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  <title>thinQ360 — ताज़ा खबरें</title>
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  <description>thinQ360 — राजस्थान और भारत की ताज़ा खबरें, राजनीति, अपराध, खेल और मनोरंजन</description>
  <language>hi</language>
  <lastBuildDate>Wed, 23 Sep 2026 16:54:34 +0530</lastBuildDate>
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    <title>thinQ360 — ताज़ा खबरें</title>
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    <title>डूंगरपुर चुनाव में जीत के बाद वीरेंद्र सिंह चौहान का स्वागत</title>
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    <pubDate>Wed, 23 Sep 2026 16:54:34 +0530</pubDate>
    <dc:creator>गणपत सिंह मांडोली</dc:creator>
    <category>राजस्थान</category>
    <description><![CDATA[डूंगरपुर जिला संगठन प्रभारी वीरेंद्र सिंह चौहान के कुशल प्रबंधन से भाजपा को नगर निकाय चुनावों में शत-प्रतिशत सफलता मिली। सिरोही लौटने पर कार्यकर्ताओं ने उनका अभिनंदन किया।]]></description>
    <content:encoded><![CDATA[<p><strong>सिरोही | </strong> भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश कार्यसमिति सदस्य वीरेंद्र सिंह चौहान का सिरोही लौटने पर भव्य स्वागत किया गया। डूंगरपुर नगर निकाय चुनाव में मिली ऐतिहासिक सफलता के बाद कार्यकर्ताओं में भारी उत्साह देखा गया।</p>
<h2>डूंगरपुर में भाजपा की शत-प्रतिशत सफलता</h2>
<p>वीरेंद्र सिंह चौहान को चुनाव के दौरान डूंगरपुर जिला संगठन प्रभारी का महत्वपूर्ण दायित्व सौंपा गया था। उन्होंने लगातार 22 दिनों तक क्षेत्र में रहकर संगठन और चुनाव प्रबंधन को मजबूती प्रदान की।</p>
<p>इस समर्पण का परिणाम यह रहा कि डूंगरपुर नगर परिषद और सागवाड़ा नगर पालिका दोनों ही स्थानों पर भाजपा ने पूर्ण विजय प्राप्त की। कार्यकर्ताओं ने इसे प्रभावी प्रबंधन का परिणाम बताया।</p>
<h2>कार्यकर्ताओं ने किया आत्मीय अभिनंदन</h2>
<p>जीत के बाद सिरोही पहुंचने पर भाजपा कार्यकर्ताओं ने चौहान के निज निवास पर पहुंचकर उनका स्वागत किया। कार्यकर्ताओं ने इसे संगठन की सामूहिक मेहनत और चौहान के नेतृत्व का फल बताया।</p>
<p>सिरोही के कार्यकर्ताओं ने कहा कि दायित्व मिलने के बाद उसे केवल पद के रूप में नहीं, बल्कि संगठन के प्रति जिम्मेदारी के रूप में निभाना ही भाजपा की कार्यसंस्कृति है।</p>
<h3>कुशल प्रबंधन और सक्रियता की सराहना</h3>
<p>चौहान ने चुनावी अवधि में संगठनात्मक समन्वय और कार्यकर्ताओं के साथ सतत संवाद बनाए रखा। उन्होंने प्रत्येक राजनीतिक घटनाक्रम पर सक्रिय नजर रखते हुए पार्टी को एकजुट रखा।</p>
<p>चौहान द्वारा 22 दिनों तक पूर्ण समय देकर डूंगरपुर में कार्य करना उनकी संगठनात्मक प्रतिबद्धता का एक बड़ा उदाहरण पेश करता है। इससे स्थानीय कार्यकर्ताओं में उत्साह है।</p>
<h2>स्वागत समारोह में उपस्थित प्रमुख कार्यकर्ता</h2>
<p>चौहान के सिरोही आगमन पर बड़ी संख्या में भाजपा पदाधिकारियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। स्वागत करने वालों में मुख्य रूप से निम्नलिखित कार्यकर्ता शामिल थे:</p>
<ul>
<li>अरुण ओझा (पूर्व जिला उपाध्यक्ष)</li>
<li>हेमंत पुरोहित (पूर्व युवा मोर्चा जिलाध्यक्ष)</li>
<li>लोकेश खंडेलवाल (पूर्व मंडल अध्यक्ष)</li>
<li>महिपाल चरण और महेंद्र माली</li>
<li>सुरेश सगरवंशी (पूर्व उपसभापति)</li>
<li>रोहित खत्री (मीडिया प्रभारी)</li>
</ul>
<h3>अन्य गणमान्य जनों की उपस्थिति</h3>
<p>इसके अलावा पार्षद प्रवीण राठौड़, सुनील गुप्ता, माणक सोनी, अजय भट्ट, शैतान सिंह परमार, अमृत सुथार, ललित प्रजापत और विक्रम सिंह केराल भी मौजूद रहे।</p>
<p>रणछोड़ पुरोहित, अशोक पुरोहित, रमजान खान, गोविंद सैनी एवं कांतिलाल सेन सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं ने चौहान का आत्मीय अभिनंदन किया और जीत की बधाई दी।</p>
<p style="display: flex; align-items: center; gap: 4px; font-style: italic; font-size: 0.65em; color: #94a3b8; font-weight: normal; margin-top: 20px;">*Edit with Google AI Studio</p>]]></content:encoded>
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  </item>
  <item>
    <title>एशियन गेम्स में भारत का दबदबा, श्रीलंका को 16-1 से रौंदा</title>
    <link>https://thinq360.com/india-vs-sri-lanka-asian-games-hockey-result</link>
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    <pubDate>Wed, 23 Sep 2026 12:44:55 +0530</pubDate>
    <dc:creator>बलजीत सिंह शेखावत</dc:creator>
    <category>खेल</category>
    <description><![CDATA[भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने एशियन गेम्स 2026 के पूल-ए मुकाबले में श्रीलंका को 16-1 के विशाल अंतर से हरा दिया है। इस जीत के साथ भारत अंक तालिका में शीर्ष पर पहुंच गया है।]]></description>
    <content:encoded><![CDATA[<p><strong>काकामिगाहारा | </strong> एशियन गेम्स 2026 में भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने अपने विजय अभियान को जारी रखते हुए श्रीलंका के खिलाफ ऐतिहासिक जीत दर्ज की है। पूल-ए के इस महत्वपूर्ण मुकाबले में भारत ने श्रीलंका को 16-1 के विशाल अंतर से पराजित किया।</p>
<h2>भारत का दबदबा और पूल-ए में शीर्ष स्थान</h2>
<p>काकामिगाहारा के गिफू प्रीफेक्चरल ग्रीन स्टेडियम में खेले गए इस मैच में भारतीय खिलाड़ी शुरू से ही हावी रहे। इस बड़ी जीत के साथ भारतीय टीम अब पूल-ए की अंक तालिका में पहले स्थान पर पहुंच गई है।</p>
<p>भारतीय टीम ने इस शानदार प्रदर्शन की बदौलत दक्षिण कोरिया और जापान जैसी मजबूत टीमों को पीछे छोड़ दिया है। टीम के इस आक्रामक खेल ने आगामी मैचों के लिए प्रतिद्वंद्वियों को कड़ी चेतावनी दी है।</p>
<h3>जुगराज सिंह का शानदार प्रदर्शन</h3>
<p>मैच के स्टार खिलाड़ी जुगराज सिंह रहे, जिन्होंने श्रीलंका के डिफेंस को पूरी तरह ध्वस्त करते हुए सर्वाधिक 4 गोल दागे। उनके अलावा अभिषेक और दिलप्रीत सिंह ने भी बेहतरीन तालमेल दिखाते हुए 3-3 गोल अपने नाम किए।</p>
<h2>पहले हाफ में गोलों की झड़ी</h2>
<p>भारतीय टीम ने पहले क्वार्टर की शुरुआत से ही आक्रामक रुख अपनाया और श्रीलंका पर दबाव बना दिया। मनदीप सिंह ने खेल के 5वें मिनट में ही भारत का पहला गोल दागकर टीम को बढ़त दिला दी थी।</p>
<h3>पहला क्वार्टर: 4-0 की मजबूत बढ़त</h3>
<ul>
<li>5वें मिनट में मनदीप सिंह ने भारत का खाता खोला।</li>
<li>10वें मिनट में जुगराज सिंह ने स्कोर 2-0 कर दिया।</li>
<li>11वें मिनट में अभिषेक ने तीसरा गोल दागा।</li>
<li>15वें मिनट में कप्तान हरमनप्रीत सिंह ने स्कोर 4-0 पहुंचाया।</li>
</ul>
<h3>दूसरा क्वार्टर: भारत की बढ़त हुई 8-0</h3>
<p>दूसरे क्वार्टर में भी श्रीलंका की टीम भारतीय फॉरवर्ड लाइन के सामने बेबस नजर आई। 17वें मिनट में अभिषेक ने अपना दूसरा गोल किया, जबकि 22वें मिनट में जुगराज ने भी अपना दूसरा गोल पूरा किया।</p>
<p>हाफ टाइम की सीटी बजने से ठीक पहले सखजीत सिंह ने 29वें मिनट में गोल किया। इसके तुरंत बाद 30वें मिनट में दिलप्रीत सिंह ने गोल दागकर भारत की बढ़त को 8-0 तक पहुंचा दिया।</p>
<h2>तीसरे क्वार्टर में भारत का आक्रमण</h2>
<p>तीसरे क्वार्टर में भारतीय टीम ने पांच और गोल जोड़कर श्रीलंका की वापसी की सभी संभावनाओं को समाप्त कर दिया। मनप्रीत ने 31वें मिनट में गोल कर स्कोर 9-0 किया।</p>
<h3>विवेक सागर और दिलप्रीत का योगदान</h3>
<p>विवेक सागर प्रसाद ने 36वें मिनट में अपनी तकनीक का प्रदर्शन करते हुए गोल किया। इसके बाद दिलप्रीत सिंह ने 38वें मिनट में मैच का अपना दूसरा गोल दागा।</p>
<h3>जुगराज सिंह की शानदार हैट्रिक</h3>
<p>मैच के 42वें मिनट में जुगराज सिंह ने एक और गोल दागकर अपनी हैट्रिक पूरी की। कप्तान हरमनप्रीत सिंह ने तीसरे क्वार्टर के अंतिम मिनटों में अपना दूसरा गोल किया, जिससे स्कोर 13-0 हो गया।</p>
<h2>चौथा क्वार्टर: श्रीलंका का खाता खुला</h2>
<p>आखिरी क्वार्टर में श्रीलंका ने कुछ जवाबी हमले करने की कोशिश की। हालांकि, 49वें मिनट में अभिषेक ने अपनी हैट्रिक पूरी करते हुए भारत को 14-0 की बढ़त दिला दी।</p>
<h3>श्रीलंका का एकमात्र गोल</h3>
<p>श्रीलंका के लिए मैच का एकमात्र गोल 50वें मिनट में आया। सुरेश रत्नायके ने भारतीय डिफेंस को छकाते हुए अपनी टीम का खाता खोला।</p>
<h3>मैच का समापन और अंतिम स्कोर</h3>
<p>इसके बाद जुगराज सिंह ने 53वें मिनट में मैच का अपना चौथा गोल किया। अंत में दिलप्रीत सिंह ने 55वें मिनट में अपना तीसरा गोल कर भारत की जीत 16-1 के स्कोर पर सुनिश्चित कर दी।</p>
<p style="display: flex; align-items: center; gap: 4px; font-style: italic; font-size: 0.65em; color: #94a3b8; font-weight: normal; margin-top: 20px;">*Edit with Google AI Studio</p>]]></content:encoded>
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  </item>
  <item>
    <title>राजस्थान पंचायत चुनाव: आरक्षण लॉटरी शुरू, जानें वार्डों का हाल</title>
    <link>https://thinq360.com/rajasthan-panchayat-election-reservation-lottery-2026-results</link>
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    <pubDate>Wed, 23 Sep 2026 12:41:44 +0530</pubDate>
    <dc:creator>बलजीत सिंह शेखावत</dc:creator>
    <category>राजनीति</category>
    <description><![CDATA[राजस्थान में पंचायती राज चुनावों के लिए आरक्षण लॉटरी प्रक्रिया शुरू हो गई है। जयपुर और नागौर सहित विभिन्न जिलों में जिला परिषद और पंचायत समिति वार्डों का आरक्षण तय किया जा रहा है।]]></description>
    <content:encoded><![CDATA[<p><strong>जयपुर | </strong> राजस्थान में पंचायती राज चुनाव के लिए आरक्षण की लॉटरी प्रक्रिया आज बुधवार से शुरू हो चुकी है। शहरी निकायों में चुनाव संपन्न होने के बाद अब पंचायती राज चुनावों को लेकर प्रशासनिक और राजनीतिक सरगर्मियां चरम पर हैं।</p>
<p>ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग के शासन सचिव डॉ. जोगाराम द्वारा जारी नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, प्रदेश की पंचायती राज संस्थाओं में विभिन्न पदों के आरक्षण और श्रेणीवार आवंटन के लिए यह लॉटरी प्रक्रिया आज और कल आयोजित की जा रही है।</p>
<h2>पंचायती राज चुनाव 2026 का लक्ष्य</h2>
<p>राज्य सरकार ने आगामी 15 नवम्बर 2026 तक पंचायती राज चुनावों की पूरी प्रक्रिया को हर हाल में संपन्न कराने का कड़ा लक्ष्य निर्धारित किया है।</p>
<p>इस दो दिवसीय लॉटरी प्रक्रिया के शुरू होते ही ग्रामीण राजस्थान की राजनीति का परिदृश्य पूरी तरह बदल रहा है और हजारों भावी उम्मीदवारों की चुनावी किस्मत की तस्वीर साफ होने लगी है।</p>
<h2>जयपुर जिला परिषद आरक्षण का विवरण</h2>
<p>जयपुर जिले में जिला कलक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी संदेश नायक की देखरेख में जिला परिषद सदस्यों, पंचायत समितियों के सदस्यों और प्रधान पदों के आरक्षण की लॉटरी निकाली जा रही है।</p>
<h3>SC और ST वर्ग के लिए आरक्षित वार्ड</h3>
<p>जयपुर जिला परिषद के 57 वार्डों में से 10 वार्ड अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित किए गए हैं। इनमें वार्ड संख्या 34, 36, 42, 32, 23, 40, 29, 24, 27 और 13 शामिल हैं।</p>
<p>SC वर्ग के लिए आरक्षित वार्डों में 50 प्रतिशत महिलाओं के लिए रिजर्व हैं। SC महिला के लिए वार्ड 42, 36, 23, 32 और 27 आरक्षित किए गए हैं।</p>
<p>अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग के लिए सर्वाधिक आबादी वाले 8 वार्ड (41, 44, 38, 37, 50, 46, 49 और 47) आरक्षित किए गए हैं। इनमें से चार वार्ड (47, 41, 46, 44) ST महिला के लिए रिजर्व हैं।</p>
<h3>OBC और सामान्य वर्ग का आरक्षण</h3>
<p>OBC वर्ग के लिए लॉटरी के माध्यम से 10 वार्ड (01, 22, 10, 21, 57, 51, 45, 08, 43, 56) आरक्षित किए गए हैं। OBC महिला के लिए 43, 08, 01, 51 और वार्ड 10 आरक्षित हैं।</p>
<p>शेष 29 वार्डों में से 14 वार्ड सामान्य महिला के लिए आरक्षित किए गए हैं। इनमें वार्ड 26, 9, 31, 25, 11, 02, 19, 53, 05, 15, 39, 06, 20 और 17 शामिल हैं। शेष 15 वार्ड सामान्य पुरुष के लिए हैं।</p>
<h2>नागौर जिला परिषद वार्डवार आरक्षण स्थिति</h2>
<p>नागौर में जिला निर्वाचन अधिकारी देवेन्द्र कुमार और अतिरिक्त जिला कलेक्टर रामरतन सौंकरिया की मौजूदगी में आरक्षण लॉटरी प्रक्रिया संपन्न हुई।</p>
<h3>नागौर के प्रमुख वार्डों की स्थिति</h3>
<ul>
<li>वार्ड 1: महिला, वार्ड 2: SC महिला, वार्ड 3: अनारक्षित</li>
<li>वार्ड 6: SC, वार्ड 7: SC, वार्ड 12: SC, वार्ड 26: SC, वार्ड 29: SC, वार्ड 31: SC, वार्ड 37: SC</li>
<li>वार्ड 16: ओबीसी महिला, वार्ड 18: ओबीसी महिला, वार्ड 32: ओबीसी महिला</li>
<li>वार्ड 20: ओबीसी, वार्ड 25: ओबीसी, वार्ड 33: ओबीसी, वार्ड 34: ओबीसी</li>
<li>वार्ड 27: सामान्य महिला, वार्ड 35: सामान्य महिला</li>
</ul>
<h2>आरक्षण लॉटरी का पूरा शेड्यूल</h2>
<p>प्रशासनिक व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए राज्य निर्वाचन आयोग ने इस प्रक्रिया को दो अलग-अलग स्तरों पर विभाजित किया है।</p>
<h3>जिला और उपखंड स्तर पर आयोजन</h3>
<p>23 सितम्बर 2026 को जिला मुख्यालय स्तर पर जिला परिषद सदस्यों, पंचायत समिति सदस्यों और प्रधान के पदों की आरक्षण लॉटरी निकाली जा रही है।</p>
<p>24 सितम्बर 2026 को उपखंड स्तर पर सरपंच और वार्ड पंच के पदों का आरक्षण संबंधित उपखंड अधिकारी (SDM) मुख्यालयों पर तय किया जाएगा।</p>
<p style="display: flex; align-items: center; gap: 4px; font-style: italic; font-size: 0.65em; color: #94a3b8; font-weight: normal; margin-top: 20px;">*Edit with Google AI Studio</p>]]></content:encoded>
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  </item>
  <item>
    <title>जालोर की माहेश्वरी चौहान ने बढ़ाया भारत का मान, एशियन गेम्स में महिला स्कीट टीम ने जीता कांस्य</title>
    <link>https://thinq360.com/jalore-maheshwari-chauhan-india-womens-skeet-team-bronze-asian-games-2026</link>
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    <pubDate>Wed, 23 Sep 2026 11:08:48 +0530</pubDate>
    <dc:creator>Pradeep Beedawat</dc:creator>
    <category>राजस्थान</category>
    <description><![CDATA[जालोर के सियाणा की माहेश्वरी चौहान, राइजा ढिल्लों और परिनाज धालीवाल की भारतीय महिला स्कीट टीम ने आइची-नगोया एशियन गेम्स 2026 में 331 अंकों के साथ कांस्य पदक जीता। चीन ने 357 अंकों के साथ स्वर्ण और कजाकिस्तान ने 336 अंकों के साथ रजत पदक हासिल किया।]]></description>
    <content:encoded><![CDATA[<p><strong>स्पोर्ट्स डेस्क | 23 सितंबर 2026&nbsp;</strong></p>
<p>राजस्थान के जालोर जिले के सियाणा की अंतरराष्ट्रीय निशानेबाज माहेश्वरी चौहान ने एक बार फिर देश और प्रदेश का मान बढ़ाया है। माहेश्वरी चौहान, राइजा ढिल्लों और परिनाज धालीवाल की भारतीय टीम ने आइची-नगोया एशियन गेम्स 2026 की महिला स्कीट टीम स्पर्धा में कांस्य पदक अपने नाम किया।</p>
<p>भारतीय तिकड़ी ने तीन दिनों तक चले क्वालिफिकेशन मुकाबलों में कुल 331 अंक अर्जित कर तीसरा स्थान हासिल किया। चीन ने 357 अंकों के साथ स्वर्ण पदक जीता, जबकि कजाकिस्तान ने 336 अंक बनाकर रजत पदक प्राप्त किया।&nbsp;</p>
<p>साथ ही&nbsp;जयपुर के अनंतजीत सिंह नरुका ने मराज अहमद खान और भवतेघ सिंह गिल के साथ पुरुष स्कीट टीम स्पर्धा में भारत को कांस्य पदक दिलाया। इससे पहले वे 2023 एशियन गेम्स में व्यक्तिगत रजत और पेरिस ओलंपिक 2024 में मिश्रित स्कीट स्पर्धा में चौथा स्थान हासिल कर चुके हैं।</p>
<h2>राइजा और परिनाज के 111-111, माहेश्वरी ने बनाए 109 अंक</h2>
<p>भारतीय टीम के लिए राइजा ढिल्लों और परिनाज धालीवाल ने 125 में से 111-111 अंक हासिल किए। माहेश्वरी चौहान ने 109 अंक जोड़कर भारत का कुल स्कोर 331 तक पहुंचाया। तीनों खिलाड़ियों के संयुक्त प्रदर्शन से भारत महिला स्कीट टीम स्पर्धा के पदक मंच तक पहुंचने में सफल रहा।</p>
<p>इस कांस्य पदक के साथ भारतीय निशानेबाजों ने एशियन गेम्स में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई। पदक जीतने की खबर सामने आने के बाद राजस्थान और विशेष रूप से जालोर जिले के खेलप्रेमियों में खुशी का माहौल है।</p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p dir="ltr" lang="hi">जालोर की बेटी माहेश्वरी चौहान ने बढ़ाया देश का मान!<br><br>सियाणा की माहेश्वरी ने राइजा ढिल्लों और परिनाज धालीवाल के साथ एशियन गेम्स 2026 की महिला स्कीट टीम स्पर्धा में भारत को कांस्य पदक दिलाया। भारतीय तिकड़ी ने 331 अंक हासिल कर तीसरा स्थान प्राप्त किया। चीन ने स्वर्ण और कजाकिस्तान ने&hellip; <a href="https://t.co/Kylc9Ge6DK">pic.twitter.com/Kylc9Ge6DK</a></p>
&mdash; thinQ360 (@thinQ360) <a href="https://x.com/thinQ360/status/2102637282385854470?ref_src=twsrc%5Etfw">September 23, 2026</a></blockquote>
<h2>सियाणा से एशियन गेम्स के पदक मंच तक</h2>
<p>4 जुलाई 1996 को जन्मीं माहेश्वरी चौहान जालोर जिले के सियाणा की रहने वाली हैं। कम उम्र में ही उन्होंने स्कीट शूटिंग की ओर कदम बढ़ाया। परिवार में निशानेबाजी के प्रति रुचि और विशेष रूप से उनके दादाजी गणपत सिंह सियाणा से मिले प्रोत्साहन ने उनके खेल जीवन की नींव मजबूत की।</p>
<p>माहेश्वरी ने किशोरावस्था में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व करना शुरू कर दिया था। इसके बाद उन्होंने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में निरंतर बेहतर प्रदर्शन करते हुए भारतीय महिला स्कीट शूटिंग में अपनी विशेष पहचान बनाई।</p>
<h2>पेरिस ओलंपिक में एक अंक से चूका था पदक</h2>
<p>पेरिस ओलंपिक 2024 में माहेश्वरी चौहान ने अनंतजीत सिंह नरूका के साथ मिश्रित टीम स्कीट स्पर्धा में भारत का प्रतिनिधित्व किया था। भारतीय जोड़ी कांस्य पदक मुकाबले में चीन से 43-44 के बेहद करीबी अंतर से हार गई थी। इस कारण भारत स्कीट शूटिंग के ऐतिहासिक ओलंपिक पदक से केवल एक अंक दूर रह गया था।</p>
<p>ओलंपिक में चौथे स्थान पर रहने की निराशा के बाद भी माहेश्वरी ने अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए अपनी तैयारी जारी रखी। एशियन गेम्स का कांस्य पदक उनकी निरंतर मेहनत और उच्च स्तर पर बने रहने की क्षमता का महत्वपूर्ण परिणाम है।</p>
<p>&nbsp;</p>
<h2>एशियन चैंपियनशिप में भी जीत चुकी हैं पदक</h2>
<p>माहेश्वरी चौहान ने वर्ष 2017 में अस्ताना में आयोजित एशियन शॉटगन चैंपियनशिप की महिला स्कीट स्पर्धा में कांस्य पदक जीतकर पहचान बनाई थी। उन्होंने वर्ष 2024 की एशियन चैंपियनशिप में भी कांस्य पदक हासिल किया।</p>
<p>राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में लगातार प्रदर्शन के कारण माहेश्वरी भारत की प्रमुख महिला स्कीट निशानेबाजों में शामिल हैं। उनका लक्ष्य स्कीट शूटिंग में भारत को ओलंपिक और विश्व चैंपियनशिप का पदक दिलाना है।</p>
<h2>राइजा ढिल्लों का मजबूत प्रदर्शन</h2>
<p>चंडीगढ़ की राइजा ढिल्लों भारतीय महिला स्कीट शूटिंग की सबसे प्रतिभाशाली युवा खिलाड़ियों में गिनी जाती हैं। उन्होंने वर्ष 2024 की एशियन शॉटगन चैंपियनशिप में शानदार प्रदर्शन करते हुए भारत के लिए पेरिस ओलंपिक का कोटा हासिल किया था।</p>
<p>राइजा ने जूनियर विश्व चैंपियनशिप, एशियन चैंपियनशिप और आईएसएसएफ जूनियर विश्व कप की विभिन्न स्पर्धाओं में भारत के लिए कई पदक जीते हैं। एशियन गेम्स की टीम स्पर्धा में उनके 111 अंक भारत को कांस्य पदक दिलाने में महत्वपूर्ण रहे।</p>
<h2>परिनाज ने टीम को दी मजबूती</h2>
<p>पटियाला की परिनाज धालीवाल ने वर्ष 2015 में निशानेबाजी शुरू की थी। शुरुआती दौर में उन्होंने ट्रैप स्पर्धा में हाथ आजमाया, लेकिन बाद में स्कीट को अपनी मुख्य स्पर्धा के रूप में चुना।</p>
<p>परिनाज ने आईएसएसएफ विश्व कप, जूनियर विश्व कप, विश्व चैंपियनशिप और एशियन गेम्स में भारत का प्रतिनिधित्व किया है। उन्होंने वर्ष 2021 के नई दिल्ली आईएसएसएफ विश्व कप में महिला स्कीट टीम स्पर्धा का रजत और वर्ष 2022 के सुहल जूनियर विश्व कप में टीम कांस्य पदक जीता था। एशियन गेम्स में बनाए गए उनके 111 अंक भारत के लिए निर्णायक साबित हुए।</p>
<h2>जालोर और राजस्थान के लिए गौरव</h2>
<p>सियाणा जैसे ग्रामीण क्षेत्र से निकलकर ओलंपिक और एशियन गेम्स तक पहुंचीं माहेश्वरी चौहान की उपलब्धि जालोर और राजस्थान के उभरते खिलाड़ियों के लिए प्रेरणादायक है। अंतरराष्ट्रीय पदक ने एक बार फिर साबित किया है कि उचित प्रशिक्षण, पारिवारिक सहयोग और निरंतर मेहनत के जरिए ग्रामीण क्षेत्र की प्रतिभाएं विश्व स्तर पर अपनी पहचान बना सकती हैं।</p>
<p>अब माहेश्वरी चौहान की निगाहें आगामी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं और लॉस एंजिल्स ओलंपिक 2028 पर रहेंगी। एशियन गेम्स का यह कांस्य उनकी उस लंबी यात्रा में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि है।</p>]]></content:encoded>
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  </item>
  <item>
    <title>बीकानेर में बदला सियासी गणित: पंकज गहलोत दो वोट से विजयी</title>
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    <pubDate>Tue, 22 Sep 2026 19:15:02 +0530</pubDate>
    <dc:creator>महेन्द्रसिंह शेखावत</dc:creator>
    <category>राजनीति</category>
    <description><![CDATA[बीकानेर में कांग्रेस के अनिल कल्ला के महापौर बनने के अगले दिन भाजपा के पंकज गहलोत ने उपमहापौर चुनाव जीत लिया। पंकज गहलोत को 40 और कांग्रेस प्रत्याशी नसीम बानो को 38 मत मिले। इस परिणाम के बाद नगर निगम में महापौर कांग्रेस और उपमहापौर भाजपा से होगा।]]></description>
