अजमेर | राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने शिक्षा के क्षेत्र में एक नई अलख जगाई है। उन्होंने गुरुवार को अजमेर के विभिन्न राजकीय विद्यालयों में विकास कार्यों का भव्य आगाज किया।
करीब एक करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले नवीन कक्षा-कक्षों का निर्माण कार्य अब गति पकड़ेगा। देवनानी ने रामनगर और बोराज स्थित विद्यालयों में इन कार्यों का विधिवत शुभारम्भ किया।
बुनियादी ढांचे और सुरक्षा पर विशेष जोर
विधानसभा अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि मानसून का समय अब बेहद करीब है। ऐसे में बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि होनी चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को इस संबंध में सख्त निर्देश दिए हैं।
उन्होंने कहा कि शहर के किसी भी स्कूल में कोई भी भवन या कक्ष जर्जर अवस्था में नहीं रहना चाहिए। बच्चों को हर संभावित खतरे से सुरक्षित रखना प्रशासन की जिम्मेदारी है।
महात्मा गांधी राजकीय विद्यालय रामनगर में 44.82 लाख रुपये की लागत से तीन नए कमरे बनेंगे। देवनानी ने कहा कि बैठने की बेहतर व्यवस्था से ही पढ़ाई का अच्छा माहौल बनता है।
केवल परीक्षा परिणाम ही काफी नहीं
देवनानी का मानना है कि केवल शत-प्रतिशत परीक्षा परिणाम ही स्कूल की असली उपलब्धि नहीं है। उन्होंने शिक्षा के लक्ष्य को और भी ऊंचा करने का पुरजोर आह्वान किया है।
उन्होंने शिक्षकों से कहा कि वे यह लक्ष्य रखें कि हर विद्यार्थी कम से कम 60 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त करे। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा ही बच्चों का उज्जवल भविष्य संवार सकती है।
सर्वांगीण विकास और अतिरिक्त मार्गदर्शन
विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए शिक्षकों को अब अतिरिक्त प्रयास करने होंगे। देवनानी ने शिक्षकों को बच्चों को अतिरिक्त समय देने और बेहतर मार्गदर्शन प्रदान करने की विशेष सलाह दी।
उन्होंने सुझाव दिया कि ग्रीष्मकालीन अवकाश के दौरान भी रोटेशन के आधार पर शैक्षणिक गतिविधियां होनी चाहिए। इससे बच्चों का जुड़ाव विद्यालय और शिक्षा से लगातार बना रहेगा।
पुस्तकीय ज्ञान के अलावा देश, समाज और संस्कृति के प्रति कर्तव्यबोध भी बहुत जरूरी है। बच्चों को यह समझाना होगा कि समाज के प्रति उनकी क्या और कैसी जिम्मेदारियां हैं।
"विद्यार्थियों को पुस्तकीय ज्ञान के साथ देश, समाज और संस्कृति के प्रति कर्तव्यबोध का भी ज्ञान दिया जाना चाहिए।"
संस्कारयुक्त वातावरण की आवश्यकता
विद्यालयों में भाईचारे और संस्कारयुक्त वातावरण के निर्माण पर देवनानी ने विशेष बल दिया। उन्होंने एक अनूठी पहल का सुझाव विद्यार्थियों के सामने रखा जो सामाजिक समरसता बढ़ाएगा।
उन्होंने कहा कि विद्यार्थी आपस में एक-दूसरे को भाई-बहन कहकर संबोधित करें। इससे सामाजिक समरसता बढ़ेगी और नैतिक मूल्यों का विकास जमीनी स्तर पर संभव हो सकेगा।
अनुशासन और समय की पाबंदी को उन्होंने सफलता की सबसे बड़ी कुंजी बताया। विद्यार्थियों से समय पर स्कूल आने और शिक्षकों की आज्ञा का पालन करने का आग्रह किया।
पढ़ने की आदत और पुस्तकालय का महत्व
देवनानी ने हर स्कूल में एक समृद्ध पुस्तकालय के निर्माण की इच्छा जताई है। उन्होंने कहा कि बच्चों को पाठ्यक्रम के अलावा भी अन्य ज्ञानवर्धक किताबें पढ़नी चाहिए।
उन्होंने विद्यार्थियों को महापुरुषों की जीवनी और विज्ञान की पुस्तकें पढ़ने के लिए प्रेरित किया। हर विद्यार्थी को साल में कम से कम एक अतिरिक्त पुस्तक अवश्य पढ़नी चाहिए।
अभिभावकों की भूमिका पर भी उन्होंने विस्तार से चर्चा की। उन्होंने माता-पिता से बच्चों के गृहकार्य और उनके अध्ययन की नियमित समीक्षा करने की भावुक अपील की है।
जनसहभागिता से बदलेगी स्कूलों की सूरत
रामनगर स्कूल स्टाफ द्वारा जनसहभागिता से किए गए विकास कार्यों की उन्होंने सराहना की। स्टाफ ने मिलकर करीब दो लाख रुपये विद्यालय विकास में स्वयं लगाए हैं।
उन्होंने भामाशाहों, बैंकों और स्थानीय संस्थाओं से भी आगे आने का आह्वान किया। जन्मदिन जैसे यादगार अवसरों पर स्कूलों को उपयोगी सामग्री भेंट करने की परंपरा बननी चाहिए।
आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों की सहायता के लिए समाज को सक्रिय होना होगा। राज्य सरकार ने भी मरम्मत और बुनियादी सुविधाओं के लिए करोड़ों रुपये स्वीकृत किए हैं।
बोराज विद्यालय में नई उम्मीदें
इसके बाद देवनानी महात्मा गांधी राजकीय विद्यालय बोराज पहुंचे। यहाँ भी 44.82 लाख रुपये की लागत से तीन नए कक्षा-कक्षों का निर्माण कार्य शुरू किया गया।
बोराज का यह विद्यालय क्षेत्र की पुरानी और प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थाओं में से एक है। यहाँ से पढ़कर कई पीढ़ियां आज समाज के विभिन्न क्षेत्रों में योगदान दे रही हैं।
उन्होंने शिक्षकों को निर्देश दिए कि वे नामांकन वृद्धि पर ध्यान दें। साथ ही, आवश्यकता पड़ने पर विद्यार्थियों के घर जाकर अभिभावकों से सीधा संवाद स्थापित करें।
शिक्षा से कोई भी बच्चा वंचित न रहे, यह सरकार की प्राथमिकता है। संसाधनों का विकास और गुणवत्ता में सुधार इसी प्रतिबद्धता का एक अहम हिस्सा है।
इस नई पहल से अजमेर के सरकारी स्कूलों की न केवल सूरत बदलेगी, बल्कि बच्चों के भविष्य को भी एक नई सुरक्षित दिशा और बेहतरीन माहौल मिलेगा।
*Edit with Google AI Studio