नागपुर | बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र शास्त्री अक्सर अपने बयानों को लेकर चर्चा में रहते हैं, लेकिन इस बार उन्होंने नागपुर की धरती से एक ऐसा आह्वान किया है जिसने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।
नागपुर में आयोजित एक भव्य समारोह के दौरान धीरेंद्र शास्त्री ने हिंदुओं से अपील की कि वे चार बच्चे पैदा करें और उनमें से एक बच्चा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) को समर्पित कर दें।
नागपुर में गूंजा राष्ट्रवाद का स्वर
पंडित धीरेंद्र शास्त्री नागपुर में विश्व के पहले ‘भारतदुर्गा मंदिर’ के शिलान्यास समारोह में शिरकत करने पहुंचे थे, जहां उन्होंने धर्म और राष्ट्र सेवा पर विस्तार से अपनी बात रखी।
इस कार्यक्रम की गरिमा तब और बढ़ गई जब वहां राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत भी मौजूद रहे, जिनकी उपस्थिति में शास्त्री ने यह बड़ा बयान दिया।
चार बच्चों का फॉर्मूला और संघ की सेवा
शास्त्री ने मंच से स्पष्ट रूप से कहा कि आज के समय में हिंदुओं को अपनी आबादी और राष्ट्र की सुरक्षा के प्रति सजग रहने की अत्यंत आवश्यकता है।
उन्होंने सुझाव दिया कि आप चार बच्चे पैदा करें और उनमें से एक को संघ को दे दें, ताकि वह दूसरों को बचाने और समाज सेवा के काम आ सके।
आपदा में संघ की भूमिका की सराहना
धीरेंद्र शास्त्री ने संघ के स्वयंसेवकों की प्रशंसा करते हुए कहा कि जब भी देश में कोई बड़ी आपदा आती है, तो आम लोग अपनी जान बचाकर भागने लगते हैं।
लेकिन ऐसे कठिन समय में केवल संघ के कार्यकर्ता ही होते हैं जो अपनी जान की परवाह किए बिना वहां जाकर लोगों की जान बचाते हैं और सेवा कार्य करते हैं।
शास्त्र और शस्त्र का अद्भुत संगम
नागपुर के कैंसर इंस्टीट्यूट परिसर में बनने वाला यह 'भारतदुर्गा मंदिर' अपने आप में अनूठा होगा, जो आने वाली पीढ़ियों को भारत की शक्ति का अहसास कराएगा।
शास्त्री ने कहा कि यह मंदिर लोगों को याद दिलाएगा कि भारत केवल 'शास्त्रों' से ही नहीं, बल्कि जरूरत पड़ने पर 'शस्त्रों' से भी अपनी रक्षा करना जानता है।
माला और भाला का संदेश
उन्होंने एक बहुत ही मार्मिक और प्रभावी उदाहरण देते हुए कहा कि हमारा धर्म 'माला और भाला' दोनों का संगम है, जिसे हमें कभी नहीं भूलना चाहिए।
शास्त्री ने तर्क दिया कि हमारे देवी-देवताओं के हाथों में भी शस्त्र हैं, जो इस बात का प्रतीक हैं कि शांति के लिए शक्ति का होना अनिवार्य है।
महाभारत के युद्ध का दिया उदाहरण
भगवान कृष्ण का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि अगर केवल बंसी बजाने से दुनिया का काम चल सकता होता, तो कुरुक्षेत्र में महाभारत का भीषण युद्ध कभी नहीं होता।
शास्त्री के अनुसार, धर्म की रक्षा के लिए कभी-कभी कठोर निर्णय लेने पड़ते हैं और शस्त्र उठाना भी धर्म का ही एक हिस्सा बन जाता है।
भारत माता और नारी शक्ति का सम्मान
नारी शक्ति पर बात करते हुए धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि दुनिया के किसी भी अन्य देश में मातृशक्ति को वह सम्मान नहीं दिया जाता, जो हमारे भारत में मिलता है।
उन्होंने सवालिया लहजे में पूछा कि क्या कभी किसी ने 'पाकिस्तान माता' या 'चीन माता' की जयकार सुनी है? यह गौरव केवल भारत के पास ही है।
नारी भोग्या नहीं पूज्या है