    <content:encoded><![CDATA[<p><strong>बीकानेर, 22 सितंबर 2026 |</strong> नगर निगम के महापौर चुनाव में कांग्रेस के अनिल कल्ला की जीत के अगले ही दिन उपमहापौर चुनाव ने बीकानेर की राजनीति का समीकरण बदल दिया। भाजपा प्रत्याशी पंकज गहलोत ने कांग्रेस की नसीम बानो को दो मतों से हराकर उपमहापौर पद अपने नाम कर लिया। गहलोत को 40 मत मिले, जबकि नसीम बानो को 38 पार्षदों का समर्थन प्राप्त हुआ। एक मत नोटा के पक्ष में गया और एक मत निरस्त घोषित किया गया।</p>
<p>इस परिणाम के बाद बीकानेर नगर निगम में एक असामान्य राजनीतिक स्थिति बन गई है। महापौर पद पर कांग्रेस के अनिल कल्ला हैं, जबकि उपमहापौर पद भाजपा के पंकज गहलोत के पास रहेगा। एक दिन के अंतराल में आए दोनों चुनाव परिणामों ने स्थानीय राजनीतिक प्रबंधन, पार्षदों की एकजुटता और अंदरूनी समीकरणों को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है।</p>
<h2>कल जो नहीं हुआ, आज कैसे हो गया?</h2>
<p>उपमहापौर चुनाव का परिणाम सबसे बड़ा सवाल यही खड़ा करता है कि महापौर चुनाव में कांग्रेस के पक्ष में दिखाई दिया व्यापक समर्थन अगले दिन उसी रूप में क्यों कायम नहीं रहा। महापौर चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी अनिल कल्ला ने 50 मत प्राप्त कर भाजपा प्रत्याशी को हराया था, लेकिन उपमहापौर चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी नसीम बानो 38 मतों पर रुक गईं।</p>
<p>भाजपा के पंकज गहलोत को 40 मत मिलने का अर्थ है कि उन्हें भाजपा के निर्वाचित पार्षदों की संख्या से कहीं अधिक समर्थन प्राप्त हुआ। हालांकि मतदान गोपनीय था, इसलिए यह आधिकारिक रूप से नहीं बताया जा सकता कि किस दल या समूह के किन पार्षदों ने उनके पक्ष में मतदान किया।</p>
<h2>80 पार्षदों में 78 मत प्रत्याशियों को मिले</h2>
<p>बीकानेर नगर निगम में कुल 80 निर्वाचित पार्षद हैं। उपमहापौर चुनाव में पंकज गहलोत और नसीम बानो को मिलाकर 78 मत प्राप्त हुए। शेष दो मतों में से एक नोटा के पक्ष में गया, जबकि दूसरा मत निरस्त हो गया।</p>
<p>नगर निगम चुनाव में कांग्रेस के 42, भाजपा के 27, निर्दलीय 10 और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी का एक पार्षद निर्वाचित हुआ था। इस संख्या के अनुसार कांग्रेस स्पष्ट बहुमत की स्थिति में थी। इसके बावजूद उपमहापौर चुनाव में उसकी अधिकृत प्रत्याशी को 38 मत मिलना पार्टी के राजनीतिक प्रबंधन और पार्षदों की एकजुटता पर सवाल खड़े करता है।</p>
<h2>भाजपा को अपने संख्या बल से 13 मत अधिक</h2>
<p>भाजपा के पास 27 निर्वाचित पार्षद हैं, जबकि उसके प्रत्याशी पंकज गहलोत को 40 मत मिले। इस हिसाब से उन्हें अपने दल के संख्या बल से 13 मत अधिक प्राप्त हुए। ये अतिरिक्त मत निर्दलीय, अन्य दल अथवा कांग्रेस खेमे में से कहां से आए, इसका कोई आधिकारिक विवरण उपलब्ध नहीं है।</p>
<p>गोपनीय मतदान के कारण किसी पार्षद या राजनीतिक समूह पर क्रॉस वोटिंग का निश्चित आरोप नहीं लगाया जा सकता। फिर भी चुनावी आंकड़े यह संकेत जरूर देते हैं कि उपमहापौर चुनाव में भाजपा अपने परंपरागत संख्या बल से बाहर समर्थन जुटाने में सफल रही।</p>
<h2>कांग्रेस के सामने राजनीतिक प्रबंधन का सवाल</h2>
<p>कांग्रेस के लिए यह परिणाम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि पार्टी के पास सदन में 42 पार्षद हैं। इसके बावजूद उसकी प्रत्याशी को 38 मत ही मिले। चुनाव से पहले उपमहापौर पद के लिए कांग्रेस में कई नामों की चर्चा थी। अंततः नसीम बानो को अधिकृत प्रत्याशी बनाया गया और अन्य दावेदारों के नाम वापस होने के बाद मुकाबला सीधा रह गया था।</p>
<p>मतदान के बाद सामने आए आंकड़ों ने पार्टी के भीतर संभावित असंतोष, स्थानीय गुटों और उम्मीदवार चयन को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि कांग्रेस संगठन अथवा किसी पार्षद की आधिकारिक प्रतिक्रिया के बिना इन कारणों पर निश्चित निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी।</p>
<h2>लॉबी और स्थानीय समीकरणों की चर्चा</h2>
<p>महापौर और उपमहापौर चुनाव के अलग-अलग परिणामों के बाद स्थानीय राजनीति में लॉबी, गुटबाजी और पार्षदों के व्यक्तिगत संबंधों की चर्चा शुरू हो गई है। नगर निगम की राजनीति में निर्दलीय पार्षदों और स्थानीय समूहों की भूमिका भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।</p>
<p>महापौर चुनाव में अनिल कल्ला को कांग्रेस के मूल संख्या बल से अधिक वोट मिले थे। इसके ठीक अगले दिन भाजपा प्रत्याशी को अपने दल के संख्या बल से 13 अधिक मत मिलना बताता है कि दोनों चुनावों में पार्षदों के समर्थन का स्वरूप अलग रहा। इसके पीछे वास्तविक कारण राजनीतिक दलों की समीक्षा और पार्षदों की सार्वजनिक प्रतिक्रियाओं के बाद ही स्पष्ट हो सकेंगे।</p>
<h2>महापौर कांग्रेस का, उपमहापौर भाजपा का</h2>
<p>इस परिणाम के साथ बीकानेर नगर निगम में विभाजित राजनीतिक नेतृत्व की स्थिति बन गई है। महापौर अनिल कल्ला कांग्रेस से हैं और उपमहापौर पंकज गहलोत भाजपा का प्रतिनिधित्व करेंगे।</p>
<p>नगर निगम की साधारण सभाओं, समितियों, विकास प्रस्तावों और प्रशासनिक निर्णयों के दौरान दोनों पदाधिकारियों तथा दलों के बीच समन्वय महत्वपूर्ण रहेगा। राजनीतिक मतभेद बढ़ने पर निर्णय प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है, जबकि सकारात्मक तालमेल शहर के विकास कार्यों को आगे बढ़ाने में सहायक हो सकता है।</p>
<h2>कल कांग्रेस में खुशी, आज भाजपा में उत्सव</h2>
<p>महापौर चुनाव में जीत के बाद कांग्रेस खेमे में उत्साह था। अब उपमहापौर पद हासिल करने के बाद भाजपा कार्यकर्ताओं और समर्थकों में खुशी का माहौल है। लगातार दो दिनों में आए अलग-अलग परिणामों ने यह स्पष्ट कर दिया कि बीकानेर नगर निगम की राजनीति को केवल 42 बनाम 27 के संख्या बल से नहीं समझा जा सकता।</p>
<p>निर्दलीय पार्षदों, आरएलपी के एक सदस्य, स्थानीय राजनीतिक संबंधों और प्रत्येक पद के लिए अलग चुनावी रणनीति ने परिणामों को प्रभावित किया है। अब कांग्रेस के सामने अपने पार्षदों और समर्थक समूहों की समीक्षा की चुनौती है, जबकि भाजपा इस जीत को नगर निगम में अपनी राजनीतिक भूमिका मजबूत करने के अवसर के रूप में देखेगी।</p>
<h2>नतीजों ने छोड़े कई सवाल</h2>
<p>फिलहाल तथ्य यह है कि बीकानेर को कांग्रेस का महापौर और भाजपा का उपमहापौर मिला है। किस पार्षद ने किस प्रत्याशी को मत दिया, यह गोपनीय मतदान के कारण आधिकारिक रूप से सामने नहीं आ सकता।</p>
<p>लेकिन महापौर चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी को मिले 50 मत और अगले दिन उपमहापौर चुनाव में भाजपा प्रत्याशी को मिले 40 मत बीकानेर की राजनीति के भीतर मौजूद बदलते समीकरणों की ओर संकेत करते हैं। इन परिणामों की राजनीतिक समीक्षा आने वाले दिनों में कांग्रेस और भाजपा दोनों के लिए महत्वपूर्ण रहेगी।</p>]]></content:encoded>
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  </item>
  <item>
    <title>लॉरेंस-आरजू गैंग के दो इनामी शार्प शूटर जोधपुर में गिरफ्तार, सिरोही में भी रुके थे, दोनों पर 5-5 लाख का इनाम</title>
    <link>https://thinq360.com/jodhpur-agtf-arrests-lawrence-arzoo-bishnoi-gang-sharpshooters</link>
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    <pubDate>Tue, 22 Sep 2026 18:56:39 +0530</pubDate>
    <dc:creator>thinQ360</dc:creator>
    <category>क्राइम</category>
    <description><![CDATA[राजस्थान पुलिस की एंटी गैंगस्टर टास्क फोर्स ने जोधपुर पुलिस के सहयोग से लॉरेंस-आरजू गैंग से कथित रूप से जुड़े दो इनामी शार्प शूटरों को गिरफ्तार किया है। दोनों नेपाल से लौटने के बाद विभिन्न राज्यों से होते हुए जोधपुर पहुंचे थे। पुलिस उनके स्थानीय संपर्कों और शहर में आने के उद्देश्य की जांच कर रही है।]]></description>
    <content:encoded><![CDATA[<p><strong>जयपुर/जोधपुर | विशेष अपराध संवाददाता</strong> राजस्थान पुलिस की एंटी गैंगस्टर टास्क फोर्स ने संगठित अपराध के खिलाफ कार्रवाई करते हुए लॉरेंस-अर्जू गैंग से कथित रूप से जुड़े दो इनामी शार्प शूटरों को जोधपुर से गिरफ्तार किया है। जोधपुर कमिश्नरेट पुलिस के सहयोग से दोनों आरोपियों को एक स्थानीय होटल में ठहरने के दौरान पकड़ा गया। ये दोनों सिरोही में भी रुके थे। इनके पास एक बड़े राजनेता के फोटो मिलने के बात भी सामने आ रही है। इसको लेकर पुलिस और अन्य एजेंसियां सतर्क हुई हैं।</p>
<p>गिरफ्तार आरोपियों की पहचान पंजाब के फाजिल्का निवासी 23 वर्षीय जसकरण सिंह उर्फ करण उर्फ सन्नी उर्फ कट्टा और राजिंदर सिंह उर्फ बिल्ला के रूप में हुई है। पंजाब पुलिस ने दोनों आरोपियों की गिरफ्तारी पर पांच-पांच लाख रुपये का इनाम घोषित किया था।</p>
<h2>होटल में चेक-इन के दौरान पकड़े गए आरोपी</h2>
<p>एजीटीएफ के अतिरिक्त महानिदेशक दिनेश एमएन के अनुसार, खुफिया सूचनाओं के आधार पर आरोपियों की गतिविधियों पर निगरानी रखी जा रही थी। दोनों के जोधपुर पहुंचने की पुष्टि होने के बाद एजीटीएफ ने जोधपुर पुलिस के साथ संयुक्त अभियान चलाया।</p>
<p>अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सिद्धांत शर्मा के नेतृत्व वाली टीम ने आरोपियों को होटल में चेक-इन करते समय पकड़ लिया। पूछताछ और पहचान के सत्यापन के बाद दोनों को गिरफ्तार किया गया।</p>
<p class=""><strong>15 दिन में 5 बार चकमा दिया, जोधपुर में पकड़े गए</strong></p>
<p class="">एंटी गैंगस्टर टास्क फोर्स (एजीटीएफ) के एडीजी दिनेश एमएन ने बताया- टीम को 15 दिन पहले टिप मिली थी कि नेपाल में फरारी काट रहे लॉरेंस के 2 शूटर जसकरण और राजिंदर राजस्थान में वारदात के लिए आ रहे हैं। बदमाशों के नेपाल में होने की पुष्टि हुई। टीम नेपाल पहुंची, लेकिन उससे पहले ही दोनों वहां से निकल चुके थे।</p>
<h2>फर्जी पहचान और आधार कार्ड के इस्तेमाल का आरोप</h2>
<p>पुलिस का आरोप है कि दोनों व्यक्ति अलग-अलग स्थानों पर ठहरने और यात्रा करने के दौरान फर्जी पहचान एवं कथित फर्जी आधार कार्ड का इस्तेमाल कर रहे थे। गिरफ्तारी के समय उनके पास हथियार और अफीम मिलने की जानकारी भी पुलिस की ओर से दी गई है।</p>
<p>इस संबंध में मामला दर्ज कर लिया गया है। जब्त सामग्री की प्रकृति, हथियारों के स्रोत और दस्तावेजों की सत्यता की जांच जोधपुर कमिश्नरेट पुलिस कर रही है।</p>
<h2>नेपाल से लौटकर कई राज्यों से गुजरे</h2>
<p>पुलिस के अनुसार दोनों आरोपी पंजाब में हत्या के मामलों के बाद कथित रूप से नेपाल चले गए थे। हाल में वे नेपाल से भारत लौटे और गोरखपुर, काशी, इंदौर तथा सिरोही होते हुए जोधपुर पहुंचे।</p>
<p>एजीटीएफ ने विभिन्न स्थानों से मिले इनपुट के आधार पर उनका पीछा जारी रखा। आरोपियों के सिरोही से जोधपुर जाने की जानकारी मिलने के बाद निगरानी बढ़ाई गई और जोधपुर पुलिस को सतर्क किया गया।</p>
<h2>पंजाब में हत्या के मामलों में वांछित</h2>
<p>पुलिस के अनुसार दोनों आरोपी पंजाब में दर्ज हत्या सहित कई गंभीर आपराधिक मामलों में वांछित थे। उन पर अबोहर के कपड़ा व्यापारी संजय वर्मा और फाजिल्का के साहिल सेन की हत्या में कथित संलिप्तता के आरोप हैं।</p>
<p>उपलब्ध आपराधिक रिकॉर्ड के अनुसार दोनों के विरुद्ध पंजाब में कुल 12 मामले दर्ज बताए गए हैं। राजिंदर उर्फ बिल्ला के खिलाफ आठ और जसकरण सिंह के खिलाफ चार मामले दर्ज होने की जानकारी सामने आई है।</p>
<p>इन मामलों में हत्या, हत्या का प्रयास, मारपीट, आपराधिक धमकी, लूट, समूह हिंसा और शस्त्र अधिनियम से संबंधित आरोप शामिल बताए गए हैं।</p>
<h2>जोधपुर आने के उद्देश्य की जांच</h2>
<p>एजीटीएफ के अनुसार ऐसी आशंका थी कि आरोपी जोधपुर में किसी प्रमुख व्यापारी को निशाना बनाकर धमकी देने और करोड़ों रुपये की रंगदारी मांगने जैसी वारदात कर सकते थे।&nbsp;पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि क्या आरोपियों को किसी विशेष व्यक्ति को धमकाने अथवा किसी अन्य आपराधिक वारदात के लिए जोधपुर भेजा गया था। संभावित लक्ष्य की पहचान सुरक्षा कारणों से सार्वजनिक नहीं की गई है।</p>
<h2>स्थानीय संपर्कों की तलाश</h2>
<p>जांच एजेंसियां आरोपियों की यात्रा, ठहरने, भोजन और परिवहन की व्यवस्था में सहायता करने वाले लोगों का पता लगा रही हैं। उनके मोबाइल फोन, फर्जी दस्तावेज और संपर्क नंबरों का तकनीकी विश्लेषण किया जा रहा है।</p>
<p>पुलिस यह भी जांच रही है कि जोधपुर अथवा राजस्थान के अन्य जिलों में आरोपियों को किसी स्थानीय व्यक्ति ने लॉजिस्टिक सहायता उपलब्ध कराई थी या नहीं। जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर अन्य संदिग्धों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।</p>
<h2>गैंग के संपर्क और हथियारों का स्रोत जांच के घेरे में</h2>
<p>आरोपियों के कथित गैंग संपर्कों, संचार माध्यमों और धन के स्रोत की जांच की जा रही है। पुलिस जब्त हथियारों की आपूर्ति शृंखला का पता लगाने और यह जानने का प्रयास कर रही है कि उन्हें हथियार कहां तथा किस व्यक्ति से मिले थे।&nbsp;राजस्थान पुलिस के अनुसार पंजाब के अतिरिक्त हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की पुलिस भी दोनों आरोपियों की तलाश कर रही थी। उनके नेपाल में छिपे होने और बाद में भारत लौटने की सूचना मिलने के बाद निगरानी तेज की गई थी।</p>
<p>दोनों आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद पंजाब पुलिस और अन्य संबंधित राज्यों की जांच एजेंसियों से उनके पुराने मामलों तथा आपराधिक रिकॉर्ड की जानकारी साझा किए जाने की संभावना है।</p>
<h2>पूछताछ से नेटवर्क की कड़ियां सामने आने की उम्मीद</h2>
<p>जोधपुर कमिश्नरेट पुलिस आरोपियों से पूछताछ कर उनके कथित गैंग नेटवर्क, स्थानीय मददगारों और राजस्थान में संभावित गतिविधियों की जानकारी जुटा रही है। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि गिरफ्तारी से पहले वे किन लोगों के संपर्क में थे।</p>]]></content:encoded>
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  </item>
  <item>
    <title>EWS आरक्षण में व्यावहारिक सुधारों की मांग, रविन्द्र सिंह भाटी बोले—केंद्र बदले पात्रता के कड़े नियम</title>
    <link>https://thinq360.com/ravindra-singh-bhati-demands-reforms-central-ews-reservation-rules-jaipur</link>
    <guid isPermaLink="true">https://thinq360.com/ravindra-singh-bhati-demands-reforms-central-ews-reservation-rules-jaipur</guid>
    <pubDate>Tue, 22 Sep 2026 16:17:27 +0530</pubDate>
    <dc:creator>Pradeep Beedawat</dc:creator>
    <category>राजस्थान</category>
    <description><![CDATA[शिव विधायक रविन्द्र सिंह भाटी ने केंद्रीय सेवाओं और शिक्षण संस्थानों के लिए लागू EWS पात्रता नियमों को व्यावहारिक बनाने की मांग की है। उन्होंने राज्य के प्रमाण-पत्र को केंद्र में मान्यता देने, प्रमाण-पत्र की वैधता बढ़ाने, आय गणना सरल करने और राष्ट्रीय आर्थिक पिछड़ा वर्ग आयोग गठित करने का प्रस्ताव रखा।]]></description>
    <content:encoded><![CDATA[<p><strong>जयपुर |</strong> शिव विधानसभा क्षेत्र से विधायक रविन्द्र सिंह भाटी ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग यानी EWS की आरक्षण व्यवस्था में जमीनी और व्यावहारिक सुधार करने की मांग उठाई है। मंगलवार को जयपुर के पिंक सिटी प्रेस क्लब में आयोजित प्रेसवार्ता में उन्होंने कहा कि पूरे देश में भूमि एवं संपत्ति के एक समान मापदंड लागू होने के कारण राजस्थान जैसे भौगोलिक विविधता वाले राज्य के पात्र युवाओं को केंद्रीय सेवाओं और शिक्षण संस्थानों में आरक्षण का वास्तविक लाभ नहीं मिल पा रहा है।</p>
<p>भाटी ने केंद्र सरकार से EWS पात्रता से संबंधित संपत्ति, भूमि, आय, प्रमाण-पत्र की वैधता और अन्य शर्तों की समीक्षा कर राज्यों की भौगोलिक एवं सामाजिक परिस्थितियों के अनुरूप नियम बनाने की मांग की।</p>
<h2>राजस्थान की परिस्थितियों के अनुरूप हों नियम</h2>
<p>रविन्द्र सिंह भाटी ने कहा कि राजस्थान के मरुस्थलीय और सीमावर्ती क्षेत्रों में कृषि भूमि का आकार बड़ा हो सकता है, लेकिन उसकी उत्पादकता तथा बाजार कीमत देश के अन्य क्षेत्रों की तुलना में काफी कम होती है। इसके बावजूद केंद्रीय EWS नियमों में जमीन के क्षेत्रफल को पात्रता का प्रमुख आधार बनाया गया है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि राजस्थान की कम उपजाऊ अथवा बंजर भूमि की तुलना पंजाब की कृषि भूमि या दिल्ली-एनसीआर की महंगी जमीन से एक समान मापदंड पर करना व्यावहारिक नहीं है। भौगोलिक, कृषि और संपत्ति संबंधी विषमताओं को ध्यान में रखते हुए राज्यों को पात्रता के मापदंड निर्धारित करने में अधिक भूमिका मिलनी चाहिए।</p>
<h2>राज्य और केंद्रीय प्रमाण-पत्रों में बड़ा अंतर</h2>
<p>विधायक भाटी ने दावा किया कि राजस्थान सरकार ने संपत्ति और आवासीय भूखंड से संबंधित शर्तों को सरल किया था। इसके बाद वित्तीय वर्ष 2022-23 में राज्य स्तर पर 2,77,555 EWS प्रमाण-पत्र जारी किए गए।</p>
<p>उनके अनुसार, इसी अवधि में केंद्रीय सेवाओं और संस्थानों के लिए लागू कड़े नियमों के कारण केवल 95,243 केंद्रीय EWS प्रमाण-पत्र बन सके। उन्होंने इसे लगभग 70:30 का अंतर बताते हुए कहा कि मरुस्थलीय क्षेत्रों में यह विषमता और भी अधिक है। ये आंकड़े विधायक की ओर से प्रेसवार्ता में प्रस्तुत किए गए हैं।</p>
<h2>राज्य के प्रमाण-पत्र को केंद्र में मान्यता देने की मांग</h2>
<p>भाटी ने मांग की कि राज्य सरकारों द्वारा जारी EWS प्रमाण-पत्रों को केंद्रीय सेवाओं, प्रतियोगी परीक्षाओं और शैक्षणिक संस्थानों में भी सीधे मान्यता दी जाए। इससे पात्र अभ्यर्थियों को अलग-अलग प्रमाण-पत्र बनवाने और केंद्रीय नियमों की अतिरिक्त शर्तें पूरी करने की आवश्यकता नहीं रहेगी।</p>
<p>उन्होंने कहा कि राज्यों को अपनी भौगोलिक परिस्थितियों, भूमि की उत्पादकता, संपत्ति की वास्तविक कीमत और स्थानीय सामाजिक-आर्थिक स्थितियों के आधार पर EWS पात्रता निर्धारित करने का अधिकार मिलना चाहिए।</p>
<h2>आयु सीमा और परीक्षा शुल्क में छूट का प्रस्ताव</h2>
<p>विधायक भाटी ने अन्य आरक्षित वर्गों की तरह EWS वर्ग के अभ्यर्थियों को भी अधिकतम आयु सीमा, परीक्षा शुल्क और न्यूनतम अर्हता में उचित छूट देने की मांग की।</p>
<p>उन्होंने कहा कि केवल सीटों में आरक्षण उपलब्ध कराने से आर्थिक रूप से कमजोर अभ्यर्थियों की सभी समस्याओं का समाधान नहीं होता। परीक्षा आवेदन शुल्क, तैयारी का खर्च और आयु सीमा जैसी बाधाएं भी जरूरतमंद युवाओं के अवसरों को प्रभावित करती हैं।</p>
<h2>प्रमाण-पत्र की वैधता तीन से पांच वर्ष हो</h2>
<p>प्रेसवार्ता में EWS प्रमाण-पत्र की वर्तमान वार्षिक वैधता को बढ़ाकर तीन से पांच वर्ष करने की मांग भी रखी गई। भाटी ने कहा कि अभ्यर्थियों को हर वर्ष नया प्रमाण-पत्र बनवाने में प्रशासनिक दिक्कतों और अनावश्यक देरी का सामना करना पड़ता है।</p>
<p>उन्होंने सुझाव दिया कि निर्धारित अवधि के बाद प्रमाण-पत्र का नवीनीकरण शपथ-पत्र और आवश्यक सत्यापन के आधार पर सरल प्रक्रिया से किया जाए। आर्थिक स्थिति में महत्वपूर्ण बदलाव होने पर ही विस्तृत जांच की आवश्यकता रखी जा सकती है।</p>
<h2>परिवार की आय गणना को व्यावहारिक बनाने की मांग</h2>
<p>भाटी ने EWS पात्रता के लिए परिवार की आय की गणना संबंधी नियमों में भी बदलाव की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि मौजूदा व्यवस्था में कई अभ्यर्थियों, विशेष रूप से विवाहित महिलाओं को दस्तावेज बनवाने में प्रशासनिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है।</p>
<p>विवाहित महिला अभ्यर्थियों को मायके और ससुराल दोनों पक्षों से आय एवं संपत्ति संबंधी दस्तावेज उपलब्ध कराने की आवश्यकता पड़ती है। उन्होंने मांग की कि इस प्रक्रिया को सरल बनाते हुए क्रीमीलेयर निर्धारण की तर्ज पर माता-पिता की आय को मुख्य आधार बनाने पर विचार किया जाए।</p>
<h2>छात्रवृत्ति और छात्रावास सुविधा भी मिले</h2>
<p>विधायक ने EWS वर्ग के जरूरतमंद विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति, छात्रावास और विशेष शैक्षणिक सहायता उपलब्ध कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि आर्थिक कमजोरी केवल नौकरी के अवसरों को ही नहीं, बल्कि स्कूल और उच्च शिक्षा तक पहुंच को भी प्रभावित करती है।</p>
<p>उन्होंने सुझाव दिया कि केंद्र और राज्य सरकारें EWS विद्यार्थियों के लिए अलग छात्रवृत्ति योजनाएं, प्रतियोगी परीक्षाओं की निःशुल्क अथवा रियायती कोचिंग और छात्रावास सुविधाएं विकसित करें।</p>
<h2>राष्ट्रीय आर्थिक पिछड़ा वर्ग आयोग का प्रस्ताव</h2>
<p>रविन्द्र सिंह भाटी ने EWS वर्ग की नीतिगत और व्यावहारिक समस्याओं के समाधान के लिए राष्ट्रीय स्तर पर &lsquo;राष्ट्रीय आर्थिक पिछड़ा वर्ग आयोग&rsquo; गठित करने की मांग की।</p>
<p>उन्होंने कहा कि यह आयोग EWS से संबंधित शिकायतों, पात्रता नियमों, राज्यों की परिस्थितियों और सरकारी योजनाओं की समीक्षा कर केंद्र सरकार को आवश्यक सुझाव दे सकता है। आयोग के माध्यम से इस वर्ग की समस्याओं को संस्थागत मंच भी मिल सकेगा।</p>
<h2>पंचायती राज संस्थाओं में प्रतिनिधित्व की मांग</h2>
<p>प्रेसवार्ता में ग्रामीण क्षेत्रों के आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की स्थानीय शासन में भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए पंचायती राज संस्थाओं के चुनावों में EWS वर्ग को उचित प्रतिनिधित्व देने की मांग भी उठाई गई।</p>
<p>भाटी ने कहा कि पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद जैसे संस्थानों में आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की भागीदारी बढ़ने से उनकी स्थानीय समस्याएं नीति निर्माण और प्रशासन तक प्रभावी रूप से पहुंच सकेंगी।</p>
<h2>75 से अधिक विधायकों के समर्थन का दावा</h2>
<p>रविन्द्र सिंह भाटी ने दावा किया कि EWS नियमों में सुधार की इन मांगों को राजस्थान के 75 से अधिक विधायक लिखित समर्थन दे चुके हैं। उन्होंने कहा कि राज्य के सांसदों ने भी इस विषय पर सकारात्मक रुख व्यक्त किया है।</p>
<p>उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि आर्थिक रूप से कमजोर और वर्तमान नियमों के कारण आरक्षण के लाभ से वंचित परिवारों को न्याय दिलाने के लिए पात्रता नियमों में शीघ्र संशोधन किया जाए।</p>
<h2>केंद्र के निर्णय पर टिकी निगाहें</h2>
