राजस्थान

डिजिटल जनगणना 2027 की शुरुआत: डिजिटल जनगणना 2027: घर बैठे 2 मिनट में दर्ज करें जानकारी

जोगेन्द्र सिंह शेखावत · 01 मई 2026, 05:32 शाम
मुख्य सचिव वी श्रीनिवास ने स्व-गणना कर अभियान शुरू किया, पोर्टल 15 मई तक खुला है।

जयपुर | राजस्थान के मुख्य सचिव वी श्रीनिवास ने शुक्रवार को डिजिटल जनगणना-2027 के तहत 'स्व-गणना' (Self Enumeration) प्रक्रिया का सफलतापूर्वक शुभारंभ किया। उन्होंने आधिकारिक पोर्टल पर अपनी जानकारी दर्ज कर प्रदेशवासियों को इस अभियान से जुड़ने के लिए प्रेरित किया।

सिर्फ दो मिनट में पूरी होगी प्रक्रिया

मुख्य सचिव ने बताया कि डिजिटल जनगणना की यह प्रणाली बेहद सरल और समय बचाने वाली है। पोर्टल se.census.gov.in पर जाकर नागरिक स्वयं अपनी जानकारी ऑनलाइन दर्ज कर सकते हैं।

इस प्रक्रिया में कुल 32 प्रश्न पूछे जाते हैं जिन्हें हल करने में मात्र दो मिनट का समय लगता है। यह विशेष अभियान 1 मई से 15 मई तक संचालित किया जा रहा है।

डिजिटल सशक्तिकरण की ओर एक बड़ा कदम

वी. श्रीनिवास ने इस पहल को तकनीक और प्रशासन के बीच बढ़ती नजदीकी का प्रमाण बताया। उन्होंने कहा कि यह डेटा संकलन से कहीं बढ़कर नागरिकों को सशक्त बनाने का माध्यम है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'अधिकतम शासन, न्यूनतम सरकार' के विजन को ध्यान में रखते हुए यह पोर्टल तैयार किया गया है। इससे सरकारी सेवाओं की पहुंच और पारदर्शिता में सुधार होगा।

डिजिटल सेंसस केवल डेटा का संकलन नहीं, बल्कि नागरिकों के डिजिटल सशक्तिकरण की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है। यह तकनीक सरकार और जनता के बीच की दूरी कम करेगी।

व्यापक स्तर पर प्रशिक्षण और भविष्य की योजना

अभियान की सफलता के लिए पंचायत स्तर तक व्यापक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं। मास्टर ट्रेनर्स ने जिला और तहसील स्तर पर अधिकारियों को डिजिटल डेटा प्रविष्टि के लिए तैयार किया है।

डिजिटल माध्यम से प्राप्त आंकड़े अधिक सटीक और पारदर्शी होंगे, जिससे भविष्य में क्षेत्रीय गणना पर निर्भरता कम होगी। मुख्य सचिव ने अधिकारियों को प्रथम चरण के लक्ष्य निर्धारित करने के निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने विश्वास जताया कि राजस्थान के नागरिक इस आधुनिक प्रक्रिया में उत्साहपूर्वक भाग लेंगे। तकनीक का यह उपयोग प्रशासनिक सुधारों की दिशा में एक नया कीर्तिमान स्थापित करने वाला है।

यह डिजिटल जनगणना 'विकसित भारत 2027' के संकल्प को सिद्ध करने में मील का पत्थर साबित होगी। तकनीक के इस बढ़ते उपयोग में जन-भागीदारी ही इसकी वास्तविक सफलता की कुंजी बनेगी।

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