नई दिल्ली | पसीना आना शरीर की एक स्वाभाविक प्रक्रिया है। विज्ञान के अनुसार, यह हमारे शरीर का 'नेचुरल एयर कंडीशनर' है जो बढ़ते तापमान को नियंत्रित करता है। लेकिन जब पसीना बिना किसी शारीरिक श्रम के आने लगे, तो यह चिंता का विषय बन जाता है। खेल और व्यायाम के दौरान पसीना आना सामान्य है, पर शांत बैठने पर भी पसीना आना असामान्य है।
क्या है हाइपरहाइड्रोसिस?
बिना मेहनत के अत्यधिक पसीना आने की स्थिति को चिकित्सा विज्ञान में हाइपरहाइड्रोसिस कहा जाता है। इसमें शरीर की पसीने वाली ग्रंथियां (Sweat Glands) जरूरत से ज्यादा सक्रिय हो जाती हैं। यदि आपकी हथेलियों, तलवों या माथे पर बिना किसी शारीरिक गतिविधि के पसीना आता है, तो यह प्राइमरी हाइपरहाइड्रोसिस हो सकता है। यह शरीर के अंदरूनी अंगों की गड़बड़ी का संकेत है।
पसीने की दुर्गंध के कारण
शुद्ध पसीने का अपना कोई रंग या गंध नहीं होती है। लेकिन जब यह त्वचा पर मौजूद बैक्टीरिया के संपर्क में आता है, तो तेज दुर्गंध पैदा होती है। इसे ब्रोमहाइड्रोसिस कहते हैं। यदि अच्छी साफ-सफाई और डियोड्रेंट के बाद भी बदबू नहीं जा रही, तो यह आपके मेटाबॉलिज्म या खराब डाइट की ओर इशारा करता है।
इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज
अगर आपको रात में सोते समय अचानक बहुत ज्यादा पसीना (Night Sweats) आता है, तो इसे नजरअंदाज न करें। अचानक ठंडा पसीना आना कार्डियक अरेस्ट का संकेत हो सकता है। तेजी से वजन कम होना और शुगर लेवल का गिरना भी पसीने के जरिए संकेत देता है। खिलाड़ियों को खेल के मैदान के बाहर आने वाले पसीने पर गौर करना चाहिए।
गंभीर बीमारियों का अलार्म
अत्यधिक पसीना हार्ट अटैक (Heart Disease) और थायराइड (Hyperthyroidism) का लक्षण हो सकता है। इसके अलावा, यह डायबिटीज और लो ब्लड शुगर की चेतावनी भी देता है। शरीर में संक्रमण (Sepsis) या किडनी और लिवर की पुरानी समस्याओं में भी पसीना बढ़ जाता है। ऐसे में समय पर डॉक्टर की सलाह लेना बेहद जरूरी हो जाता है। डिसक्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी केवल जागरूकता के लिए है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। उपचार के लिए डॉक्टर से संपर्क करें।