जयपुर | राजस्थान की उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी ने सार्वजनिक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के अधिकारियों को सख्त लहजे में निर्देश दिए हैं। उन्होंने बजट प्रस्तावों में प्रोजेक्ट की लागत का सटीक आकलन करने पर विशेष जोर दिया है।
शनिवार को जयपुर स्थित निर्माण भवन के सभागार में पीडब्ल्यूडी की एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस बैठक की अध्यक्षता करते हुए उपमुख्यमंत्री ने विकास कार्यों की वर्तमान स्थिति का जायजा लिया।
प्रोजेक्ट्स में देरी और बढ़ती लागत पर नाराजगी
बैठक के दौरान दिया कुमारी ने कुछ प्रोजेक्ट्स के बार-बार अलाइनमेंट बदलने और उनकी लागत में होने वाली वृद्धि पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने इसे सरकारी संसाधनों की बर्बादी बताया।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि प्राथमिक स्तर पर प्रस्ताव बनाते समय ही प्रोजेक्ट की संभावित लागत का बारीकी से अध्ययन करें। इससे भविष्य में होने वाली अनावश्यक देरी से बचा जा सकेगा।
"अधिकारी बजट के प्रस्ताव भिजवाते समय ही प्रोजेक्ट की लागत का सही आंकलन करें ताकि प्रोजेक्ट में अनावश्यक देरी ना हो और जनता को समय पर लाभ मिले।"
इन प्रमुख प्रोजेक्ट्स की हुई समीक्षा
उपमुख्यमंत्री ने बयाना बाईपास, बारां-अटरू आरओबी, जैतूपुरा-जयसिंहपुरा और भादरा बाईपास जैसे महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को इन कार्यों में हो रही देरी को तुरंत दूर करने के निर्देश दिए।
इसके साथ ही नसीराबाद-सारवाड़-केकड़ी-देवली सड़क और मेज नदी पर हाई लेवल ब्रिज के निर्माण को गति देने को कहा गया। सलूम्बर बाईपास के काम में भी तेजी लाने के निर्देश दिए गए हैं।
बुनियादी ढांचे की मजबूती पर फोकस
बैठक में एनएच, एनएचएआई, सीआरआईएफ और आरएसआरडीसी सहित विभिन्न सड़क एवं अवसंरचनात्मक परियोजनाओं की बिंदुवार समीक्षा की गई। उपमुख्यमंत्री ने गुणवत्ता के साथ किसी भी प्रकार के समझौते को अस्वीकार्य बताया।
इस अवसर पर राज्य मंत्री मंजू बाघमार और अतिरिक्त मुख्य सचिव प्रवीण गुप्ता सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। सरकार का उद्देश्य राजस्थान के बुनियादी ढांचे को विश्वस्तरीय और मजबूत बनाना है।
इस कड़े रुख से स्पष्ट है कि सरकार अब विकास परियोजनाओं में लेटलतीफी बर्दाश्त नहीं करेगी। समयबद्ध तरीके से प्रोजेक्ट पूरे होने से आमजन को बेहतर परिवहन सुविधाएं और आर्थिक उन्नति के अवसर मिलेंगे।
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