सिरोही। पूर्व विधायक संयम लोढ़ा को निशाना बनाने की कथित साजिश के मामले में भाजपा के पूर्व जिला महामंत्री एवं पार्षद दिनेश बिंदल ने अपनी पहली प्रतिक्रिया देते हुए इसे बेहद गंभीर और चिंताजनक घटना बताया। बिंदल ने स्पष्ट किया कि यह उनकी निजी प्रेस वार्ता है और पार्टी की ओर से उन्हें इस संबंध में कोई निर्देश नहीं दिए गए हैं।
बिंदल ने कहा कि उनके 35 वर्ष के राजनीतिक जीवन में उन्होंने ऐसा माहौल पहले कभी नहीं देखा। उन्होंने कहा कि राजनीति में विचारों और मुद्दों को लेकर मतभेद हो सकते हैं, लेकिन जब किसी व्यक्ति के जीवन पर खतरे की बात सामने आए तो राजनीतिक सीमाओं से ऊपर उठकर मानवता और इंसानियत को प्राथमिकता देनी चाहिए।
उन्होंने कहा, “संयम लोढ़ा से मेरे राजनीतिक मतभेद हो सकते हैं, लेकिन एक इंसान के तौर पर मैं उनके लंबे और स्वस्थ जीवन की कामना करता हूं।”
“सिरोही पर लग जाता बड़ा कलंक”
बिंदल ने राज्य सरकार और सुरक्षा एजेंसियों की कार्रवाई की सराहना करते हुए कहा कि एजेंसियों की सतर्कता और तत्परता से एक बड़ी घटना को टाला गया। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं होती तो ऐसी घटना से पूरे सिरोही की छवि पर गंभीर असर पड़ता और “सिरोही पर एक बड़ा कलंक लग जाता।”
उन्होंने कहा कि अपराध को रोकने के लिए सरकार और सुरक्षा एजेंसियों की जिम्मेदारी महत्वपूर्ण है और इस मामले में जिस तत्परता से कार्रवाई हुई, वह महत्वपूर्ण है। उन्होंने मामले में गिरफ्तार आरोपियों से जुड़ी जांच और सामने आ रहे तथ्यों की भी चर्चा की।
“पार्टी का निर्देश नहीं, मेरा व्यक्तिगत निर्णय”
बिंदल ने अपनी प्रेस वार्ता को लेकर किसी भी राजनीतिक भ्रम की स्थिति को स्पष्ट करते हुए कहा कि “यह मेरी व्यक्तिगत प्रेस कॉन्फ्रेंस है। पार्टी ने मुझे कोई निर्देश नहीं दिया था।” उन्होंने कहा कि उन्होंने यह बात किसी राजनीतिक एजेंडे के तहत नहीं, बल्कि एक नागरिक और राजनीतिक कार्यकर्ता के तौर पर अपनी भावना व्यक्त करने के लिए कही है।
पूरे मामले की तह तक जाने की जरूरत
बिंदल ने कहा कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और साजिश के पीछे जुड़े प्रत्येक व्यक्ति तथा पूरे घटनाक्रम की वास्तविकता सामने आनी चाहिए। उन्होंने उम्मीद जताई कि जांच एजेंसियां मामले की तह तक पहुंचकर पूरे षड्यंत्र का पर्दाफाश करेंगी।
उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों को केवल राजनीतिक नजरिए से देखने के बजाय कानून-व्यवस्था और मानवीय दृष्टिकोण से देखा जाना चाहिए।
अंत में बिंदल ने दोहराया कि राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन इंसानियत सबसे ऊपर है।