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दिल्ली-NCR में CNG महंगी: दिल्ली-NCR में CNG की कीमतों में फिर लगी आग, ₹1 और बढ़े दाम

जोगेन्द्र सिंह शेखावत · 17 मई 2026, 01:21 दोपहर
दिल्ली-NCR में CNG के दाम 1 रुपए बढ़ गए हैं, जिससे अब दिल्ली में भाव ₹80.09 किलो हो गया है।

नई दिल्ली | दिल्ली-एनसीआर के निवासियों के लिए महंगाई का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा है। आज यानी 17 मई से सीएनजी की कीमतों में एक बार फिर इजाफा कर दिया गया है। इस बढ़ोतरी ने आम जनता की जेब पर अतिरिक्त बोझ डाल दिया है।

दिल्ली और एनसीआर में क्या हैं नए रेट?

राजधानी दिल्ली में अब एक किलो सीएनजी के लिए उपभोक्ताओं को 80.09 रुपये खर्च करने होंगे। वहीं नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद जैसे सटे हुए इलाकों में सीएनजी की नई कीमत 88.70 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है।

आपको बता दें कि पिछले दो दिनों के भीतर कीमतों में यह दूसरी बड़ी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इससे पहले 15 मई को भी सीएनजी के दामों में 2 रुपये प्रति किलो की वृद्धि की गई थी।

मध्य प्रदेश और अन्य राज्यों का हाल

महंगाई की यह लहर सिर्फ दिल्ली तक ही सीमित नहीं है। मध्य प्रदेश के भोपाल में भी शनिवार रात से सीएनजी के दाम 3 रुपये प्रति किलो तक बढ़ गए हैं। यहां अब एक किलो गैस के लिए 93.75 रुपये चुकाने पड़ रहे हैं।

इतना ही नहीं, 15 मई को तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भी 3-3 रुपये प्रति लीटर की भारी बढ़ोतरी की थी। दिल्ली में पेट्रोल अब 97.77 रुपये और डीजल 90.67 रुपये प्रति लीटर पर बिक रहा है।

आखिर क्यों बढ़ रहे हैं दाम?

इस बढ़ोतरी के पीछे सबसे मुख्य कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल यानी क्रूड ऑयल की कीमतों में हो रहा उतार-चढ़ाव है। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को पूरी तरह से अस्थिर कर दिया है।

युद्ध की स्थिति से पहले कच्चे तेल के दाम 70 डॉलर प्रति बैरल के आसपास थे, जो अब बढ़कर 100 डॉलर के पार निकल गए हैं। तेल कंपनियां अपने घाटे की भरपाई के लिए लगातार कीमतों में इजाफा कर रही हैं।

"विशेषज्ञों का कहना है कि तेल कंपनियां अभी भी घाटे में हैं और उन्हें ब्रेक-ईवन तक पहुंचने के लिए पेट्रोल-डीजल के दामों में और भी ज्यादा बढ़ोतरी करनी पड़ सकती है।"

आम आदमी की रसोई पर सीधा असर

डीजल और सीएनजी के दाम बढ़ने का सीधा असर आपके किचन और बजट पर पड़ता है। मालभाड़ा बढ़ने के कारण दूसरे राज्यों से आने वाले फल, सब्जियां और राशन के सामान महंगे हो जाते हैं जिससे महंगाई बढ़ती है।

किसानों के लिए भी खेती की लागत बढ़ गई है क्योंकि ट्रैक्टर और पंपिंग सेट चलाने के लिए ईंधन महंगा हो गया है। इसके अलावा स्कूल बसों और सार्वजनिक परिवहन के किराए में भी जल्द ही बढ़ोतरी देखी जा सकती है।

क्या अभी और झटके लगेंगे?

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा बढ़ोतरी पर्याप्त नहीं है। घाटा पूरी तरह खत्म करने के लिए कंपनियों को पेट्रोल पर 28 रुपये और डीजल पर 32 रुपये तक दाम बढ़ाने की जरूरत है, जो एक चिंताजनक संकेत है।

अगर वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की सप्लाई इसी तरह बाधित रही, तो आने वाले हफ्तों में आम आदमी को और भी बड़े महंगाई के झटके लग सकते हैं। फिलहाल राहत की कोई उम्मीद नजर नहीं आ रही है।

कुल मिलाकर, ईंधन की कीमतों में हो रही यह बेतहाशा वृद्धि मध्यम वर्ग के लिए बड़ी चुनौती बन गई है। अब हर किसी की नजरें सरकार और तेल कंपनियों के अगले कदम पर टिकी हुई हैं कि क्या कीमतें वापस नीचे आएंगी।

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