भोपाल | मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता महेंद्र सिंह चौहान और उनकी बैंक ऑफिसर पत्नी शिखा सिंह के बीच चल रहा पारिवारिक विवाद अब एक बड़े सियासी और कानूनी मोर्चे में तब्दील हो गया है। दोनों पक्षों द्वारा एक-दूसरे पर लगाए जा रहे गंभीर आरोपों ने न केवल समाज बल्कि राजनीतिक गलियारों में भी खलबली मचा दी है।
विवाद की शुरुआत और गंभीर आरोप
शिखा सिंह ने हाल ही में मीडिया के सामने आकर अपने पति महेंद्र सिंह चौहान पर कई चौंकाने वाले आरोप लगाए हैं, जिससे यह मामला पूरी तरह से गरमा गया है। बैंक ऑफिसर पत्नी ने भास्कर को वह शिकायत भी दिखाई है, जिसमें महेंद्र सिंह चौहान ने खुद को अपनी ही पत्नी और नाबालिग बेटे से जान का खतरा बताया है। शिखा ने इन आरोपों पर कड़ा पलटवार करते हुए कहा कि वह अपने पति से उम्र में करीब 20 साल छोटी हैं और उनका बेटा अभी पूरी तरह से नाबालिग है। उन्होंने सवाल उठाया कि एक निहत्थी महिला और एक छोटा बच्चा आखिर किसी कद्दावर नेता के लिए जान का खतरा कैसे बन सकते हैं, यह समझ से परे है।
दहेज प्रताड़ना और मारपीट की शिकायत
आपको बता दें कि शिखा सिंह करीब दो महीने पहले ही अपने पति महेंद्र सिंह चौहान के खिलाफ दहेज प्रताड़ना और शारीरिक मारपीट की लिखित शिकायत दर्ज करा चुकी हैं। शिखा का आरोप है कि शादी के कुछ समय बाद से ही उनके साथ दुर्व्यवहार शुरू हो गया था, जो समय के साथ-साथ और भी ज्यादा हिंसक और अपमानजनक होता गया। उन्होंने बताया कि एक बैंक अधिकारी के रूप में उनकी अपनी पहचान है, लेकिन घर के भीतर उन्हें लगातार मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है। महेंद्र सिंह चौहान पर आरोप है कि उन्होंने अपनी पत्नी को घर से बाहर निकाल दिया और अब उन्हें उनके ही घर में प्रवेश करने से रोका जा रहा है।
IAS से शादी तुड़वाने का सनसनीखेज दावा
शिखा सिंह ने एक बहुत बड़ा खुलासा करते हुए आरोप लगाया कि करीब दो दशक पहले महेंद्र सिंह चौहान ने उनकी एक आईएएस (IAS) अधिकारी से तय हो चुकी शादी तुड़वाई थी। उन्होंने दावा किया कि चौहान ने उस समय कई तरह के प्रपंच रचे थे ताकि शिखा की शादी उस अधिकारी से न हो सके और वे उनसे शादी करने के लिए मजबूर हो जाएं। शिखा के अनुसार, उस समय वे चौहान की बातों में आ गई थीं और उन्होंने अपने पिता की मर्जी के खिलाफ जाकर महेंद्र सिंह से विवाह करने का फैसला किया था। आज उन्हें अपने उस पुराने फैसले पर गहरा पछतावा हो रहा है और वे इसे अपने जीवन की सबसे बड़ी और दर्दनाक गलती मानती हैं, जिसने उनका भविष्य बर्बाद कर दिया।
पिता की चेतावनी और वर्तमान स्थिति
शिखा ने याद किया कि जब उन्होंने अपने पिता को महेंद्र सिंह चौहान से शादी करने के फैसले के बारे में बताया था, तब उनके पिता ने उन्हें गंभीर चेतावनी दी थी। उनके पिता ने कहा था कि यह फैसला भविष्य में उनके लिए बहुत भारी पड़ेगा और उन्हें एक दिन सड़क पर आने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है। शिखा कहती हैं कि उस समय उन्हें लगा था कि उनके पिता गलत हैं, लेकिन आज जब वे चार इमली के सरकारी बंगले से बाहर हैं, तो उन्हें पिता की बात सच लग रही है। सरकारी आवास से बेदखल किए जाने के बाद शिखा अब न्याय के लिए दर-दर भटक रही हैं और पुलिस प्रशासन से मदद की गुहार लगा रही हैं।
मायके की संपत्ति पर नजर होने का आरोप
