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CEC के इस्तीफे की मांग: चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग, CJP का प्रदर्शन

बलजीत सिंह शेखावत · 01 अक्टूबर 2026, 05:22 शाम
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग को लेकर देशव्यापी आंदोलन का ऐलान किया है।

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर मोर्चा खोल दिया है। पार्टी ने देश के विभिन्न राज्यों में विरोध प्रदर्शन करने का निर्णय लिया है।

CJP के संस्थापक और राष्ट्रीय संयोजक अभिजीत दिपके ने इस आंदोलन की रूपरेखा साझा की है। उन्होंने बताया कि पार्टी चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली के खिलाफ सड़कों पर उतरेगी।

देशव्यापी आंदोलन की रूपरेखा

पार्टी ने विरोध प्रदर्शन के लिए कई राज्यों का चयन किया है। इन राज्यों में पार्टी कार्यकर्ता अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन करेंगे।

इन राज्यों में होगा प्रदर्शन

इन राज्यों में प्रदर्शन के बाद पार्टी ने राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली का रुख करने का फैसला किया है। अक्टूबर के अंत से दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक बड़ा आंदोलन शुरू किया जाएगा।

अभिजीत दिपके ने इस प्रस्तावित आंदोलन को 'जंतर-मंतर 2.0' का नाम दिया है। उनका कहना है कि यह आंदोलन चुनाव आयोग में सुधार की मांग को लेकर होगा।

CJP की तीन प्रमुख मांगें

कॉकरोच जनता पार्टी ने चुनाव आयोग और मतदाता सूची से संबंधित मुद्दों पर तीन मुख्य मांगें रखी हैं। इन मांगों को लेकर पार्टी अडिग है।

इस्तीफा और आपराधिक कार्रवाई

पार्टी की पहली मांग मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की है। CJP ने उनके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई शुरू करने की भी मांग की है।

पार्टी यह भी जानना चाहती है कि कथित तौर पर संबंधित आदेश किसके निर्देश पर जारी किए गए थे। इसकी स्पष्टता की मांग प्रमुखता से उठाई गई है।

मतदाता सूची और SIR पर रोक

दूसरी मांग विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया को तत्काल रोकने की है। पार्टी चाहती है कि जनवरी 2025 की मतदाता सूची को बहाल किया जाए।

CJP ने मतदाता सूची से जुड़े फैसलों की एक स्वतंत्र जांच कराने की आवश्यकता पर भी जोर दिया है। उनका मानना है कि इसमें पारदर्शिता का अभाव है।

नियुक्ति प्रक्रिया में सुधार की मांग

तीसरी मांग 2023 में मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े कानून को वापस लेने की है। पार्टी एक नई व्यवस्था की मांग कर रही है।

पारदर्शिता और सिविल सोसाइटी

अभिजीत दिपके के अनुसार, नियुक्ति प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी होनी चाहिए। इसमें सिविल सोसाइटी की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जानी चाहिए।

यह मांग ऐसे समय में आई है जब चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर राजनीतिक गलियारों में विवाद चल रहा है। CJP ने पहले ही 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया था।

चुनाव आयोग का पक्ष

दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने इन विवादों और मतभेदों की खबरों को सिरे से खारिज कर दिया है। आयोग ने अपनी स्थिति स्पष्ट की है।

सर्वसम्मति से लिए गए फैसले

आयोग के मुताबिक, SIR सहित सभी महत्वपूर्ण फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की सर्वसम्मति से लिए गए हैं। इसमें किसी भी प्रकार के आंतरिक मतभेद की बात गलत है।

आयोग ने स्पष्ट किया कि सभी प्रक्रियाएं तीनों आयुक्तों की मंजूरी के बाद ही आगे बढ़ाई गई हैं। आयोग अपनी कार्यप्रणाली को नियमों के अनुरूप बता रहा है।

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