कच्चे तेल की कीमतों में लगातार पांचवें दिन उछाल
ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार पांचवें दिन तेजी देखने को मिल रही है। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और तेल सप्लाई को लेकर बढ़ी चिंता के कारण ब्रेंट क्रूड इस सप्ताह अप्रैल के बाद अपनी सबसे बड़ी साप्ताहिक बढ़त की ओर बढ़ रहा है।
ब्रेंट और WTI क्रूड के दाम
ग्लोबल मार्केट में ब्रेंट क्रूड 1.05 डॉलर, यानी करीब 1.25 फीसदी बढ़कर 85.28 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है।
वहीं, अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड 1.03 डॉलर, यानी करीब 1.3 फीसदी की तेजी के साथ 79.98 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है।
इस सप्ताह ब्रेंट और डब्ल्यूटीआई दोनों में लगभग 12 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई है, जो कच्चे तेल के बाजार में एक महत्वपूर्ण हलचल का संकेत है।
भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतें स्थिर
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के बावजूद, भारत में पेट्रोल और डीजल की खुदरा दरों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया गया है। देश में पेट्रोल और डीजल के अपडेटेड रिटेल दाम जारी कर दिए गए हैं, और वे स्थिर बने हुए हैं।
भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम सरकारी तेल कंपनियां (ओएमसी) तय करती हैं, इसलिए अंतरराष्ट्रीय कीमतों का असर खुदरा दरों पर तुरंत दिखाई नहीं देता।
प्रमुख शहरों में 17 जुलाई के दाम
देश के विभिन्न शहरों में पेट्रोल और डीजल की कीमतें इस प्रकार हैं:
- नई दिल्ली: पेट्रोल ₹102.12, डीजल ₹95.20
- कोलकाता: पेट्रोल ₹113.50, डीजल ₹99.82
- मुंबई: पेट्रोल ₹111.18, डीजल ₹97.83
- चेन्नई: पेट्रोल ₹108.96, डीजल ₹100.74
- गुरुग्राम: पेट्रोल ₹102.97, डीजल ₹95.64
- नोएडा: पेट्रोल ₹101.89, डीजल ₹95.37
मध्य पूर्व में तनाव से बढ़ी चिंता
तेल बाजार में यह तेजी मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण है। ईरान और अमेरिका के बीच सैन्य संघर्ष तेज हो गया है, जिससे तेल सप्लाई को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।
हॉर्मुज और बाब अल-मंडेब पर खतरा
सीजफायर टूटने के बाद जॉइंट मैरीटाइम इन्फॉर्मेशन सेंटर ने होर्मुज के लिए खतरे का स्तर बढ़ाकर 'गंभीर' कर दिया है।
इसके अलावा, एक और महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग बाब अल-मंडेब को लेकर भी चिंता जताई जा रही है। रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने यमन के हूती विद्रोहियों को बाब-अल-मंडेब जलमार्ग को बंद करने का निर्देश दिया है, यदि ईरान के बिजली के बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया जाता है।
यह मार्ग सऊदी अरब के तेल निर्यात के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। यदि इस मार्ग पर भी होर्मुज जैसी नाकेबंदी या तेल टैंकरों पर हमले होते हैं, तो कच्चे तेल के दामों में भारी उछाल देखने को मिल सकता है।
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