<p>EWS आरक्षण में बदलाव की इन मांगों में भूमि और संपत्ति की सीमा, आय गणना, प्रमाण-पत्र की वैधता, आयु सीमा तथा अतिरिक्त शैक्षणिक सहायता जैसे कई नीतिगत विषय शामिल हैं। इनमें संशोधन का अंतिम निर्णय केंद्र सरकार और संबंधित संवैधानिक एवं प्रशासनिक प्रक्रियाओं के माध्यम से ही हो सकता है।</p>
<p>अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि विधायक भाटी की ओर से उठाई गई मांगों पर केंद्र सरकार क्या रुख अपनाती है और क्या EWS पात्रता नियमों की समीक्षा के लिए कोई औपचारिक प्रक्रिया शुरू की जाती है।</p>]]></content:encoded>
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  </item>
  <item>
    <title>सिरोही में सौगंध का सियासी गणित: पांच भाजपा पार्षदों ने मंदिर में खाई कसम, प्रत्याशी को मिले सिर्फ 5 वोट</title>
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    <pubDate>Mon, 21 Sep 2026 23:40:39 +0530</pubDate>
    <dc:creator>गणपत सिंह मांडोली</dc:creator>
    <category>राजस्थान</category>
    <description><![CDATA[सिरोही नगर परिषद सभापति चुनाव में भाजपा प्रत्याशी पूजा माली को केवल पांच वोट मिले। इससे पहले भाजपा के पांच पार्षदों के मंदिर में पार्टी प्रत्याशी को वोट देने की सौगंध लेने का मामला चर्चा में रहा था। प्रत्याशी स्वयं उन पांच पार्षदों में शामिल नहीं थीं, इसलिए चुनाव परिणाम के बाद सौगंध और मतों के गणित को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।]]></description>
    <content:encoded><![CDATA[<p><strong>सिरोही | </strong>&nbsp;नगर परिषद सभापति चुनाव का परिणाम आने के बाद सिरोही की राजनीति में सौगंध और वोट का एक दिलचस्प गणित चर्चा का विषय बन गया है। चुनाव से पहले भाजपा के पांच पार्षदों के मंदिर पहुंचकर पार्टी प्रत्याशी के पक्ष में मतदान करने की सौगंध लेने का मामला सामने आया था, लेकिन परिणाम में भाजपा प्रत्याशी पूजा माली को केवल पांच मत मिले।</p>
<p>चुनावी आंकड़ों ने शहर में यह सवाल खड़ा कर दिया है कि यदि मंदिर में सौगंध लेने वाले पांचों पार्षदों ने भाजपा प्रत्याशी को मतदान किया और प्रत्याशी का अपना वोट भी उनके साथ था, तो भाजपा के खाते में पांच से अधिक मत क्यों नहीं आए।</p>
<h2>इन पांच पार्षदों ने ली थी सौगंध</h2>
<p>सभापति चुनाव से पहले वार्ड संख्या 1 की भाजपा पार्षद पूनम अनिल प्रजापत, वार्ड संख्या 16 के मनीष प्रजापत, वार्ड संख्या 17 के गौरव, वार्ड संख्या 19 की संतोष और वार्ड संख्या 21 के सुनील गुप्ता के शनेश्वरजी महादेव मंदिर पहुंचकर सौगंध लेने का मामला चर्चा में रहा।</p>
<p>पार्षदों ने कथित रूप से भगवान के समक्ष भाजपा की अधिकृत सभापति प्रत्याशी पूजा माली के पक्ष में मतदान करने की बात कही थी। इस घटनाक्रम के वीडियो भी सामने आने के बाद स्थानीय राजनीति में चर्चा तेज हो गई थी।</p>
<h2>भाजपा प्रत्याशी को मिले केवल पांच वोट</h2>
<p>सिरोही नगर परिषद के कुल 35 पार्षदों में कांग्रेस के 23, भाजपा के 10 और दो निर्दलीय पार्षद निर्वाचित हुए थे। सभापति चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी रितु जैन को 30 और भाजपा प्रत्याशी पूजा माली को केवल पांच मत मिले।</p>
<p>परिणाम के आंकड़ों के अनुसार भाजपा को अपने निर्वाचित पार्षदों की संख्या से पांच मत कम मिले। कांग्रेस ने दावा किया कि उसके 23 पार्षदों और दो निर्दलीयों के साथ भाजपा खेमे से भी पांच वोट रितु जैन के पक्ष में आए।</p>
<p>हालांकि मतदान गोपनीय था। इसलिए यह आधिकारिक रूप से निर्धारित नहीं किया जा सकता कि किस भाजपा पार्षद ने अपनी पार्टी की प्रत्याशी को वोट दिया और किसने किसी अन्य उम्मीदवार के पक्ष में मतदान किया।</p>
<h2>पूजा माली सौगंध लेने वाले पांच पार्षदों में शामिल नहीं थीं</h2>
<p>चुनावी पहेली का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि मंदिर में सौगंध लेने वाले पांच पार्षद अलग थे और भाजपा की अधिकृत प्रत्याशी पूजा माली उन पांच लोगों में शामिल नहीं थीं।</p>
<p>सामान्य राजनीतिक अनुमान के अनुसार प्रत्याशी अपना मत स्वयं के पक्ष में देती हैं। यदि पूजा माली का अपना मत और सौगंध लेने वाले पांचों पार्षदों के मत भाजपा के पक्ष में जोड़े जाएं, तो पार्टी को कम से कम छह मत मिलने चाहिए थे। इसके विपरीत भाजपा प्रत्याशी को केवल पांच वोट मिले।</p>
<p>यह केवल चुनाव परिणाम पर आधारित राजनीतिक गणना है। गोपनीय मतदान के कारण यह भी आधिकारिक रूप से प्रमाणित नहीं किया जा सकता कि प्रत्याशी सहित संबंधित पार्षदों ने वास्तव में किसे वोट दिया।</p>
<h2>सौगंध किसकी सच्ची, सवाल किस पर?</h2>
<p>चुनाव परिणाम के बाद सिरोही के राजनीतिक गलियारों में सवाल उठ रहा है कि मंदिर में सौगंध लेने वाले पांच पार्षदों में से क्या किसी ने भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में मतदान नहीं किया, या फिर पार्टी के अन्य पार्षदों का मतदान अनुमान से अलग रहा।</p>
<p>इन सवालों का प्रमाणित उत्तर उपलब्ध नहीं है। किसी भी पार्षद को केवल चुनावी गणित के आधार पर क्रॉस वोटिंग के लिए जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं होगा। मतदान की गोपनीयता के कारण व्यक्तिगत मत की पुष्टि नहीं की जा सकती।</p>
<h2>सियासी गलियारों में चल रहा व्यंग्य</h2>
<p>परिणाम के बाद शहर में राजनीतिक व्यंग्य भी चर्चा में है&mdash;&lsquo;सौगंध पांच की, प्रत्याशी का वोट अलग, फिर भाजपा के खाते में हिसाब इतना कम क्यों?&rsquo;</p>
<p>यह सवाल भाजपा की स्थानीय इकाई के भीतर विश्वास और समन्वय की स्थिति को भी सामने लाता है। पार्टी के 10 पार्षद होने के बावजूद अधिकृत उम्मीदवार को पांच मत मिलना पहले ही संगठन के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है। अब मंदिर में हुई सौगंध के वीडियो ने इस चर्चा को नया आयाम दे दिया है।</p>
<h2>संगठन ने सौगंध दिलवाई या पार्षद स्वयं पहुंचे?</h2>
<p>यह भी स्पष्ट नहीं है कि पांचों पार्षद पार्टी संगठन के निर्देश पर मंदिर पहुंचे थे या उन्होंने अपनी ओर से सौगंध लेने का निर्णय किया था। सभी पार्षदों के एक जैसे व्यवहार और लगभग समान संदेश ने राजनीतिक चर्चाओं को जरूर बढ़ाया है।</p>
<p>इस संबंध में भाजपा संगठन का विस्तृत आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि मंदिर में सौगंध लेने की यह प्रक्रिया किस स्तर पर और किन परिस्थितियों में हुई।</p>
<h2>गोपनीय मतदान के कारण पहेली का निर्णायक उत्तर नहीं</h2>
<p>सभापति पद का चुनाव गोपनीय मतदान के माध्यम से हुआ था। इसलिए मतपेटी से केवल प्रत्याशियों को मिले कुल मतों की जानकारी सामने आई है, किसी पार्षद के व्यक्तिगत मतदान की नहीं।</p>
<p>यही कारण है कि चुनाव परिणाम के आधार पर प्रश्न तो उठाए जा सकते हैं, लेकिन किसी व्यक्ति की सौगंध को सच्चा या झूठा घोषित नहीं किया जा सकता। संबंधित पार्षदों के अपने बयान ही उनके राजनीतिक रुख को सामने रख सकते हैं, मत की आधिकारिक पुष्टि नहीं।</p>
<h2>भाजपा के सामने आंतरिक समीक्षा की चुनौती</h2>
<p>भाजपा के लिए अब सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि उसके 10 पार्षदों में से अधिकृत प्रत्याशी को केवल पांच मत क्यों मिले। उम्मीदवार चयन, पार्षदों की नाराजगी, स्थानीय संगठन की रणनीति और चुनाव प्रबंधन जैसे विषय पार्टी की आंतरिक समीक्षा का हिस्सा बन सकते हैं।</p>
<p>सौगंध लेने वाले पार्षदों के वीडियो और चुनाव परिणाम के बीच दिखाई दे रहा गणितीय अंतर सिरोही की राजनीति में चर्चा का विषय बना हुआ है। प्रमाणित उत्तर भले उपलब्ध न हो, लेकिन &lsquo;सौगंध बनाम वोट&rsquo; की यह सियासी पहेली फिलहाल आसानी से समाप्त होती दिखाई नहीं दे रही है।</p>]]></content:encoded>
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  </item>
  <item>
    <title>निकाय चुनाव में जीत पर भाजपा उत्साहित, मदन राठौड़ बोले—मोदी और भजनलाल के काम पर जनता की मुहर</title>
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    <pubDate>Mon, 21 Sep 2026 18:29:07 +0530</pubDate>
    <dc:creator>Pradeep Beedawat</dc:creator>
    <category>राजनीति</category>
    <description><![CDATA[राजस्थान भाजपा अध्यक्ष मदन राठौड़ ने निकाय चुनाव परिणामों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की नीतियों पर जनता की मुहर बताया। उन्होंने दावा किया कि घोषित सात नगर निगम परिणामों में छह स्थानों पर भाजपा का महापौर बना है। प्रेसवार्ता में राठौड़ ने कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा पर भी राजनीतिक हमला बोला।]]></description>
    <content:encoded><![CDATA[<p><strong>जयपुर |</strong> राजस्थान में नगर निकाय चुनावों के परिणामों से उत्साहित भारतीय जनता पार्टी ने अपनी सफलता को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की नीतियों पर जनता की मुहर बताया है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने प्रेसवार्ता में प्रदेश की जनता का आभार जताते हुए कहा कि पार्टी के निर्वाचित प्रतिनिधि चुनावी संकल्प पत्र के आधार पर काम करेंगे।</p>
<p>राठौड़ ने कहा कि नगर निगमों के साथ नगर परिषदों और नगर पालिकाओं में भी भाजपा को व्यापक जनसमर्थन मिला है। उन्होंने दावा किया कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व और राज्य सरकार के विकास कार्यों पर भरोसा जताते हुए मतदाताओं ने भाजपा को आशीर्वाद दिया है।</p>
<h2>सात में से छह नगर निगमों में भाजपा का महापौर: राठौड़</h2>
<p>भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि राजस्थान के 10 नगर निगमों में से घोषित सात निगमों के परिणामों में छह स्थानों पर भाजपा का महापौर निर्वाचित हुआ है। उन्होंने अलवर, भीलवाड़ा, अजमेर, पाली, उदयपुर और भरतपुर में भाजपा के महापौर बनने का उल्लेख किया।</p>
<p>राठौड़ ने कहा कि भाजपा ने निकाय चुनाव से पहले जो संकल्प पत्र जनता के सामने रखा था, उस पर मतदाताओं ने विश्वास जताया है। पार्टी के निर्वाचित महापौर, सभापति, अध्यक्ष और पार्षद जनता की सेवा के लिए समर्पित रहते हुए वादों को पूरा करने का प्रयास करेंगे।</p>
<h2>वन स्टेट-वन इलेक्शन को बताया नई दिशा</h2>
<p>मदन राठौड़ ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की &lsquo;वन स्टेट-वन इलेक्शन&rsquo; पहल की सराहना करते हुए कहा कि प्रदेश में स्थानीय निकाय चुनाव एक साथ करवाने से चुनावी खर्च में कमी आएगी। इसके साथ सरकार और प्रशासन को विकास एवं जनकल्याणकारी कार्यों के लिए अधिक समय मिल सकेगा।</p>
<p>उन्होंने दावा किया कि राजस्थान की इस पहल ने देश को नई दिशा दिखाई है। एक साथ चुनाव होने से बार-बार लागू होने वाली चुनावी प्रक्रिया और प्रशासनिक व्यस्तता कम होने की संभावना है।</p>
<h2>पंचायत चुनाव में भी पूरी ताकत लगाएगी भाजपा</h2>
<p>राठौड़ ने कहा कि निकाय चुनाव की सफलता के बाद भाजपा अब आगामी पंचायत चुनावों की तैयारियों में जुटेगी। पार्टी कार्यकर्ता केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं एवं उपलब्धियों को लेकर ग्रामीण मतदाताओं के बीच जाएंगे।</p>
<p>उन्होंने विश्वास जताया कि निकाय चुनाव की तरह पंचायत चुनाव में भी प्रदेश की जनता भाजपा को समर्थन देगी।</p>
<h2>मोदी सरकार की योजनाओं का किया उल्लेख</h2>
<p>भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने स्थानीय निकाय चुनावों में पार्टी को मिले समर्थन को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकास विजन से जोड़ा। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने प्रत्येक परिवार को आवास उपलब्ध कराने, स्वच्छता बढ़ाने और घर-घर शौचालय निर्माण की दिशा में काम किया है।</p>
<p>उन्होंने रेलवे के आधुनिकीकरण, रेल लाइनों के दोहरीकरण एवं विद्युतीकरण, सड़कों के सुदृढ़ीकरण, सिंचाई परियोजनाओं और बांधों के निर्माण एवं रखरखाव को केंद्र सरकार की प्रमुख उपलब्धियों के रूप में प्रस्तुत किया।</p>
<p>राठौड़ ने कहा कि किसानों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य में वृद्धि, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि और कृषि क्षेत्र को मजबूत करने के प्रयास किए गए हैं। &lsquo;मेक इन इंडिया&rsquo; के माध्यम से औद्योगिक विकास, निवेश और रोजगार के अवसर बढ़ाने का काम भी हुआ है।</p>
<h2>ईआरसीपी और जल परियोजनाओं पर सरकार की प्रशंसा</h2>
<p>राठौड़ ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में ईआरसीपी को आगे बढ़ाने, यमुना जल समझौते को मूर्त रूप देने, पंजाब से राजस्थान को मिलने वाले पानी की व्यवस्था मजबूत करने और नर्मदा जल की उपलब्धता सुनिश्चित करने की दिशा में किए गए प्रयासों का उल्लेख किया।</p>
<p>उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के अतिरिक्त राजस्थान सरकार की ओर से भी किसानों को आर्थिक सहायता दी जा रही है। फसल बीमा योजना का लाभ किसानों तक पहुंचाने पर सरकार विशेष ध्यान दे रही है।</p>
<h2>राइजिंग राजस्थान और रोजगार का किया जिक्र</h2>
<p>भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि &lsquo;राइजिंग राजस्थान&rsquo; के माध्यम से प्रदेश में निवेश और उद्योगों को प्रोत्साहित किया गया है। उन्होंने दावा किया कि नए उद्योग स्थापित होने से रोजगार के अवसर सृजित हुए हैं और सरकारी भर्तियों के माध्यम से भी युवाओं को रोजगार दिया गया है।</p>
<p>उन्होंने अपराधियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई तथा चिकित्सा, सड़क, बिजली और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विस्तार को राज्य सरकार की उपलब्धियों में शामिल किया। राठौड़ के अनुसार, मतदाताओं ने इन्हीं कार्यों को महत्व देते हुए निकाय चुनाव में भाजपा को समर्थन दिया है।</p>
<h2>गोविंद सिंह डोटासरा पर बोला राजनीतिक हमला</h2>
<p>प्रेसवार्ता में पूछे गए एक सवाल के जवाब में मदन राठौड़ ने कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा पर तीखा राजनीतिक हमला किया। व्यंग्यात्मक लहजे में उन्होंने कहा कि डोटासरा &lsquo;बड़े आदमी&rsquo; हैं और वे उनकी बराबरी नहीं कर सकते।</p>
<p>राठौड़ ने डोटासरा पर परिवार के सदस्यों को लाभ पहुंचाने और ओबीसी क्रीमी लेयर से जुड़े लाभ लेने के आरोप लगाए। ये आरोप मदन राठौड़ द्वारा लगाए गए हैं। इस बयान में डोटासरा अथवा कांग्रेस का जवाब शामिल नहीं है और आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि प्रस्तुत नहीं की गई है।</p>
<h2>पाली के चुनावी नतीजों का दिया उदाहरण</h2>
<p>मदन राठौड़ ने कांग्रेस के संगठनात्मक ढांचे पर सवाल उठाते हुए पाली जिले के सादड़ी और पाली नगर निगम के परिणामों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सादड़ी में कांग्रेस प्रत्याशी को शून्य वोट मिले, जबकि पाली नगर निगम में कांग्रेस की अधिकृत महापौर प्रत्याशी केवल तीन मत हासिल कर सकीं।</p>
<p>पाली नगर निगम में कांग्रेस के 29 पार्षद निर्वाचित हुए थे, लेकिन उसकी अधिकृत महापौर प्रत्याशी सुमित्रा जैन को तीन मत मिले। भाजपा की नमिता बुबकिया 33 मत हासिल कर महापौर निर्वाचित हुईं, जबकि निर्दलीय राजबाला हिंगड़ को 29 मत मिले।</p>
<h2>गहलोत और पायलट के साथ संबंधों पर भी टिप्पणी</h2>
<p>राठौड़ ने कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति का उल्लेख करते हुए डोटासरा पर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट के साथ टकराव की राजनीति करने का आरोप लगाया। उन्होंने राजस्थान विधानसभा के एक घटनाक्रम का उल्लेख करते हुए कहा कि डोटासरा के स्थान पर नेता प्रतिपक्ष को सदन में माफी मांगनी पड़ी थी।</p>
<p>ये सभी बयान भाजपा प्रदेश अध्यक्ष की राजनीतिक प्रतिक्रिया का हिस्सा हैं। संबंधित आरोपों पर गोविंद सिंह डोटासरा और कांग्रेस की प्रतिक्रिया सामने आने पर उनका पक्ष भी महत्वपूर्ण होगा।</p>
<h2>जीत के साथ जवाबदेही की चुनौती</h2>
<p>भाजपा ने निकाय चुनाव के परिणामों को अपनी केंद्र और राज्य सरकारों की नीतियों की स्वीकार्यता के रूप में प्रस्तुत किया है। पार्टी के सामने अब अपने संकल्प पत्रों में किए गए वादों को पूरा करने और निर्वाचित निकायों में सफाई, सड़क, पेयजल, सीवरेज, पार्किंग और अन्य नागरिक सुविधाओं को बेहतर बनाने की जिम्मेदारी होगी।</p>
<p>मदन राठौड़ ने कहा कि भाजपा जनता से मिले आशीर्वाद पर खरा उतरने का प्रयास करेगी और आगामी पंचायत चुनाव में भी संगठन पूरी ताकत के साथ मैदान में उतरेगा।</p>]]></content:encoded>
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  </item>
  <item>
    <title>गोसेवा के साथ पर्यावरण संरक्षण का संकल्प, नंदगांव में 4300 खेजड़ी पौधों का रोपण</title>
    <link>https://thinq360.com/nandgaon-pathmeda-4300-khejri-saplings-plantation-environment-conservation</link>
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    <pubDate>Mon, 21 Sep 2026 18:22:56 +0530</pubDate>
    <dc:creator>गणपत सिंह मांडोली</dc:creator>
    <category>राजस्थान</category>
    <description><![CDATA[नंदगांव में आयोजित श्री सुरभि हरिहर चातुर्मास आराधना महोत्सव के दौरान ऋषि चैतन्यजी महाराज के सानिध्य में 4300 खेजड़ी पौधों का रोपण किया गया। बिश्नोई समाज के पुरुषों और महिलाओं ने पौधरोपण में भाग लेकर नियमित देखभाल एवं पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लिया।]]></description>
    <content:encoded><![CDATA[<p><strong>रेवदर |</strong> अर्बुदारण्य की पावन धरा पर स्थित श्री गोधाम महातीर्थ पथमेड़ा की ओर से नंदगांव में आयोजित &lsquo;श्री सुरभि हरिहर चातुर्मास आराधना महोत्सव&rsquo; में धार्मिक आराधना और गोसेवा के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया जा रहा है। महोत्सव के दौरान नंदगांव में 4300 खेजड़ी पौधों का रोपण किया गया।</p>
<p>महोत्सव गोऋषि दत्त शरणानंदजी महाराज एवं द्वारका शारदा पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी सदानन्द सरस्वतीजी महाराज के सानिध्य में आयोजित किया जा रहा है। इसके अंतर्गत आध्यात्मिक कार्यक्रमों के साथ प्रकृति और पर्यावरण के संरक्षण से जुड़ी गतिविधियां भी आयोजित की जा रही हैं।</p>
<h2>ऋषि चैतन्यजी महाराज के सानिध्य में पौधरोपण</h2>
<p>श्री गोधाम महातीर्थ पथमेड़ा के वरिष्ठ ट्रस्टी रणछोड़ पुरोहित ने बताया कि महोत्सव के दौरान ऋषि चैतन्यजी महाराज के सानिध्य में 4300 खेजड़ी पौधे लगाए गए।</p>
<p>पौधरोपण कार्यक्रम का उद्देश्य लोगों को प्रकृति के प्रति उनकी जिम्मेदारी का अहसास कराना और आने वाली पीढ़ियों के लिए हरित एवं सुरक्षित पर्यावरण तैयार करने का संदेश देना रहा।</p>
<h2>राजस्थान के जीवन में खेजड़ी का विशेष महत्व</h2>
<p>राजस्थान की संस्कृति, ग्रामीण जीवन, कृषि और पर्यावरण में खेजड़ी के वृक्ष का विशेष महत्व है। मरुस्थलीय परिस्थितियों में भी जीवित रहने वाला खेजड़ी का वृक्ष मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने, पशुओं को चारा उपलब्ध कराने और पर्यावरणीय संतुलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।</p>
<p>आयोजकों ने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में खेजड़ी पौधों का रोपण केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि राजस्थान की पारंपरिक पर्यावरण चेतना को आगे बढ़ाने का प्रयास है।</p>
<h2>बिश्नोई समाज के सैकड़ों गोभक्तों ने लिया भाग</h2>
<p>पौधरोपण कार्यक्रम में बिश्नोई समाज के सैकड़ों गोभक्तों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। समाज के पुरुषों और महिलाओं ने मिलकर निर्धारित स्थानों पर पौधे लगाए।</p>
<p>कार्यक्रम की विशेषता यह रही कि महिलाओं और माताओं ने भी बढ़-चढ़कर सहभागिता निभाई। प्रतिभागियों ने पौधे लगाने के साथ उनके संरक्षण, नियमित देखभाल और सिंचाई की जिम्मेदारी निभाने का संकल्प लिया।</p>
<p><img src="https://d2uvd0bcf4ztg.cloudfront.net/uploads/images/WhatsApp_Image_2026-09-21_at_18_09_50.webp" alt="" width="1280" height="851"></p>
<h2>गोसेवा और प्रकृति संरक्षण का साझा संदेश</h2>
<p>आयोजकों ने कहा कि गोसेवा और पर्यावरण संरक्षण एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। पशुधन, वनस्पति, जल, भूमि और मनुष्य के बीच संतुलन बनाए रखने से ही प्रकृति को सुरक्षित रखा जा सकता है।</p>
<p>महोत्सव के माध्यम से श्रद्धालुओं को धार्मिक एवं आध्यात्मिक साधना के साथ सामाजिक और पर्यावरणीय जिम्मेदारियों के प्रति भी जागरूक किया जा रहा है।</p>
<h2>गणमान्यजन और गोभक्त रहे उपस्थित</h2>
<p>पौधरोपण कार्यक्रम में हरलालजी बिश्नोई, पुखराजजी बिश्नोई, कल्पेशजी भालनी और ओमप्रकाशजी करडा सहित बिश्नोई समाज के अनेक गणमान्यजन एवं गोभक्त उपस्थित रहे।</p>
<p>सभी ने सामूहिक रूप से पौधों के संरक्षण और पर्यावरण जागरूकता के संदेश को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।</p>
<h2>4300 पौधों का संरक्षण भी बड़ी जिम्मेदारी</h2>
<p>नंदगांव में 4300 खेजड़ी पौधों का रोपण पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। इसके साथ ही इन पौधों को जीवित रखने, नियमित पानी देने और पशुओं से सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी भी महत्वपूर्ण होगी।</p>
<p>महोत्सव के माध्यम से गोसेवा, आध्यात्मिक साधना और पर्यावरण संरक्षण को एक साथ जोड़कर समाज को प्रकृति के प्रति अपना दायित्व निभाने का संदेश दिया गया। आयोजकों ने पौधरोपण को हरित भविष्य के संकल्प की महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।</p>]]></content:encoded>
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  </item>
  <item>
    <title>सिरोही की नवनिर्वाचित सभापति रितु जैन बोलीं—कांग्रेस का घोषणा पत्र ही बोर्ड का संकल्प पत्र होगा</title>
    <link>https://thinq360.com/sirohi-chairperson-ritu-jain-development-priorities-congress-manifesto</link>
    <guid isPermaLink="true">https://thinq360.com/sirohi-chairperson-ritu-jain-development-priorities-congress-manifesto</guid>
    <pubDate>Mon, 21 Sep 2026 18:19:57 +0530</pubDate>
    <dc:creator>गणपत सिंह मांडोली</dc:creator>
    <category>शख्सियत</category>
