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Crude Oil Price Update: कच्चा तेल $72 पर स्थिर, पेट्रोल-डीजल के दाम अपरिवर्तित

जोगेन्द्र सिंह शेखावत · 06 जुलाई 2026, 10:36 दोपहर
OPEC+ देशों के उत्पादन बढ़ाने के फैसले के बाद भी कच्चे तेल की कीमतें स्थिर हैं, लेकिन भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम नहीं बदले हैं।

कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव

नई दिल्ली | सोमवार को वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव देखा गया। इसका मुख्य कारण तेल निर्यातक देशों के संगठन (OPEC) और उसके सहयोगी देशों का अगस्त से तेल उत्पादन बढ़ाने का निर्णय है।

इसके अलावा, खाड़ी क्षेत्र से तेल निर्यात में सुधार की संभावना ने भी कीमतों को प्रभावित किया है। बाजार को उम्मीद है कि आने वाले समय में कच्चे तेल की सप्लाई बढ़ेगी, जिससे कीमतों पर दबाव बना रह सकता है।

ब्रेंट और WTI क्रूड का हाल

सोमवार सुबह 8 बजकर 15 मिनट पर ब्रेंट क्रूड का भाव 72.20 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था।

वहीं, अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड 68.94 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। अमेरिका में स्वतंत्रता दिवस की छुट्टी के कारण शुक्रवार को WTI का कारोबार बंद था।

भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर

कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद, भारत में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। कीमतों में आखिरी बार 25 मई को संशोधन किया गया था।

6 जुलाई 2026 को प्रमुख शहरों में दाम

देश के विभिन्न शहरों में पेट्रोल और डीजल की कीमतें इस प्रकार हैं:

OPEC+ का उत्पादन बढ़ाने का फैसला

तेल निर्यातक देशों के संगठन OPEC और रूस सहित उसके सहयोगी देशों (OPEC+) ने रविवार को एक महत्वपूर्ण बैठक की।

इस बैठक में अगस्त से रोजाना 1.88 लाख बैरल अतिरिक्त उत्पादन का लक्ष्य तय किया गया है। इससे पहले जून और जुलाई के लिए भी उत्पादन बढ़ाने की घोषणा की गई थी।

बाजार पर क्या होगा असर?

उत्पादन बढ़ाने के इस फैसले से बाजार में तेल की उपलब्धता बढ़ने की उम्मीद है, जिसका असर कीमतों पर दिखाई दे रहा है।

जून में बढ़ा OPEC का उत्पादन

रॉयटर्स के एक सर्वे के अनुसार, जून में OPEC का तेल उत्पादन पिछले महीने की तुलना में 33 लाख बैरल प्रतिदिन बढ़कर 1.943 करोड़ बैरल प्रतिदिन पर पहुंच गया।

वहीं, खाड़ी क्षेत्र का तेल निर्यात भी मई की तुलना में 30 लाख बैरल से अधिक बढ़कर जून में 1 करोड़ बैरल प्रतिदिन के पार पहुंच गया। हालांकि, उत्पादन बढ़ाने के फैसले का पूरा असर अभी जमीन पर दिखना बाकी है।

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