विवाद की एक और बड़ी वजह संपत्ति बताई जा रही है। शिखा का आरोप है कि महेंद्र सिंह चौहान की नजर उनके मायके की बेशकीमती संपत्ति पर टिकी हुई है। वे लगातार शिखा पर इस बात के लिए दबाव बना रहे हैं कि वे अपने पिता की संपत्ति में अपना कानूनी हिस्सा मांगें और उसे चौहान के हवाले कर दें। शिखा का कहना है कि उनके मायके वाले काफी संपन्न हैं, लेकिन वे अपनी निजी महत्वाकांक्षाओं के लिए अपने माता-पिता या भाइयों की संपत्ति में दखल नहीं देना चाहतीं। इसी बात को लेकर दोनों के बीच अक्सर झगड़े होते हैं, क्योंकि चौहान चाहते हैं कि शिखा किसी भी तरह से अपने मायके से मोटी रकम और जमीन लेकर आएं।
कांग्रेस आलाकमान तक पहुंची शिकायत
शिखा सिंह ने अब इस लड़ाई को राजनीतिक स्तर पर भी लड़ने का फैसला किया है और उन्होंने मध्य प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी हरीश चौधरी को एक विस्तृत पत्र लिखा है। इस पत्र में उन्होंने मांग की है कि महेंद्र सिंह चौहान जैसे व्यक्ति को पार्टी के सभी पदों से तुरंत निष्कासित किया जाना चाहिए क्योंकि वे अनैतिक कार्यों में लिप्त हैं। शिखा ने पत्र में लिखा है कि चौहान ने न केवल उनका जीवन बर्बाद किया है, बल्कि वे अपने पद का दुरुपयोग करके उन्हें लगातार डराने-धमकाने का काम भी कर रहे हैं। उन्होंने कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी से भी सवाल किया है कि आखिर ऐसे गंभीर आरोपों के बावजूद चौहान के खिलाफ अब तक कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई क्यों नहीं की गई?
प्रियंका और राहुल गांधी से न्याय की गुहार
शिखा ने अपने पत्र की प्रतियां कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, सांसद राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा को भी ईमेल और डाक के माध्यम से भेजी हैं। उनका कहना है कि कांग्रेस पार्टी हमेशा महिलाओं के सम्मान और न्याय की बात करती है, तो फिर उनके मामले में चुप्पी क्यों साधी गई है, यह एक बड़ा सवाल है। शिखा का मानना है कि जब तक चौहान पार्टी के प्रभावशाली पद पर बने रहेंगे, तब तक पुलिस उन पर निष्पक्ष रूप से कार्रवाई करने में हिचकिचाती रहेगी। वे चाहती हैं कि पार्टी नेतृत्व इस मामले का संज्ञान ले और एक पीड़ित महिला को न्याय दिलाने में मदद करे, जो खुद एक जिम्मेदार सरकारी पद पर कार्यरत है।
राजनीतिक महत्वाकांक्षा और पारिवारिक कलह
पत्र में शिखा ने इस बात का भी विशेष उल्लेख किया है कि महेंद्र सिंह की अत्यधिक राजनीतिक महत्वाकांक्षा ने उनके परिवार को पूरी तरह से तबाह कर दिया है। उनका आरोप है कि चौहान राजनीति में अपना रसूख बढ़ाने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं और इसके लिए वे अपने परिवार के हितों की भी बलि दे रहे हैं। शिखा के अनुसार, चौहान की अनर्गल मांगें और उनका व्यवहार दिन-ब-दिन आक्रामक होता जा रहा है, जिससे घर का माहौल पूरी तरह से जहरीला हो चुका है। वे कहती हैं कि एक नेता को समाज के लिए उदाहरण होना चाहिए, लेकिन चौहान का आचरण उनके निजी जीवन में इसके बिल्कुल विपरीत और निंदनीय रहा है।
सरकारी बंगले को लेकर कानूनी पेच
शिखा ने सरकारी आवास को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि जिस बंगले में वे रह रही थीं, वह सरकार द्वारा एक जनसेवक के नाते आवंटित किया गया है। उनका तर्क है कि कोई भी व्यक्ति सरकारी संपत्ति से अपनी पत्नी और बच्चों को इस तरह गैर-कानूनी तरीके से बाहर नहीं निकाल सकता, जैसा चौहान ने किया है। शिखा ने बताया कि शिवाजी नगर स्थित उस बंगले में उनके और उनके बेटे के कई जरूरी दस्तावेज, गहने और कपड़े रखे हुए हैं, जिन पर चौहान ने ताला लगा दिया है। वे अपने सामान को वापस पाने के लिए पुलिस के पास भी गई थीं, लेकिन अभी तक उन्हें अपने निजी सामान तक पहुंच बनाने की अनुमति नहीं मिल पाई है।
जानलेवा हमले की धमकी का दावा
