कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल
मिडिल ईस्ट में एक बार फिर तनाव बढ़ने से कच्चे तेल की कीमतों में लगी आग भड़क उठी है। बुधवार को तीन दिनों से जारी गिरावट का सिलसिला थम गया और कीमतों में 4% से ज्यादा का उछाल देखने को मिला। इस तेजी के पीछे सऊदी अरब और ईरान समर्थित मिलिशिया के बीच हुए हमले मुख्य कारण हैं।
क्यों बढ़े कच्चे तेल के दाम?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, इराक में मौजूद ईरान समर्थित मिलिशिया ने सऊदी अरब के तेल ठिकानों को निशाना बनाते हुए ड्रोन से हमला किया।
इस हमले के जवाब में सऊदी अरब ने भी अमेरिकी सेंट्रल कमांड के साथ मिलकर जवाबी कार्रवाई की और मिलिशिया के ठिकानों पर हमले किए। इन हमलों ने वैश्विक तेल आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं, जिसका सीधा असर कीमतों पर पड़ा है।
वैश्विक बाजार में क्या हैं कीमतें?
बुधवार सुबह 8 बजकर 40 मिनट के आसपास, ब्रेंट क्रूड 3.4 डॉलर यानी 4.1 फीसदी की बढ़त के साथ 87.57 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था।
इससे पहले के तीन कारोबारी सत्रों में इसमें 14 फीसदी से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई थी। वहीं, अमेरिकी क्रूड WTI भी 3.3 डॉलर या 4.1 फीसदी बढ़कर 82.56 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।
भारत में पेट्रोल-डीजल पर असर नहीं
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद, भारत में फिलहाल इसका असर पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों पर नहीं दिख रहा है।
ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने ईंधन की कीमतों को स्थिर बनाए रखा है। आखिरी बार 25 मई को कीमतों में बदलाव किया गया था, जब पेट्रोल 2.61 रुपये और डीजल 2.71 रुपये प्रति लीटर महंगा हुआ था।
आपके शहर में क्या हैं दाम? (29 जुलाई 2026)
- नई दिल्ली: पेट्रोल ₹102.12, डीजल ₹95.20
- कोलकाता: पेट्रोल ₹113.47, डीजल ₹99.82
- मुंबई: पेट्रोल ₹112.40, डीजल ₹99.03
- चेन्नई: पेट्रोल ₹107.87, डीजल ₹99.65
- गुरुग्राम: पेट्रोल ₹102.75, डीजल ₹95.42
- नोएडा: पेट्रोल ₹101.92, डीजल ₹95.40
ईरान और अमेरिका के बीच तनाव
इस बीच, ईरान ने ओमान के उस प्रस्ताव को खारिज कर दिया है जिसमें स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर बराबर नियंत्रण की बात कही गई थी। ईरान के उप विदेश मंत्री काजिम गरीबाबादी ने स्पष्ट किया कि जहाजों के रास्ते पर पूरा नियंत्रण ईरान का ही रहेगा।
दूसरी ओर, वॉशिंगटन में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से मुलाकात की। इस मुलाकात का उद्देश्य ईरान पर फिर से सैन्य हमले को टालना था। इजराइल ने भी संकेत दिए हैं कि सभी पक्ष बातचीत के जरिए समाधान चाहते हैं।
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