दिल्ली | दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने पाकिस्तान द्वारा संचालित एक बड़े जासूसी नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। यह मॉड्यूल सोलर-पावर्ड सीसीटीवी कैमरों के जरिए भारतीय सेना की जासूसी कर रहा था। पुलिस ने इस मामले में दिल्ली, गाजियाबाद और पंजाब से कुल 11 संदिग्धों को गिरफ्तार किया है। आईएसआई ने इस बार जासूसी के लिए बेहद आधुनिक और तकनीकी रास्ता चुना था।
सोलर कैमरों से 24 घंटे निगरानी
यह मॉड्यूल पंजाब, राजस्थान, हरियाणा और जम्मू-कश्मीर के सैन्य क्षेत्रों के पास सक्रिय था। आईएसआई हैंडलर्स ने इसे खालिस्तानी संगठन बब्बर खालसा इंटरनेशनल के साथ मिलकर चलाया था। पारंपरिक जासूसी के विपरीत, इसमें सोलर ऊर्जा से चलने वाले सीसीटीवी कैमरों का उपयोग किया गया। सोलर पैनल होने के कारण ये कैमरे बिना बिजली कनेक्शन के भी हर समय काम करते थे।
4G/5G नेटवर्क का इस्तेमाल
आईएसआई हैंडलर्स सोशल मीडिया के माध्यम से बेरोजगार और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को फंसाते थे। उन्हें पहले ड्रग्स तस्करी जैसे कामों में लगाया गया और फिर सीसीटीवी लगाने का काम सौंपा गया। इन कैमरों में फर्जी पहचान पत्र पर खरीदे गए सिम कार्ड डाले गए थे। इससे पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स को 4G/5G नेटवर्क के जरिए सीधे लाइव वीडियो फीड प्राप्त हो रही थी।
रणनीतिक ठिकानों की रेकी
जांच में पता चला कि ये कैमरे दिल्ली कैंट रेलवे स्टेशन, सोनीपत रेलवे ट्रैक और बॉर्डर इलाकों में लगाए गए थे। इनका उद्देश्य भारतीय सेना के वाहनों और ट्रूप मूवमेंट की रीयल-टाइम रिकॉर्डिंग करना था। कुछ कैमरे चीन के 'EseeCloud' प्लेटफॉर्म से भी जुड़े थे, जो रिमोट एक्सेस की सुविधा प्रदान करते थे। हैंडलर्स इन फीड्स का उपयोग आतंकी हमलों की योजना बनाने के लिए कर रहे थे।
सरकार का बड़ा एक्शन
पुलिस ने छापेमारी के दौरान 9 सोलर सीसीटीवी कैमरे, हथियार और कारतूस बरामद किए हैं। इस घटना की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार ने देश भर में सीसीटीवी नेटवर्क के ऑडिट का आदेश दिया है। विशेष रूप से विदेशी तकनीक वाले कैमरों की गहन जांच शुरू कर दी गई है। भारतीय सुरक्षा एजेंसियां अब अन्य संभावित स्लीपर सेल्स और तकनीकी जासूसी के खतरों का पता लगाने में जुटी हैं।