नई दिल्ली | विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इबोला वायरस के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए इसे 'ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी' घोषित कर दिया है। कांगो में हालात बेकाबू हो रहे हैं, जहाँ महज 20 दिनों में 200 लोगों की मौत हो चुकी है। इसके बाद भारत सरकार भी पूरी तरह अलर्ट पर है।
भारत में बढ़ी सतर्कता और एयरपोर्ट अलर्ट
इबोला के खतरे को देखते हुए भारत सरकार ने भी सतर्कता बढ़ा दी है। खास तौर पर कांगो, युगांडा और सूडान की यात्रा करने वालों को विशेष सावधानी बरतने और स्वास्थ्य की निगरानी करने की सलाह दी गई है।
सरकार ने कहा है कि इन देशों से लौटने वाले लोग अगर बुखार, कमजोरी, उल्टी, दस्त या शरीर में दर्द जैसे लक्षण महसूस करें, तो तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र को सूचित करें। एयरपोर्ट पर स्क्रीनिंग अब और तेज कर दी गई है।
वैश्विक स्तर पर उठाए गए सख्त कदम
अमेरिका, चीन, जापान और फ्रांस जैसे देशों ने भी अपनी सीमाओं पर निगरानी बढ़ा दी है। कांगो में डर का माहौल है, जहाँ सैनिटाइजर और मास्क की कीमतें कई गुना बढ़ गई हैं और अस्पताल मरीजों से भर गए हैं।
"इबोला एक अत्यंत गंभीर बीमारी है। अंतरराष्ट्रीय समन्वय और व्यक्तिगत सावधानी ही इसके वैश्विक प्रसार को रोकने का एकमात्र प्रभावी तरीका है।"
इबोला का इतिहास और जानलेवा प्रभाव
इबोला वायरस पहली बार 1976 में अफ्रीका में सामने आया था। यह बीमारी इतनी घातक है कि इससे संक्रमित होने वाले 25% से 90% मरीजों की मौत हो सकती है। फिलहाल पूरी दुनिया इस मेडिकल संकट से लड़ रही है।
जापान ने यात्रा जोखिम चेतावनी जारी की है, जबकि फ्रांस ने अस्पतालों की तैयारी मजबूत की है। इबोला का यह नया संकट वैश्विक स्वास्थ्य ढांचे के लिए एक बड़ी परीक्षा साबित हो रहा है और सभी देश सतर्क हैं।
इबोला का यह प्रकोप मानवता के लिए बड़ी चेतावनी है। भारत सरकार की मुस्तैदी और आम जनता की जागरूकता ही इस जानलेवा वायरस को फैलने से रोकने में सबसे कारगर साबित होगी। सतर्क रहें और सुरक्षित रहें।
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