    <description><![CDATA[नवनिर्वाचित सभापति रितु जैन ने कहा कि सिरोही का विकास जनभावनाओं के अनुरूप किया जाएगा। उन्होंने सफाई, सीवरेज, पार्किंग, ट्रैफिक, रोड लाइट, डिजिटल जनसुनवाई और शहर का मास्टर प्लान तैयार कराने को नए बोर्ड की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल किया है।]]></description>
    <content:encoded><![CDATA[<p><strong>सिरोही |</strong> सिरोही नगर परिषद की नवनिर्वाचित सभापति रितु पुनीत जैन ने कहा है कि शहर का विकास अब जनभावनाओं के अनुरूप किया जाएगा। कांग्रेस ने नगर परिषद चुनाव में जो घोषणा पत्र जारी किया था, वही नए बोर्ड का संकल्प पत्र होगा और उसके आधार पर शहर के विकास कार्यों को आगे बढ़ाया जाएगा।</p>
<p>रितु जैन ने कहा कि नगर परिषद का नया बोर्ड सिरोही को स्वच्छ, व्यवस्थित, विकसित और हरा-भरा बनाने के उद्देश्य से काम करेगा। उन्होंने चुनाव में कांग्रेस को समर्थन देने के लिए शहरवासियों का आभार व्यक्त करते हुए भरोसा दिलाया कि बोर्ड जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरने का प्रयास करेगा।</p>
<h2>जनादेश के लिए शहरवासियों का जताया आभार</h2>
<p>नवनिर्वाचित सभापति ने कहा कि सिरोही की जनता ने पूर्व विधायक संयम लोढ़ा के नेतृत्व में कांग्रेस को नगर परिषद में काम करने का स्पष्ट जनादेश दिया है। इसके लिए कांग्रेस पार्टी और सभी निर्वाचित पार्षद शहर की जनता का आभार व्यक्त करते हैं।</p>
<p>उन्होंने कहा कि कांग्रेस अपने चुनावी वादों को पूरा करने और नागरिक सुविधाओं में सुधार के लिए सभी पार्षदों के सहयोग से काम करेगी। शहरवासियों का विश्वास बनाए रखना नए बोर्ड की सबसे बड़ी जिम्मेदारी होगी।</p>
<h2>भाजपा के कार्यकाल पर साधा निशाना</h2>
<p>रितु जैन ने आरोप लगाया कि पिछले ढाई वर्षों में सिरोही की सफाई व्यवस्था, सड़कों, सीवरेज, ट्रैफिक प्रबंधन, अतिक्रमण और अवैध निर्माण से संबंधित समस्याएं बढ़ीं। उन्होंने नगर परिषद के पिछले कामकाज और कथित भ्रष्टाचार को लेकर भी भाजपा पर निशाना साधा।</p>
<p>ये राजनीतिक आरोप रितु जैन की ओर से लगाए गए हैं। पूर्व नगर परिषद बोर्ड अथवा भाजपा की प्रतिक्रिया इस बयान में शामिल नहीं है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि नगर परिषद चुनाव में जनता ने भाजपा को 10 सीटों तक सीमित कर दिया, जबकि कांग्रेस को 35 में से 23 वार्डों में जीत दिलाकर स्थानीय सरकार बनाने का अवसर दिया।</p>
<h2>सभापति चुनाव में मिले थे 30 मत</h2>
<p>सिरोही नगर परिषद सभापति चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी रितु जैन को 30 मत मिले, जबकि भाजपा प्रत्याशी पूजा गोपाल माली को पांच मत प्राप्त हुए। कांग्रेस के 23, भाजपा के 10 और दो निर्दलीय पार्षद निर्वाचित हुए थे।</p>
<p>परिणाम के आंकड़ों के आधार पर कांग्रेस ने दावा किया है कि दोनों निर्दलीय पार्षदों के साथ भाजपा खेमे से भी पांच मत रितु जैन के पक्ष में आए। हालांकि मतदान गोपनीय था, इसलिए किसी व्यक्तिगत पार्षद के मतदान की आधिकारिक पुष्टि नहीं की जा सकती।</p>
<h2>सफाई और सीवरेज व्यवस्था पहली प्राथमिकता</h2>
<p>रितु जैन ने कहा कि नए बोर्ड की प्राथमिकताओं में शहर की सफाई व्यवस्था और सीवरेज सिस्टम को सुधारना प्रमुख रूप से शामिल रहेगा। इसके साथ पार्किंग, ट्रैफिक प्रबंधन, बाग-बगीचों का रखरखाव, रोड लाइट तथा नालियों एवं नालों की नियमित सफाई पर भी ध्यान दिया जाएगा।</p>
<p>उन्होंने कहा कि सभी पार्षदों के सहयोग से समस्याओं की पहचान कर चरणबद्ध तरीके से समाधान कराया जाएगा। प्रत्येक वार्ड की आवश्यकताओं के आधार पर विकास कार्यों की प्राथमिकता तय करने का प्रयास होगा।</p>
<h2>नगर परिषद की कार्यप्रणाली में सुधार का दावा</h2>
<p>नवनिर्वाचित सभापति ने कहा कि नगर परिषद से संबंधित कार्यों के लिए नागरिकों को बार-बार कार्यालय के चक्कर नहीं लगाने पड़ें, इसके लिए प्रशासनिक कार्यप्रणाली में व्यापक सुधार किए जाएंगे।</p>
<p>जनसुनवाई और शिकायतों के समाधान के लिए डिजिटल व्यवस्था को प्रभावी बनाया जाएगा। इसके माध्यम से नागरिकों की शिकायतें दर्ज करने, उनकी प्रगति जानने और तय समय में समाधान कराने की व्यवस्था विकसित करने का प्रयास होगा।</p>
<p><img src="https://d2uvd0bcf4ztg.cloudfront.net/uploads/images/Screenshot_2026-09-21_at_6_20_14___PM.webp" alt="" width="600" height="567"></p>
<h2>पार्षदों से वार्डों में सीधा संवाद रखने की अपील</h2>
<p>रितु जैन ने कहा कि वे शहरवासियों के साथ सीधा संवाद बनाए रखने के लिए नियमित रूप से फील्ड में रहेंगी। उन्होंने सभी नवनिर्वाचित पार्षदों से भी अपने-अपने वार्ड के नागरिकों के संपर्क में रहने की अपील की।</p>
<p>उन्होंने पार्षदों से कहा कि वे अपने वार्ड की समस्याओं, विकास संबंधी आवश्यकताओं और नागरिकों की शिकायतों से सभापति एवं नगर परिषद प्रशासन को लगातार अवगत कराते रहें।</p>
<h2>हर तीन महीने में प्रबुद्ध नागरिकों से संवाद</h2>
<p>सभापति ने घोषणा की कि सिरोही को आगे बढ़ाने, नागरिक सुविधाओं का विस्तार करने, नगर परिषद का राजस्व बढ़ाने और शहर की समस्याओं का समाधान तलाशने के लिए प्रत्येक तीन महीने में प्रबुद्ध नागरिकों के साथ संवाद किया जाएगा।</p>
<p>इस संवाद में अलग-अलग क्षेत्रों के विशेषज्ञों, सामाजिक संगठनों, व्यापारियों और नागरिक प्रतिनिधियों से सुझाव लिए जाएंगे। उपयोगी सुझावों को नगर परिषद की योजनाओं में शामिल करने का प्रयास किया जाएगा।</p>
<h2>सिरोही के लिए तैयार होगा मास्टर प्लान</h2>
<p>रितु जैन ने कहा कि शहर के सुनियोजित और दीर्घकालीन विकास के लिए सिरोही का मास्टर प्लान तैयार कराया जाएगा। इसमें भविष्य की जनसंख्या, यातायात, पार्किंग, आवासीय विस्तार, हरित क्षेत्र, सार्वजनिक सुविधाओं और बुनियादी ढांचे की आवश्यकताओं को ध्यान में रखा जाएगा।</p>
<p>उन्होंने कहा कि नगर परिषद के राजस्व स्रोत बढ़ाने और उपलब्ध संसाधनों के बेहतर उपयोग की दिशा में भी काम किया जाएगा।</p>
<h2>सरकारी विद्यालय से पढ़कर आगे बढ़ीं रितु जैन</h2>
<p>49 वर्षीय रितु जैन मूल रूप से आबूरोड के आकराभट्टा गांव की रहने वाली हैं। उन्होंने प्रारंभिक शिक्षा आकराभट्टा के मिडिल स्कूल से प्राप्त की। कक्षा नौ से बारहवीं तक की पढ़ाई आर्य समाज स्कूल, आबूरोड से पूरी की।</p>
<p>इसके बाद उन्होंने आबूरोड कॉलेज से निजी विद्यार्थी के रूप में स्नातक की पढ़ाई की। विवाह के बाद उन्होंने सिरोही के पीजी कॉलेज से स्नातकोत्तर की शिक्षा प्राप्त की।</p>
<p>रितु जैन के दादा शांतिस्वरूप अग्रवाल आकराभट्टा के सरपंच और पिता भगवानजी अग्रवाल वार्ड पंच रहे थे। सात भाइयों की इकलौती बहन रितु का विवाह वर्ष 2001 में सिरोही निवासी पुनीत जैन के साथ हुआ था।</p>
<h2>ससुराल पक्ष का नगर राजनीति से पुराना जुड़ाव</h2>
<p>रितु जैन के ससुराल पक्ष का सिरोही की स्थानीय राजनीति और कांग्रेस से पुराना संबंध रहा है। परिवार के लाला लखमीचंद जैन और बाद में विमलचंद जैन सिरोही नगरपालिका के अध्यक्ष रह चुके हैं।</p>
<p>रितु जैन के पति पुनीत जैन हाल ही में नगर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष बने हैं। उनके पिता स्वर्गीय सुरेंद्र भाई जैन नगर पालिका में पार्षद और नगर कांग्रेस अध्यक्ष रहे थे। उन्होंने नगरपालिका अध्यक्ष का चुनाव भी लड़ा था, लेकिन उन्हें जीत नहीं मिली थी।</p>
<h2>पहली बार मिली बड़ी राजनीतिक जिम्मेदारी</h2>
<p>रितु जैन सक्रिय चुनावी राजनीति में अपेक्षाकृत नया चेहरा हैं। सामाजिक सरोकारों, पारिवारिक अनुभव और शिक्षा को उनकी प्रमुख ताकत के रूप में देखा जा रहा है। सभापति के रूप में नगर परिषद का संचालन करना उनकी पहली बड़ी राजनीतिक एवं प्रशासनिक जिम्मेदारी होगी।</p>
<p>उन्होंने कहा कि पूर्व विधायक संयम लोढ़ा और कांग्रेस की टीम के मार्गदर्शन तथा सभी पार्षदों के सहयोग से वे अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन करेंगी।</p>
<h2>बिगड़ी व्यवस्था सुधारना सबसे बड़ी चुनौती</h2>
<p>नवनिर्वाचित सभापति के सामने नगर परिषद की प्रशासनिक व्यवस्था को प्रभावी बनाने और कांग्रेस के घोषणा पत्र में किए गए वादों को पूरा करने की प्रमुख चुनौती रहेगी। सफाई, सीवरेज, सड़क, अतिक्रमण, पार्किंग, राजस्व और नागरिक सेवाओं से जुड़े विषयों पर नए बोर्ड के प्रदर्शन का मूल्यांकन होगा।</p>
<p>वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के पास स्थानीय स्तर पर अपनी प्रशासनिक क्षमता दिखाने के लिए सीमित समय है। ऐसे में नगर परिषद में किए जाने वाले विकास कार्यों और नागरिक सुविधाओं में दिखाई देने वाले सुधार का राजनीतिक महत्व भी रहेगा।</p>
<p>रितु जैन ने कहा कि उनका उद्देश्य सिरोही में ऐसा वातावरण बनाना है, जिसमें विकास कार्य धरातल पर दिखाई दें और नगर परिषद के प्रति नागरिकों का विश्वास मजबूत हो।</p>]]></content:encoded>
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  </item>
  <item>
    <title>सभापति चुनाव से पहले हनुमानगढ़ विधायक गणेशराज बंसल गिरफ्तार, 23 साल पुराने पट्टा मामले में कार्रवाई</title>
    <link>https://thinq360.com/hanumangarh-mla-ganeshraj-bansal-arrested-fake-patta-case-chairperson-election</link>
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    <pubDate>Mon, 21 Sep 2026 13:31:25 +0530</pubDate>
    <dc:creator>Pradeep Beedawat</dc:creator>
    <category>राजनीति</category>
    <description><![CDATA[हनुमानगढ़ नगर परिषद सभापति चुनाव से पहले निर्दलीय विधायक गणेशराज बंसल को वर्ष 2003 के कथित फर्जी भूमि पट्टा मामले में गिरफ्तार किया गया है। नगर परिषद के 60 वार्डों में 34 निर्दलीय पार्षद निर्वाचित हुए हैं। समर्थकों ने गिरफ्तारी के समय पर सवाल उठाते हुए प्रदर्शन किया, जबकि कार्रवाई दर्ज आपराधिक मामलों से जुड़ी बताई गई है।]]></description>
    <content:encoded><![CDATA[<p><strong>हनुमानगढ़ |</strong> हनुमानगढ़ नगर परिषद के सभापति चुनाव से ठीक पहले निर्दलीय विधायक गणेशराज बंसल की गिरफ्तारी ने जिले की राजनीति में हलचल पैदा कर दी है। सीआईडी-सीबी और पुलिस की स्पेशल क्राइम ब्रांच की टीम ने वर्ष 2003 में कथित रूप से फर्जी भूमि पट्टे जारी करने से जुड़े मामले में उन्हें हिरासत में लेने के बाद गिरफ्तार किया है।</p>
<p>यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है, जब हनुमानगढ़ नगर परिषद में बड़ी संख्या में निर्दलीय पार्षद निर्वाचित हुए हैं और बंसल समर्थित खेमे को बहुमत की स्थिति में बताया जा रहा है। गिरफ्तारी के विरोध में विधायक के समर्थकों और स्थानीय व्यापारियों ने प्रदर्शन करते हुए कार्रवाई के समय पर सवाल उठाए हैं।</p>
<h2>बीकानेर क्षेत्र से हिरासत में लिया</h2>
<p>उपलब्ध जानकारी के अनुसार, शनिवार 19 सितंबर की देर रात सीआईडी-सीबी और पुलिस की स्पेशल क्राइम ब्रांच की टीम ने विधायक गणेशराज बंसल को बीकानेर क्षेत्र से हिरासत में लिया। इसके बाद उन्हें हनुमानगढ़ के पल्लू थाने ले जाया गया, जहां उनसे पूछताछ की गई। रविवार सुबह उनकी गिरफ्तारी की जानकारी सामने आई।</p>
<p>कार्रवाई वर्ष 2003 में जारी किए गए कथित फर्जी भूमि पट्टों से जुड़े आपराधिक मामलों के संबंध में की गई है। बताया गया है कि जांच एजेंसी ने विधायक को मामले में अपना पक्ष रखने के लिए नोटिस भी दिया था।</p>
<h2>विधायक और उनकी पत्नी के खिलाफ दो मामले</h2>
<p>रिपोर्टों के अनुसार, विधायक गणेशराज बंसल और उनकी पत्नी संतोष बंसल सहित अन्य लोगों के खिलाफ हनुमानगढ़ जंक्शन पुलिस थाने में दो अलग-अलग मामले दर्ज हैं। इनमें जमीन और पट्टों से जुड़ी कथित अनियमितताओं तथा धोखाधड़ी के आरोप लगाए गए हैं।</p>
<p>ये आरोप अभी न्यायिक परीक्षण और जांच के दायरे में हैं। मामले में दोष अथवा निर्दोषता का अंतिम निर्धारण सक्षम न्यायालय की प्रक्रिया के बाद ही होगा।</p>
<h2>23 साल पुराने मामले में हाल ही में दर्ज हुई प्राथमिकी</h2>
<p>जिस कथित घटनाक्रम को लेकर कार्रवाई हुई है, वह वर्ष 2003 से संबंधित बताया गया है। हालांकि उपलब्ध जानकारी के अनुसार इस प्रकरण में प्राथमिकी हाल में दर्ज की गई, जिसके बाद जांच एजेंसी ने कार्रवाई शुरू की।</p>
<p>गिरफ्तारी के बाद सीआईडी-सीबी और बीकानेर रेंज के पुलिस अधिकारियों से मामले की विस्तृत जानकारी लेने का प्रयास किया गया, लेकिन शुरुआती स्तर पर अधिकारियों की ओर से आरोपों और कार्रवाई के संबंध में विस्तार से आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई।</p>
<h2>नगर परिषद में 34 निर्दलीय पार्षद</h2>
<p>हनुमानगढ़ नगर परिषद में कुल 60 वार्ड हैं। चुनाव परिणाम में 34 निर्दलीय प्रत्याशियों ने जीत दर्ज की है। भाजपा के 15, कांग्रेस के 10 और माकपा का एक पार्षद निर्वाचित हुआ है।</p>
<p>नगर परिषद में बहुमत का आंकड़ा 31 है। ऐसे में 34 निर्दलीय पार्षद सभापति चुनाव में निर्णायक स्थिति में हैं। इन निर्दलीय पार्षदों में बंसल समर्थित समूह की संख्या को लेकर अलग-अलग रिपोर्टों में 32 से 34 तक का उल्लेख किया गया है।</p>
<p>समर्थकों का दावा है कि सभी 34 निर्दलीय पार्षद बंसल खेमे के साथ हैं। हालांकि व्यक्तिगत पार्षदों की राजनीतिक प्रतिबद्धता और मतदान का वास्तविक रुख चुनाव के दौरान ही स्पष्ट होगा।</p>
<h2>मंजू रणवां को बनाया सभापति उम्मीदवार</h2>
<p>बंसल समर्थित निर्दलीय खेमे ने मंजू रणवां को नगर परिषद सभापति पद का उम्मीदवार बनाया है। निर्दलीय पार्षदों की संख्या को देखते हुए इस खेमे की स्थिति मजबूत मानी जा रही है।</p>
<p>सभापति चुनाव से ठीक पहले विधायक की गिरफ्तारी के कारण स्थानीय राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि गिरफ्तारी के बाद भी बंसल समर्थित पार्षद एकजुट रहते हैं या मतदान में कोई नया समीकरण सामने आता है।</p>
<h2>समर्थकों ने भारत माता चौक पर किया प्रदर्शन</h2>
<p>विधायक गणेशराज बंसल की गिरफ्तारी की खबर सामने आने के बाद उनके समर्थकों में नाराजगी दिखाई दी। रविवार को बड़ी संख्या में समर्थक हनुमानगढ़ के भारत माता चौक पर एकत्र हुए और गिरफ्तारी के विरोध में प्रदर्शन किया।</p>
<p>प्रदर्शन में निर्दलीय पार्षदों के समर्थकों के साथ स्थानीय व्यापारियों ने भी हिस्सा लिया। इसके बाद प्रदर्शनकारियों ने जंक्शन पुलिस थाने का घेराव किया और कार्रवाई के समय को लेकर सवाल उठाए।</p>
<h2>चुनाव प्रभावित करने का लगाया आरोप</h2>
<p>प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि सभापति चुनाव से ठीक पहले विधायक के खिलाफ की गई कार्रवाई का उद्देश्य उनके समर्थक पार्षदों पर दबाव बनाना और चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करना है।</p>
<p>यह प्रदर्शनकारियों और विधायक समर्थकों का आरोप है। गिरफ्तारी के पीछे किसी राजनीतिक उद्देश्य का स्वतंत्र प्रमाण सामने नहीं आया है। पुलिस सूत्रों ने कार्रवाई को दर्ज आपराधिक मामलों और उनकी जांच से संबंधित बताया है।</p>
<h2>अधिकारियों के आश्वासन के बाद समाप्त हुआ घेराव</h2>
<p>प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस ने अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था की। उपखंड अधिकारी रवि कुमार और पुलिस उपाधीक्षक मीनाक्षी सहारण ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत की।</p>
<p>अधिकारियों ने सभापति और उपसभापति पद के चुनाव निष्पक्ष तरीके से कराने तथा किसी पार्षद को अनावश्यक रूप से परेशान नहीं किए जाने का आश्वासन दिया। बातचीत और आश्वासन के बाद प्रदर्शनकारियों ने पुलिस थाने का घेराव समाप्त कर दिया।</p>
<h2>सभापति चुनाव पर टिकी निगाहें</h2>
<p>हनुमानगढ़ नगर परिषद में सभापति पद के लिए 21 सितंबर को मतदान प्रस्तावित है। इससे ठीक पहले विधायक गणेशराज बंसल की गिरफ्तारी ने पुलिस कार्रवाई और स्थानीय राजनीतिक समीकरणों को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।</p>
<p>एक तरफ जांच एजेंसी के सामने वर्ष 2003 के कथित फर्जी पट्टा मामले की जांच है, वहीं दूसरी तरफ नगर परिषद में बहुमत रखने वाले निर्दलीय पार्षदों का राजनीतिक रुख महत्वपूर्ण है।</p>
<p>अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि बंसल समर्थित बताए जा रहे निर्दलीय पार्षद सभापति चुनाव में एकजुट रहते हैं या मतदान के दौरान भाजपा, कांग्रेस और निर्दलीय खेमों के बीच कोई नया समीकरण बनता है।</p>]]></content:encoded>
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  </item>
  <item>
    <title>पाली में कांग्रेस के 29 पार्षद, फिर भी भाजपा की नमिता बुबकिया बनीं महापौर; सुमित्रा जैन को सिर्फ 3 वोट</title>
    <link>https://thinq360.com/pali-mayor-election-namita-bubakia-wins-sumitra-jain-three-votes-rajbala-hingad</link>
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    <pubDate>Mon, 21 Sep 2026 13:23:10 +0530</pubDate>
    <dc:creator>Pradeep Beedawat</dc:creator>
    <category>राजनीति</category>
    <description><![CDATA[पाली नगर निगम में 29 पार्षद होने के बावजूद कांग्रेस की अधिकृत प्रत्याशी सुमित्रा जैन को केवल तीन वोट मिले। भाजपा की नमिता बुबकिया 33 मत लेकर महापौर चुनी गईं, जबकि कांग्रेस से बगावत कर निर्दलीय चुनाव लड़ने वाली राजबाला हिंगड़ को 29 मत मिले। परिणाम ने कांग्रेस के उम्मीदवार चयन और संगठनात्मक समन्वय पर सवाल खड़े किए हैं।]]></description>
    <content:encoded><![CDATA[<p><strong>पाली |</strong> पाली नगर निगम के महापौर चुनाव में वार्ड चुनाव के दलगत आंकड़ों से बिल्कुल अलग परिणाम सामने आया है। नगर निगम में 29 पार्षदों के साथ सबसे बड़ा दल होने के बावजूद कांग्रेस अपना महापौर नहीं बना सकी। भाजपा की नमिता बुबकिया ने 33 मत हासिल कर जीत दर्ज की, जबकि निर्दलीय प्रत्याशी राजबाला हिंगड़ को 29 और कांग्रेस की अधिकृत प्रत्याशी सुमित्रा जैन को केवल तीन मत मिले।</p>
<p>नगर निगम के सभी 65 पार्षदों ने मतदान किया। तीनों प्रत्याशियों को मिले मतों का कुल योग भी 65 रहा। नमिता बुबकिया के बहुमत के लिए आवश्यक 33 मत हासिल करते ही पाली नगर निगम में भाजपा का महापौर निर्वाचित हो गया।</p>
<h2>कांग्रेस के 29, भाजपा के 21 और निर्दलीय 15 पार्षद</h2>
<p>पाली नगर निगम के 65 वार्डों के चुनाव परिणाम 14 सितंबर 2026 को घोषित हुए थे। कांग्रेस ने 29 वार्डों में जीत दर्ज की, जबकि भाजपा के 21 प्रत्याशी पार्षद बने। इसके अतिरिक्त 15 निर्दलीय प्रत्याशी चुनाव जीतकर नगर निगम पहुंचे।</p>
<p>नगर निगम में बहुमत का आंकड़ा 33 था। कांग्रेस बहुमत से चार सीट दूर थी, जबकि भाजपा को अपना महापौर बनाने के लिए अपने 21 पार्षदों के अतिरिक्त 12 मतों की आवश्यकता थी। संख्या बल के लिहाज से कांग्रेस भाजपा के मुकाबले आठ सीट आगे थी, लेकिन कोई भी दल अपने दम पर बोर्ड बनाने की स्थिति में नहीं था।</p>
<h2>कांग्रेस में उम्मीदवार चयन के बाद सामने आई बगावत</h2>
<p>कांग्रेस की ओर से महापौर पद के लिए सुमित्रा जैन और राजबाला हिंगड़ सहित कई नाम दावेदारी में थे। राजबाला हिंगड़ वार्ड संख्या 38 और सुमित्रा जैन वार्ड संख्या 34 से कांग्रेस के टिकट पर पार्षद निर्वाचित हुई थीं। भाजपा की नमिता बुबकिया वार्ड संख्या 33 से चुनाव जीती थीं।</p>
<p>कांग्रेस ने सुमित्रा जैन को महापौर पद का अधिकृत प्रत्याशी घोषित किया। पार्टी का टिकट नहीं मिलने के बाद राजबाला हिंगड़ ने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ने का फैसला किया। इस तरह कांग्रेस की अधिकृत प्रत्याशी को निर्दलीय पार्षदों का समर्थन जुटाने के साथ अपने ही दल से निर्वाचित बागी उम्मीदवार की चुनौती का सामना करना पड़ा।</p>
<h2>छह प्रत्याशियों ने दाखिल किए थे नामांकन</h2>
<p>महापौर पद के लिए प्रारंभ में छह उम्मीदवारों की ओर से कुल 10 नामांकन पत्र दाखिल किए गए थे। इनमें कांग्रेस की सुमित्रा जैन, भाजपा की नमिता बुबकिया, राजबाला हिंगड़, पुष्पा सोमनानी, कुसुम सोनी और राशिदा बानो शामिल थीं।</p>
<p>नाम वापसी के अंतिम दिन कुसुम सोनी, पुष्पा सोमनानी और राशिदा बानो ने अपने नाम वापस ले लिए। इसके बाद मुख्य मुकाबला भाजपा की नमिता बुबकिया, कांग्रेस की सुमित्रा जैन और निर्दलीय राजबाला हिंगड़ के बीच रह गया। राजबाला को &lsquo;सोफा&rsquo; चुनाव चिह्न आवंटित किया गया था।</p>
<h2>सिंबल जमा कराने के बाद विधायक के भाई से कथित मारपीट</h2>
<p>नामांकन प्रक्रिया के दौरान कांग्रेस प्रत्याशी सुमित्रा जैन का अधिकृत सिंबल जमा कराकर लौट रहे पाली विधायक भीमराज भाटी के छोटे भाई लक्ष्मीनारायण भाटी के साथ कथित मारपीट का मामला भी सामने आया था।</p>
<p>आरोप था कि उनकी स्कूटी को एक वाहन से टक्कर मारकर गिराया गया और इसके बाद उनके साथ मारपीट की गई। इस घटना को लेकर पुलिस में शिकायत दी गई थी। हालांकि घटना के पीछे कौन लोग थे और उसका उद्देश्य क्या था, इसका निर्धारण पुलिस जांच के आधार पर ही हो सकता है। इसे किसी राजनीतिक पक्ष से जोड़ने की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।</p>
<h2>मतदान में सभी 65 पार्षदों ने लिया हिस्सा</h2>
<p>21 सितंबर को पाली नगर निगम में महापौर पद के लिए मतदान हुआ। भाजपा की नमिता बुबकिया और कांग्रेस की सुमित्रा जैन मतदान स्थल पहुंचीं, जबकि निर्दलीय प्रत्याशी राजबाला हिंगड़ अपने समर्थक पार्षदों के साथ नगर निगम पहुंचीं।</p>
<p>मतदान के दौरान दो निर्दलीय पार्षदों के पास कथित रूप से छिपे हुए कैमरे मिलने की बात भी सामने आई। बताया गया कि पुलिस ने उन्हें प्रवेश द्वार पर रोक लिया। इस घटनाक्रम से संबंधित विस्तृत आधिकारिक जानकारी उपलब्ध होने पर ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।</p>
<p>सभी 65 पार्षदों के मतदान के बाद मतगणना हुई। भाजपा की नमिता बुबकिया को 33, निर्दलीय राजबाला हिंगड़ को 29 और कांग्रेस की अधिकृत प्रत्याशी सुमित्रा जैन को केवल तीन मत मिले।</p>
<h2>29 पार्षदों वाली कांग्रेस की प्रत्याशी को तीन वोट क्यों?</h2>
<p>पाली महापौर चुनाव का सबसे बड़ा राजनीतिक सवाल कांग्रेस की अधिकृत प्रत्याशी को मिले केवल तीन मत हैं। कांग्रेस के टिकट पर 29 पार्षद निर्वाचित हुए थे, लेकिन सुमित्रा जैन के पक्ष में केवल तीन वोट पड़े। पार्टी के निर्वाचित पार्षदों की संख्या और अधिकृत प्रत्याशी को मिले मतों के बीच 26 का अंतर रहा।</p>
