राजस्थान

EWS आरक्षण: राठौड़ का बड़ा ऐलान: EWS आरक्षण सरलीकरण: राठौड़ का जयपुर-दिल्ली में प्रदर्शन का ऐलान

प्रदीप बीदावत · 28 अप्रैल 2026, 09:02 रात
ईडब्ल्यूएस आरक्षण की शर्तों को हटाने के लिए राठौड़ ने केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

बाड़मेर | राजस्थान पर्यटन विकास निगम (RTDC) के पूर्व चेयरमैन धर्मेंद्र सिंह राठौड़ ने ईडब्ल्यूएस आरक्षण के नियमों को लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ बड़े आंदोलन की चेतावनी दी है।

बाड़मेर के एक निजी होटल में आयोजित विचार गोष्ठी के दौरान राठौड़ ने स्पष्ट किया कि वर्तमान नियमों की जटिलता युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है।

ईडब्ल्यूएस आरक्षण और युवाओं की बढ़ती निराशा

धर्मेंद्र सिंह राठौड़ ने कहा कि जब युवाओं को आरक्षण का लाभ नहीं मिलता है, तो उनके मन में व्यवस्था के प्रति गहरी निराशा पैदा होती है।

बेरोजगारी की समस्या आज के समय में सबसे विकराल है और ईडब्ल्यूएस आरक्षण एक गरीब परिवार के लिए उम्मीद की एकमात्र किरण है।

राठौड़ का मानना है कि यदि एक गरीब युवा को इस आरक्षण के जरिए सरकारी नौकरी मिलती है, तो उससे उसके पूरे परिवार का जीवन संवर जाता है।

उन्होंने कहा कि पहले युवाओं को लगता था कि उनके लिए कोई आरक्षण नहीं है, लेकिन अब प्रावधान होने के बावजूद शर्तें बाधा बन रही हैं।

प्रदेशव्यापी जन जागृति अभियान का आगाज

राठौड़ ने बताया कि वे वर्तमान में प्रदेश के अलग-अलग जिलों का दौरा कर रहे हैं ताकि लोगों के बीच इस मुद्दे पर जागरूकता पैदा की जा सके।

इस अभियान के पहले चरण में हर जिले में प्रेस वार्ता और विचार गोष्ठियों का आयोजन किया जा रहा है ताकि जनमत तैयार हो सके।

अब तक वे अजमेर, जयपुर, अलवर और जोधपुर जैसे प्रमुख जिलों का दौरा कर चुके हैं, जहां उन्हें जनता का भरपूर समर्थन मिला है।

बाड़मेर में आयोजित कार्यक्रम में भी बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया और आरक्षण के सरलीकरण की मांग का पुरजोर समर्थन किया।

जनता का दबाव और सरकार की मजबूरी

राठौड़ ने जोर देकर कहा कि जब तक जनता का भारी दबाव सरकार पर नहीं पड़ेगा, तब तक केंद्र सरकार नियमों में बदलाव नहीं करेगी।

उनका मानना है कि विभिन्न सरकारी एजेंसियों की रिपोर्ट भी सरकार तक पहुंच रही है, जो युवाओं के आक्रोश को साफ तौर पर दर्शाती हैं।

लोकतंत्र में जनता की आवाज ही सबसे बड़ी शक्ति होती है और इसी शक्ति के दम पर नियमों को बदलवाया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि हम शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखेंगे और सरकार को मजबूर करेंगे कि वह युवाओं के हित में फैसला ले।

जयपुर और दिल्ली में बड़े आंदोलन की तैयारी

विचार गोष्ठी में राठौड़ ने ऐलान किया कि आने वाले समय में जयपुर में एक बहुत बड़ा और अहिंसात्मक विरोध प्रदर्शन आयोजित किया जाएगा।

यदि जयपुर के प्रदर्शन के बाद भी केंद्र सरकार की नींद नहीं खुली, तो इस आंदोलन की गूंज देश की राजधानी दिल्ली तक जाएगी।

उन्होंने कहा कि हम दिल्ली में धरना देने से भी पीछे नहीं हटेंगे क्योंकि यह लाखों युवाओं के भविष्य और उनके हक का सवाल है।

