राजस्थान

नशे में अफसर का आतंक: जयपुर में नशे में धुत अफसर का हंगामा, 3 बार कार को मारी टक्कर

desk · 23 अगस्त 2026, 06:39 शाम
जयपुर में नशे में धुत एक सरकारी अधिकारी ने कार को 3 बार टक्कर मारी और मारपीट की। पीड़ित ने पुलिस पर FIR दर्ज न करने और आरोपी का पक्ष लेने का आरोप लगाया है।

जयपुर |जयपुर के वैशाली नगर में एक सरकारी अधिकारी पर नशे में गाड़ी चलाते हुए सड़क पर हंगामा करने का आरोप लगा है। मामला तब और गंभीर हो गया जब कार की टक्कर से परेशान एक व्यक्ति ने आरोपी का करीब तीन किलोमीटर तक पीछा किया। आरोप है कि पकड़े जाने पर भी चालक ने पीड़ित के साथ मारपीट की।

गुरुद्वारे के पास टक्कर से शुरू हुआ मामला

पीड़ित संतोष सिंह तंवर (45) ने अपनी शिकायत में बताया कि वह वैशाली नगर गुरुद्वारे के सामने अपनी कार पार्क कर रहे थे।

इसी दौरान पीछे से आई एक कार ने उनकी गाड़ी में टक्कर मार दी। जब संतोष नुकसान देखने के लिए नीचे उतरने लगे, तो आरोपी ने दोबारा उनकी कार को टक्कर मारी और वहां से भाग गया। इसके बाद संतोष ने उस कार का पीछा करना शुरू कर दिया।

3 किलोमीटर तक पीछा, रेड लाइट भी तोड़ी

संतोष के अनुसार, आरोपी अपनी कार को तेज रफ्तार में भगा रहा था और उसने वैशाली सर्किल की रेड लाइट भी पार कर दी।

इस दौरान कई राहगीर कार की चपेट में आने से बाल-बाल बचे। करीब तीन किलोमीटर पीछा करने के बाद संतोष ने आरोपी की कार को रोकने के लिए अपनी गाड़ी उसके आगे लगा दी।

कार फंसी तो की मारपीट

आरोप है कि रुकने के बजाय चालक ने संतोष की कार को फिर से टक्कर मार दी। जब संतोष ने अपनी कार साइड की, तो आरोपी फिर आगे बढ़ गया।

कुछ दूर जाकर सड़क निर्माण के कारण उसकी कार रोड़ी-कंकर में फंस गई। संतोष ने बताया कि कार फंसने के बाद जब उन्होंने चालक को पकड़ा, तो उसने उनका गला पकड़ लिया और मारपीट शुरू कर दी। पीड़ित के मुताबिक, आरोपी ने उनकी छाती पर तीन-चार मुक्के मारे।

पुलिस पर पक्षपात का गंभीर आरोप

मौके पर मौजूद लोगों ने चालक को पकड़ लिया और पुलिस को सूचना दी। पीड़ित के अनुसार, कार के अंदर शराब की बोतल भी मिली थी।

पीड़ित का आरोप है कि मौके पर पहुंची वैशाली नगर थाना पुलिस ने कार को जब्त तो कर लिया, लेकिन नशे में मिले चालक को छोड़ दिया।

संतोष का कहना है कि उन्होंने लिखित शिकायत दी, लेकिन FIR दर्ज नहीं की गई। उनका आरोप है कि पुलिसकर्मी आरोपी का पक्ष ले रहे थे और उसे एक सरकारी अधिकारी बताते हुए उसके ट्रांसफर की वजह से परेशान होने की बात कह रहे थे।

जब उन्होंने FIR पर जोर दिया तो पुलिस ने कथित तौर पर कहा कि कार्रवाई कर दी गई है, अब क्या उसे फांसी पर चढ़ा दें। वहीं, पुलिस का कहना है कि उन्हें पीड़ित की ओर से कोई शिकायत नहीं मिली है।

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