ग्लासगो |
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में मेंस जेवलिन थ्रो का क्वालिफिकेशन राउंड काफी दिलचस्प रहा। इस राउंड में दुनिया के 18 एथलीट्स ने हिस्सा लिया, लेकिन कोई भी फाइनल के लिए निर्धारित 84 मीटर के ऑटोमेटिक क्वालिफिकेशन मार्क को हासिल नहीं कर सका।
फाइनल में पहुंचे 12 एथलीट
भले ही कोई एथलीट सीधे फाइनल में जगह नहीं बना पाया, लेकिन नियमों के तहत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले 12 एथलीटों को फाइनल का टिकट मिल गया।
इनमें ओलंपिक चैंपियन नीरज चोपड़ा और पाकिस्तान के अरशद नदीम जैसे बड़े नाम भी शामिल थे, जो 84 मीटर के आंकड़े से दूर रह गए।
तीन भारतीय थ्रोअर फाइनल में
भारत के लिए खुशी की बात यह है कि फाइनल में पहुंचने वाले 12 एथलीटों में तीन भारतीय शामिल हैं।
टोक्यो ओलंपिक चैंपियन नीरज चोपड़ा के साथ-साथ रोहित यादव और यशवीर सिंह भी 31 जुलाई को होने वाले मेडल इवेंट में अपनी चुनौती पेश करेंगे।
क्या है क्वालिफिकेशन का नियम?
अब सवाल यह उठता है कि जब कोई भी क्वालिफिकेशन मार्क तक नहीं पहुंच पाया तो 12 एथलीट फाइनल में कैसे पहुंचे।
जेवलिन थ्रो का नियम कहता है कि अगर 12 से कम एथलीट क्वालिफिकेशन मार्क को पार करते हैं, तो दोनों ग्रुप के बेस्ट थ्रोअर को मिलाकर 12 एथलीटों को फाइनल में जगह दी जाती है।
अगर कोई भी एथलीट क्वालिफिकेशन मार्क पार नहीं कर पाता है, तो क्वालिफिकेशन राउंड में भाग लेने वाले टॉप 12 थ्रोअर को फाइनल में जगह मिल जाती है। ग्लासगो में भी यही हुआ।
क्वालिफिकेशन राउंड के टॉप परफॉर्मर
क्वालिफिकेशन राउंड में श्रीलंका के रुमेश पथिराज ने 82.84 मीटर के थ्रो के साथ पहला स्थान हासिल किया।
- एंडरसन पीटर्स (दो बार के वर्ल्ड चैंपियन): 81.29 मीटर (दूसरा स्थान)
- डौव स्मिट (साउथ अफ्रीका): 80.64 मीटर (तीसरा स्थान)
- बेन ईस्ट (इंग्लैंड): 80.38 मीटर (चौथा स्थान)
- अरशद नदीम (पाकिस्तान): 78.63 मीटर
इनके अलावा ऑस्ट्रेलिया के कैमरन मैकिन्टायर, बहामास के कीशॉन स्ट्रैचन, त्रिनिदाद और टोबैगो के केशॉर्न वॉलकॉट और नाइजीरिया के चिनेचेरेम न्नामदी भी फाइनल में पहुंचे।
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