तैयारियों का जायजा लेते हुए उन्होंने कहा कि वे देख रहे हैं कि लोग इस संघर्ष के लिए कितने दिनों तक साथ खड़े रहने को तैयार हैं।

राज्यों का उदाहरण और केंद्र से अपेक्षा

राठौड़ ने तर्क दिया कि जब राजस्थान, गुजरात और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में ईडब्ल्यूएस नियमों का सरलीकरण हो चुका है, तो केंद्र में क्यों नहीं।

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने आरक्षण तो दे दिया, लेकिन उसके साथ ऐसी कठिन शर्तें जोड़ दीं कि उनका लाभ लेना लगभग असंभव हो गया है।

"रिजर्वेशन आपने दे दिया है, तो अब उसमें लगी अतार्किक शर्तों को भी हटाना चाहिए ताकि वास्तविक जरूरतमंदों को इसका फायदा मिल सके।"

राठौड़ ने कहा कि वे तार्किक रूप से अपनी बात रख रहे हैं और आज तक भाजपा का कोई भी नेता उनकी दलीलों को काट नहीं पाया है।

भाजपा नेताओं से सहयोग की अपील

धर्मेंद्र सिंह राठौड़ ने इस लड़ाई को दलगत राजनीति से ऊपर उठकर लड़ने की बात कही और भाजपा नेताओं से भी सहयोग मांगा है।

उन्होंने विधायक प्रतापपुरी से मुलाकात कर आग्रह किया कि वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस गंभीर विषय पर बात करने के लिए समय दिलाएं।

राठौड़ चाहते हैं कि राजस्थान के युवाओं का एक प्रतिनिधिमंडल प्रधानमंत्री से मिलकर उन्हें जमीनी हकीकत से रूबरू करवा सके।

उनका कहना है कि अगर भाजपा नेता वास्तव में युवाओं का भला चाहते हैं, तो उन्हें इस मुहिम में साथ आना चाहिए और सरकार पर दबाव बनाना चाहिए।

बेरोजगारी और सामाजिक न्याय का संतुलन

राठौड़ ने विस्तार से बताया कि कैसे आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग के लोग आज भी मुख्यधारा से जुड़ने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि आरक्षण केवल एक शब्द नहीं है, बल्कि यह उन परिवारों के लिए सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने का एक सशक्त माध्यम है।

जब नियम इतने कठिन हों कि कोई प्रमाण पत्र ही न बनवा पाए, तो ऐसे आरक्षण का कोई औचित्य नहीं रह जाता है।

इसलिए हमारा प्राथमिक उद्देश्य नियमों को सरल बनाना है ताकि अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति को भी इसका लाभ मिल सके।

भविष्य की रणनीति और युवाओं का जोश

बाड़मेर की गोष्ठी में युवाओं के जोश को देखकर राठौड़ ने विश्वास जताया कि यह आंदोलन एक निर्णायक मोड़ पर पहुंचेगा।

उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे अपने अधिकारों के लिए सजग रहें और इस अहिंसात्मक लड़ाई में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें।

आने वाले दिनों में अन्य जिलों के दौरे भी तय किए जा चुके हैं, जहां इसी तरह की विचार गोष्ठियों के माध्यम से समर्थन जुटाया जाएगा।

राठौड़ ने स्पष्ट किया कि यह केवल एक राजनीतिक बयानबाजी नहीं है, बल्कि एक सामाजिक सुधार की दिशा में उठाया गया बड़ा कदम है।

निष्कर्ष और प्रभाव

धर्मेंद्र सिंह राठौड़ का यह दौरा और उनकी चेतावनी राजस्थान की राजनीति में एक नई हलचल पैदा कर सकती है।

ईडब्ल्यूएस आरक्षण का मुद्दा सीधे तौर पर एक बड़े वोट बैंक से जुड़ा है, जिसे कोई भी सरकार नजरअंदाज करने का जोखिम नहीं उठा सकती।

अब देखना यह होगा कि जयपुर और दिल्ली में होने वाले प्रदर्शनों का केंद्र सरकार की नीतियों पर क्या असर पड़ता है।

युवाओं की उम्मीदें अब इस आंदोलन की सफलता और सरकार के सकारात्मक रुख पर टिकी हुई हैं।

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