भाजपा में देर रात बड़ा बदलाव: राजस्थान में 8 जिलों के जिलाध्यक्ष बदले, नए चेहरों को दिया मौका

राजस्थान में 8 जिलों के जिलाध्यक्ष बदले, नए चेहरों को दिया मौका
CP Joshi
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विधानसभा चुनावों के मद्देनजर प्रदेशाध्यक्ष सीपी जोशी ने नए जिलाध्यक्षों की घोषणा की है। जिसके अनुसार 8 जिलों के जिलाध्यक्ष को बदलकर नए चेहरों को मौका दिया है।

जयपुर | राजस्थान में विधानसभा चुनावों की तैयारियों के बीच भाजपा ने बड़ा बदलाव किया है। 

शनिवार को देर रात राजस्थान भाजपा ने बड़ा फेरबदल करते हुए 8 जिलों में नए जिलाध्यक्ष नियुक्त किए हैं। 

नए चेहरों को दिया गया मौका

विधानसभा चुनावों के मद्देनजर प्रदेशाध्यक्ष सीपी जोशी ने नए जिलाध्यक्षों की घोषणा की है। 

जिसके अनुसार 8 जिलों के जिलाध्यक्ष को बदलकर नए चेहरों को मौका दिया है। इनमें जयपुर ग्रामीण के दो जिलाध्यक्ष भी शामिल है।

गौरतलब है कि राजस्थान में इसी साल के अंत में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में गहलोत सरकार भी आचार संहिता लगने से पूर्व लगातार अपने प्रशासनिक अमले में फेरबदल कर रही है। 

ये बनाए गए जिलाध्यक्ष

- चुरू जिले में हरलाल सहारण, 
- जयपुर दक्षिण में राजेश गुर्जर, 
- जयपुर उत्तर में श्याम शर्मा, 
- सीकर जिले में पवन मोदी, 
- धौलपुर जिले में सत्येंद्र पराशर, 
- बांसवाड़ा में लाभचंद पटेल, 
- नागौर शहर में रामनिवास सांखला, 
- कोटा देहात में प्रेम गोचर।

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आपको बता दें कि चुनावों में प्रदेश भाजपा कर्नाटक जैसी कोई भी गलती नहीं दोहराना चाहती है। ऐसे में आम जनता के बीच में अपनी जगह बनाने के लिए निरंतर प्रयासों में लगी हुई है। 

दूसरे राज्यों से आये विधायकों ने संभाली कमान 

वही दूसरी ओर, छह राज्यों से प्रदेश प्रवास पर आए भाजपा विधायकों को आवंटित विधानसभा क्षेत्रों में भेज दिया गया है।  ये विधायक  पार्टी के वरिष्ठ कार्यकर्ताओं नाराज कार्यकर्ताओं से मुलाकात करेंगे। विभिन्न समाज के प्रमुख लोगों से मिलेंगे।

जयपुर पहुंचे 170 विधायकों की शनिवार को जयपुर में कार्यशाला हुई। कार्यशाला के दौरान प्रदेश प्रभारी अरुण सिंह, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सीपी जोशी, नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़, भाजपा संगठन महामंत्री चंद्रशेखर प्रदेश उपाध्यक्ष मुकेश दाधीच, विधायक वासुदेव देवनानी ने संबोधित किया। 

तैयार होगी रिपोर्ट ?

अन्य राज्यों से प्रदेश में पहुंचे ये सभी विधायक उस विधानसभा सीट के प्रत्येक समीकरण पर नजर रखते हुए रिपोर्ट तैयार करेंगे। 

रिपोर्ट में बताया जाएगा कि किस विधानसभा सीट से कौन मजबूत दावेदार है और जनता में उसकी पकड़ कितनी है।मौजूदा

उनके नामों की सूची भी विधायक अपनी रिपोर्ट में शामिल करेंगे। 

रिपोर्ट में दावेदारों के अलावा भाजपा की स्थिती भी देखी जाएगी कि किस सीट पर पार्टी मजबूत है और किस पर कमजोर। 

यहीं नहीं, इस रिपोर्ट में बागियों और तीसरे मार्चे पर भी नजर रखी जाएगी। 

जिन सीटों पर भाजपा उपचुनाव में हारी है, उस हार के कारणों का भी पता लगाया जाएगा।  इसके अलावा जिन सीटों पर कांग्रेस जीत रही है। वहां पर भाजपा की हार की समीक्षा की जाएगी। 

दूसरे राज्योां से आए सभी विधायक अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों में सामाजिक समीकरण समझ कर मतदाताओं पर भी फोकस करेंगे। 

ऐसे सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर रिपोर्ट तैयारी होगी जिसके बाद पार्टी में इन पर मंथन किया जाएगा। 

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