<p>इस गणना में राजबाला हिंगड़ भी शामिल हैं, क्योंकि उन्होंने पार्षद का चुनाव कांग्रेस के टिकट पर जीता था, लेकिन महापौर पद का चुनाव निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में लड़ा। राजबाला को 29 मत मिले, जो कांग्रेस की अधिकृत प्रत्याशी से 26 अधिक हैं।</p>
<p>महापौर पद के लिए मतदान गोपनीय था। इसलिए केवल परिणाम के आधार पर यह निश्चित रूप से नहीं बताया जा सकता कि कांग्रेस, भाजपा अथवा निर्दलीय पार्षदों में से किसने किस उम्मीदवार को वोट दिया। इतना स्पष्ट है कि कांग्रेस की अधिकृत प्रत्याशी अपने दल से निर्वाचित पार्षदों का व्यापक समर्थन हासिल नहीं कर सकीं।</p>
<h2>भाजपा को अपने पार्षदों से 12 वोट अधिक मिले</h2>
<p>नगर निगम चुनाव में भाजपा के 21 पार्षद निर्वाचित हुए थे, जबकि पार्टी की महापौर प्रत्याशी नमिता बुबकिया को 33 मत मिले। इस तरह उन्हें भाजपा की मूल निर्वाचित संख्या से 12 वोट अधिक प्राप्त हुए।</p>
<p>ये अतिरिक्त मत भाजपा के बाहर से निर्वाचित पार्षदों के समर्थन की ओर संकेत करते हैं। हालांकि इनमें कितने निर्दलीय थे और क्या कांग्रेस से निर्वाचित किसी पार्षद ने भी भाजपा प्रत्याशी को वोट दिया, इसका निश्चित निर्धारण गोपनीय मतदान के कारण नहीं किया जा सकता।</p>
<p>नमिता बुबकिया के 33 मतों तक पहुंचने से यह स्पष्ट है कि भाजपा ने चुनाव से पहले आवश्यक अतिरिक्त समर्थन जुटा लिया था। दूसरी ओर राजबाला हिंगड़ के 29 मतों ने वास्तविक मुकाबले को भाजपा और निर्दलीय प्रत्याशी के बीच ला दिया।</p>
<h2>राजबाला और सुमित्रा को मिलाकर भी भाजपा से एक वोट कम</h2>
<p>चुनावी आंकड़ों का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि राजबाला हिंगड़ को मिले 29 और सुमित्रा जैन को मिले तीन मतों को जोड़ने पर कुल संख्या 32 होती है। यह भाजपा की विजयी प्रत्याशी नमिता बुबकिया को मिले 33 मतों से एक कम है।</p>
<p>हालांकि यह केवल परिणाम के बाद का गणित है। इससे यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि राजबाला को कांग्रेस का अधिकृत प्रत्याशी बनाए जाने पर यही सभी मत उनके साथ बने रहते। उम्मीदवार बदलने की स्थिति में पार्षदों का समर्थन और चुनावी समीकरण भी बदल सकते थे।</p>
<h2>उम्मीदवार चयन और संगठनात्मक समन्वय पर सवाल</h2>
<p>पाली के परिणाम ने कांग्रेस के उम्मीदवार चयन, स्थानीय नेतृत्व और पार्षदों के बीच समन्वय को लेकर कई सवाल खड़े किए हैं। सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि क्या महापौर प्रत्याशी के नाम पर पार्टी के सभी निर्वाचित पार्षदों के बीच सहमति थी।</p>
<p>यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या कांग्रेस नेतृत्व राजबाला हिंगड़ की दावेदारी को लेकर समय रहते कोई सहमति बना सकता था और क्या निर्दलीय पार्षदों के समर्थन के लिए कोई साझा रणनीति तैयार की गई थी। इन सवालों का स्पष्ट उत्तर कांग्रेस नेतृत्व, निर्वाचित पार्षदों और दोनों दावेदारों के विस्तृत पक्ष सामने आने के बाद ही मिल सकेगा।</p>
<h2>सिरोही और पाली में दिखी अलग राजनीतिक तस्वीर</h2>
<p>पाली और सिरोही में 21 सितंबर को हुए निकाय प्रमुखों के चुनाव ने दो अलग-अलग राजनीतिक तस्वीरें प्रस्तुत कीं। सिरोही नगर परिषद में कांग्रेस के 23 पार्षद थे, जबकि कांग्रेस की ऋतु जैन को सभापति चुनाव में 30 मत मिले। भाजपा की पूजा माली को पांच वोट प्राप्त हुए।</p>
<p>इसके विपरीत पाली में कांग्रेस के 29 पार्षद होने के बावजूद पार्टी की अधिकृत प्रत्याशी को केवल तीन मत मिले। सिरोही में कांग्रेस प्रत्याशी को उसकी निर्वाचित संख्या से सात मत अधिक मिले, जबकि पाली में कांग्रेस प्रत्याशी और पार्टी की निर्वाचित संख्या के बीच 26 मतों का अंतर रहा।</p>
<p>यह तुलना बताती है कि वार्ड चुनाव में अधिक सीटें जीतना और उसके बाद महापौर अथवा सभापति चुनाव में पार्षदों का समर्थन बनाए रखना दो अलग-अलग राजनीतिक चुनौतियां हैं।</p>
<h2>महापौर चुनी गईं, लेकिन सदन का मूल गणित नहीं बदला</h2>
<p>नमिता बुबकिया के महापौर निर्वाचित होने के बावजूद नगर निगम के निर्वाचित पार्षदों का मूल दलगत आंकड़ा नहीं बदला है। कांग्रेस के टिकट पर 29, भाजपा के टिकट पर 21 और निर्दलीय रूप से 15 पार्षद चुनाव जीते हैं।</p>
<p>भाजपा प्रत्याशी को महापौर चुनाव में 33 मत मिलने का यह अर्थ नहीं है कि नगर निगम में भाजपा के निर्वाचित पार्षदों की संख्या 33 हो गई है। नगर निगम की समितियों, बजट, प्रस्तावों और अन्य नीतिगत निर्णयों के दौरान महापौर चुनाव में मिला समर्थन किस सीमा तक कायम रहता है, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा।</p>
<h2>नए बोर्ड के सामने शहर के विकास की चुनौती</h2>
<p>महापौर चुनाव के राजनीतिक घटनाक्रम के बाद अब पाली की जनता की नजर नगर निगम के कामकाज पर रहेगी। महापौर नमिता बुबकिया के सामने शहर की सड़कें, सफाई, पेयजल, सार्वजनिक प्रकाश व्यवस्था, नगर निगम की संपत्तियों और नागरिक सुविधाओं से जुड़े मुद्दे प्रमुख चुनौती होंगे।</p>
<p>कांग्रेस के सामने अपने निर्वाचित पार्षदों के बीच समन्वय स्थापित करने, अधिकृत प्रत्याशी को केवल तीन मत मिलने के कारणों की समीक्षा करने और नगर निगम में प्रभावी विपक्ष की भूमिका निभाने की चुनौती है। वहीं राजबाला हिंगड़ का समर्थन करने वाले पार्षद भविष्य में नगर निगम के मुद्दों पर क्या रुख अपनाते हैं, इस पर भी राजनीतिक निगाहें रहेंगी।</p>
<p>पाली का महापौर चुनाव तीन आंकड़ों के कारण लंबे समय तक चर्चा में रहेगा&mdash;कांग्रेस के 29 निर्वाचित पार्षद, उसकी अधिकृत प्रत्याशी को मिले तीन मत और भाजपा की नमिता बुबकिया की 33 वोटों से हुई जीत।</p>]]></content:encoded>
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  </item>
  <item>
    <title>सिरोही सभापति चुनाव: ऋतु जैन ने 30 वोट लेकर दर्ज की जीत, भाजपा खेमे में क्रॉस वोटिंग</title>
    <link>https://thinq360.com/sirohi-chairperson-election-ritu-jain-wins-bjp-cross-voting-sanyam-lodha</link>
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    <pubDate>Mon, 21 Sep 2026 12:59:34 +0530</pubDate>
    <dc:creator>गणपत सिंह मांडोली</dc:creator>
    <category>राजनीति</category>
    <description><![CDATA[सिरोही नगर परिषद सभापति चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी ऋतु जैन ने 30 मत हासिल कर जीत दर्ज की, जबकि भाजपा प्रत्याशी पूजा माली को पांच वोट मिले। कांग्रेस के 23 पार्षद और दो निर्दलीय होने के कारण परिणाम के आंकड़ों से भाजपा खेमे के पांच मत कांग्रेस प्रत्याशी को मिल गए हैं।]]></description>
    <content:encoded><![CDATA[<p><strong>सिरोही |</strong> सिरोही नगर परिषद के सभापति चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी ऋतु जैन ने बड़ी जीत दर्ज की है। सोमवार को हुए मतदान में ऋतु जैन को 30 मत मिले, जबकि भाजपा प्रत्याशी पूजा माली पांच मतों पर सिमट गईं। ऋतु जैन ने 25 मतों के अंतर से चुनाव जीतकर नगर परिषद में कांग्रेस का बोर्ड बना दिया।</p>
<p>चुनाव परिणाम के आंकड़ों ने भाजपा खेमे में संभावित क्रॉस वोटिंग की चर्चा तेज कर दी है। नगर परिषद के कुल 35 पार्षदों में कांग्रेस के 23, भाजपा के 10 और दो निर्दलीय पार्षद हैं। कांग्रेस प्रत्याशी को मिले 30 मतों के आधार पर माना जा रहा है कि कांग्रेस के सभी पार्षदों और दोनों निर्दलीयों के अतिरिक्त भाजपा खेमे से भी पांच मत उनके पक्ष में गए। हालांकि मतदान गोपनीय होने के कारण किसी व्यक्तिगत पार्षद के नाम सहित मतदान की आधिकारिक पुष्टि नहीं की जा सकती।</p>
<h2>ऋतु जैन को 30 और पूजा माली को पांच वोट</h2>
<p>सभापति चुनाव का परिणाम घोषित होते ही कांग्रेस खेमे में खुशी की लहर दौड़ गई। ऋतु जैन के समर्थकों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी करते हुए जीत का जश्न मनाया। कांग्रेस नेताओं ने परिणाम को सिरोही की जनता के जनादेश की जीत बताया।</p>
<p>भाजपा के पास 10 पार्षद होने के बावजूद उसकी अधिकृत प्रत्याशी पूजा माली को केवल पांच मत मिले। वहीं कांग्रेस के पास 23 पार्षद होने के बाद भी ऋतु जैन के मतों की संख्या 30 तक पहुंच गई। इसी अंतर के कारण भाजपा के पांच पार्षदों की संभावित क्रॉस वोटिंग राजनीतिक चर्चा का प्रमुख विषय बन गई है।</p>
<h2>नामांकन पर आपत्ति के बाद भी मैदान में बनी रहीं ऋतु जैन</h2>
<p>सभापति चुनाव से पहले ऋतु जैन के नामांकन को लेकर भी राजनीतिक और कानूनी विवाद हुआ था। भाजपा की ओर से उनके नामांकन पर आपत्तियां दर्ज कराई गई थीं। कांग्रेस की कानूनी टीम ने रिटर्निंग अधिकारी के समक्ष इन आपत्तियों का जवाब प्रस्तुत किया था।</p>
<p>दोनों पक्षों की दलीलों और उपलब्ध दस्तावेजों पर विचार करने के बाद रिटर्निंग अधिकारी ने ऋतु जैन का नामांकन कायम रखा था। इसके बाद ऋतु जैन और भाजपा की पूजा माली सभापति पद के चुनाव मैदान में बनी रहीं।</p>
<h2>14 सितंबर को ही जनता ने दे दिया था जनादेश: लोढ़ा</h2>
<p>चुनाव परिणाम के बाद पूर्व विधायक एवं कांग्रेस नेता संयम लोढ़ा ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि सिरोही की जनता ने 14 सितंबर को ही अपना जनादेश दे दिया था और अब वही जनादेश सभापति चुनाव के परिणाम तक पहुंचा है।</p>
<p>भाजपा खेमे से संभावित क्रॉस वोटिंग के सवाल पर लोढ़ा ने इसे भाजपा की रणनीतिक विफलता बताया। उन्होंने कहा, &lsquo;यह भाजपा की रणनीतिक विफलता है। इन्होंने शुरुआत से ही चुनाव को मिसहैंडल किया।&rsquo;</p>
<h2>उम्मीदवार चयन को लेकर भाजपा पर उठाए सवाल</h2>
<p>संयम लोढ़ा ने आरोप लगाया कि भाजपा ने चुनावी प्रक्रिया के शुरुआती चरण में ही एक व्यक्ति विशेष को सभापति पद का दावेदार घोषित कर दिया था। उनके अनुसार इस निर्णय के कारण भाजपा के भीतर असंतोष पैदा हुआ, जो पार्षद चुनाव और सभापति पद के मतदान तक बना रहा।</p>
<p>लोढ़ा ने भाजपा के उम्मीदवार चयन और स्थानीय रणनीति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी की ओर से विवादों से जुड़े लोगों को चुनावी चेहरा बनाने के कारण संगठन में नाराजगी बढ़ी। लोढ़ा के इन आरोपों पर भाजपा की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है।</p>
<h2>सिरोही पुलिस पर भी साधा निशाना</h2>
<p>सभापति चुनाव की प्रक्रिया के दौरान पुलिस और प्रशासन की व्यवस्थाओं से जुड़े सवाल पर संयम लोढ़ा ने सिरोही पुलिस के कामकाज पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस अपने मूल दायित्वों के निर्वहन के बजाय भाजपा नेताओं को विशेष सुविधाएं उपलब्ध कराने में लगी है।</p>
<p>लोढ़ा ने एक राज्यमंत्री की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए दावा किया कि निर्धारित नियमों में एस्कॉर्ट की सुविधा नहीं होने के बावजूद उनके शहर में आने पर आगे और पीछे पुलिस के वाहन लगाए जाते हैं।</p>
<p>उन्होंने शहर में चोरी और नशीले पदार्थों के कथित कारोबार का मुद्दा उठाते हुए पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल किए। लोढ़ा ने एक विद्यालय में शिक्षक द्वारा बच्चे की कथित पिटाई के मामले का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि राजनीतिक दबाव के कारण अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। ये सभी आरोप संयम लोढ़ा द्वारा लगाए गए हैं। संबंधित मामलों में पुलिस, प्रशासन और भाजपा का पक्ष सामने आना बाकी है।</p>
<h2>नगर परिषद की संपत्तियों का संरक्षण प्राथमिकता</h2>
<p>नगर परिषद में कांग्रेस का बोर्ड बनने के बाद शहर के विकास और नागरिक सुविधाओं से जुड़े सवाल पर संयम लोढ़ा ने कहा कि नए बोर्ड की प्राथमिकताएं स्पष्ट हैं। नगर परिषद की जमीन, धार्मिक संपत्तियों और अन्य सार्वजनिक संपत्तियों का संरक्षण किया जाएगा।</p>
<p>लोढ़ा ने कहा, &lsquo;हमारा बोर्ड काम करेगा। यह जो धर्म संपदा है, सार्वजनिक संपदा है और नगर परिषद की भूमि है, उसका संरक्षण करने का काम बोर्ड करेगा।&rsquo;</p>
<p>उन्होंने शहर की नागरिक सुविधाओं में सुधार करने और आम लोगों की समस्याओं को कम करने की दिशा में काम करने की बात भी कही। नए बोर्ड के सामने अब इन घोषणाओं को धरातल पर लागू करने की चुनौती होगी।</p>
<h2>शिवगंज पर बोले&mdash;अदृश्य शक्तियों से मदद की उम्मीद</h2>
<p>सिरोही में कांग्रेस का बोर्ड बनने के बाद संयम लोढ़ा से शिवगंज नगरपालिका अध्यक्ष चुनाव के समीकरणों पर भी सवाल किया गया। इस पर उन्होंने कहा, &lsquo;मैंने पहले भी आपसे निवेदन किया था कि हमें अदृश्य शक्तियों से मदद की उम्मीद है और उसी के सहारे हम इंतजार कर रहे हैं।&rsquo;</p>
<p>हालांकि लोढ़ा ने अपने बयान में कथित अदृश्य शक्तियों से जुड़े किसी व्यक्ति अथवा समूह का नाम नहीं बताया। उनके बयान के बाद शिवगंज के राजनीतिक समीकरणों को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है।</p>
<h2>नए बोर्ड के सामने विकास की चुनौती</h2>
<p>सिरोही नगर परिषद के 35 वार्डों में कांग्रेस ने 23 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया था। भाजपा को 10 और निर्दलीयों को दो सीटें मिली थीं। अब ऋतु जैन के सभापति बनने के साथ नगर परिषद में कांग्रेस के नए बोर्ड का कार्यकाल शुरू होगा।</p>
<p>शहर की सड़कें, सफाई व्यवस्था, नगर परिषद की जमीन, सार्वजनिक संपत्तियों का संरक्षण और बुनियादी नागरिक सुविधाएं नए बोर्ड के सामने प्रमुख मुद्दे रहेंगे। वहीं भाजपा के लिए अपने पांच मत कम होने के संभावित कारणों और संगठन के भीतर उठ रहे सवालों से निपटना बड़ी चुनौती होगा।</p>
<p>मतदान गोपनीय होने के कारण क्रॉस वोटिंग करने वाले पार्षदों की व्यक्तिगत पहचान आधिकारिक रूप से सामने नहीं आई है। भाजपा संगठन और उसके पार्षदों की प्रतिक्रिया के बाद ही इस राजनीतिक घटनाक्रम की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।</p>]]></content:encoded>
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  </item>
  <item>
    <title>पंचायत चुनाव की रणनीति पर भाजपा का मंथन, सभी 41 जिला परिषदों में बहुमत का दावा</title>
    <link>https://thinq360.com/rajasthan-bjp-panchayat-election-strategy-meeting-41-zila-parishad</link>
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    <pubDate>Sun, 20 Sep 2026 19:39:02 +0530</pubDate>
    <dc:creator>Pradeep Beedawat</dc:creator>
    <category>राजनीति</category>
    <description><![CDATA[भाजपा प्रदेश कार्यालय में मदन राठौड़ की अध्यक्षता में पंचायत चुनाव की रणनीति पर संगठनात्मक बैठक हुई। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा वर्चुअल माध्यम से जुड़े। भाजपा नेताओं ने निकाय चुनाव के बाद पंचायत चुनाव में भी बहुमत मिलने का दावा किया और सभी 41 जिला परिषदों में जीत का लक्ष्य रखा।]]></description>
    <content:encoded><![CDATA[<p><strong>जयपुर |</strong> राजस्थान में आगामी पंचायत चुनावों की तैयारियों को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने संगठनात्मक कवायद तेज कर दी है। रविवार को भाजपा प्रदेश कार्यालय में प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में चुनावी रणनीति, संगठन की तैयारियों और आगामी कार्यक्रमों पर विस्तार से चर्चा की गई।</p>
<p>मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा बैठक में वर्चुअल माध्यम से जुड़े। संगठन महामंत्री अजेय कुमार, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अशोक परनामी और डॉ. अरुण चतुर्वेदी, प्रदेश महामंत्री श्रवण सिंह बगड़ी, प्रदेश उपाध्यक्ष नाहर सिंह जोधा, वरिष्ठ नेता ओंकार सिंह लखावत तथा सीआर चौधरी सहित पार्टी के कई वरिष्ठ पदाधिकारी बैठक में उपस्थित रहे।</p>
<h2>निकाय चुनाव के बाद पंचायतों में भी जीत का दावा</h2>
<p>बैठक के बाद भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने कहा कि नगर निकाय चुनाव में प्रदेश की जनता ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार पर भरोसा जताया है। उन्होंने दावा किया कि पंचायत चुनाव में भी जनता भाजपा को आशीर्वाद देकर भारी बहुमत से विजयी बनाएगी।</p>
<p>राठौड़ ने कहा कि पार्टी पंचायत चुनाव के लिए संगठनात्मक स्तर पर पूरी तैयारी कर रही है। संभाग, जिला और मंडल स्तर तक पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारियां सौंपते हुए चुनावी कार्यक्रमों को आगे बढ़ाया जाएगा।</p>
<h2>मेयर चुनाव और क्रॉस वोटिंग पर कांग्रेस को घेरा</h2>
<p>महापौर चुनाव में संभावित क्रॉस वोटिंग से जुड़े सवाल पर मदन राठौड़ ने कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पहले भाजपा पर चुनावी प्रबंधन को लेकर आरोप लगाती थी, लेकिन अब स्वयं अपने पक्ष में क्रॉस वोटिंग होने का दावा कर रही है।</p>
<p>राठौड़ ने आरोप लगाया कि कांग्रेस भाजपा पार्षदों से क्रॉस वोटिंग करवाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस के किसी भी प्रयास से परिणाम नहीं बदलेगा और भाजपा स्पष्ट बहुमत के साथ अपने महापौर बनाएगी।</p>
<h2>सभी 41 जिला परिषदों में बहुमत का लक्ष्य</h2>
<p>भाजपा के पंचायत चुनाव प्रभारी एवं राष्ट्रीय महामंत्री हरीश द्विवेदी ने कहा कि राजस्थान की जनता ने हालिया चुनावों के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की नीतियों पर भरोसा जताया है। उन्होंने इसे राष्ट्र प्रथम की भावना और राज्य सरकार के कामकाज के प्रति समर्थन बताया।</p>
<p>द्विवेदी ने दावा किया कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के कार्यकाल में किए गए कार्यों पर प्रदेश की जनता ने अपनी मुहर लगाई है। उन्होंने इसके लिए मतदाताओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि पार्टी अब पंचायत चुनाव में सभी 41 जिला परिषदों में बहुमत हासिल करने के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रही है।</p>
<h2>निर्दलीय चुनाव लड़ने वाले कार्यकर्ताओं की वापसी</h2>
<p>हरीश द्विवेदी ने कहा कि नगर निकाय चुनावों में पार्षद पद पर 40 से 42 प्रतिशत सफलता को भी बड़ी उपलब्धि माना जाता है। राजस्थान में टिकट वितरण के दौरान भाजपा के कुछ कार्यकर्ता नाराज होकर निर्दलीय चुनाव मैदान में उतर गए थे।</p>
<p>उन्होंने दावा किया कि निर्दलीय चुनाव लड़ने वाले भाजपा से जुड़े कई कार्यकर्ता अब वापस पार्टी में आ चुके हैं। पार्टी इन कार्यकर्ताओं को संगठन के साथ जोड़ते हुए पंचायत चुनाव में सामूहिक रूप से काम करेगी।</p>
<h2>यूजीसी विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश का इंतजार</h2>
<p>यूजीसी से जुड़े विवाद के सवाल पर हरीश द्विवेदी ने कहा कि मामला फिलहाल न्यायालय में विचाराधीन है। उनके अनुसार सुप्रीम कोर्ट की ओर से आने वाले आदेश के अनुरूप इस विषय पर विचार और चर्चा की जाएगी।</p>
<p>द्विवेदी ने कहा कि यूजीसी से जुड़े विषय का चुनाव पर कितना प्रभाव पड़ा, इसे लेकर उनके पास कोई स्पष्ट आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश के सभी समाजों और वर्गों ने भाजपा को समर्थन दिया है।</p>
<h2>वन स्टेट-वन इलेक्शन से मिली नई दिशा: राजेंद्र राठौड़</h2>
<p>भाजपा के वरिष्ठ नेता राजेंद्र राठौड़ ने कहा कि राजस्थान के लोकतांत्रिक इतिहास में पहली बार 309 नगरीय निकायों के चुनाव एक साथ कराए गए। उन्होंने इस व्यवस्था को वन स्टेट-वन इलेक्शन की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताते हुए कहा कि इससे प्रदेश की लोकतांत्रिक प्रक्रिया को नई दिशा मिली है।</p>
<p>राठौड़ ने बताया कि भाजपा सरकार ने पहली बार प्रदेश स्तर पर निकाय चुनाव के लिए संकल्प पत्र जारी किया। इसके बाद प्रत्येक निकाय में पार्टी कार्यकर्ताओं ने संकल्प पत्र में किए गए वादों और प्रस्तावों को मतदाताओं तक पहुंचाने का काम किया।</p>
<p>उन्होंने दावा किया कि प्रदेश के शहरी मतदाताओं ने भाजपा को व्यापक समर्थन दिया है। तीस से अधिक निकायों में भाजपा प्रत्याशियों के निर्विरोध निर्वाचन को भी उन्होंने पार्टी के प्रति जनता के भरोसे का संकेत बताया।</p>
<h2>कांग्रेस की चुनावी तैयारियों पर उठाए सवाल</h2>
<p>राजेंद्र राठौड़ ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि निकाय चुनाव के दौरान विपक्षी दल ने न तो प्रभावी घोषणा पत्र जारी किया और न ही जिला स्तर पर पर्याप्त संगठनात्मक बैठकें आयोजित कीं। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं की सक्रिय भागीदारी भी चुनाव प्रचार में दिखाई नहीं दी।</p>
<p>उन्होंने कहा कि भाजपा ने संगठनात्मक ढांचे, कार्यकर्ताओं की सक्रियता और सरकार के कामकाज के आधार पर चुनाव लड़ा, जबकि कांग्रेस चुनावी मैदान में प्रभावी रणनीति प्रस्तुत नहीं कर सकी।</p>
<h2>दिल्ली विश्वविद्यालय चुनाव का भी किया उल्लेख</h2>
<p>राजेंद्र राठौड़ ने दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव परिणाम का उल्लेख करते हुए कांग्रेस और एनएसयूआई पर भी निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि देश के युवाओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों पर विश्वास व्यक्त किया है और चुनाव परिणाम से विद्यार्थियों के राजनीतिक रुझान का संकेत मिला है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि देशभर के विद्यार्थी दिल्ली विश्वविद्यालय में अध्ययन करते हैं। ऐसे में वहां के चुनाव परिणाम को युवाओं की राजनीतिक सोच के एक संकेत के रूप में देखा जा सकता है।</p>
<h2>संगठनात्मक रणनीति और कार्यक्रमों पर चर्चा</h2>
<p>बैठक में भाजपा के सभी संभाग प्रभारी और प्रदेश संगठन के पदाधिकारी उपस्थित रहे। पार्टी नेताओं ने पंचायत चुनाव की तैयारियों, क्षेत्रवार राजनीतिक परिस्थितियों, कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारियों और मतदाताओं तक पहुंचने के लिए आयोजित किए जाने वाले आगामी कार्यक्रमों पर चर्चा की।</p>
<p>भाजपा ने पंचायत चुनाव में सभी 41 जिला परिषदों में बहुमत हासिल करने का लक्ष्य रखा है। हालांकि इन दावों की वास्तविक परीक्षा चुनाव परिणामों के बाद ही होगी।</p>]]></content:encoded>
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  </item>
  <item>
    <title>सिरोही में 24 से 27 सितंबर तक होगा आर्ट ऑफ लिविंग का एडवांस मेडिटेशन कोर्स</title>
    <link>https://thinq360.com/art-of-living-advanced-meditation-course-sirohi-september-2026</link>
