बांसवाड़ा | मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कुशलगढ़ के चुड़ादा गांव में आयोजित ग्राम विकास चौपाल में महिलाओं की ताकत को सराहा। उन्होंने राजीविका को महिला सशक्तीकरण का असली रोल मॉडल बताया और उनके योगदान की प्रशंसा की।
राजीविका: ग्रामीण भारत की बदलती तस्वीर
मुख्यमंत्री ने कहा कि राजीविका के माध्यम से गांव की महिलाएं अब लाखों और करोड़ों रुपये के बड़े कारोबार से जुड़ रही हैं। यह मंच उन्हें आत्मनिर्भर बनाने का काम कर रहा है।
यह योजना न केवल ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर उपलब्ध करवा रही है, बल्कि एक बड़ा सामाजिक बदलाव भी ला रही है। महिलाएं अब आर्थिक रूप से स्वतंत्र हो रही हैं।
भजनलाल शर्मा ने जोर देकर कहा कि जब महिलाएं सशक्त होती हैं, तभी समाज और देश का विकास सुनिश्चित होता है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था में उनकी भागीदारी अब पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।
महिलाओं के आर्थिक उत्थान के लिए प्रतिबद्धता
राज्य सरकार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की मंशा के अनुसार कार्य कर रही है। सरकार का मुख्य लक्ष्य महिला, युवा, किसान और मजदूर वर्ग का सर्वांगीण उत्थान करना है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इन वर्गों के जीवन स्तर में सुधार होने से ही गांव, तहसील और जिला स्तर पर प्रगति संभव है। हमारी सरकार हर वर्ग के विकास के लिए समर्पित है।
प्रधानमंत्री मोदी का विजन और नारी शक्ति
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री द्वारा उठाए गए क्रांतिकारी कदमों की चर्चा की। उन्होंने कहा कि महिलाओं के गरिमापूर्ण जीवन के लिए केंद्र सरकार ने कई महत्वपूर्ण योजनाएं शुरू की हैं।
बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान ने समाज की सोच बदली है। घर-घर शौचालय निर्माण और उज्ज्वला योजना ने महिलाओं के दैनिक संघर्ष को कम कर उन्हें नई राहत प्रदान की है।
इसके अलावा, हर घर नल से जल और जन-धन खाते खुलवाकर महिलाओं को सीधे बैंकिंग प्रणाली से जोड़ा गया है। इससे उनकी वित्तीय स्वतंत्रता और सुरक्षा में भारी इजाफा हुआ है।
नारी शक्ति वंदन अधिनियम और राजनीति
मुख्यमंत्री ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम का जिक्र करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ने लोकसभा और विधानसभा में 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया है। यह महिला नेतृत्व को मजबूती देगा।
उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रधानमंत्री की इस पहल को रोकने की कोशिश की गई। राजनीति के चलते इस महत्वपूर्ण बिल को संसद में बाधित करने का प्रयास हुआ।
डबल इंजन सरकार की प्रमुख योजनाएं
राजस्थान में डबल इंजन की सरकार महिलाओं के कल्याण के लिए निरंतर सक्रिय है। मा वाउचर योजना के तहत अब महिलाओं को मुफ्त सोनोग्राफी की सुविधा मिल रही है।
शिक्षा के क्षेत्र में बालिकाओं को प्रोत्साहित करने के लिए 13 लाख से अधिक साइकिलें बांटी गई हैं। साथ ही, 44 हजार से अधिक मेधावी छात्राओं को स्कूटियां वितरित की गई हैं।
मातृ वंदन योजना की राशि को भी 5 हजार से बढ़ाकर 6,500 रुपये कर दिया गया है। यह राशि गर्भवती महिलाओं के पोषण और स्वास्थ्य देखभाल में सहायक सिद्ध हो रही है।
लाडो प्रोत्साहन और स्वास्थ्य सुरक्षा
लाडो प्रोत्साहन योजना के तहत बालिकाओं के जन्म पर 1 लाख 50 हजार रुपये का सेविंग बॉण्ड दिया जा रहा है। यह बेटियों के सुरक्षित भविष्य की एक मजबूत गारंटी है।
स्वास्थ्य और स्वच्छता को प्राथमिकता देते हुए सरकार ने 1 करोड़ से अधिक महिलाओं को निशुल्क सेनेटरी नेपकिन वितरित किए हैं। यह ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य जागरूकता का बड़ा कदम है।
लखपति दीदी: आत्मनिर्भरता की नई मिसाल
मुख्यमंत्री ने लखपति दीदी योजना को महिलाओं की आत्मनिर्भरता का प्रतीक बताया। प्रदेश की 22 लाख से अधिक महिलाओं को इस योजना के तहत विशेष प्रशिक्षण दिया गया है।
हर्ष की बात यह है कि इनमें से 17 लाख से अधिक महिलाएं अब 'लखपति दीदी' बन चुकी हैं। डूंगरपुर और बांसवाड़ा की महिलाओं ने इस योजना में शानदार प्रदर्शन किया है।
उन्होंने महिलाओं से आह्वान किया कि वे स्वयं भी आगे बढ़ें और अन्य महिलाओं को भी राजीविका समूहों से जोड़ें। छोटी पूंजी से बड़े सपने साकार करना अब मुमकिन है।
बांसवाड़ा में विकास के नए आयाम
मुख्यमंत्री ने जनजातीय संस्कृति की सराहना करते हुए कहा कि इस अंचल के लोगों ने गौरवशाली परंपराओं को संजोया है। गांव-ढाणी का विकास सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।
महिलाओं की मांग पर मुख्यमंत्री ने बांसवाड़ा में राजीविका बहनों के लिए सीएलएफ कार्यशाला बनाने के निर्देश दिए। साथ ही उत्पादों की बेहतर मार्केटिंग के लिए पैकेजिंग यूनिट भी लगेगी।
सफलता की सच्ची कहानियां
संवाद के दौरान वन धन मैनेजर गुणवति निनामा ने बताया कि वह ऑर्गेनिक और केमिकल मुक्त उत्पाद बना रही हैं। इससे उनकी मासिक आय 20 हजार रुपये तक पहुंच गई है।
बीसी सखी निर्मला ने अपनी कहानी साझा करते हुए कहा कि वह अब 15 लाख से अधिक का ट्रांजेक्शन संभाल रही हैं। अब ग्रामीणों को बैंक जाने की जरूरत नहीं पड़ती।
"राजीविका ने मुझे नई पहचान दी है। अब लोग मुझे लखपति दीदी के नाम से जानते हैं। मेरे क्लस्टर में 8200 महिलाएं जुड़ी हुई हैं और हम सब मिलकर आगे बढ़ रहे हैं।" - धर्मिष्टा पण्ड्या
वन धन मैनेजर विधिका ने बताया कि वह हाथों से बने ऑर्गेनिक प्रोडक्ट बेचकर 30 हजार रुपये महीना कमा रही हैं। इस कमाई से उन्होंने अपना पक्का मकान भी बनवा लिया है।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का स्वागत पारंपरिक आदिवासी अंदाज में किया गया। कलाकारों ने लोक नृत्य प्रस्तुत किया और उन्हें आदिवासी जैकेट तथा तीर-कमान भेंट कर सम्मानित किया गया।
इस कार्यक्रम ने सिद्ध कर दिया कि राजस्थान की नारी शक्ति अब रुकने वाली नहीं है। सरकार की योजनाओं और महिलाओं के जज्बे ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को एक नई दिशा प्रदान की है।
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