शास्त्री ने जोर देकर कहा कि भारत ही एकमात्र ऐसा देश है जहां नारी को केवल भोग की वस्तु नहीं माना जाता, बल्कि उसे साक्षात देवी मानकर पूजा जाता है।
उनके इस बयान पर वहां मौजूद हजारों की भीड़ ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ उनका समर्थन किया और भारत माता की जय के नारे लगाए।
अखंड भारत का सपना और नम आंखें
भूमिपूजन के दौरान धीरेंद्र शास्त्री काफी भावुक नजर आए और उन्होंने स्वीकार किया कि उस समय उनकी आंखें नम थीं क्योंकि भारत एक नया इतिहास लिखने जा रहा है।
उन्होंने हनुमान जी से विशेष प्रार्थना की कि भारत हमेशा संतमय और भगवामय बना रहे और हम सभी जल्द ही 'अखंड भारत' के सपने को साकार होते देखें।
दिग्गज नेताओं की गरिमामयी उपस्थिति
इस ऐतिहासिक कार्यक्रम में केवल धार्मिक गुरु ही नहीं, बल्कि राजनीति और समाज सेवा के कई बड़े चेहरे भी एक साथ एक मंच पर नजर आए।
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी इस शिलान्यास समारोह में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और संतों का आशीर्वाद लिया।
संतों का मिला भारी समर्थन
कार्यक्रम में स्वामी अवधेशानंद गिरि जी महाराज, कार्ष्णी पीठाधीश्वर गोविंद गिरी जी और दीदी मां ऋतम्भरा जैसे महान संतों ने भी शिरकत की।
चिन्मया मिशन के संतों के साथ-साथ अन्य धार्मिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी मंदिर निर्माण के इस संकल्प को राष्ट्र निर्माण की दिशा में बड़ा कदम बताया।
मध्य प्रदेश में बदलेंगे आबादी के नियम
शास्त्री के इस बयान के बीच एक महत्वपूर्ण खबर यह भी है कि मध्य प्रदेश सरकार सरकारी नौकरी में दो बच्चों की पाबंदी वाले पुराने नियम को बदलने की तैयारी कर रही है।
सामान्य प्रशासन विभाग ने इसका प्रस्ताव तैयार कर लिया है और सूत्रों की मानें तो मुख्यमंत्री ने इस बदलाव को अपनी सैद्धांतिक मंजूरी भी दे दी है।
कैबिनेट में जल्द आएगा प्रस्ताव
यह महत्वपूर्ण प्रस्ताव फिलहाल मुख्य सचिव कार्यालय में प्रक्रियाधीन है और उम्मीद जताई जा रही है कि इसे बहुत जल्द राज्य कैबिनेट के सामने पेश किया जाएगा।
आपको बता दें कि साल 2001 में दिग्विजय सिंह की सरकार ने सिविल सेवा नियम 1961 में संशोधन करके दो बच्चों की अनिवार्य शर्त लागू की थी।
प्रदीप मिश्रा का पहले भी आया था बयान
धीरेंद्र शास्त्री से पहले मशहूर कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने भी हिंदुओं को ज्यादा बच्चे पैदा करने की सलाह देकर विवाद खड़ा कर दिया था।
मई 2024 में छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में शिव महापुराण कथा के दौरान उन्होंने कहा था कि सनातनियों को कम से कम चार बच्चे पैदा करने चाहिए।
राष्ट्र के लिए बच्चों का समर्पण
प्रदीप मिश्रा का तर्क था कि दो बच्चे परिवार के लिए और दो बच्चे राष्ट्र की सेवा के लिए होने चाहिए, ताकि देश की संस्कृति सुरक्षित रहे।
उन्होंने तो यहां तक कह दिया था कि जब तक देश में जनसंख्या नियंत्रण को लेकर कोई कड़ा कानून नहीं आता, तब तक हिंदुओं को पीछे नहीं रहना चाहिए।
लव मैरिज पर बेटियों को दी नसीहत
उसी कथा के दौरान प्रदीप मिश्रा ने बेटियों को लव मैरिज के प्रति सचेत करते हुए कहा था कि उन्हें स्कूल-कॉलेज में मिलने वाले लड़कों के झांसे में नहीं आना चाहिए।
उन्होंने कहा था कि जो जीवनसाथी पिता ढूंढकर लाएंगे, उनके साथ 100 साल की जिंदगी ज्यादा सुखद और सुरक्षित तरीके से गुजारी जा सकती है।
