सिरोही | आरटीडीसी के पूर्व चेयरमैन धर्मेंद्र राठौड़ के नेतृत्व में 'ईडब्ल्यूएस जन जागृति यात्रा' सिरोही पहुंची। इस दौरान उन्होंने पत्रकारों से वार्ता करते हुए आर्थिक पिछड़ा वर्ग (EWS) के आरक्षण नियमों में बदलाव की वकालत की।
ईडब्ल्यूएस आरक्षण और कठिन शर्तें
धर्मेंद्र राठौड़ ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 103वें संविधान संशोधन के जरिए 10 प्रतिशत आरक्षण दिया, जिसका हम स्वागत करते हैं। हालांकि, इसके साथ जुड़ी पांच शर्तें इसे निष्प्रभावी बना रही हैं।
उन्होंने बताया कि 8 लाख रुपये की आय सीमा के अलावा जमीन और मकान संबंधी चार अन्य शर्तें अव्यावहारिक हैं। इन शर्तों के कारण सामान्य वर्ग के गरीब युवाओं को आरक्षण का वास्तविक लाभ नहीं मिल पा रहा है।
विशेष रूप से राजस्थान जैसे मरुस्थलीय प्रदेश में पांच एकड़ भूमि की शर्त पूरी तरह से गलत है। नीति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, इतनी जमीन से होने वाली आय बेहद कम मानी गई है।
ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों की विसंगतियां
राठौड़ ने कहा कि ग्रामीण इलाकों में 200 वर्ग गज के प्लॉट की शर्त पशुपालकों के लिए अन्यायपूर्ण है। एक गरीब पशुपालक को भी अपनी गाय-भैंस बांधने के लिए इससे अधिक जगह की आवश्यकता होती है।
इसी तरह शहरी क्षेत्रों में 100 वर्ग गज का प्लॉट और 1000 स्क्वायर फीट के फ्लैट की शर्त भी बाधा बनी हुई है। इन राइडर्स के कारण तहसीलदार और एसडीएम स्तर पर प्रमाण पत्र नहीं बन पाते।
राजस्थान का सफल मॉडल और सुधार
राठौड़ ने बताया कि पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने संवेदनशीलता दिखाते हुए राजस्थान में इन चार कठिन शर्तों को हटा दिया था। अब राज्य में केवल 8 लाख रुपये की आय ही एकमात्र मापदंड है।
इस सरलीकरण का परिणाम यह हुआ कि हाल ही में आए आरएएस भर्ती के परिणामों में 142 ईडब्ल्यूएस अभ्यर्थी चयनित हुए। राजस्थान में ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र की वैधता भी अब तीन साल की गई है।
इसके अतिरिक्त राजस्थान सरकार ने ईडब्ल्यूएस अभ्यर्थियों को आयु सीमा में पांच वर्ष की छूट भी प्रदान की है। यह मॉडल पूरे देश के लिए एक मिसाल बन चुका है जिसे केंद्र को अपनाना चाहिए।
केंद्र सरकार से बड़ी मांग
उन्होंने मांग की कि केंद्र सरकार रेलवे, बैंक, एसएससी और यूपीएससी जैसी भर्तियों में भी राजस्थान मॉडल लागू करे। वर्तमान में केंद्रीय नौकरियों में राजस्थान के युवाओं को इन शर्तों के कारण नुकसान हो रहा है।
राठौड़ ने स्पष्ट किया कि यह कोई राजनीतिक मुद्दा नहीं है, बल्कि युवाओं के भविष्य का सवाल है। उन्होंने सभी दलों के जनप्रतिनिधियों से इस मुहिम में साथ आने का आह्वान किया है।
मैं प्रधानमंत्री जी से आग्रह करता हूं कि वे राजस्थान की तर्ज पर केंद्र में भी ईडब्ल्यूएस आरक्षण का सरलीकरण करें ताकि युवाओं को उनका हक मिल सके।
भविष्य की रणनीति और आंदोलन
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि केंद्र सरकार ने ये शर्तें नहीं हटाईं, तो वे गांधीवादी तरीके से आंदोलन करेंगे। इसमें जयपुर में पैदल मार्च और बड़े प्रदर्शन शामिल हो सकते हैं।
राठौड़ ने पंचायती राज और स्थानीय निकाय चुनावों में भी ईडब्ल्यूएस वर्ग को 10 प्रतिशत आरक्षण देने की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि इसके लिए राज्य सरकार को स्वयं निर्णय लेना चाहिए।
यह जन जागृति अभियान राजस्थान के हर जिले में चलाया जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना और सरकार पर दबाव बनाना है।
*Edit with Google AI Studio