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    <pubDate>Sun, 20 Sep 2026 19:32:22 +0530</pubDate>
    <dc:creator>गणपत सिंह मांडोली</dc:creator>
    <category>राज्य</category>
    <description><![CDATA[सिरोही स्थित KR कृषि फार्म में आर्ट ऑफ लिविंग का चार दिवसीय एडवांस मेडिटेशन कोर्स आयोजित होगा। बेसिक अथवा हैप्पीनेस प्रोग्राम पूरा कर चुके साधक इसमें ध्यान, मौन, साधना और श्वास आधारित प्रक्रियाओं का अभ्यास कर सकेंगे।]]></description>
    <content:encoded><![CDATA[<p><strong>सिरोही |</strong> आर्ट ऑफ लिविंग की ओर से साधकों के लिए चार दिवसीय एडवांस मेडिटेशन कोर्स का आयोजन 24 से 27 सितंबर 2026 तक सिरोही स्थित KR कृषि फार्म में किया जाएगा। कार्यक्रम में शामिल होने वाले प्रतिभागियों की रिपोर्टिंग 23 सितंबर को होगी।</p>
<h2>प्राकृतिक वातावरण में होगी ध्यान-साधना</h2>
<p>प्राकृतिक वातावरण और हरियाली के बीच आयोजित होने वाले इस विशेष कोर्स में प्रतिभागियों को ध्यान, साधना, मौन और श्वास आधारित प्रक्रियाओं के माध्यम से अपनी साधना को अधिक गहराई देने का अवसर मिलेगा।</p>
<p>कोर्स के दौरान प्रतिभागियों को दैनिक जीवन की व्यस्तता से अलग शांत और सकारात्मक वातावरण में समय बिताने का अवसर मिलेगा। नियमित ध्यान एवं साधना के लिए आवश्यक अनुकूल व्यवस्थाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी।</p>
<h2>हैप्पीनेस प्रोग्राम पूरा करने वाले साधक ले सकेंगे भाग</h2>
<p>यह एडवांस मेडिटेशन कोर्स उन साधकों के लिए निर्धारित है, जिन्होंने आर्ट ऑफ लिविंग का बेसिक कोर्स अथवा हैप्पीनेस प्रोग्राम पूरा किया हुआ है। पात्र साधक निर्धारित पंजीकरण प्रक्रिया पूरी कर कार्यक्रम में शामिल हो सकेंगे।</p>
<h2>आंतरिक शांति और जागरूकता पर रहेगा जोर</h2>
<p>आर्ट ऑफ लिविंग के प्रशिक्षकों द्वारा संचालित इस कार्यक्रम का उद्देश्य प्रतिभागियों को आंतरिक शांति, जागरूकता और ध्यान के अनुभव को गहरा करने का अवसर प्रदान करना है। कोर्स में श्वास आधारित प्रक्रियाओं के साथ मौन और आत्मचिंतन पर भी विशेष जोर रहेगा।</p>
<p>आयोजकों के अनुसार, नियमित साधना के माध्यम से प्रतिभागी अपने मन को शांत करने, वर्तमान क्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने और आध्यात्मिक अनुभव को अधिक गहराई से समझने का प्रयास कर सकेंगे।</p>
<h2>23 सितंबर को होगी रिपोर्टिंग</h2>
<p>आयोजक राम लाल रावल ने बताया कि सिरोही और आसपास के क्षेत्रों के इच्छुक साधक निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार पंजीकरण कर एडवांस मेडिटेशन कोर्स में शामिल हो सकते हैं। पंजीकृत प्रतिभागियों को 23 सितंबर को कार्यक्रम स्थल KR कृषि फार्म में रिपोर्टिंग करनी होगी।</p>]]></content:encoded>
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  </item>
  <item>
    <title>44 साल बाद उसी पद पर पोते की तैनाती, जहां दादा रहे थे DSP</title>
    <link>https://thinq360.com/44-saal-baad-mount-abu-dsp-jitendra-singh-rathore-dada-raghunath-singh-rathore</link>
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    <pubDate>Sun, 20 Sep 2026 12:35:43 +0530</pubDate>
    <dc:creator>गणपत सिंह मांडोली</dc:creator>
    <category>राजस्थान</category>
    <description><![CDATA[]]></description>
    <content:encoded><![CDATA[<p><strong>माउंट आबू ।</strong> पर्यटन नगरी माउंट आबू में पुलिस उपाधीक्षक (DSP) जितेंद्र सिंह राठौड़ की पोस्टिंग एक खास पारिवारिक संयोग लेकर आई है। करीब 44 साल पहले उनके दादा रघुनाथ सिंह राठौड़ इसी पद पर माउंट आबू में सेवाएं दे चुके हैं। अब उसी पद और उसी शहर में पोते ने जिम्मेदारी संभाली है।<img src="https://d2uvd0bcf4ztg.cloudfront.net/uploads/images/WhatsApp_Image_2026-09-20_at_12_01_59_PM.webp" alt="" width="1280" height="959"></p>
<p><br>जोधपुर जिले के गिलाकोर गांव निवासी राठौड़ परिवार के लिए यह महज एक प्रशासनिक नियुक्ति नहीं, बल्कि दो पीढ़ियों को जोड़ने वाला यादगार संयोग बन गया है।<img src="https://d2uvd0bcf4ztg.cloudfront.net/uploads/images/WhatsApp_Image_2026-09-20_at_11_59_52_AM.webp" alt="" width="1190" height="1322"></p>
<p><br><strong>करीब एक माह पहले संभाला कार्यभार</strong><br>जितेंद्र सिंह राठौड़ ने करीब एक माह पहले माउंट आबू DSP का कार्यभार संभाला। संयोग से उनके दादा दिवंगत रघुनाथ सिंह राठौड़ वर्ष 1981-82 में माउंट आबू में DSP पद पर तैनात रहे थे। करीब 44 वर्ष बाद उसी पद पर पोते की तैनाती ने परिवार से जुड़ी पुरानी यादों को फिर से ताजा कर दिया।</p>
<p><br><strong>बदला शहर, बदली चुनौतियां&hellip; जिम्मेदारी वही</strong><br>आज माउंट आबू देश-विदेश के पर्यटकों का प्रमुख आकर्षण है। ऐसे में DSP के सामने कानून-व्यवस्था के साथ पर्यटकों की सुरक्षा, यातायात व्यवस्था और स्थानीय लोगों के साथ पुलिस समन्वय जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां हैं।&nbsp;</p>
<p>चार दशक से अधिक समय में माउंट आबू का स्वरूप और पुलिसिंग की चुनौतियां जरूर बदली हैं, लेकिन आमजन की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी आज भी वही है। दादा ने जहां वर्दी में जिम्मेदारी निभाई, 44 साल बाद उसी जगह पोते ने संभाली कमान&mdash;राठौड़ परिवार के लिए यह पदस्थापन एक यादगार संयोग बन गया है।</p>]]></content:encoded>
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  </item>
  <item>
    <title>बीजेपी ने बनाया 33 निर्विरोध बोर्ड का रिकॉर्ड</title>
    <link>https://thinq360.com/rajasthan-nikay-chunav-2026-bjp-unopposed-board-record</link>
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    <pubDate>Sun, 20 Sep 2026 11:25:55 +0530</pubDate>
    <dc:creator>जोगेन्द्र सिंह शेखावत</dc:creator>
    <category>राजस्थान</category>
    <description><![CDATA[राजस्थान के 309 नगरीय निकाय चुनावों में बीजेपी ने 33 निकायों में निर्विरोध बोर्ड गठित कर नया रिकॉर्ड बनाया है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में बीजेपी ने पिछली कांग्रेस सरकार के 11 निर्विरोध बोर्डों के आंकड़े को पीछे छोड़ते हुए शानदार जीत दर्ज की है।]]></description>
    <content:encoded><![CDATA[<p><strong>राजस्थान | </strong> राजस्थान में हाल ही में संपन्न हुए 309 नगरीय निकाय चुनाव 2026 के नतीजों में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने निर्विरोध बोर्ड बनाने के मामले में एक नया रिकॉर्ड कायम किया है। प्रदेश की वर्तमान मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व वाली राज्य सरकार के कार्यकाल में बिना किसी मुकाबले के यानी निर्विरोध रूप से 33 निकायों में बोर्ड गठित हुए हैं। यह उपलब्धि पिछली कांग्रेस सरकार के पांच साल के कार्यकाल की तुलना में तीन गुना अधिक है।</p>
<h2>बीजेपी का ऐतिहासिक प्रदर्शन और नया रिकॉर्ड</h2>
<p>राजस्थान के स्थानीय निकाय चुनावों में बीजेपी ने निर्विरोध बोर्ड बनाने के मामले में पिछली सरकार को काफी पीछे छोड़ दिया है।</p>
<p>भजनलाल सरकार के ढाई साल के कार्यकाल में 33 निकायों में बिना किसी मुकाबले के बोर्ड बने हैं।</p>
<p>यह आंकड़ा पिछली कांग्रेस सरकार के पांच साल के कार्यकाल की तुलना में तीन गुना अधिक है।</p>
<p>इस जीत को राज्य सरकार के कामकाज पर जनता की मोहर के रूप में देखा जा रहा है।</p>
<p>बीजेपी ने 30 निकायों पर पूरी तरह से एकतरफा कब्जा जमाया है।</p>
<h3>कांग्रेस बनाम बीजेपी: आंकड़ों का विश्लेषण</h3>
<p>राजस्थान के राजनीतिक इतिहास में स्थानीय निकाय चुनावों के दौरान निर्विरोध बोर्ड बनना हमेशा से सांगठनिक मजबूती का पैमाना माना जाता रहा है।</p>
<p>पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के पांच साल के कार्यकाल में कुल 11 निकायों में बिना किसी मुकाबले के बोर्ड बने थे।</p>
<p>इन 11 बोर्डों में से कांग्रेस के पास 6, बीजेपी के पास 3 और निर्दलीयों के पास 2 बोर्ड आए थे।</p>
<p>मौजूदा बीजेपी सरकार में यह आंकड़ा तीन गुना बढ़कर 33 निकायों तक पहुंच गया है।</p>
<p>इन 33 निर्विरोध बोर्डों में बीजेपी ने अकेले 30 निकायों में जीत हासिल की है।</p>
<p>वहीं कांग्रेस को केवल 2 निकायों में निर्विरोध जीत मिली, जबकि 1 पर बीजेपी समर्थित बोर्ड बना।</p>
<h2>भरतपुर और डीग में बीजेपी का दबदबा</h2>
<p>मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के गृह संभाग भरतपुर और नवगठित जिले डीग में बीजेपी का प्रदर्शन सबसे शानदार रहा है।</p>
<p>आंकड़ों के मुताबिक, इन दोनों जिलों की लगभग 90 प्रतिशत नगरपालिकाओं में बीजेपी अपना बोर्ड बनाने में सफल रही।</p>
<p>विपक्ष इन क्षेत्रों में अपना खाता खोलने के लिए भी संघर्ष करता नजर आया।</p>
<p>बीजेपी समर्थित पार्षदों ने इन क्षेत्रों में अपनी मजबूत पकड़ साबित की है।</p>
<h3>निकायों की संख्या और चुनावी प्रक्रिया</h3>
<p>इस बार प्रशासनिक पुनर्गठन के बाद कुल 309 नगरीय निकायों में एक साथ मतदान कराया गया था।</p>
<p>इसमें 10 नगर निगम, 47 नगर परिषद और 252 नगरपालिकाएं शामिल थीं।</p>
<p>पिछली कांग्रेस सरकार के समय केवल 196 नगरीय निकायों में चुनाव आयोजित हुए थे।</p>
<p>निकायों की संख्या अधिक होने के बावजूद बीजेपी ने जमीनी स्तर पर अपनी राजनीतिक पकड़ को और अधिक मजबूत किया है।</p>
<h2>जीत के पीछे के मुख्य कारण</h2>
<p>राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, ईआरसीपी (ERCP) परियोजना को धरातल पर उतारने का सीधा फायदा बीजेपी को मिला है।</p>
<p>पूर्वी राजस्थान के जिलों जैसे भरतपुर, डीग, धौलपुर और करौली में पेयजल योजनाओं का सकारात्मक असर दिखा।</p>
<p>शहरी विकास परियोजनाओं और बुनियादी ढांचे के लिए जारी बजट ने भी मतदाताओं को प्रभावित किया।</p>
<p>सड़कों के निर्माण और स्वच्छता अभियानों के लिए जारी किए गए बजट का सकारात्मक असर मतदान के रुख में देखने को मिला।</p>
<h3>संगठनात्मक रणनीति और भविष्य की राह</h3>
<p>बीजेपी संगठन ने असंतुष्ट कार्यकर्ताओं और स्थानीय दावेदारों को साधने के लिए विशेष रणनीति अपनाई थी।</p>
<p>इसी रणनीति के कारण 30 से अधिक स्थानों पर विपक्षी दल अपने उम्मीदवार तक खड़े नहीं कर सके।</p>
<p>बीजेपी के पन्ना प्रमुख और बूथ स्तर के नेटवर्क की यह एक बड़ी सफलता मानी जा रही है।</p>
<p>अब इन निकायों में नए अध्यक्षों और सभापतियों के शपथ ग्रहण की तैयारियां शुरू हो गई हैं।</p>
<p>बीजेपी कैडर में इस जीत से आगामी पंचायत चुनावों के लिए नया उत्साह देखने को मिल रहा है।</p>
<p>कांग्रेस के लिए इन नतीजों को एक बड़े झटके के रूप में देखा जा रहा है।</p>
<p style="display: flex; align-items: center; gap: 4px; font-style: italic; font-size: 0.65em; color: #94a3b8; font-weight: normal; margin-top: 20px;">*Edit with Google AI Studio</p>]]></content:encoded>
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  </item>
  <item>
    <title>अजमेर में एक ही परिवार के 3 लोगों ने जहर खाकर दी जान</title>
    <link>https://thinq360.com/ajmer-family-suicide-poison-debt-investigation</link>
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    <pubDate>Sun, 20 Sep 2026 11:21:43 +0530</pubDate>
    <dc:creator>जोगेन्द्र सिंह शेखावत</dc:creator>
    <category>राजस्थान</category>
    <description><![CDATA[अजमेर के गढ़ी मलियान में शनिवार रात एक व्यवसायी, उनकी पत्नी और 20 वर्षीय बेटी ने जहर खा लिया। अस्पताल में इलाज के दौरान तीनों की मौत हो गई। घटना से इलाके में सनसनी है।]]></description>
    <content:encoded><![CDATA[<h2>अजमेर में दिल दहला देने वाली घटना</h2>
<p><strong>अजमेर | </strong> राजस्थान के अजमेर जिले में एक ही परिवार के तीन सदस्यों द्वारा आत्महत्या करने का मामला सामने आया है।</p>
<p>यह घटना आदर्श नगर थाना क्षेत्र के गढ़ी मलियान इलाके में शनिवार रात को घटित हुई।</p>
<p>एक व्यवसायी ने अपनी पत्नी और 20 साल की जवान बेटी के साथ कथित तौर पर जहर का सेवन कर लिया।</p>
<p>तीनों को गंभीर हालत में अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।</p>
<h3>मृतकों का विवरण</h3>
<p>पुलिस ने मृतकों की पहचान उजागर कर दी है।</p>
<p>मृतकों में 59 वर्षीय अशोक शर्मा शामिल हैं, जो पेशे से फर्नीचर व्यवसायी थे।</p>
<p>उनके साथ उनकी 52 वर्षीय पत्नी इंद्रा शर्मा और 20 वर्षीय बेटी दीक्षा शर्मा ने भी दम तोड़ दिया।</p>
<p>इस घटना के बाद से पूरे गढ़ी मलियान इलाके में मातम पसरा हुआ है।</p>
<h2>जहर पीने की खौफनाक रात</h2>
<p>जानकारी के मुताबिक, यह घटना शनिवार रात करीब 7:30 से 8:00 बजे के बीच हुई।</p>
<p>परिवार के तीनों सदस्यों ने जहर की गोलियां पानी में मिलाकर पी ली थीं।</p>
<p>जहर का असर होते ही तीनों की तबीयत तेजी से बिगड़ने लगी।</p>
<p>आसपास के लोगों और परिजनों ने उन्हें तुरंत जवाहरलाल नेहरू (जेएलएन) अस्पताल पहुंचाया।</p>
<h3>अंतिम फोन कॉल: 'अब बात नहीं होगी'</h3>
<p>घटना को अंजाम देने से पहले अशोक शर्मा ने एक फोन कॉल किया था।</p>
<p>उन्होंने जयपुर के फुलेरा में रहने वाले अपने भांजे निर्मल को फोन लगाया।</p>
<p>निर्मल की पत्नी ने जब फोन उठाया, तो अशोक ने भारी मन से कहा, "अब बात नहीं होगी, अलविदा।"</p>
<p>यह सुनकर भांजे का परिवार डर गया और उन्होंने तुरंत अजमेर में संपर्क किया।</p>
<h2>पड़ोसियों ने देखा खौफनाक मंजर</h2>
<p>अशोक के भांजे ने अजमेर में रहने वाले उनके पड़ोसी गुरुदत्त को फोन कर घर जाने को कहा।</p>
<p>जब गुरुदत्त अशोक शर्मा के घर पहुंचे, तो वहां का नजारा देख उनके होश उड़ गए।</p>
<p>अशोक, इंद्रा और दीक्षा तीनों बेड पर पड़े तड़प रहे थे।</p>
<p>पड़ोसियों ने बिना देरी किए उन्हें अस्पताल पहुंचाया, लेकिन जहर शरीर में फैल चुका था।</p>
<h3>बेटे की आंखों के सामने उजड़ा संसार</h3>
<p>इस दुखद घटना के समय अशोक शर्मा का बेटा गौरव घर में ही मौजूद था।</p>
<p>गौरव जयपुर की एक निजी कंपनी में कार्यरत है और दो दिन पहले ही अजमेर आया था।</p>
<p>उसकी आंखों के सामने उसके माता-पिता और बहन ने दम तोड़ दिया।</p>
<p>इस सदमे को गौरव बर्दाश्त नहीं कर सका और वह अस्पताल में ही बेहोश हो गया।</p>
<h2>लाखों का कर्ज और मानसिक तनाव</h2>
<p>अशोक शर्मा फर्नीचर का काम करते थे और काफी समय से परेशान चल रहे थे।</p>
<p>पड़ोसियों ने पुलिस को बताया कि अशोक पर लाखों रुपये का कर्ज था।</p>
<p>माना जा रहा है कि इसी कर्ज के बोझ और मानसिक तनाव के कारण परिवार ने यह कदम उठाया।</p>
<p>हालांकि, पुलिस ने अभी तक आधिकारिक तौर पर कर्ज को मुख्य वजह नहीं माना है।</p>
<h3>पुलिस की कार्रवाई और जांच</h3>
<p>घटना की सूचना मिलते ही आदर्श नगर थाना सीआई ओमप्रकाश मीणा पुलिस टीम के साथ पहुंचे।</p>
<p>एफएसएल (FSL) टीम ने भी घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया और साक्ष्य जुटाए।</p>
<ul>
<li>पुलिस परिवार के अन्य सदस्यों से पूछताछ कर रही है।</li>
<li>घटनास्थल पर किसी सुसाइड नोट की तलाश की जा रही है।</li>
<li>पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद मौत के सही कारणों का पता चलेगा।</li>
</ul>
<p>थाना प्रभारी ने कहा कि अभी किसी नतीजे पर पहुंचना जल्दबाजी होगी, जांच जारी है।</p>
<p style="display: flex; align-items: center; gap: 4px; font-style: italic; font-size: 0.65em; color: #94a3b8; font-weight: normal; margin-top: 20px;">*Edit with Google AI Studio</p>]]></content:encoded>
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  </item>
  <item>
    <title>जालोर में सभापति चुनाव से पहले घमासान, पाराशर के गंभीर आरोप</title>
    <link>https://thinq360.com/jalore-municipal-council-election-parashar-bjp-allegations</link>
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    <pubDate>Sun, 20 Sep 2026 10:41:54 +0530</pubDate>
    <dc:creator>Pradeep Beedawat</dc:creator>
    <category>राजनीति</category>
    <description><![CDATA[जालोर नगर निकाय चुनाव के बाद सभापति पद के लिए सियासी पारा चढ़ गया है। कांग्रेस नेता पुखराज पाराशर ने भाजपा पर सत्ता के दुरुपयोग और पार्षदों की घेराबंदी का आरोप लगाया है।]]></description>
    <content:encoded><![CDATA[<p><strong>जालोर | </strong> जालोर नगर निकाय चुनाव के नतीजों के बाद अब सभापति पद को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। कांग्रेस नेता पुखराज पाराशर ने भाजपा पर गंभीर आरोप लगाए हैं।</p>
<p>पूर्ववर्ती सरकार में राजस्थान जन अभाव अभियोग निराकरण समिति के अध्यक्ष रहे पुखराज पाराशर ने एक प्रेस वार्ता आयोजित की। इसमें उन्होंने भाजपा पर सत्ता के दुरुपयोग का दावा किया।</p>
<h2>भाजपा पर पार्षदों को धमकाने का आरोप</h2>
<p>पाराशर ने आरोप लगाया कि कांग्रेस पार्षदों और उनके परिजनों को डराने-धमकाने की कोशिशें की जा रही हैं। उनके अनुसार, पार्षदों के घरों के बाहर निगरानी रखी जा रही है।</p>
<p>उन्होंने दावा किया कि भाजपा द्वारा पार्षदों को पैसों का प्रलोभन भी दिया जा रहा है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस के सभी 19 पार्षद पूरी तरह एकजुट हैं।</p>
<h3>निर्दलीयों के समर्थन से बोर्ड बनाने का दावा</h3>
<p>कांग्रेस नेता ने विश्वास जताया कि निर्दलीय पार्षदों के समर्थन से जालोर में कांग्रेस अपना बोर्ड बनाएगी। उन्होंने कहा कि जनता ने कांग्रेस को 19 और भाजपा को 14 सीटें दी हैं।</p>
<p>पाराशर ने भाजपा को जनता के फैसले का सम्मान करने की नसीहत दी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के पार्षद किसी भी सूरत में बिकने वाले नहीं हैं।</p>
<h2>सुरक्षा और निष्पक्ष चुनाव की मांग</h2>
<p>प्रेस वार्ता के दौरान पाराशर ने दावा किया कि दो गाड़ियां उनका पीछा कर रही हैं। उन्होंने इन संदिग्ध लोगों की पहचान होने की बात कही और मुकदमा दर्ज कराने की चेतावनी दी।</p>
<p>कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने इस संबंध में जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपा है। उन्होंने प्रशासन से पूरी चुनाव प्रक्रिया को निष्पक्ष और सुरक्षित बनाने की मांग की है।</p>
<h3>अधिकारियों की भूमिका पर उठाए सवाल</h3>
<p>पाराशर ने कुछ सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों पर पक्षपात करने का आरोप लगाया। उन्होंने चेतावनी दी कि पक्षपात करने वाले अधिकारियों की पहचान कर ली गई है और मामला आगे उठाया जाएगा।</p>
<p>उन्होंने कहा कि सत्ता स्थायी नहीं होती, इसलिए अधिकारियों को अपनी जिम्मेदारी निष्पक्षता से निभानी चाहिए। उन्होंने भाजपा की उम्मीदवार चयन प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े किए।</p>
<h2>मतदान में गड़बड़ी और आरटीआई का मुद्दा</h2>
<p>पाराशर ने राजेंद्र नगर क्षेत्र में मतदान के दौरान बूथ पर कब्जे की कोशिश और फर्जी मतदान का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस के पास इसकी वीडियो रिकॉर्डिंग उपलब्ध है।</p>
<p>उन्होंने आरोप लगाया कि सीसीटीवी फुटेज मांगने के लिए आरटीआई लगाने वाले कांग्रेस पदाधिकारी पर दबाव बनाया जा रहा है। उन्होंने सवाल किया कि गड़बड़ी नहीं हुई तो फुटेज देने में आपत्ति क्यों है।</p>
<h2>विकास कार्यों और भ्रष्टाचार पर घेरा</h2>
<p>निकाय चुनाव के साथ-साथ पाराशर ने जालोर के विकास कार्यों पर भी राज्य सरकार को घेरा। उन्होंने मेडिकल कॉलेज और किले की सड़क के काम में देरी पर आपत्ति जताई।</p>
<p>उन्होंने आरोप लगाया कि मेडिकल कॉलेज को पीपीपी मोड पर ले जाना परियोजना को लटकाने की कोशिश है। उन्होंने सरकार से पूर्व में स्वीकृत कार्यों को जल्द पूरा करने की मांग की।</p>
<h3>जमीन आवंटन में अनियमितता का दावा</h3>
<p>पाराशर ने जमीन आवंटन और सायला में फर्जी रजिस्ट्रियों के मामलों में भी भ्रष्टाचार के आरोप लगाए। उन्होंने नगर निकाय के पुराने रिकॉर्ड रूम में आग लगने की घटना की जांच की मांग की।</p>
<p>उन्होंने मतदाताओं से अपील की कि वे अपने पार्षदों से शहर के हित में फैसला लेने की अपेक्षा रखें। उन्होंने धनबल के इस्तेमाल से शहर पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ के प्रति आगाह किया।</p>
<p style="display: flex; align-items: center; gap: 4px; font-style: italic; font-size: 0.65em; color: #94a3b8; font-weight: normal; margin-top: 20px;">*Edit with Google AI Studio</p>]]></content:encoded>
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  </item>
  <item>
    <title>जयपुर मेयर चुनाव: भाजपा ने सुनील कोठारी को बनाया प्रत्याशी, कांग्रेस से सुनीता मावर मैदान में</title>
    <link>https://thinq360.com/jaipur-mayor-election-bjp-sunil-kothari-congress-sunita-mawar</link>
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    <pubDate>Sat, 19 Sep 2026 17:16:57 +0530</pubDate>
    <dc:creator>Pradeep Beedawat</dc:creator>
    <category>राजनीति</category>
    <description><![CDATA[जयपुर नगर निगम में भाजपा ने वार्ड संख्या 112 से निर्वाचित सुनील कोठारी को महापौर पद का उम्मीदवार बनाया है। कांग्रेस की अधिकृत प्रत्याशी सुनीता मावर हैं। नगर निगम के 150 वार्डों में भाजपा के 78, कांग्रेस के 57 और 15 निर्दलीय पार्षद हैं।]]></description>
    <content:encoded><![CDATA[<p><strong>जयपुर |</strong> जयपुर नगर निगम के नए महापौर की ताजपोशी की उलटी गिनती शुरू हो गई है। भारतीय जनता पार्टी ने तमाम अटकलों पर विराम लगाते हुए परकोटा क्षेत्र के वार्ड संख्या 112 से नवनिर्वाचित पार्षद सुनील कोठारी को महापौर पद का उम्मीदवार बनाया है। भाजपा प्रदेश महामंत्री श्रवण बगड़ी ने उनके नाम की आधिकारिक घोषणा की।</p>
<p>दूसरी ओर कांग्रेस ने वार्ड संख्या 118 से निर्वाचित सुनीता मावर को महापौर पद का अधिकृत प्रत्याशी बनाया है। नगर निगम में भाजपा के पास स्पष्ट बहुमत होने के कारण सुनील कोठारी की स्थिति मजबूत मानी जा रही है। हालांकि महापौर का अंतिम फैसला निर्वाचन प्रक्रिया और मतदान के बाद ही होगा।</p>