मोहन भागवत की जनसंख्या पर चिंता
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने भी हाल ही में जनसंख्या वृद्धि दर में आ रही गिरावट को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की थी।
भागवत ने कहा था कि किसी भी समाज को जीवित रहने के लिए उसकी प्रजनन दर 2.1 प्रतिशत से नीचे नहीं जानी चाहिए, जो कि वर्तमान में चिंता का विषय है।
तीन बच्चों का दिया था सुझाव
दिसंबर 2024 में नागपुर के एक सम्मेलन में भागवत ने सुझाव दिया था कि परिवारों को कम से कम तीन बच्चे पैदा करने चाहिए ताकि समाज की निरंतरता बनी रहे।
उन्होंने 1998-2002 की जनसंख्या नीति का हवाला देते हुए चेतावनी दी थी कि अगर जनसंख्या दर गिरती रही, तो समाज अपने आप विलुप्त होने की कगार पर पहुंच जाएगा।
विधायक रामेश्वर शर्मा के तीखे तेवर
बीजेपी विधायक रामेश्वर शर्मा ने भी समय-समय पर हिंदुओं को अधिक बच्चे पैदा करने के लिए प्रोत्साहित किया है और इसे राष्ट्रहित से जोड़ा है।
जनवरी 2026 के एक बयान में उन्होंने कहा था कि संघ और संतों की यह चिंता बिल्कुल जायज है कि हिंदुओं की संख्या में कमी आ रही है।
हिंदू शादियों में देरी पर सवाल
रामेश्वर शर्मा ने तर्क दिया कि हिंदू समाज में अब शादियां बहुत देर से हो रही हैं, जिसके कारण कई परिवार और वंश पूरी तरह से खत्म होते जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि तीन बच्चे होना कोई अपराध नहीं है, बल्कि यह समाज को संतुलित रखने और भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए एक आवश्यक कदम है।
जनसांख्यिकीय संतुलन की चुनौती
शर्मा ने अन्य समुदायों की बढ़ती आबादी का जिक्र करते हुए कहा था कि हिंदुस्तान को बचाने के लिए हिंदुओं को अपनी संख्या बल पर ध्यान देना ही होगा।
उनके अनुसार, कम से कम तीन बच्चे हर हिंदू परिवार के लिए अनिवार्य होने चाहिए ताकि सामाजिक और धार्मिक ताना-बाना सुरक्षित बना रहे।
"आप चार बच्चे पैदा करो। उनमें से एक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को दे दो, ताकि वह दूसरों को बचाने के काम आए। आपदा में संघ के कार्यकर्ता ही जान बचाते हैं।"
विवाद और समर्थन का दौर
धीरेंद्र शास्त्री के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है, जहां एक पक्ष इसे राष्ट्रवाद से जोड़ रहा है तो दूसरा इसे विवादित मान रहा है।
हालांकि, शास्त्री के समर्थकों का कहना है कि उन्होंने केवल समाज की भलाई और देश की सुरक्षा के संदर्भ में यह बात कही है।
धार्मिक और सामाजिक प्रभाव
इस तरह के बयानों का भारतीय समाज पर गहरा प्रभाव पड़ता है, खासकर जब वे धीरेंद्र शास्त्री जैसे लोकप्रिय व्यक्तित्व की ओर से आते हैं।
नागपुर का यह कार्यक्रम केवल एक मंदिर का शिलान्यास नहीं, बल्कि एक वैचारिक संदेश देने का मंच भी बन गया है जो आने वाले दिनों में चर्चा में रहेगा।
निष्कर्ष
धीरेंद्र शास्त्री का चार बच्चों वाला यह बयान और उसमें संघ का जुड़ाव निश्चित रूप से एक नई बहस को जन्म दे चुका है। जहां एक तरफ जनसंख्या नियंत्रण की बातें होती हैं, वहीं दूसरी तरफ सांस्कृतिक और जनसांख्यिकीय सुरक्षा के नाम पर अधिक बच्चों की वकालत की जा रही है। यह देखना दिलचस्प होगा कि समाज और सरकार इन विचारों को किस तरह से अपनाते हैं।
*Edit with Google AI Studio