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चैंपियन की बेबसी: ई-रिक्शा में गोल्ड: नेशनल रिकॉर्ड तोड़कर ई-रिक्शा में पोल ढोने को मजबूर चैंपियन

जोगेन्द्र सिंह शेखावत · 26 मई 2026, 11:45 दोपहर
रांची में नेशनल रिकॉर्ड बनाने वाले देव मीणा को ई-रिक्शा में ढोने पड़े अपने पोल।

रांची | रांची में आयोजित एथलेटिक्स फेडरेशन कप में भोपाल के देव कुमार मीणा ने इतिहास रच दिया। उन्होंने 5.45 मीटर की छलांग लगाकर नया नेशनल रिकॉर्ड बनाया। लेकिन इस गौरवशाली पल के कुछ ही घंटों बाद एक ऐसी तस्वीर सामने आई जिसने सबको झकझोर दिया। नेशनल रिकॉर्ड होल्डर देव मीणा और उनके साथी कुलदीप कुमार को अपने कीमती फाइबरग्लास पोल एक ई-रिक्शा में लादकर होटल ले जाना पड़ा। यह दृश्य भारतीय खेलों की जमीनी हकीकत और खिलाड़ियों की अनदेखी को साफ तौर पर बयां करता है।

जीत का जश्न और फिर सड़कों पर संघर्ष

देव और कुलदीप ने प्रतियोगिता में एक समान ऊंचाई पार की थी। देव को कम प्रयासों के कारण गोल्ड और कुलदीप को सिल्वर मेडल मिला। दोनों ही खिलाड़ियों ने अब 2026 कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए सफलतापूर्वक क्वालिफाई कर लिया है। इतने बड़े मुकाम पर पहुंचने के बाद भी इन खिलाड़ियों को बुनियादी परिवहन सुविधाएं नहीं मिलीं। ई-रिक्शा में 5 फीट लंबे नाजुक पोल ले जाना बहुत जोखिम भरा काम था। फाइबरग्लास पोल बहुत संवेदनशील और महंगे होते हैं। इन पोल का रखरखाव बहुत सावधानी से करना पड़ता है। जरा सा दबाव या खरोंच इन्हें पूरी तरह खराब कर सकती है। कोच घनश्याम यादव के साथ खिलाड़ियों ने खुद ही इन पोल को ई-रिक्शा पर लादा और सुरक्षित स्थान तक पहुंचाया।

रेलवे स्टेशन पर टीसी का कड़वा अनुभव

यह पहली बार नहीं है जब इन चैंपियन खिलाड़ियों को ऐसी परेशानी झेलनी पड़ी हो। इसी साल ऑल इंडिया इंटर यूनिवर्सिटी चैंपियनशिप से लौटते वक्त उन्हें पनवेल स्टेशन पर अपमानित होना पड़ा था। वहां मौजूद टीसी ने उन्हें ट्रेन से नीचे उतार दिया। टीसी का तर्क था कि इतने लंबे पोल बोगी में नहीं ले जा सकते। खिलाड़ियों ने समझाने की कोशिश की लेकिन उनकी एक नहीं सुनी गई। इस घटना ने खिलाड़ियों के मनोबल पर गहरा असर डाला था और खेल मंत्री तक बात पहुंची थी।

"अफसरों का कहना था कि इतने लंबे पोल बोगी में नहीं ले जाए जा सकते, जिसके बाद उन्हें बीच रास्ते में ही उतार दिया गया।"

कौन हैं रिकॉर्ड ब्रेकर देव मीणा?

19 साल के देव मीणा मध्य प्रदेश के खातेगांव के एक छोटे से गांव सिर्फोड़खेड़ा के रहने वाले हैं। उन्होंने फरवरी और अप्रैल 2025 में भी अपने ही रिकॉर्ड तोड़े थे। वे भारत के उभरते हुए सबसे बेहतरीन पोल-वॉल्टर हैं। देव भोपाल के टीटी नगर स्टेडियम में अभ्यास करते हैं। उनकी मेहनत का नतीजा है कि आज वे राष्ट्रीय स्तर पर चमक रहे हैं। हालांकि, सुविधाओं के अभाव में खिलाड़ियों का ऐसा संघर्ष खेल प्रशासन पर बड़े सवाल खड़े करता है। मध्य प्रदेश के खेल मंत्री विश्वास सारंग ने पिछली घटना के बाद रेलवे से परमीशन दिलाने का भरोसा दिया था। लेकिन रांची की सड़कों पर ई-रिक्शा वाली तस्वीर बताती है कि अभी बहुत सुधार की जरूरत है। देव मीणा जैसे हीरों को तराशने के लिए केवल पदकों की नहीं, बल्कि सम्मान और सुविधाओं की भी जरूरत है। उम्मीद है कि भविष्य में हमारे चैंपियंस को सड़कों पर इस तरह पोल नहीं ढोने पड़ेंगे।

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