राजस्थान

स्वच्छ राजस्थान: सीएम का बड़ा संदेश: राजस्थान में स्वच्छता अब संस्कार: सीएम भजनलाल शर्मा का ऐलान

जोगेन्द्र सिंह शेखावत · 22 मई 2026, 12:27 दोपहर
सीएम भजनलाल शर्मा ने डूंगरपुर मॉडल की तारीफ की और स्वच्छता को सामूहिक दायित्व बताया।

डूंगरपुर | मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने डूंगरपुर में स्वच्छता अभियान को लेकर बड़ी बातें कहीं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने स्वच्छता को केवल सफाई कर्मियों तक सीमित न रखकर इसे जन-जन का आंदोलन बना दिया है।

मुख्यमंत्री ने डूंगरपुर में नागरिक अभिनंदन एवं स्वच्छता संदेश कार्यक्रम को संबोधित किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि स्वच्छता केवल एक व्यवस्था नहीं है, बल्कि यह हमारे संस्कारों का हिस्सा बन चुकी है।

स्वच्छता अब व्यवस्था नहीं, संस्कार है

सीएम ने कहा कि महात्मा गांधी का सपना स्वच्छ और स्वस्थ भारत का था। आज यह सपना जनभागीदारी से हकीकत बन रहा है। अब गांवों में शौचालय और कचरा प्रबंधन एक नई चेतना बन चुका है।

डूंगरपुर की धरती ने स्वच्छता आंदोलन को एक नई पहचान दी है। यहां स्वच्छता को जनसहभागिता का उत्सव बनाया गया है। जिसकी वजह से आज पूरे देश में डूंगरपुर मॉडल की चर्चा होती है।

स्वच्छता केवल सफाई कर्मचारियों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह समस्त देशवासियों का सामूहिक दायित्व है।

डूंगरपुर मॉडल और जनभागीदारी

डूंगरपुर में स्वच्छता को एक उत्सव की तरह मनाया जाता है। यहां के लोगों ने मिलकर शहर को साफ रखने की जिम्मेदारी उठाई है। राज्य सरकार भी इसी तर्ज पर पूरे प्रदेश को स्वच्छ बना रही है।

राज्य सरकार का स्पष्ट लक्ष्य है कि राजस्थान विकास के साथ-साथ नागरिक सुविधाओं में भी अग्रणी रहे। पर्यावरण अनुकूल नीतियों के माध्यम से प्रदेश की तस्वीर बदलने की कोशिश की जा रही है।

आधुनिक कचरा प्रबंधन और तकनीक

राजस्थान में अब ठोस कचरा प्रबंधन को और भी मजबूत किया जा रहा है। शहरों में आधुनिक वेस्ट प्रोसेसिंग सिस्टम लगाए जा रहे हैं। घर-घर कचरा संग्रहण की व्यवस्था को प्रभावी बनाया जा रहा है।

राज्य सरकार ने प्लास्टिक मुक्त राजस्थान के लिए विशेष अभियान शुरू किया है। नगर निकायों को अब तकनीक से जोड़ा जा रहा है। इससे सफाई व्यवस्था की निगरानी और सुधार करना काफी आसान हो जाएगा।

स्वच्छ भारत मिशन की बड़ी उपलब्धियां

मिशन के तहत राजस्थान में करीब 3 लाख व्यक्तिगत शौचालय बनाए गए हैं। इसके साथ ही 5 हजार से अधिक सामुदायिक शौचालयों का निर्माण भी पूरा हो चुका है। ग्रामीण इलाकों में बड़ा बदलाव आया है।

प्रदेश के 41 हजार से अधिक गांव अब ओडीएफ प्लस मॉडल बन चुके हैं। 21 जिलों में गोबरधन योजना के तहत बायो-गैस संयंत्र लगाए गए हैं। यह पर्यावरण और ऊर्जा के लिए फायदेमंद है।

नगरीय क्षेत्रों के लिए 454 करोड़ रुपये के कार्यादेश जारी किए गए हैं। इससे 168 निकायों में ठोस अपशिष्ट प्रसंस्करण प्लांट लगेंगे। यह कदम राजस्थान को कचरा मुक्त बनाने की दिशा में मील का पत्थर होगा।

पिंक टॉयलेट और पर्यटन का विकास

महिलाओं की सुविधा के लिए प्रदेश में 348 पिंक टॉयलेट बन चुके हैं। इसके अलावा 356 नए पिंक टॉयलेट बनाने की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है। यह शहरों की नागरिक सुविधाओं में बड़ा सुधार है।

स्वच्छता का सीधा संबंध स्वास्थ्य और पर्यटन से है। साफ-सुथरे शहर अधिक निवेश आकर्षित करते हैं। डूंगरपुर और बांसवाड़ा को अब प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की योजना पर काम चल रहा है।

मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम के दौरान 'स्वच्छ राजस्थान' पोस्टर का भी विमोचन किया। सरकार का लक्ष्य राजस्थान को स्वच्छता में देश का अग्रणी राज्य बनाना है। इससे नागरिकों का जीवन स्तर भी बेहतर होगा।

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