जयपुर | राजस्थान की राजधानी जयपुर के सबसे बड़े सरकारी चिकित्सा केंद्र, सवाई मानसिंह (एसएमएस) अस्पताल से एक बड़ी खबर सामने आई है। अस्पताल के वरिष्ठ न्यूरोसर्जन और पूर्व अधीक्षक डॉ. अचल शर्मा ने अपनी सरकारी सेवा से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) ले ली है।
डॉ. शर्मा का यह फैसला चिकित्सा जगत में चर्चा का विषय बना हुआ है। राज्य सरकार ने बुधवार को उनके वीआरएस आवेदन को आधिकारिक तौर पर मंजूरी दे दी। बता दें कि डॉ. शर्मा का कार्यकाल अभी तीन साल और शेष था, उनका रिटायरमेंट 2029 में होना था।
किडनी कांड और डॉ. अचल शर्मा का कनेक्शन
डॉ. अचल शर्मा वही डॉक्टर हैं जिन्होंने एसएमएस अस्पताल में अधीक्षक के पद पर रहते हुए चर्चित किडनी कांड का खुलासा किया था। उन्होंने ही इस मामले की गंभीरता को देखते हुए उच्च स्तर पर शिकायत दर्ज कराई थी।
किडनी कांड के सार्वजनिक होने के बाद पूरे देश में राजस्थान की स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल उठे थे। हालांकि, इस खुलासे के कुछ समय बाद ही उन्हें अधीक्षक के पद से हटा दिया गया था। तब से ही अस्पताल के गलियारों में कई तरह की चर्चाएं व्याप्त थीं।
स्वास्थ्य कारणों का दिया हवाला
डॉ. शर्मा ने अपने वीआरएस आवेदन में खराब स्वास्थ्य को मुख्य कारण बताया है। उन्होंने कहा कि वह अपनी शारीरिक स्थिति के कारण अब पूर्ण क्षमता के साथ सेवाएं देने में असमर्थ महसूस कर रहे हैं।
सरकारी सेवा छोड़ने के बाद डॉ. शर्मा ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि उन्हें सरकारी सेवा के दौरान बहुत मान-सम्मान मिला। लेकिन मजबूरीवश स्वास्थ्य संबंधी कारणों से उन्हें यह कठिन फैसला लेना पड़ा है।
SMS अस्पताल में गहरा सकता है डॉक्टरों का संकट
डॉ. अचल शर्मा जयपुर के जाने-माने न्यूरोसर्जन हैं और वे एसएमएस मेडिकल कॉलेज में न्यूरोसर्जरी विभाग के एचओडी भी रह चुके हैं। उनके जाने से अस्पताल में सीनियर न्यूरोसर्जन की भारी कमी होने की आशंका जताई जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सुपर स्पेशलिटी विभागों में अनुभवी डॉक्टरों का इस तरह जाना एक बड़ा नुकसान है। आमतौर पर चिकित्सा शिक्षा विभाग में शिक्षकों की कमी के चलते वीआरएस के आवेदन आसानी से मंजूर नहीं किए जाते हैं।
कतार में हैं कई और दिग्गज नाम
एसएमएस अस्पताल में वरिष्ठ डॉक्टरों द्वारा वीआरएस लेने का यह कोई अकेला मामला नहीं है। सूत्रों के अनुसार, कई अन्य सीनियर प्रोफेसर भी अब सरकारी सेवा छोड़ने की तैयारी में जुटे हुए हैं।
नेफ्रोलॉजी विभाग के सीनियर प्रोफेसर डॉ. विनय मल्होत्रा ने भी वीआरएस के लिए आवेदन किया है। वहीं, पूर्व अधीक्षक डॉ. सुशील भाटी भी इसी प्रक्रिया में बताए जा रहे हैं। इन बड़े नामों के जाने से अस्पताल की साख पर असर पड़ सकता है।
मरीजों और मेडिकल छात्रों पर पड़ेगा असर
एसएमएस अस्पताल में प्रदेश भर से मरीज जटिल ऑपरेशन्स के लिए आते हैं। अनुभवी डॉक्टरों की कमी से सुपर स्पेशलिटी सेवाओं में वेटिंग लिस्ट बढ़ सकती है। मरीजों को अब सीनियर ओपिनियन के लिए निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ सकता है।
वहीं, मेडिकल छात्रों के लिए भी यह एक बड़ा झटका है। वरिष्ठ डॉक्टरों के मार्गदर्शन में होने वाले शोध और प्रैक्टिकल प्रशिक्षण की गुणवत्ता प्रभावित होने का डर सता रहा है। अनुभवी शिक्षकों के बिना उच्च शिक्षा का स्तर बनाए रखना बड़ी चुनौती होगी।
प्रशासन की वैकल्पिक व्यवस्था पर नजर
एसएमएस मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. दीपक माहेश्वरी ने कहा कि डॉ. अचल शर्मा की कमी अस्पताल और कॉलेज दोनों को खलेगी। उन्होंने स्वास्थ्य कारणों से यह कदम उठाया है, जिसे स्वीकार करना पड़ा।
अब अस्पताल प्रशासन न्यूरोसर्जरी विभाग में वैकल्पिक व्यवस्था करने पर विचार कर रहा है। सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती इन रिक्त पदों को भरने और अनुभवी विशेषज्ञों को सरकारी सेवा में बनाए रखने की है।
सरकार के लिए बढ़ी मुश्किलें
वरिष्ठ डॉक्टरों का मोहभंग होना राजस्थान के स्वास्थ्य विभाग के लिए चिंता का विषय है। क्या यह केवल व्यक्तिगत कारण हैं या अस्पताल की आंतरिक राजनीति, यह बहस का विषय बना हुआ है।
फिलहाल, डॉ. अचल शर्मा के जाने से एसएमएस अस्पताल के न्यूरोसर्जरी विभाग में एक बड़ा शून्य पैदा हो गया है। अब देखना होगा कि राज्य सरकार प्रदेश के इस सबसे बड़े चिकित्सा संस्थान की सेवाओं को सुचारू रखने के लिए क्या ठोस कदम उठाती है।