सिरोही | राजस्थान के सिरोही जिले से एक ऐसी खौफनाक घटना सामने आई है, जो किसी बॉलीवुड क्राइम थ्रिलर फिल्म की कहानी लगती है। यहां खुद को जयपुर ATS का अधिकारी बताकर 7-8 बदमाशों ने एक युवक को आधी रात में उसके होटल के कमरे से अगवा कर लिया।
इसके बाद पीड़ित को डरा-धमका कर पाकिस्तान बॉर्डर के पास बाड़मेर के सुनसान रेगिस्तानी इलाके में ले जाया गया, जहां उसे जान से मारने की धमकियां दी गईं और रकम की मांग की गई।
क्या है पूरा मामला? फिल्मी स्टाइल में हुआ अपहरण
यह पूरी घटना किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है। पीड़ित झालाराम, जो मंडवारिया के निवासी हैं, ने पुलिस को अपनी आपबीती सुनाई। उन्होंने बताया कि वह माउंट आबू के एक होटल में रुके हुए थे।
आधी रात को होटल के कमरे पर दस्तक
झालाराम के अनुसार, रात के करीब 3:30 बजे किसी ने उनके कमरे का दरवाजा जोर-जोर से खटखटाया। जब उन्होंने दरवाजा खोला तो बाहर 7-8 लोग खड़े थे।
उनमें से एक ने खुद को जयपुर ATS का अधिकारी विकास कुमार बताया। झालाराम को लगा कि अगर उन्होंने कुछ गलत नहीं किया है, तो पुलिस उन्हें थाने ही ले जाएगी।
लेकिन बदमाशों ने उनकी गाड़ी को पुलिस स्टेशन की तरफ ले जाने के बजाय ढूंढी पुलिया की ओर मोड़ दिया, जिससे झालाराम के मन में खौफ पैदा हो गया।
वीडियो कॉल पर रची गई खौफनाक साजिश
अपहरणकर्ता झालाराम को माधव पुलिया ले गए। वहां उन्होंने कुछ लोगों को वीडियो कॉल किया ताकि झालाराम की पहचान की पुष्टि हो सके।
वीडियो कॉल पर भूतगांव निवासी खुशवंत रावल और मणादर निवासी राजू राम रावल मौजूद थे। उन्होंने किसी पुराने पैसे के लेन-देन का जिक्र किया।
जब झालाराम ने ऐसे किसी भी लेन-देन से इनकार किया, तो फोन पर मौजूद शख्स ने अपहरणकर्ताओं को आदेश दिया।
"इसे ठिकाने लेकर जाओ"
फोन पर कहा गया, "तुम इसको ठिकाने लेकर जाओ तो पता चलेगा।" इस पूरी साजिश में सोडो की ढाणी निवासी युवराज सिंह सोडा भी शामिल था।
युवराज ने अपहरणकर्ताओं से कहा कि इसे छोड़ना मत, यह पैसे मंगवा सकता है। इसके बाद झालाराम को गाड़ी में डालकर घुमाया जाने लगा।
पाकिस्तान बॉर्डर के पास मौत का फरमान
बदमाश पीड़ित को बाड़मेर से करीब 30-35 किलोमीटर दूर पाकिस्तान बॉर्डर के पास 'परा' गांव के सुनसान धोरों (रेत के टीलों) में ले गए।
वहां उनसे जबरदस्ती कुछ कोरे कागजों पर हस्ताक्षर करवाए गए और दबाव डालकर झूठे वीडियो भी बनवाए गए, ताकि बाद में उन्हें फंसाया जा सके।
अपहरणकर्ताओं ने पहले 10 लाख रुपये, बाद में 5 लाख रुपये मांगे। जब झालाराम ने कहा कि उनके पास इतने पैसे नहीं हैं, तो खुशवंत रावल ने फोन पर एक खौफनाक फरमान सुनाया।
"पैसे की मुझे कोई जरूरत ही नहीं है, इसको मार के फेंक दो, जो मैंने तुमको पैसे कहे वो मैं दे दूंगा।"
1.5 लाख रुपये देकर बचाई जान
लगातार मिल रही जान से मारने की धमकियों से घबराकर झालाराम ने अपनी जान बचाने का एक रास्ता निकाला। उन्होंने बताया कि उनकी गाड़ी में 1.5 लाख रुपये रखे हैं।
पैसे मिलने के बाद अपहरणकर्ताओं का रवैया थोड़ा बदला। उन्होंने झालाराम को खाना खिलाया और फिर उसे एक हाईवे पर ले जाकर छोड़ दिया।
होटल प्रबंधन की भूमिका पर उठे सवाल
वहां से छूटने के बाद झालाराम सीधे माउंट आबू पुलिस स्टेशन पहुंचे और पूरी घटना की रिपोर्ट दर्ज करवाई। उन्होंने होटल से सीसीटीवी फुटेज भी निकलवाए।
पुलिस इस मामले में पूरी गंभीरता से जांच कर रही है और बाड़मेर जाकर घटनास्थल का मुआयना भी कर चुकी है। हालांकि, इस घटना ने होटल प्रबंधन की सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पुलिस का मानना है कि अगर होटल स्टाफ ने समय पर पुलिस को सूचना दी होती, तो शायद आरोपियों को होटल से बाहर निकलने से पहले ही पकड़ा जा सकता था। फिलहाल पुलिस मामले की हर कड़ी को जोड़कर आरोपियों की तलाश में जुटी है।
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