जयपुर |राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने राज्य सरकार पर निकाय और पंचायत चुनावों की आरक्षण लॉटरी को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा जारी ओबीसी तथा अनुसूचित जाति और जनजाति के आंकड़े अतार्किक और गलत हैं।
आरक्षण खत्म करने की साजिश: डोटासरा
डोटासरा ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी हमेशा कहते हैं कि भाजपा संविधान पर चोट कर रही है और आरक्षण को खत्म करना चाहती है।
उन्होंने कहा कि देश में अनुसूचित जाति/जनजाति और ओबीसी की जितनी आबादी है, उसके हिसाब से उनकी भागीदारी एवं हिस्सेदारी होनी चाहिए।
डोटासरा ने आरोप लगाया कि सरकार ने लंबे समय से अनुसूचित जाति और जनजाति की जनगणना नहीं करवाई है और जातिगत जनगणना से भी भाजपा कतरा रही है।
उन्होंने कहा, "क्योंकि उनके मन में बेईमानी है, ये लोग एससी/एसटी और अब ओबीसी के साथ न्याय नहीं करना चाहते और इसकी शुरुआत राजस्थान से की गई है।"
आंकड़ों में भारी विसंगति का दावा
कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि राजस्थान सरकार ने जिस प्रकार आंकड़े दिए हैं, उनमें विसंगति है।
उन्होंने समझाया कि पूरे राजस्थान में ग्रामीण परिवेश की जो ओबीसी जनसंख्या बताई गई है, उसमें पंचायत समितियों की टोटल और जिला परिषद की जनसंख्या एक होनी चाहिए, इसमें फर्क नहीं होना चाहिए।
डोटासरा ने बताया, "सरकार द्वारा बताए गए आंकड़ों के अनुसार जिला परिषद के अंतर्गत और पंचायत समितियों की एक ही जिले की जनसंख्या में कई प्रतिशत का अंतर है, ऐसा वास्तविक रूप से नहीं हो सकता है।"
50% आरक्षण के नियम का उल्लंघन?
डोटासरा ने उच्चतम न्यायालय के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि नौकरियों में 50 प्रतिशत आरक्षण का कैप है, लेकिन राजनीति में ऐसा कोई नियम नहीं है।
उन्होंने कहा कि यदि नौकरियों वाले 50 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था का भी अनुसरण करें, तो भी राजस्थान में एससी/एसटी और ओबीसी को 50 प्रतिशत तक आरक्षण प्रदान नहीं किया गया है।
जिलों के आंकड़े देकर सरकार को घेरा
उन्होंने कई जिलों के उदाहरण दिए जहां कुल आरक्षण 50 प्रतिशत से काफी कम है।
- अजमेर में कुल आरक्षण 39.97 प्रतिशत है।
- बालोतरा में यह 41.93 प्रतिशत है।
- डीग में 34.48 प्रतिशत है।
- डीडवाना कुचामन में 42.85 प्रतिशत है।
- जैसलमेर में 38 प्रतिशत है।
- झुंझुनू में आरक्षण मात्र 39 प्रतिशत है।
- कोटपूतली-बहरोड में 37 प्रतिशत है।
- फलोदी में 39.13 प्रतिशत है।
- सीकर में 40.8 प्रतिशत ही आरक्षण दिया गया है।
डोटासरा ने कहा कि इन सभी वर्गों को मिलाकर 50 प्रतिशत आरक्षण दिया जाना चाहिए था, लेकिन इसे 40 प्रतिशत से भी कम रखा गया है।
OBC वर्ग के साथ अन्याय का आरोप
डोटासरा ने कहा कि जिन जिलों में ओबीसी की जनसंख्या अधिक है, वहां भी जनसंख्या के आधार पर कम सीटें आरक्षित की गई हैं।
उन्होंने सवाल उठाया कि सरकार ने किस आधार पर कहां कितना आरक्षण दिया है, यह समझ से परे है।
प्रदेश में कुल 41 जिला परिषद में 1403 निर्वाचन क्षेत्र हैं, जिनमें से ओबीसी के लिए केवल 192 वार्ड (13.68%) आरक्षित करने की अनुशंसा की गई है।
उन्होंने दावा किया कि यदि 50 प्रतिशत की सीमा में भी आरक्षण होता तो 294 वार्ड आरक्षित होते, इस प्रकार ओबीसी के 102 वार्ड कम आरक्षित हुए हैं।
इसी तरह, 457 पंचायत समितियों में 8245 सदस्यों के निर्वाचन क्षेत्रों में से ओबीसी के लिए मात्र 1101 वार्ड (13.35%) आरक्षित करने की अनुशंसा की गई है।
डोटासरा के अनुसार, 50 प्रतिशत की सीमा में यह 1731 वार्ड होते, जिससे ओबीसी वर्ग के 630 वार्ड कम आरक्षित हुए हैं।
सड़कों पर उतरने की चेतावनी
डोटासरा ने चेतावनी देते हुए कहा कि भाजपा की सरकार अनुसूचित जाति/जनजाति और ओबीसी वर्ग को जनसंख्या के आधार पर भागीदारी नहीं दे रही है।
उन्होंने कहा कि सभी प्रदेशवासी भाजपा सरकार की इस तानाशाही के विरोध में सड़कों पर उतरेंगे और आगामी नगर निकाय व पंचायत चुनाव में भाजपा का सूपड़ा साफ हो जाएगा।
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