नई दिल्ली | केंद्र सरकार ने किसानों की आय बढ़ाने और सरकारी लाभों में पारदर्शिता लाने के लिए एक बड़ा निर्णय लिया है। अब देश के सभी किसानों के लिए 'फार्मर आईडी' (Farmer ID) बनवाना अनिवार्य कर दिया गया है।
15 मई 2026 है अंतिम तिथि
सरकार ने इस डिजिटल पहचान पत्र को बनवाने के लिए 15 मई 2026 की समय सीमा निर्धारित की है। यदि किसान इस तिथि तक अपना पंजीकरण नहीं कराते हैं, तो उन्हें कई महत्वपूर्ण सुविधाओं से हाथ धोना पड़ सकता है। बिना फार्मर आईडी के किसानों को बीज और उर्वरक पर मिलने वाली सब्सिडी बंद हो जाएगी। इसके साथ ही कृषि से जुड़ी अन्य सरकारी योजनाओं और पीएम किसान सम्मान निधि की किस्तों पर भी रोक लग सकती है।
क्यों जरूरी है फार्मर आईडी?
फार्मर आईडी एक प्रकार की डिजिटल पहचान प्रणाली है। इसमें किसान की भूमि का रिकॉर्ड, उगाई जाने वाली फसल और बैंक खाते की पूरी जानकारी दर्ज होती है। इसका उद्देश्य बिचौलियों को हटाकर सीधा लाभ किसानों तक पहुंचाना है। इस प्रणाली से सरकारी योजनाओं में होने वाले फर्जीवाड़े पर लगाम लगेगी। सरकार सुनिश्चित करना चाहती है कि सब्सिडी और सहायता राशि केवल उन्हीं लोगों तक पहुंचे जो वास्तव में खेती कर रहे हैं।
ग्राम पंचायतों में लगेंगे विशेष कैंप
रिपोर्ट्स के अनुसार, अभी भी एक बड़ा वर्ग इस पंजीकरण प्रक्रिया से बाहर है। इसे देखते हुए सरकार ने मिशन मोड में काम करने का निर्देश दिया है। अब हर ग्राम पंचायत स्तर पर विशेष कैंप लगाए जाएंगे। प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं कि जहां रजिस्ट्रेशन की गति धीमी है, वहां विशेष अभियान चलाया जाए। स्थानीय जनप्रतिनिधियों को भी इस प्रक्रिया में शामिल किया जा रहा है ताकि कोई भी पात्र किसान छूट न जाए।
भविष्य में मिलेंगे ये बड़े लाभ
आने वाले समय में फार्मर आईडी को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर फसल की बिक्री से जोड़ा जाएगा। इसके अलावा फसल बीमा और प्राकृतिक आपदा में मिलने वाली राहत राशि भी इसी के माध्यम से ट्रांसफर की जाएगी। खाद वितरण प्रणाली में होने वाली कालाबाजारी को रोकने के लिए भी इस आईडी का उपयोग किया जा सकता है। डिजिटल रिकॉर्ड होने से बैंक से कृषि ऋण लेना भी पहले से कहीं अधिक आसान और तेज हो जाएगा। यह डिजिटल कदम भारतीय कृषि व्यवस्था को आधुनिक और पारदर्शी बनाने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा। किसानों को सलाह दी जाती है कि वे समय रहते अपना पंजीकरण पूरा कर लें।