नई दिल्ली | देश की राजधानी और आसपास के इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए मंगलवार की सुबह महंगाई का बड़ा झटका लेकर आई है। इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड (IGL) ने दिल्ली-NCR में कंप्रेस्ड नेचुरल गैस (CNG) की कीमतों में ₹2 प्रति किलोग्राम की भारी बढ़ोतरी कर दी है।
दिल्ली में अब CNG की कीमत ₹81.09 से बढ़कर ₹83.09 प्रति किलो हो गई है। यह बदलाव आज सुबह से ही लागू कर दिया गया है।
NCR के अन्य शहरों में भी इसका असर दिखा है। नोएडा, गाजियाबाद और ग्रेटर नोएडा में अब एक किलो सीएनजी के लिए ग्राहकों को ₹91.70 खर्च करने होंगे।
वहीं, गुरुग्राम में भी कीमतें बढ़ा दी गई हैं। यहाँ अब नई दर ₹88.12 प्रति किलोग्राम तय की गई है, जिससे वाहन चालकों की जेब पर बोझ बढ़ गया है।
महीने में चौथी बार बढ़े दाम: अब तक ₹6 का इजाफा
हैरान करने वाली बात यह है कि इस अकेले मई महीने में ही चार बार कीमतों में बदलाव किया गया है। पिछले दो हफ्तों के भीतर ही कुल ₹6 का इजाफा हो चुका है।
इससे पहले 15 मई के बाद से लगातार कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा था। तेल और गैस कंपनियों का कहना है कि लागत बढ़ने की वजह से यह कदम उठाना पड़ा है।
पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भी लगी आग
सिर्फ सीएनजी ही नहीं, बल्कि पेट्रोल और डीजल के दामों ने भी आम आदमी को परेशान कर रखा है। 25 मई को ही तेल कंपनियों ने पेट्रोल ₹2.61 और डीजल ₹2.71 महंगा किया था।
इस बढ़ोतरी के बाद दिल्ली में पेट्रोल का भाव ₹102.12 प्रति लीटर हो गया है। वहीं डीजल भी ₹95.20 प्रति लीटर के स्तर पर पहुँच गया है।
क्यों बढ़ रही हैं कीमतें? ईरान जंग का वैश्विक असर
कीमतों में इस उछाल की सबसे बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल यानी क्रूड ऑयल की कीमतों में आया भारी उछाल है। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने बाजार को अस्थिर कर दिया है।
जंग शुरू होने से पहले कच्चे तेल की कीमत करीब 70 डॉलर प्रति बैरल थी। अब यह बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल के आंकड़े को पार कर गई है।
तेल कंपनियाँ इस समय भारी दबाव में काम कर रही हैं। कच्चे तेल की ऊँची कीमतों के कारण कंपनियों को अपने घाटे की भरपाई करने के लिए स्थानीय स्तर पर दाम बढ़ाने पड़ रहे हैं।
पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने बताया, "सरकारी तेल कंपनियों को फिलहाल करीब 600 करोड़ रुपए प्रति दिन का नुकसान उठाना पड़ रहा है।"
आम आदमी की थाली पर पड़ेगा असर
ईंधन की कीमतों में इस वृद्धि का सीधा असर मालभाड़े पर पड़ेगा। ट्रक और टेम्पो का किराया बढ़ने से फल, सब्जियां और अन्य जरूरी राशन महंगा होना तय माना जा रहा है।
खेती की लागत भी बढ़ेगी क्योंकि ट्रैक्टर और पंपिंग सेट चलाने के लिए किसानों को अब ज्यादा पैसे खर्च करने होंगे। इससे अनाज की कीमतों में भी तेजी आ सकती है।
यही नहीं, सार्वजनिक परिवहन और स्कूल बसों के किराए में भी इजाफा हो सकता है। ऑटो और टैक्सी चालकों ने भी अब किराए बढ़ाने की मांग शुरू कर दी है।
CNG गाड़ियों का बढ़ता क्रेज और भविष्य
महंगाई के बावजूद पिछले तीन वर्षों में सीएनजी गाड़ियों की बिक्री में 50% तक की बढ़ोत्तरी देखी गई है। अकेले भोपाल जैसे शहरों में हर रोज 15 से ज्यादा सीएनजी गाड़ियां बिक रही हैं।
इसका मुख्य कारण पेट्रोल और डीजल के मुकाबले सीएनजी का बेहतर माइलेज है। लोग अब भी इसे लंबी दूरी के लिए एक किफायती विकल्प के रूप में देख रहे हैं।
क्या है CNG और कैसे बनती है?
सीएनजी यानी कंप्रेस्ड नेचुरल गैस मुख्य रूप से मीथेन से बनी होती है। यह जमीन के नीचे प्राकृतिक कुओं से निकलती है और पेट्रोल की तुलना में बहुत कम प्रदूषण फैलाती है।
फैक्ट्रियों में इसे रिफाइन करके अशुद्धियां हटाई जाती हैं। फिर भारी दबाव (कंप्रेशन) के जरिए इसे सिलेंडरों में भरा जाता है ताकि यह कम जगह में ज्यादा ऊर्जा दे सके।
निष्कर्षतः, यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता नहीं आई, तो आने वाले दिनों में आम जनता को ईंधन की कीमतों में और भी बढ़ोत्तरी झेलनी पड़ सकती है।
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