जयपुर | राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने विद्या भवन पॉलिटेक्निक में आयोजित एक गरिमामय समारोह के दौरान देश के भविष्य के अभियंताओं को संबोधित किया। उन्होंने तकनीकी श्रेष्ठता के साथ नैतिकता और राष्ट्रप्रेम के महत्व को रेखांकित किया।
गुरु-शिष्य परंपरा और गौरवशाली इतिहास
देवनानी ने कहा कि आज देश को ऐसे अभियंताओं की जरूरत है जिनमें तकनीकी कौशल के साथ मर्यादा, संयम और ईमानदारी जैसे गुण हों। प्रकृति की सेवा करना भी एक इंजीनियर का परम धर्म होना चाहिए।
विद्या भवन पॉलिटेक्निक के लिए यह गौरव का क्षण था। यह संस्था 1956 से निरंतर राष्ट्र निर्माण के लिए समर्पित अभियंताओं को गढ़ने का महत्वपूर्ण कार्य कर रही है।
इस संस्थान में तीस वर्षों तक शिक्षक और प्राचार्य रहे देवनानी का अपने पुराने शिष्यों से मिलना अत्यंत भावुक रहा। उन्होंने 25 और 50 वर्ष पूर्व उत्तीर्ण हुए विद्यार्थियों को सम्मानित किया।
गुरु और शिष्यों के इस मिलन ने पूरे परिसर के माहौल को संवेदनाओं से भर दिया। देवनानी ने अपने विद्यार्थियों की सफलताओं को देख प्रसन्नता व्यक्त की और उन्हें भविष्य के लिए प्रेरित किया।
डिग्री से ऊपर है नवाचार और चरित्र
देवनानी इस अवसर पर पुनः एक इंजीनियरिंग प्राध्यापक के अंदाज में नजर आए। उन्होंने जहां समय पालन और अनुशासन के महत्व को समझाया, वहीं वर्तमान तकनीकी परिदृश्य पर भी चर्चा की।
उन्होंने आह्वान किया कि अभियंता भारत के समृद्ध वैज्ञानिक अतीत की नींव पर आधुनिक वर्तमान का निर्माण करें। मानवीय मूल्यों को तकनीक से ऊपर रखना आज की सबसे बड़ी जरूरत है।
आने वाला समय केवल पास डिग्री धारकों का नहीं होगा, बल्कि उन लोगों का होगा जिनके भीतर नवाचार की क्षमता, निर्णय की स्पष्टता और राष्ट्र के प्रति संवेदनशीलता होगी।
वैश्विक संकट और भारतीय समाधान
उन्होंने वर्तमान विद्यार्थियों से कहा कि मशीनें भविष्य में बहुत से कार्य करेंगी। लेकिन चरित्र, संवेदना और नेतृत्व का गुण केवल परिवार और समाज के संस्कारों से ही प्राप्त होगा।
आज जब पूरी दुनिया आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई पर चर्चा कर रही है, देवनानी ने याद दिलाया कि भारत ने हजारों वर्ष पहले मानव बुद्धि की अनंत संभावनाओं पर गहन चिंतन किया था।
जलवायु परिवर्तन पर उन्होंने कहा कि दुनिया अब सस्टेनेबल डेवलपमेंट की बात कर रही है। जबकि भारत ने सदियों पहले ही प्रकृति और पुरुष के संतुलन का दर्शन विश्व को दिया था।
आज विश्व जिस मानसिक तनाव से गुजर रहा है, उसका समाधान भारत के योग और अध्यात्म में ही है। भारत ने केवल तकनीक नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक श्रेष्ठ दिशा भी दी है।
स्वरोजगार और राष्ट्र निर्माण का संकल्प
देवनानी ने युवाओं से आग्रह किया कि वे स्वयं को केवल नौकरी पाने तक सीमित न रखें। उनमें स्वरोजगार सृजन और स्वावलंबन का भाव होना चाहिए ताकि वे रोजगार देने वाले बनें।
समारोह के अंत में डिप्लोमा परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले मेधावी छात्रों को पुरस्कृत किया गया। इसमें प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले छात्र शामिल थे।
संस्थान की बेस्ट गर्ल सुमेधा और बेस्ट बॉय रक्षित को विशेष रूप से सम्मानित किया गया। यह सम्मान पाकर विद्यार्थियों के चेहरे खिल उठे और उनमें नई ऊर्जा का संचार हुआ।
यह आयोजन न केवल पुराने और नए विद्यार्थियों के मिलन का साक्षी बना, बल्कि इसने राष्ट्र निर्माण में तकनीकी शिक्षा और भारतीय मूल्यों की भूमिका को भी स्पष्ट रूप से परिभाषित किया।
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