शिखा सिंह ने एक और डरावना दावा किया है कि उनके पति ने उन्हें सीधे तौर पर जान से मारने की या हमला करवाने की धमकी दी है। उनके अनुसार, चौहान ने उनसे कहा कि 'तुम अकेले बैंक जाती हो, रास्ते में तुम पर कभी भी हमला हो सकता है, इसलिए अपनी खैर मनाओ'। शिखा इस धमकी को बेहद गंभीरता से ले रही हैं और उन्हें डर है कि उनके पति अपने राजनीतिक रसूख का इस्तेमाल कर उन पर कोई फर्जी हमला करवा सकते हैं। उन्होंने पुलिस प्रशासन से अपनी और अपने बेटे की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है, क्योंकि उन्हें अपने पति के इरादों पर अब बिल्कुल भी भरोसा नहीं रहा है।
महेंद्र सिंह चौहान का पक्ष और मीडिया ट्रायल
दूसरी तरफ, महेंद्र सिंह चौहान ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है और अपनी पत्नी पर ही उन्हें ब्लैकमेल करने का आरोप लगाया है। चौहान का कहना है कि यह उनका निजी पारिवारिक मामला है और वर्तमान में यह न्यायालय के समक्ष विचाराधीन है, इसलिए वे इस पर अधिक टिप्पणी नहीं करेंगे। उनके समर्थकों का कहना है कि शिखा सिंह द्वारा लगाए गए आरोप निराधार हैं और वे केवल चौहान की राजनीतिक छवि को धूमिल करने के उद्देश्य से लगाए जा रहे हैं। चौहान ने मीडिया से दूरी बना रखी है और उनका कहना है कि वे इस मामले का 'मीडिया ट्रायल' नहीं चाहते, बल्कि उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है।
सामाजिक और मनोवैज्ञानिक प्रभाव
इस तरह के हाई-प्रोफाइल विवादों का असर न केवल संबंधित व्यक्तियों पर पड़ता है, बल्कि समाज में भी एक गलत संदेश जाता है, खासकर जब इसमें कोई राजनेता शामिल हो। शिखा सिंह और महेंद्र सिंह चौहान का यह मामला अब केवल एक घरेलू झगड़ा नहीं रह गया है, बल्कि यह स्त्री-पुरुष समानता और सत्ता के दुरुपयोग की बहस बन चुका है। मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि ऐसे विवादों में सबसे ज्यादा नुकसान बच्चों का होता है, जो अपने माता-पिता को एक-दूसरे के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ते हुए देखते हैं। शिखा का बेटा इस समय किस मानसिक स्थिति से गुजर रहा होगा, इसका अंदाजा लगाना कठिन नहीं है, क्योंकि उसके पिता ने ही उसे अपने लिए खतरा बताया है।
न्याय की उम्मीद और भविष्य की राह
शिखा सिंह अब पूरी तरह से कानूनी लड़ाई के मूड में हैं और उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि वे अपने हक के लिए आखिरी सांस तक लड़ती रहेंगी। वे चाहती हैं कि उन्हें उनके घर में वापस सम्मान के साथ रहने दिया जाए और उनके पति के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। मध्य प्रदेश की राजनीति में भी इस मामले को लेकर सरगर्मी तेज है और विपक्षी दल भी इस मुद्दे पर कांग्रेस की घेराबंदी करने की योजना बना रहे हैं। अब देखना यह होगा कि कांग्रेस आलाकमान अपनी महिला कार्यकर्ता और एक बैंक अधिकारी की इस गुहार पर क्या रुख अपनाता है और पुलिस जांच किस दिशा में जाती है।
"उन्होंने मेरी एक आईएएस अधिकारी से तय शादी तुड़वा दी थी। इसके बाद उन्होंने मुझसे शादी की। अब लगता है कि यह जिंदगी की सबसे बड़ी गलती थी। मैं बस न्याय चाहती हूं।" - शिखा सिंह
निष्कर्ष और समाज के लिए संदेश
यह मामला हमें याद दिलाता है कि घरेलू हिंसा और प्रताड़ना किसी भी घर में हो सकती है, चाहे वह कितना भी रसूखदार क्यों न हो। एक शिक्षित और आत्मनिर्भर महिला होने के बावजूद शिखा सिंह को जिस तरह के संघर्ष का सामना करना पड़ रहा है, वह सिस्टम की खामियों को भी उजागर करता है। उम्मीद है कि जांच एजेंसियां और न्यायालय इस मामले में दूध का दूध और पानी का पानी करेंगे ताकि पीड़ित पक्ष को जल्द से जल्द न्याय मिल सके।
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