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राजस्थान

rajasthan: एम-सेण्ड प्लॉट्स की ई-नीलामी प्रक्रिया इसी माह से शुरू

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HIGHLIGHTS

  • टी. रविकान्त ने बताया कि मुख्यमंत्री  भजन लाल शर्मा ने आमनागरिकों के लिए संवेदनशील निर्णय करते हुए बजरी के विकल्प के रुप में नई और व्यावहारिक एम-सेण्ड नीति बनाने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री  भजन लाल शर्मा के मार्गदर्शन में नई एम-सेण्ड पॉलिसी तैयार की गई। नई नीति में एम-सेण्ड इकाइयों को उद्योग का दर्जा देने के साथ ही राजस्थान निवेश प्रोत्साहन योजना में विशेष रियायतों दी गई है
e auction process of m send plots starts from this month

जयपुर । खान एवं भूविज्ञान विभाग के प्रमुख शासन सचिव  टी. रविकान्त ने बताया है कि विभाग द्वारा इसी माह के अंत तक एम-सेण्ड प्लॉटों की ई-नीलामी की प्रक्रिया आरंभ कर दी जाएगी। उन्हांेने बताया कि विभाग के फील्ड अधिकारियों को एम-सेण्ड इकाइयों की स्थापना के लिए प्लॉट तैयार कर निदेशालय को प्रस्ताव भेजने के निर्देश दिए गए हैं।
       
प्रमुख सचिव खान  टी. रविकान्त ने मुख्यमंत्री एवं खान मंत्री  भजन लाल शर्मा द्वारा बुधवार को राज्य की नई एम-सेण्ड पॉलिसी जारी होने के साथ ही एक्शन मोड पर आते हुए गुरुवार को सचिवालय में विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की। उन्होंने बताया कि बजरी के विकल्प के रुप में एम-सेण्ड की सहज उपलब्धता के लिए नई एम-सेण्ड इकाइयों की स्थापना हेतु प्लॉट तैयार कर ई नीलामी की जाएगी।

इससे प्रदेश मेें एम-सेण्ड का उत्पादन बढ़ेगा और आमनागरिकों को बजरी के विकल्प के रुप में एम-सेण्ड की सहज और सस्तें में उपलब्धत हो सकेगी। इसके सााथ ही प्रदेश में माइनिंग सेक्टर में नया निवेश और रोजगार के अवसर विकसित हो सकेंगे।
       
 टी. रविकान्त ने बताया कि मुख्यमंत्री  भजन लाल शर्मा ने आमनागरिकों के लिए संवेदनशील निर्णय करते हुए बजरी के विकल्प के रुप में नई और व्यावहारिक एम-सेण्ड नीति बनाने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री  भजन लाल शर्मा के मार्गदर्शन में नई एम-सेण्ड पॉलिसी तैयार की गई। नई नीति में एम-सेण्ड इकाइयों को उद्योग का दर्जा देने के साथ ही राजस्थान निवेश प्रोत्साहन योजना में विशेष रियायतों दी गई है।

राज्य की नई एम-सेण्ड नीति में प्रदेश में एम-सेण्ड इकाइयांे की स्थापना और प्रदेश में बजरी के विकल्प के रुप में एम-सेण्ड के उपयोग को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया है। नई नीति में प्रदेश में एम-सेण्ड इकाइयों के संचालन में आसानी एवं उत्पादन की दृष्टि से निवेशकों के अनुकूल बनाने के साथ ही निवेशकों को रिप्स में सहायता प्रावधान और आमनागरिकों को बजरी के विकल्प के रुप में एम-सेण्ड की सहज उपलब्धता सुनिश्चित करने पर बल दिया गया है।
       
प्रमुख सचिव  रविकान्त ने बताया कि राज्य की नई एम-सेण्ड नीति में आम नागरिकों को बजरी के विकल्प के रुप में सस्ती एवं सहज उपलब्धता, नदियों से बजरी की आपूर्ति पर निर्भरता कम करते हुए पारिस्थितिकीय तंत्र में सुधार, खनन क्षेत्र के आवरबर्डन का बेहतर उपयोग, भवनों और कंक्रिट ढांचे के मलबे को रिसाईकलिंग के साथ ही एम-सेण्ड उद्योग को बढ़ावा व रोजगार के अवसर विकसित करना है। उन्होंने बताया कि नई नीति में एम-सेण्ड इकाई की स्थापना की पात्रता में रियायत देते हुए 3 साल के अनुभव व 3 करोड़ के टर्न ऑवर की बाध्यता समाप्त कर दी गई है। इसी तरह से ऑवरबर्डन पर देय रॉयल्टी को कम किया गया है

वहीं नीलामी के समय एम-सेण्ड यूनिट के लिए दो प्लाट रखने के स्थान पर 5 प्लाट आरक्षित कर आवंटित किया जाएगा। इसके साथ ही ऑवरबर्डन पर देय डीएमएफटी की राशि में छूट, एम-सेण्ड के निर्माण में प्रयुक्त ऑवरबर्डन पर देय रॉयल्टी को कम करने, सरकारी और सरकार से वित पोषित निर्माण कार्यों में बजरी की मांग के आपूर्ति में 50 प्रतिशत एम-सेण्ड के उपयोग की अनिवार्यता तय की गई है ताकि प्रदेश में बजरी के विकल्प के रुप में सरकारी निर्माण कार्यों में एम-सेण्ड के उपयोग को बढ़ावा देना है।
       
 रविकान्त ने बताया कि विभाग का जोर अब एम-सेण्ड इकाइयों की अधिक से अधिक स्थापना और सरकारी व सरकार से वित पोषित निर्माण कार्यों में बजरी के विकल्प के रुप में एम-सेण्ड का 25 प्रतिशत उपयोग सुनिश्चित करना है। उन्होंने बताया कि विभाग 
एम-सेण्ड के उत्पादन में प्रतिवर्ष 20 फीसदी बढ़ोतरी के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ेगा।

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