<h2>पार्षदों से रायशुमारी के बाद नाम तय</h2>
<p>भाजपा ने महापौर पद का प्रत्याशी तय करने से पहले अपने सभी नवनिर्वाचित पार्षदों से वरीयता के आधार पर तीन-तीन नाम मांगे थे। पार्षदों की राय, विधायकों की पसंद, संगठनात्मक अनुभव, वरिष्ठता और राजनीतिक समीकरणों पर विचार करने के बाद पार्टी नेतृत्व ने सुनील कोठारी के नाम पर मुहर लगाई।</p>
<p>भाजपा के पार्षदों को पुष्कर स्थित द सूर्या गोल्डन पैलेस होटल में ठहराया गया था। प्रत्याशी का नाम तय होने के बाद सुनील कोठारी को जयपुर बुलाया गया। नामांकन प्रस्तुत करने के बाद उन्होंने मोती डूंगरी गणेश मंदिर पहुंचकर दर्शन भी किए।</p>
<h2>कौन हैं सुनील कोठारी?</h2>
<p>सुनील कोठारी जयपुर के जाने-माने ज्वेलरी व्यवसायी हैं और लंबे समय से भारतीय जनता पार्टी के संगठन में सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं। वे भाजपा जयपुर शहर अध्यक्ष, पार्टी के प्रदेश सचिव और प्रदेश उपाध्यक्ष जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं। वर्तमान में वे भाजपा प्रदेश कार्यसमिति के सदस्य हैं।</p>
<p>सुनील कोठारी वार्ड संख्या 112 से पार्षद निर्वाचित हुए हैं। यह वार्ड किशनपोल विधानसभा क्षेत्र में आता है, जहां से कांग्रेस के अमीन कागजी विधायक हैं। कोठारी के चयन को भाजपा के संगठनात्मक अनुभव और राजनीतिक समीकरणों के बीच संतुलन साधने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।</p>
<h2>डिप्टी मेयर पद के लिए भवानी सिंह राजावत का नाम</h2>
<p>महापौर प्रत्याशी के चयन के साथ भाजपा की ओर से उपमहापौर पद के लिए भवानी सिंह राजावत के नाम पर भरोसा जताए जाने की जानकारी सामने आई है। पार्टी महापौर और उपमहापौर के पदों के माध्यम से संगठनात्मक तथा सामाजिक समीकरणों में संतुलन स्थापित करने की रणनीति पर काम कर रही है।</p>
<h2>कांग्रेस से सुनीता मावर अधिकृत प्रत्याशी</h2>
<p>कांग्रेस की ओर से सुनीता मावर को महापौर पद का अधिकृत प्रत्याशी बनाया गया है। उनके अतिरिक्त सुनीता मेठी और दशरथ अटल ने भी कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में नामांकन पत्र प्रस्तुत किए हैं। पार्टी का अधिकृत सिंबल सुनीता मावर को मिलने के कारण अन्य दोनों दावेदारों के नामांकन पर अंतिम निर्णय संवीक्षा और निर्वाचन नियमों के अनुसार होगा।</p>
<p>सुनीता मावर ने दावा किया है कि कांग्रेस जयपुर नगर निगम में अपना बोर्ड बनाने का प्रयास करेगी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्षद एकजुट हैं और पार्टी शहर की व्यवस्थाओं में सुधार के मुद्दे पर चुनाव मैदान में उतरी है।</p>
<h2>भाजपा के पास 78 सीटों का बहुमत</h2>
<p>जयपुर नगर निगम के कुल 150 वार्डों में भाजपा ने 78 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया है। कांग्रेस के 57 पार्षद निर्वाचित हुए हैं, जबकि 15 वार्डों में निर्दलीय प्रत्याशियों ने जीत दर्ज की है।</p>
<p>बहुमत के लिए 76 पार्षदों का समर्थन आवश्यक है। भाजपा के पास अपने दम पर 78 पार्षद होने के कारण उसका बोर्ड बनना लगभग तय माना जा रहा है। भाजपा नेताओं ने पार्टी प्रत्याशी को 100 से अधिक मत मिलने का दावा भी किया है। हालांकि क्रॉस वोटिंग और अतिरिक्त समर्थन से जुड़े दावों की वास्तविकता मतदान के बाद ही स्पष्ट होगी।</p>
<h2>AIMIM पार्षद ने लगाया नामांकन नहीं करने देने का आरोप</h2>
<p>वार्ड संख्या 146 से निर्वाचित AIMIM पार्षद फिरोजा भी महापौर पद के लिए नामांकन दाखिल करने पहुंची थीं। उन्होंने आरोप लगाया कि निर्धारित समय पर पहुंचने के बावजूद प्रशासन ने उन्हें नामांकन पत्र प्रस्तुत नहीं करने दिया। इस आरोप पर निर्वाचन प्रशासन का विस्तृत पक्ष सामने आना बाकी है।</p>
<h2>अब मतदान और अंतिम परिणाम पर नजर</h2>
<p>संख्या बल भाजपा के पक्ष में होने के बावजूद दोनों प्रमुख राजनीतिक दल अपने पार्षदों को एकजुट रखने और अतिरिक्त समर्थन जुटाने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। भाजपा सुनील कोठारी की जीत को लेकर आश्वस्त दिखाई दे रही है, जबकि कांग्रेस की सुनीता मावर ने भी चुनावी मुकाबले में बने रहने का दावा किया है।</p>
<p>महापौर चुनाव का आधिकारिक परिणाम सामने आने के बाद ही साफ होगा कि जयपुर नगर निगम की कमान किसके हाथ में जाती है। फिलहाल 78 पार्षदों के बहुमत के कारण भाजपा प्रत्याशी सुनील कोठारी का पलड़ा भारी माना जा रहा है।</p>]]></content:encoded>
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  </item>
  <item>
    <title>माउंट आबू में गणपति बप्पा को विदाई, 40 से अधिक प्रतिमाओं के साथ निकली भव्य शोभायात्रा</title>
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    <pubDate>Sat, 19 Sep 2026 17:02:48 +0530</pubDate>
    <dc:creator>किशन वासवानी</dc:creator>
    <category>राजस्थान</category>
    <description><![CDATA[माउंट आबू में शुक्रवार देर रात गणेशोत्सव का समापन हुआ। शहर के 40 से अधिक स्थानों से गणपति प्रतिमाएं धड़ाधड़ महादेव मंदिर लाई गईं। वहां से भव्य शोभायात्रा निकाली गई और कमला नेहरू पार्क के पीछे प्रशासन एवं गणपति महोत्सव समिति की देखरेख में प्रतिमाओं का विसर्जन किया गया।]]></description>
    <content:encoded><![CDATA[<p><strong>माउंट आबू |</strong> पर्वतीय पर्यटन स्थल माउंट आबू में चल रहे गणेशोत्सव का शुक्रवार देर रात श्रद्धा और उल्लास के साथ समापन हुआ। शहरभर के विभिन्न स्थानों पर स्थापित गणपति प्रतिमाओं को भव्य शोभायात्रा के माध्यम से कमला नेहरू पार्क के पीछे स्थित विसर्जन स्थल तक लाया गया। यहां प्रशासन और गणपति महोत्सव समिति की देखरेख में विधिवत पूजन के बाद प्रतिमाओं का क्रमबद्ध विसर्जन किया गया।</p>
<h2>40 से अधिक स्थानों से पहुंचीं गणपति प्रतिमाएं</h2>
<p>गणपति विसर्जन से पहले शहर के 40 से अधिक स्थानों पर स्थापित प्रतिमाओं को धड़ाधड़ महादेव मंदिर परिसर में लाया गया। यहां सभी प्रतिमाओं को निर्धारित क्रम में रखा गया और विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई।</p>
<p>पूजन के बाद सभी गणपति प्रतिमाओं को शोभायात्रा के रूप में विसर्जन स्थल के लिए रवाना किया गया। इस दौरान श्रद्धालुओं ने गणपति बप्पा के जयकारे लगाए और अगले वर्ष पुनः आगमन की कामना करते हुए उन्हें भावभीनी विदाई दी।</p>
<h2>शहर के प्रमुख मार्गों से निकली शोभायात्रा</h2>
<p>धड़ाधड़ महादेव मंदिर से प्रारंभ हुई शोभायात्रा महात्मा गांधी पुस्तकालय, रोटरी सर्किल, सब्जी मंडी, नक्की झील मार्ग और तिब्बती मार्केट सहित शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरी।</p>
<p>शोभायात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। धार्मिक गीतों, भजनों और गणपति बप्पा के जयकारों से शहर का वातावरण भक्तिमय हो गया। विभिन्न स्थानों पर नागरिकों ने शोभायात्रा का स्वागत भी किया।</p>
<h2>कमला नेहरू पार्क के पीछे हुआ विसर्जन</h2>
<p>शोभायात्रा विंडरमेयर लेक क्षेत्र स्थित कमला नेहरू पार्क पहुंची। यहां पार्क के पीछे निर्धारित स्थल पर प्रशासन और गणपति महोत्सव समिति के सदस्यों ने प्रतिमाओं को क्रमबद्ध किया।</p>
<p>देर रात तक विधिवत पूजन के बाद सभी प्रतिमाओं का एक-एक कर विसर्जन करवाया गया। भीड़ और प्रतिमाओं की संख्या को देखते हुए विसर्जन स्थल पर विशेष व्यवस्थाएं की गई थीं।</p>
<h2>समिति के सदस्यों ने संभाली व्यवस्थाएं</h2>
<p>गणपति महोत्सव समिति के अध्यक्ष देवेंद्र जानी ने बताया कि शोभायात्रा से लेकर विसर्जन स्थल तक समिति के पदाधिकारी और कार्यकर्ता व्यवस्थाओं में जुटे रहे।</p>
<p>व्यवस्थाओं में उपाध्यक्ष अधिवक्ता बद्रीलाल, देवेंद्र भंडारी, राजकुमार परमार, सचिव सुरेश सिंगर, बहादुर खत्री, आईटी सेल से पर्वत सिंह बारोड़, जिला सह सचिव दीपक त्रिपाठी, तहसील महामंत्री वीरेंद्र सिंह चौहान, जिला संगठन प्रमुख प्रताप सिंह मकवाना, नगर प्रभारी प्रह्लाद जैसवार, सचिन आशुतोष कनौजिया, नगर सह सचिव देवी सिंह दहिया, संगठन मंत्री दीपक कुशवाहा, प्रचारक जितेंद्र बनोड़ा, संयोजक खुशवंत राणा, आईटी सेल के चिराग धनानी और मीडिया प्रभारी अभिषेक थिंगर सहित अनेक कार्यकर्ताओं ने सहयोग किया।</p>
<h2>पुलिस और प्रशासन रहा मुस्तैद</h2>
<p>शोभायात्रा और विसर्जन के दौरान पुलिस एवं प्रशासन की टीम भी मुस्तैद रही। थानाधिकारी दलपत सिंह राठौड़ ने पुलिस टीम के साथ मार्ग तथा विसर्जन स्थल की व्यवस्थाओं की निगरानी की।</p>
<p>शहर के प्रमुख मार्गों पर यातायात और श्रद्धालुओं की भीड़ को व्यवस्थित रखने के लिए समिति के सदस्य पुलिस एवं प्रशासन के साथ समन्वय करते हुए चल रहे थे।</p>
<h2>जयकारों के बीच बप्पा को दी विदाई</h2>
<p>देर रात तक चले विसर्जन कार्यक्रम के दौरान श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना कर गणपति बप्पा को विदाई दी। &lsquo;गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ&rsquo; के जयकारों से विसर्जन स्थल गूंजता रहा।</p>
<p>भव्य शोभायात्रा और प्रतिमाओं के शांतिपूर्ण विसर्जन के साथ माउंट आबू में गणेशोत्सव का समापन हुआ।</p>]]></content:encoded>
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  </item>
  <item>
    <title>शिवगंज अध्यक्ष चुनाव: भाजपा के लिए अग्निपरीक्षा की घड़ी, नजर हटी तो बदल सकता है पूरा खेल</title>
    <link>https://thinq360.com/shivganj-chairperson-election-bjp-test-dinesh-bindal-kundanmal-agarwal</link>
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    <pubDate>Sat, 19 Sep 2026 15:25:53 +0530</pubDate>
    <dc:creator>thinQ360</dc:creator>
    <category>राजनीति</category>
    <description><![CDATA[शिवगंज नगरपालिका में भाजपा 18 पार्षदों और एक निर्दलीय के कथित समर्थन के साथ मजबूत स्थिति में है। इसके बावजूद अध्यक्ष प्रत्याशी के चयन से नाराज दिनेश बिंदल, कांग्रेस की रणनीति और संभावित क्रॉस वोटिंग की चर्चाओं ने 21 सितंबर के मतदान को भाजपा के लिए अग्निपरीक्षा बना दिया है।]]></description>
    <content:encoded><![CDATA[<p><strong>मनोज शर्मा&nbsp;</strong></p>
<p><strong>शिवगंज |</strong> नगरपालिका में किसका बोर्ड बनेगा, इसका फैसला अब कुछ ही घंटों में होने वाला है। मतदान से पहले शहर की राजनीति में जितनी बेचैनी दिखाई दे रही है, उतनी शायद चुनाव परिणाम आने के बाद भी नहीं थी। 18 सीटों के साथ स्पष्ट बढ़त हासिल करने वाली भाजपा के सामने बोर्ड बनाने की चुनौती संख्या जुटाने से अधिक अपने संख्या बल को मतदान तक पूरी तरह एकजुट रखने की है।</p>
<p>कांग्रेस 14 सीटों के साथ बहुमत से दूर है, लेकिन पूर्व विधायक संयम लोढ़ा की सक्रियता और राजेश सोनी की अध्यक्ष पद पर दावेदारी ने मुकाबले को रोचक बना दिया है। पर्दे के पीछे जारी बैठकों और राजनीतिक संपर्कों के कारण यह कहना मुश्किल हो गया है कि मतदान के समय ऊंट किस करवट बैठेगा।</p>
<h2>संख्या बल भाजपा के साथ, फिर भी बेचैनी क्यों?</h2>
<p>नगरपालिका चुनाव में भाजपा ने 18, कांग्रेस ने 14 और निर्दलीय प्रत्याशियों ने तीन सीटों पर जीत दर्ज की। इसके बाद एक निर्दलीय पार्षद के भाजपा खेमे में आने के दावे से भाजपा समर्थित पार्षदों की संख्या 19 तक पहुंच गई।</p>
<p>कागज पर यह आंकड़ा भाजपा को मजबूत स्थिति में खड़ा करता है। इसके बावजूद पार्टी ने अपने पार्षदों की कड़ी बाड़ेबंदी कर रखी है। पिछले राजनीतिक अनुभवों और संभावित क्रॉस वोटिंग की आशंका को देखते हुए भाजपा मतदान तक किसी भी प्रकार का जोखिम नहीं लेना चाहती।</p>
<p>भाजपा के सामने वास्तविक चुनौती बहुमत जुटाने की नहीं, बल्कि उपलब्ध संख्या बल को अंतिम मतदान तक पूरी तरह सुरक्षित रखने की है। यही कारण है कि मजबूत स्थिति में होने के बावजूद पार्टी नेतृत्व लगातार पार्षदों और स्थानीय नेताओं के संपर्क में है।</p>
<h2>अध्यक्ष प्रत्याशी के चयन से बिगड़ा आंतरिक संतुलन</h2>
<p>शिवगंज की राजनीति में सबसे महत्वपूर्ण मोड़ भाजपा के अध्यक्ष पद के प्रत्याशी के चयन के बाद आया। शहर में लंबे समय से चर्चा थी कि पार्टी दिनेश बिंदल को नगरपालिका अध्यक्ष पद का उम्मीदवार बना सकती है।</p>
<p>भाजपा ने अंतिम समय में कुंदनमल अग्रवाल को अपना प्रत्याशी घोषित कर दिया। अग्रवाल का नामांकन दाखिल होने के बाद दिनेश बिंदल का पार्टी कैंप से बाहर निकलकर घर पहुंचना भाजपा के लिए अचानक उत्पन्न हुआ संकट बन गया।</p>
<p>बिंदल की नाराजगी ने पार्टी के भीतर चल रहे स्थानीय राजनीतिक समीकरणों और नेतृत्व के साथ उनके मतभेदों को सार्वजनिक कर दिया। इसके बाद भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने उन्हें मनाने और पार्टी के साथ बनाए रखने के प्रयास शुरू किए।</p>
<h2>सबसे पहले सांसद लुंबाराम चौधरी पहुंचे</h2>
<p>दिनेश बिंदल के कैंप से बाहर निकलने के बाद उन्हें मनाने की कवायद में सबसे पहले सांसद लुंबाराम चौधरी को लगाया गया। सांसद ने बिंदल से बातचीत कर उनसे पार्टी के साथ बने रहने और अध्यक्ष चुनाव में भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में मतदान करने का आग्रह किया।</p>
<p>बताया जा रहा है कि बातचीत के दौरान बिंदल ने स्वयं को पार्टी से अलग नहीं बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे भाजपा से जुड़े हुए हैं और पार्टी के पक्ष में ही मतदान करेंगे। हालांकि कैंप में वापस लौटने को लेकर उन्होंने अपनी नाराजगी बरकरार रखी।</p>
<h2>प्रदेश पदाधिकारियों ने फोन पर की बातचीत</h2>
<p>बिंदल को मनाने के प्रयास केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं रहे। प्रदेश स्तर के पदाधिकारियों ने भी उनसे कई बार फोन पर बातचीत की। बिंदल ने इन चर्चाओं में पार्टी के प्रति अपनी निष्ठा स्पष्ट की, लेकिन स्थानीय नेतृत्व के स्तर पर हुई कथित उपेक्षा को लेकर नाराजगी भी व्यक्त की।</p>
<p>यही स्थिति भाजपा नेतृत्व के लिए चिंता का कारण बनी रही। मामला केवल एक पार्षद की अध्यक्ष पद की दावेदारी तक सीमित नहीं था, बल्कि स्थानीय संगठन, प्रत्याशी चयन और नेतृत्व के साथ समन्वय से भी जुड़ा था।</p>
<h2>मुख्यमंत्री कार्यालय से बातचीत के बाद नरम पड़ा रुख</h2>
<p>दो दिनों तक चली बातचीत के बीच शुक्रवार को मुख्यमंत्री कार्यालय से संपर्क होने के बाद दिनेश बिंदल के रुख में नरमी दिखाई दी। इसके बाद उन्होंने सार्वजनिक बयान जारी कर स्वयं को भाजपा का कट्टर कार्यकर्ता बताया।</p>
<p>बिंदल ने कहा कि वे भाजपा में रहकर जनता की सेवा करते रहेंगे। उनके इस बयान से पार्टी को बड़ी राहत मिली। हालांकि वे पार्टी कैंप में वापस लौटने के लिए तैयार नहीं हुए, इसलिए उनके अंतिम राजनीतिक रुख को लेकर चल रही चर्चाएं पूरी तरह समाप्त नहीं हुईं।</p>
<h2>राज्यमंत्री ओटाराम देवासी ने की लंबी चर्चा</h2>
<p>इसके बाद राज्यमंत्री ओटाराम देवासी स्वयं शिवगंज पहुंचे और दिनेश बिंदल से लंबी बातचीत की। भाजपा के लिए इस मुलाकात को बेहद महत्वपूर्ण माना गया। चर्चा के बाद बिंदल ने क्रॉस वोटिंग की किसी भी संभावना से स्पष्ट इनकार किया।</p>
<p>उन्होंने कहा कि वे 21 सितंबर को केरलेश्वर महादेव मंदिर में पूजा-अर्चना करने के बाद अपने समर्थकों के साथ मतदान केंद्र पहुंचेंगे और भाजपा के पक्ष में मतदान करेंगे।</p>
<p>इस बयान के बाद भाजपा खेमे ने राहत की सांस ली है। इसके बावजूद पिछले कुछ दिनों के घटनाक्रम ने स्पष्ट कर दिया कि मतदान तक प्रत्येक पार्षद के साथ संवाद और राजनीतिक समन्वय बनाए रखना पार्टी के लिए अत्यंत आवश्यक है।</p>
<h2>14 सीटों के बावजूद कांग्रेस ने क्यों बढ़ाई हलचल?</h2>
<p>कांग्रेस के पास 14 पार्षद हैं और वह बहुमत के आंकड़े से दूर है। इसके बावजूद पूर्व विधायक संयम लोढ़ा ने बोर्ड बनाने के प्रयासों को जिस तरह आगे बढ़ाया, उसने भाजपा की सतर्कता बढ़ा दी है।</p>
<p>कांग्रेस की ओर से राजेश सोनी को अध्यक्ष पद के लिए मैदान में उतारना इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। सोनी वार्ड संख्या 35 में भाजपा के राजेंद्र सोलंकी से पार्षद का चुनाव हार चुके हैं, लेकिन अध्यक्ष पद के लिए उनके नामांकन ने पूरे राजनीतिक समीकरण को नया आयाम दे दिया है।</p>
<h2>लोढ़ा की सक्रियता से भाजपा सतर्क</h2>
<p>कांग्रेस के इस राजनीतिक प्रयास को भाजपा ने गंभीरता से लिया है। इसके बाद पार्षदों की बाड़ेबंदी और निगरानी अधिक कड़ी कर दी गई। भाजपा की रणनीति अपने सभी पार्षदों को एकजुट रखते हुए किसी भी संभावित क्रॉस वोटिंग को रोकने की है।</p>
<p>दूसरी ओर हॉर्स ट्रेडिंग को लेकर लगाए जा रहे कयासों को संयम लोढ़ा सार्वजनिक रूप से खारिज कर चुके हैं। उनका कहना है कि कांग्रेस विपक्ष में है और उसका राजनीतिक प्रयास भाजपा का बोर्ड बनने से रोकना है।</p>
<p>लोढ़ा की सक्रियता के कारण अब यह मुकाबला केवल संख्या बल का खेल नहीं रह गया है। यह दोनों दलों की रणनीति, राजनीतिक प्रबंधन और अंतिम क्षण तक अपने समर्थक पार्षदों को साथ रखने की क्षमता की परीक्षा बन गया है।</p>
<h2>कागज पर बहुमत, मतदान तक असली परीक्षा</h2>
<p>भाजपा के पास संख्या बल, संगठन और एक निर्दलीय के समर्थन का दावा है। दूसरी ओर कांग्रेस के पास अपेक्षाकृत कम संख्या है, लेकिन वह भाजपा की आंतरिक नाराजगी और संभावित क्रॉस वोटिंग की उम्मीद के सहारे मुकाबले में बनी हुई है।</p>
<p>दिनेश बिंदल ने भाजपा के पक्ष में मतदान करने की बात कहकर पार्टी नेतृत्व को राहत दी है, लेकिन अध्यक्ष चुनाव में गुप्त मतदान और अंतिम क्षण तक बदलते राजनीतिक समीकरणों के कारण भाजपा अभी भी पूरी तरह निश्चिंत नहीं है।</p>
<p>पार्टी के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह सुनिश्चित करने की है कि उसके सभी पार्षद और समर्थक निर्दलीय मतदान के समय अधिकृत प्रत्याशी कुंदनमल अग्रवाल के साथ खड़े रहें। वहीं कांग्रेस को किसी राजनीतिक उलटफेर के लिए भाजपा खेमे में सेंध लगाने के साथ निर्दलीय पार्षदों का समर्थन भी जुटाना होगा।</p>
<h2>21 सितंबर को खुलेगा सियासी पिटारा</h2>
<p>शिवगंज नगरपालिका अध्यक्ष पद के लिए मतदान 21 सितंबर को होगा। इसी दिन स्पष्ट होगा कि भाजपा अपना संख्या बल सुरक्षित रखते हुए बोर्ड बना पाती है या कांग्रेस पर्दे के पीछे चल रही राजनीतिक रणनीति के जरिए कोई अप्रत्याशित उलटफेर करती है।</p>
<p>फिलहाल भाजपा मजबूत है, लेकिन बीते दिनों के घटनाक्रम ने मुकाबले को साधारण चुनाव से बदलकर राजनीतिक प्रतिष्ठा की लड़ाई बना दिया है। मतदान तक नजर हटी तो पूरा खेल बदल सकता है।</p>]]></content:encoded>
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  </item>
  <item>
    <title>पाली महापौर चुनाव: सुमित्रा, नमिता और राजबाला में त्रिकोणीय मुकाबला; तीन प्रत्याशियों ने नाम वापस लिए</title>
    <link>https://thinq360.com/pali-mayor-election-sumitra-jain-namita-bubkiya-rajbala-hingad</link>
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    <pubDate>Fri, 18 Sep 2026 20:07:57 +0530</pubDate>
    <dc:creator>Pradeep Beedawat</dc:creator>
    <category>राजस्थान</category>
    <description><![CDATA[पाली नगर निगम महापौर चुनाव के लिए नाम वापसी के अंतिम दिन तीन प्रत्याशियों ने मैदान छोड़ दिया। अब कांग्रेस की सुमित्रा जैन, भाजपा की नमिता बुबकिया और कांग्रेस से बगावत कर निर्दलीय उतरीं राजबाला हिंगड़ के बीच त्रिकोणीय मुकाबला होगा। मतदान 21 सितंबर को होगा।]]></description>
    <content:encoded><![CDATA[<p><strong>पाली |</strong> नगर निगम महापौर पद के चुनाव की तस्वीर नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद साफ हो गई है। अंतिम दिन शुक्रवार को दोपहर तीन बजे तक कुसुम सोनी, पुष्पा सोमनानी और राशिदा बानो ने अपने नामांकन वापस ले लिए। इसके बाद अब महापौर पद के लिए कांग्रेस की सुमित्रा जैन, भाजपा की नमिता बुबकिया और निर्दलीय राजबाला हिंगड़ के बीच त्रिकोणीय मुकाबला होगा।</p>
<p>नगर निगम के निर्वाचित पार्षद 21 सितंबर को मतदान कर पाली का नया महापौर चुनेंगे। कांग्रेस से टिकट नहीं मिलने के बाद निर्दलीय मैदान में उतरीं राजबाला हिंगड़ की मौजूदगी ने मुकाबले को रोचक बना दिया है।</p>
<h2>तीन प्रत्याशियों ने चुनाव मैदान छोड़ा</h2>
<p>नाम वापसी के अंतिम दिन कुसुम सोनी, पुष्पा सोमनानी और राशिदा बानो ने अपने नामांकन वापस ले लिए। तीनों प्रत्याशियों ने नाम वापस लेने का कारण अपने पक्ष में पर्याप्त राजनीतिक समीकरण बनते दिखाई नहीं देना बताया।</p>
<p>इन तीनों के नाम वापस लेने के बाद अब महापौर पद के चुनाव में केवल तीन प्रत्याशी रह गए हैं। नाम वापसी से पहले निर्दलीय प्रत्याशियों की संख्या अधिक होने के कारण मुकाबला बहुकोणीय नजर आ रहा था।</p>
<h2>सुमित्रा जैन कांग्रेस की अधिकृत प्रत्याशी</h2>
<p>कांग्रेस ने सुमित्रा जैन को महापौर पद के लिए अपना अधिकृत प्रत्याशी बनाया है। पार्टी की ओर से उनके नाम पर चुनाव चिह्न संबंधी प्रपत्र भी जमा करवाया गया था।</p>
<p>पाली नगर निगम में कांग्रेस के 29 पार्षद निर्वाचित हुए हैं। बहुमत के लिए 33 मतों की आवश्यकता है। ऐसे में कांग्रेस को अपने सभी पार्षदों को एकजुट रखने के साथ कम से कम चार अतिरिक्त पार्षदों का समर्थन जुटाना होगा।</p>
<h2>भाजपा की ओर से नमिता बुबकिया मैदान में</h2>
<p>भाजपा ने वार्ड संख्या 33 से पहली बार पार्षद बनीं नमिता बुबकिया को महापौर पद का प्रत्याशी बनाया है। भाजपा के पास नगर निगम में 21 पार्षद हैं और बहुमत तक पहुंचने के लिए उसे 12 अतिरिक्त मतों की आवश्यकता होगी।</p>
<p>पार्टी निर्दलीय और भाजपा से बगावत कर चुनाव जीते पार्षदों के समर्थन का समीकरण बनाने में जुटी है। भाजपा नेतृत्व ने महापौर चुनाव में जीत का दावा किया है, लेकिन उसके लिए दूसरे खेमों में बड़ी सेंध लगाना आवश्यक होगा।</p>
<h2>टिकट नहीं मिलने पर राजबाला ने की बगावत</h2>
<p>राजबाला हिंगड़ कांग्रेस की ओर से महापौर पद की दावेदारी कर रही थीं, लेकिन पार्टी ने सुमित्रा जैन के नाम पर अंतिम मुहर लगा दी। इसके बाद राजबाला ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव मैदान में बने रहने का निर्णय लिया।</p>
<p>नाम वापसी की समय सीमा समाप्त होने के बाद राजबाला हिंगड़ को &lsquo;सोफा&rsquo; चुनाव चिह्न आवंटित किया गया है। उनकी दावेदारी से कांग्रेस के मतों में संभावित विभाजन और क्रॉस वोटिंग की चर्चा तेज हो गई है।</p>
