राजस्थान

साइबर अपराध और नए कानून पर मंथन: साइबर अपराध पर लगाम के लिए बदल रही है न्याय प्रणाली

जोगेन्द्र सिंह शेखावत · 10 मई 2026, 10:46 दोपहर
जयपुर में आयोजित कार्यशाला में केंद्रीय मंत्री अर्जुनराम मेघवाल ने साइबर अपराधों पर चिंता जताई।

जयपुर | तकनीक के बढ़ते उपयोग के साथ आज अपराध और अपराधियों का स्वरूप भी तेजी से बदल रहा है। अब अपराधी डिजिटल माध्यमों का सहारा लेकर लोगों को ठग रहे हैं।

साइबर अपराधों पर अंकुश लगाने की तैयारी

केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्री अर्जुनराम मेघवाल ने जयपुर में साइबर अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि हमारी पुलिस और न्याय व्यवस्था को अब और अधिक सशक्त होना होगा।

शनिवार को जयपुर के बिरला ऑडिटोरियम में एक महत्वपूर्ण कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य लोक अभियोजकों को साइबर क्राइम के प्रति संवेदनशील बनाना था।

विधिक एवं विधिक कार्य विभाग ने इस एक दिवसीय कार्यशाला का सफल आयोजन किया। अर्जुनराम मेघवाल ने कहा कि तकनीक आधारित अपराध पुराने अपराधों से काफी अलग होते हैं।

नए आपराधिक कानूनों का प्रभाव

इन अपराधों के अनुसंधान में अब तकनीकी साक्ष्यों पर अधिक जोर देने की जरूरत है। मंत्री ने कहा कि जांच के दौरान डिजिटल डेटा की भूमिका अब निर्णायक साबित होगी।

केंद्र सरकार ने औपनिवेशिक काल की दंड संहिता को अब पूरी तरह बदल दिया है। नई भारतीय न्याय संहिता को भारतीय पृष्ठभूमि के अनुरूप तैयार किया गया है।

इससे न्यायिक प्रक्रिया को आम आदमी के लिए सुलभ और सुगम बनाया जा सकेगा। मंत्री ने दिव्यांगजनों के प्रति भी संवेदनशील नजरिया अपनाने की बात कही।

"तकनीक पर आधारित अपराध परम्परागत अपराधों से बिल्कुल अलग हैं। इनके अनुसंधान में तकनीकी साक्ष्यों पर विशेष जोर देने की आवश्यकता है।" - अर्जुनराम मेघवाल

दिव्यांगजनों के अधिकारों की रक्षा

उन्होंने कहा कि संविधान की भावना के अनुरूप दिव्यांगजनों को आगे बढ़ाना जरूरी है। न्याय प्रक्रिया को उनके लिए आसान बनाना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।

राजस्थान उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा भी वहां मौजूद थे। उन्होंने कहा कि पीड़ित को त्वरित न्याय दिलाने के लिए तकनीक की जानकारी जरूरी है।

लोक अभियोजक हमारी न्याय प्रणाली की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी या रीढ़ की हड्डी हैं। उनके माध्यम से ही समाज के अंतिम व्यक्ति तक न्याय पहुंचना सुनिश्चित हो पाता है।

कानून और तकनीक का मेल

राजस्थान के विधि मंत्री जोगाराम पटेल ने न्याय प्रणाली के नए युग की बात की। उन्होंने कहा कि अब दंड के स्थान पर न्याय को प्राथमिकता दी जा रही है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में पुराने औपनिवेशिक कानूनों को हटा दिया गया है। अब नए कानूनों के माध्यम से मुवक्किल का पक्ष मजबूती से रखा जा सकेगा।

बढ़ते साइबर अपराधों को रोकने के लिए आमजन में जागरूकता फैलाना बहुत आवश्यक है। जागरूकता ही आम आदमी के लिए सबसे मजबूत सुरक्षा कवच के रूप में कार्य करेगी।

राजस्थान सरकार के प्रयास

राजस्थान पुलिस साइबर अपराधों पर नियंत्रण पाने के लिए निरंतर कड़े प्रयास कर रही है। राज्य सरकार इस चुनौती को पूरी गंभीरता से लेते हुए आधुनिक संसाधनों का उपयोग कर रही है।

विभाग द्वारा वर्ष 2023 से अब तक 54 हजार से अधिक पत्रावलियों का निस्तारण किया गया। राज्य में न्याय को गति देने के लिए 56 नए न्यायालय भी खोले गए हैं।

महाधिवक्ता राजेंद्र प्रसाद ने कहा कि संविधान नागरिकों के मौलिक अधिकारों का रक्षक है। उन्होंने लोक अभियोजक को मिनिस्टर ऑफ जस्टिस का महत्वपूर्ण दर्जा दिया।

सत्य का अन्वेषण और न्याय

उनका मुख्य दायित्व सत्य का अन्वेषण कर पीड़ित को सही न्याय दिलाना है। कर्तव्य में किसी भी प्रकार की चूक पूरे समाज को असुरक्षित बना सकती है।

डीजीपी राजीव शर्मा ने नए कानूनों के मुख्य उद्देश्यों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि अभियोजन निदेशालय पीड़ितों के अधिकारों की रक्षा में अहम भूमिका निभाएगा।

पुलिस की जवाबदेही बढ़ाने के लिए डिजिटल एविडेंस पर विशेष फोकस किया जा रहा है। न्यायपालिका और पुलिस के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना आज की सबसे बड़ी जरूरत है।

भविष्य की न्यायिक राह

कार्यशाला में विभाग के नए लोगो और एक लघु फिल्म का भी विमोचन किया गया। इस अवसर पर गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव भास्कर ए सावंत भी उपस्थित थे।

यह कार्यशाला राज्य में न्याय प्रणाली को और अधिक सशक्त बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। तकनीक और कानून के मेल से ही एक सुरक्षित समाज का निर्माण संभव है।

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