<h2>पूर्व सभापति प्रदीप हिंगड़ ने लगाया था गड़बड़ी का आरोप</h2>
<p>पूर्व सभापति प्रदीप हिंगड़ ने आरोप लगाया था कि जयपुर स्थित कांग्रेस मुख्यालय से उनकी पत्नी राजबाला हिंगड़ के नाम पर सिंबल भेजा गया था, लेकिन पाली पहुंचने के बाद इसमें कथित रूप से गड़बड़ी कर दी गई।</p>
<p>उन्होंने इसे पार्टी के समर्पित कार्यकर्ता के साथ धोखा बताते हुए कहा था कि राजबाला निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़कर अपनी राजनीतिक ताकत साबित करेंगी। हालांकि कांग्रेस की ओर से सुमित्रा जैन को ही आधिकारिक प्रत्याशी घोषित किया गया है। प्रदीप हिंगड़ के आरोपों पर पार्टी का विस्तृत जवाब सामने आना बाकी है।</p>
<h2>छह प्रत्याशियों ने दाखिल किए थे 10 नामांकन</h2>
<p>रिटर्निंग अधिकारी शैलेन्द्र सिंह के अनुसार महापौर पद के लिए छह प्रत्याशियों ने कुल 10 नाम निर्देशन पत्र प्रस्तुत किए थे। गुरुवार को सभी नामांकन पत्रों की संवीक्षा की गई और जांच के बाद सभी छह प्रत्याशी चुनाव मैदान में बने हुए थे।</p>
<p>शुक्रवार को नाम वापसी की प्रक्रिया के दौरान तीन प्रत्याशियों ने अपने नाम वापस ले लिए। इसके बाद अंतिम रूप से तीन प्रत्याशी चुनाव मैदान में रह गए हैं।</p>
<h2>निर्दलीय पार्षदों के हाथ में चुनाव की चाबी</h2>
<p>पाली नगर निगम में कुल 65 पार्षद हैं। इनमें कांग्रेस के 29, भाजपा के 21 और 15 निर्दलीय पार्षद निर्वाचित हुए हैं। महापौर बनने के लिए किसी भी प्रत्याशी को कम से कम 33 मतों की आवश्यकता होगी।</p>
<p>संख्या बल के अनुसार कांग्रेस बहुमत के सबसे करीब है, लेकिन राजबाला हिंगड़ की बगावत ने उसके सामने अपने पार्षदों को एकजुट रखने की चुनौती खड़ी कर दी है। भाजपा के पास संख्या कम है, लेकिन संभावित क्रॉस वोटिंग और निर्दलीयों के समर्थन के जरिए वह मुकाबले को पलटने की कोशिश कर सकती है।</p>
<h2>उपमहापौर चुनाव की भी तैयारियां शुरू</h2>
<p>महापौर चुनाव के साथ उपमहापौर पद को लेकर भी राजनीतिक गतिविधियां शुरू हो गई हैं। उपमहापौर पद के लिए मेहबूब टी. दो नामांकन पत्र लेकर गए हैं। महापौर का चुनाव होने के बाद उपमहापौर पद के लिए चुनावी प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।</p>
<h2>21 सितंबर को होगा अंतिम फैसला</h2>
<p>पाली नगर निगम के निर्वाचित पार्षद 21 सितंबर को महापौर पद के लिए मतदान करेंगे। चुनाव में पार्टी अनुशासन, निर्दलीय पार्षदों का रुख और संभावित क्रॉस वोटिंग निर्णायक भूमिका निभाएगी।</p>
<p>फिलहाल कांग्रेस की सुमित्रा जैन संख्या बल के आधार पर मजबूत दिखाई दे रही हैं, भाजपा की नमिता बुबकिया राजनीतिक उलटफेर की उम्मीद में हैं और निर्दलीय राजबाला हिंगड़ दोनों प्रमुख दलों के समीकरण प्रभावित करने की स्थिति में हैं। अब मतदान के दिन ही स्पष्ट होगा कि पाली नगर निगम की कमान किसके हाथ में जाती है।</p>]]></content:encoded>
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  </item>
  <item>
    <title>भरत चरित्र ने समझाया जीवन का गूढ़ रहस्य: अंतकाल की वृत्ति ही तय करती है जीव की गति</title>
    <link>https://thinq360.com/nandgaon-bhagwat-katha-bharat-charitra-jadabharat-final-thoughts</link>
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    <pubDate>Fri, 18 Sep 2026 18:52:34 +0530</pubDate>
    <dc:creator>thinQ360</dc:creator>
    <category>राजस्थान</category>
    <description><![CDATA[श्री सुरभि हरिहर चातुर्मास आराधना महोत्सव के तहत आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में भरत महाराज एवं जडभरत चरित्र के माध्यम से बताया गया कि मनुष्य जीवनभर जिस भाव का चिंतन करता है, अंतकाल में उसी वृत्ति के प्रभावी होने की संभावना रहती है।]]></description>
    <content:encoded><![CDATA[<p><strong>रेवदर |</strong> अर्बुदारण्य की पावन धरा पर स्थित श्री गोधाम महातीर्थ पथमेड़ा की ओर से गो ऋषि दत्त शरणानंद जी महाराज के सान्निध्य में नंदगांव में आयोजित &lsquo;श्री सुरभि हरिहर चातुर्मास आराधना महोत्सव&rsquo; के तहत श्रीमद्भागवत कथा श्रद्धा और भक्ति के वातावरण में चल रही है। कथा में भरत महाराज एवं जडभरत चरित्र के माध्यम से मन, चिंतन, आसक्ति और अंतकालीन वृत्ति का गूढ़ आध्यात्मिक रहस्य समझाया गया।</p>
<h2>अंतकाल का चिंतन तय करता है जीव की गति</h2>
<p>कथा में भगवद्गीता के सिद्धांत का उल्लेख करते हुए महाराज जी ने कहा कि मनुष्य जीवनभर जिस भाव और विषय का निरंतर चिंतन करता है, अंत समय में उसी भाव की वृत्ति बनने की संभावना रहती है। उसी अंतकालीन वृत्ति के अनुसार जीव की आगे की गति निर्धारित होती है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि भगवान का स्मरण केवल अंतिम समय के लिए सुरक्षित रखने वाला विषय नहीं है। भगवत्स्मरण को पूरे जीवन की निरंतर साधना बनाना चाहिए, ताकि अंतिम क्षण में भगवान का स्मरण किसी प्रयास अथवा दबाव से नहीं, बल्कि सहज रूप से हो सके।</p>
<h2>भरत महाराज की आसक्ति से मिली बड़ी सीख</h2>
<p>भरत महाराज के प्रसंग का वर्णन करते हुए महाराज जी ने बताया कि वे महान तपस्वी और वैराग्यवान थे। राजपाट एवं सांसारिक वैभव त्यागने के बाद वे वन में रहकर साधना कर रहे थे, लेकिन एक मृगशावक के प्रति उनकी अत्यधिक आसक्ति हो गई।</p>
<p>अंत समय में उनका चिंतन भगवान के स्थान पर उसी मृगशावक की ओर चला गया। इसी अंतकालीन वृत्ति के कारण उन्हें अगले जन्म में मृगयोनि प्राप्त हुई। इस प्रसंग से यह शिक्षा मिलती है कि साधक को बाहरी त्याग के साथ अपने मन की आसक्तियों के प्रति भी निरंतर सजग रहना चाहिए।</p>
<h2>केवल बाहरी त्याग से समाप्त नहीं होते संस्कार</h2>
<p>महाराज जी ने कहा कि मन में संचित संस्कार और वासनाएं केवल सांसारिक वस्तुओं का बाहरी त्याग करने से समाप्त नहीं होतीं। वे सूक्ष्म रूप में मन और चित्त के भीतर बनी रह सकती हैं तथा अनुकूल अवसर मिलते ही फिर सक्रिय हो सकती हैं।</p>
<p>इसे समझाने के लिए उन्होंने हींग के डिब्बे का सरल उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार डिब्बे से हींग निकाल देने के बाद भी उसमें उसकी गंध बनी रहती है, उसी प्रकार बाहरी विषयों का त्याग करने के बाद भी पुराने संस्कारों और वासनाओं की गंध मन में बनी रह सकती है।</p>
<p>साधना का वास्तविक उद्देश्य केवल बाहरी त्याग नहीं, बल्कि मन और चित्त को भी विषयों की आसक्ति से मुक्त करके भगवान की ओर मोड़ना है।</p>
<h2>भगवान में रम जाए बुद्धि और चित्त</h2>
<p>महाराज जी ने कहा कि जब साधक की बुद्धि और चित्त पूरी तरह भगवान में रम जाते हैं, तब उसे प्रत्येक स्थान और प्रत्येक जीव में भगवान की उपस्थिति का अनुभव होने लगता है। ऐसी अवस्था में संसार के दृश्य उसे परमात्मा से अलग दिखाई नहीं देते।</p>
<p>भगवान का निरंतर चिंतन मनुष्य की दृष्टि बदल देता है। जिस संसार में सामान्य व्यक्ति केवल भौतिक वस्तुएं देखता है, उसी संसार में भक्त को भगवान की लीला और परम सत्ता का अनुभव होने लगता है।</p>
<h2>उद्धव प्रसंग से समझाई प्रेम की अवस्था</h2>
<p>कथा में उद्धव प्रसंग के माध्यम से ज्ञान और भगवान के प्रेम के संबंध को भी समझाया गया। महाराज जी ने कहा कि उद्धव ज्ञान के प्रतिनिधि थे, लेकिन भगवान के प्रति भक्तों का निष्कपट प्रेम देखकर उनका ज्ञान भी भाव में परिवर्तित हो गया।</p>
<p>भगवान के प्रति प्रेम की अवस्था में तर्क, अहंकार और बौद्धिक श्रेष्ठता स्वतः समाप्त होने लगती है। भक्त के लिए भगवान केवल चिंतन अथवा चर्चा का विषय नहीं रहते, बल्कि उसके सम्पूर्ण जीवन और अस्तित्व का आधार बन जाते हैं।</p>
<h2>जडभरत ने बनाए रखा आत्मज्ञान</h2>
<p>भरत महाराज ने मृगयोनि के बाद जडभरत के रूप में जन्म लिया। पूर्व जन्म की स्मृति और आसक्ति के परिणाम को समझने के कारण उन्होंने संसार के प्रति अत्यंत सावधानी रखी और अपने वास्तविक आत्मस्वरूप में स्थित रहने का प्रयास किया।</p>
<p>जडभरत चरित्र से यह संदेश मिलता है कि मनुष्य को बाहरी व्यवहार के साथ भीतर की चेतना को भी जागृत रखना चाहिए। आत्मज्ञान प्राप्त होने पर व्यक्ति सुख-दुख, सम्मान-अपमान और सांसारिक आकर्षणों से ऊपर उठने लगता है।</p>
<h2>भारतवर्ष की आध्यात्मिक महिमा का वर्णन</h2>
<p>कथा में भारतवर्ष की आध्यात्मिक महिमा पर भी प्रकाश डाला गया। महाराज जी ने भारतभूमि को ऋषियों, मुनियों, तपस्वियों और भक्तों की साधना भूमि बताते हुए कहा कि यहां मनुष्य को कर्म, भक्ति और आत्मचिंतन के माध्यम से जीवन का वास्तविक उद्देश्य समझने का दुर्लभ अवसर प्राप्त होता है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि भारतभूमि की विशेषता केवल इसकी भौगोलिक सीमाओं में नहीं, बल्कि इसकी आध्यात्मिक परंपरा में निहित है। यहां मनुष्य को अपने कर्मों को शुद्ध करने, भगवान की भक्ति करने और आत्मतत्त्व को जानने का मार्ग बताया गया है।</p>
<h2>भगवत्स्मरण को बनाएं स्वाभाविक जीवनचर्या</h2>
<p>महाराज जी ने श्रद्धालुओं से जीवन की प्रत्येक वृत्ति को भगवान की ओर मोड़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि दैनिक कार्यों और पारिवारिक जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए भी मनुष्य अपने मन को भगवान से जोड़ सकता है।</p>
<p>भगवत्स्मरण तभी अंतिम समय में सहज हो सकता है, जब उसे जीवनभर अभ्यास में लाया जाए। इसलिए भगवान का नाम, कथा, चिंतन और सेवा मनुष्य की स्वाभाविक जीवनचर्या का हिस्सा बनने चाहिए।</p>
<p>कथा के दौरान बड़ी संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं ने भरत महाराज और जडभरत चरित्र का श्रवण करते हुए आसक्ति से सावधान रहने, मन को नियंत्रित करने और जीवनभर भगवान का स्मरण करने का संदेश ग्रहण किया।</p>]]></content:encoded>
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  </item>
  <item>
    <title>पीएम मोदी की मंत्रियों के साथ चिंतन बैठक, बड़े फैसलों की तैयारी</title>
    <link>https://thinq360.com/pm-modi-cabinet-chintan-baithak-delhi-governance-review</link>
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    <pubDate>Fri, 18 Sep 2026 12:11:32 +0530</pubDate>
    <dc:creator>बलजीत सिंह शेखावत</dc:creator>
    <category>राजनीति</category>
    <description><![CDATA[पीएम मोदी अगले सप्ताह दो दिवसीय चिंतन बैठक की अध्यक्षता करेंगे। सेवा तीर्थ में होने वाली इस बैठक में सरकार की प्राथमिकताओं और गवर्नेंस में सुधार पर चर्चा होगी।]]></description>
    <content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली | </strong> प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अगले सप्ताह अपने कैबिनेट मंत्रियों के साथ एक महत्वपूर्ण दो दिवसीय चिंतन बैठक करने जा रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, 23 और 24 सितंबर को सेवा तीर्थ में इस बैठक का आयोजन प्रस्तावित है।</p>
<p>इस बैठक का मुख्य उद्देश्य सरकार के कामकाज, नीतियों के क्रियान्वयन और मंत्रालयों के बीच तालमेल को बेहतर बनाना है। इसके साथ ही सरकार की आगे की प्राथमिकताओं पर भी विस्तार से मंथन किया जाएगा।</p>
<h2>मंत्रियों के समूहों का गठन और तैयारी</h2>
<p>सूत्रों के मुताबिक, इस महत्वपूर्ण बैठक से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने मंत्रियों के छह से ज्यादा समूह बनाए हैं। प्रत्येक समूह में आठ मंत्रियों को शामिल किया गया है।</p>
<p>ये समूह मुख्य रूप से आत्म-सुधार, संवाद और गवर्नेंस जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर अपनी तैयारी करेंगे। बैठक के दौरान इन समूहों द्वारा विषयवार प्रस्तुति और चर्चा किए जाने की संभावना है।</p>
<h3>कामकाज की व्यापक समीक्षा</h3>
<p>इस पूरी कवायद को मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल के मध्य चरण में मंत्रालयों के कामकाज की एक व्यापक समीक्षा के रूप में देखा जा रहा है।</p>
<p>सभी मंत्रियों को इस दौरान दिल्ली में रहने के निर्देश दिए गए हैं। बैठक में मंत्रालयों के प्रदर्शन का बारीकी से आकलन किया जाएगा।</p>
<h2>पुराने निर्देशों और सिफारिशों पर फोकस</h2>
<p>बैठक में 2021 के चिंतन शिविर से जुड़ी सिफारिशों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। मंत्रालयों से पिछली बैठकों में तय किए गए बिंदुओं पर हुई कार्रवाई का विवरण मांगा गया है।</p>
<p>पिछली बैठकों में मंत्रालयों को लाइव डैशबोर्ड तैयार करने, नियमित प्रगति समीक्षा करने और कर्मचारियों से फीडबैक लेने जैसे महत्वपूर्ण निर्देश दिए गए थे।</p>
<h3>जनभागीदारी और डिजिटल गवर्नेंस</h3>
<p>प्रधानमंत्री मोदी लगातार सरकारी कामकाज में जनभागीदारी बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं। हाल ही में उन्होंने मंत्रालयों की वेबसाइटों को अधिक यूजर-फ्रेंडली बनाने का निर्देश दिया था।</p>
<p>इस बैठक में सरकारी योजनाओं की जनता तक पहुंच और संवाद व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने पर चर्चा हो सकती है। नवाचार को बढ़ावा देना सरकार की प्राथमिकता में शामिल है।</p>
<h2>कैबिनेट फेरबदल की अटकलें</h2>
<p>मंत्रालयों के कामकाज की समीक्षा को देखते हुए राजनीतिक गलियारों में कैबिनेट फेरबदल की अटकलें भी तेज हो गई हैं। कार्यकाल के मध्य चरण में जिम्मेदारियों में बदलाव की संभावना है।</p>
<p>वर्तमान में केंद्र सरकार में प्रधानमंत्री सहित कुल 69 मंत्री हैं, जबकि यह संख्या 81 तक हो सकती है। कई मंत्रियों के पास एक से अधिक विभाग हैं।</p>
<h3>रिक्त पदों की स्थिति</h3>
<p>सूत्रों के अनुसार, कैबिनेट मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और राज्य मंत्री जॉर्ज कुरियन तथा रवनीत सिंह बिट्टू के इस्तीफे के बाद कुछ पद खाली हुए हैं।</p>
<p>हालांकि, इस चिंतन बैठक को सीधे तौर पर कैबिनेट फेरबदल की प्रक्रिया मानने की कोई आधिकारिक घोषणा अभी तक नहीं हुई है।</p>
<h2>चिंतन बैठक के प्रमुख मुद्दे</h2>
<ul>
<li>योजनाओं की प्रगति, लक्ष्य और लंबित कार्यों की विस्तृत समीक्षा करना।</li>
<li>निर्णय लेने की गति को तेज करना और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को प्रभावी बनाना।</li>
<li>एक से अधिक मंत्रालयों से जुड़े प्रोजेक्ट्स में बेहतर तालमेल स्थापित करना।</li>
<li>सरकारी उपलब्धियों को सरल तरीके से जनता तक पहुंचाने की रणनीति बनाना।</li>
<li>मंत्रालयों की वेबसाइट और डिजिटल सेवाओं को यूजर-फ्रेंडली बनाना।</li>
<li>2021 की सिफारिशों पर अमल की स्थिति का जायजा लेना।</li>
<li>तीसरे कार्यकाल के शेष समय के लिए सरकार की प्राथमिकताओं को तय करना।</li>
</ul>
<p style="display: flex; align-items: center; gap: 4px; font-style: italic; font-size: 0.65em; color: #94a3b8; font-weight: normal; margin-top: 20px;">*Edit with Google AI Studio</p>]]></content:encoded>
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  </item>
  <item>
    <title>कांग्रेस की जीत से बढ़ी भाजपा की धड़कनें</title>
    <link>https://thinq360.com/jaipur-municipal-corporation-congress-clean-sweep-mayor-election</link>
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    <pubDate>Fri, 18 Sep 2026 12:05:04 +0530</pubDate>
    <dc:creator>बलजीत सिंह शेखावत</dc:creator>
    <category>राजस्थान</category>
    <description><![CDATA[जयपुर नगर निगम के 4 वार्डों में हुए पुनर्मतदान में कांग्रेस ने क्लीन स्वीप किया है। 78 सीटों के साथ बहुमत होने के बाद भी भाजपा में मेयर पद के लिए भारी लॉबिंग और क्रॉस वोटिंग का खतरा बना हुआ है।]]></description>
    <content:encoded><![CDATA[<p><strong>जयपुर | </strong> जयपुर नगर निगम 2026 के लंबित चल रहे चार वार्डों के पुनर्मतदान के नतीजे घोषित होते ही गुलाबी नगरी की राजनीति में अचानक बड़ा मोड़ आ गया है। री-पोलिंग के बाद गुरुवार को आए नतीजों में चारों की चारों सीटें कांग्रेस के खाते में चली गईं।</p>
<p>इस क्लीन स्विप के साथ ही कांग्रेस का आंकड़ा 53 से बढ़कर 57 हो गया है। जबकि भाजपा 78 सीटों पर टिकी हुई है और 15 निर्दलीय जीतकर आए हैं।</p>
<h2>पुनर्मतदान के नतीजे: कांग्रेस का दबदबा</h2>
<p>EVM में आई तकनीकी खराबी के बाद वार्ड 9, 18, 25 और 34 के पांच बूथों पर दोबारा मतदान कराया गया था। गुरुवार को श्री भवानी निकेतन में हुई मतगणना में कांग्रेस ने चारों सीटों पर जीत हासिल की।</p>
<h3>वार्डवार चुनावी परिणाम का विवरण</h3>
<ul>
<li><strong>वार्ड 9:</strong> कांग्रेस की कैलाश देवी ने 4,610 वोट हासिल किए। उन्होंने भाजपा की मंजू अग्रवाल को 764 वोटों के बड़े अंतर से हराया।</li>
<li><strong>वार्ड 18:</strong> कांग्रेस की वंदिता शर्मा को 4,962 वोट मिले। उन्होंने भाजपा के नीरज कुमावत को 181 वोटों से मात दी।</li>
<li><strong>वार्ड 25:</strong> कांग्रेस की रेखा देवी सैनी 5,533 वोट पाकर विजयी रहीं। उन्होंने निर्दलीय चंचल कंवर को 397 वोटों से पीछे छोड़ा।</li>
<li><strong>वार्ड 34:</strong> कांग्रेस के सुरेश यादव को 4,405 वोट मिले। उन्होंने भाजपा के पीयूष किराड़ को 149 वोटों से हराया।</li>
</ul>
<h2>भाजपा में मेयर पद के लिए मथानी</h2>
<p>78 सीटों के साथ बहुमत में होने के बावजूद भाजपा के भीतर मेयर प्रत्याशी के चयन को लेकर भारी असमंजस है। पार्टी के सामने एक नाम पर सर्वसम्मति बनाना सबसे बड़ा सिरदर्द बन गया है।</p>
<p>मेयर पद के दावेदारों में सुनील कोठारी, पुनीत कर्णावट, शैलेंद्र भार्गव, सुभाष सिंघी, विमल अग्रवाल और भवानी सिंह राजावत के नाम पहले से चर्चा में थे। अब अनुराधा माहेश्वरी और विजय अग्रवाल के नाम भी तेजी से आगे आए हैं।</p>
<h3>केंद्रीय नेतृत्व और संघ की सक्रियता</h3>
<p>सूत्रों के अनुसार, एक नए और निष्पक्ष चेहरे को आगे बढ़ाने के लिए राजस्थान के एक केंद्रीय मंत्री सहित दो बड़े केंद्रीय नेता सक्रिय हो चुके हैं। संघ के शीर्ष पदाधिकारी भी इस प्रक्रिया में शामिल हैं।</p>
<p>यहां तक कि एक प्रसिद्ध धार्मिक स्थल से जुड़े गैर-पार्षद व्यक्ति का नाम भी अचानक लॉबिंग में उछल रहा है। इससे जयपुर के मेयर का चुनाव पेचीदा और राजनीतिक रूप से संवेदनशील हो गया है।</p>
<h2>जातीय समीकरण और लॉबिंग का खेल</h2>
<p>मेयर पद के लिए जातीय समीकरण पूरी तरह हावी हो चुके हैं। वैश्य समाज के दावे के बाद अब अन्य समाजों ने भी अपनी मांगें तेज कर दी हैं।</p>
<p>अखिल भारतवर्षीय ब्राह्मण महासभा और विप्र फाउंडेशन ने मुख्यमंत्री व भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ से मुलाकात की है। उन्होंने ब्राह्मण चेहरे को मौका देने की मांग रखी है।</p>
<p>दूसरी ओर, श्री अग्रवाल समाज समिति और राजपूत सभा जयपुर के प्रतिनिधियों ने भी ज्ञापन सौंपे हैं। वे अपनी बिरादरी के प्रत्याशी को मेयर बनाने के लिए दबाव बना रहे हैं।</p>
<h2>2019 का 'विष्णु लाटा फैक्टर' और क्रॉस वोटिंग का डर</h2>
<p>भाजपा नेतृत्व को 2019 का वह उपचुनाव बार-बार याद आ रहा है। तब 90 सदस्यों वाले बोर्ड में 63 पार्षद होने के बावजूद भाजपा अपने मेयर प्रत्याशी मनोज भारद्वाज को नहीं जिता पाई थी।</p>
<p>तब बागी भाजपा नेता विष्णु लाटा ने कांग्रेस और निर्दलीयों के साथ-साथ भाजपा के सेंधमार वोटों के दम पर 45 वोट हासिल कर जीत दर्ज की थी। नगर निगम में दलबदल कानून लागू नहीं होने के कारण इस बार भी क्रास वोटिंग का खतरा बना हुआ है।</p>
<h3>निर्दलीयों को पाले में लाने की रेस</h3>
<p>अपनी सरकार और बहुमत को सुरक्षित करने के लिए भाजपा ने निर्दलीयों में सेंधमारी तेज कर दी है। वार्ड 108 के निर्दलीय पार्षद के बाद गुरुवार को वार्ड 80 की निर्दलीय पार्षद रेणु चौधरी ने भाजपा की सदस्यता ले ली।</p>
<p>भाजपा का दावा है कि 50% से अधिक निर्दलीय उनके संपर्क में हैं। हालांकि, जब तक मेयर का आधिकारिक नामांकन और वोटिंग नहीं हो जाती, तब तक पार्षदों की बाड़ाबंदी और पर्दे के पीछे का खेल जारी रहेगा।</p>
<p style="display: flex; align-items: center; gap: 4px; font-style: italic; font-size: 0.65em; color: #94a3b8; font-weight: normal; margin-top: 20px;">*Edit with Google AI Studio</p>]]></content:encoded>
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  </item>
  <item>
    <title>राजस्थान निकाय चुनाव: गहलोत का आरोप, पार्षदों को 2 करोड़ का ऑफर</title>
    <link>https://thinq360.com/gehlot-alleges-bjp-horse-trading-rajasthan-local-body-polls</link>
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    <pubDate>Fri, 18 Sep 2026 11:15:24 +0530</pubDate>
    <dc:creator>Pradeep Beedawat</dc:creator>
    <category>राजनीति</category>
    <description><![CDATA[पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भाजपा पर शहरी निकाय चुनावों में लोकतंत्र की हत्या का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि भाजपा बहुमत न होने के बावजूद धनबल से बोर्ड बना रही है।]]></description>
    <content:encoded><![CDATA[<p><strong>जयपुर | </strong> राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने गुरुवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने नगरीय निकाय चुनावों में धनबल के प्रयोग और सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग पर गहरी चिंता व्यक्त की।</p>
<p>गहलोत ने कहा कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के लिए 'इक्वल लेवल प्लेइंग फील्ड' का होना अनिवार्य है। हालांकि, राजस्थान में इसके विपरीत एकतरफा पुलिस कार्रवाई की जा रही है।</p>
<p>उन्होंने आरोप लगाया कि पार्षदों को डराया और धमकाया जा रहा है। मंत्रियों को पार्षदों को 1.5 करोड़, 2 करोड़ और यहां तक कि 2.5 करोड़ रुपये के भारी प्रलोभन देने के लिए तैनात किया गया है।</p>
<h2>लोकतंत्र पर धनबल का प्रहार</h2>
<p>पूर्व मुख्यमंत्री ने तीखा हमला करते हुए कहा कि देश में भाजपा के पास धन की कोई कमी नहीं है। उन्होंने कहा कि धनबल का उपयोग कर चुनी हुई सरकारों को गिराने का तमाशा अब जिलों और ब्लॉकों तक पहुंच गया है।</p>
<p>गहलोत ने इसे 'जैसा देश वैसा भेष' के सिद्धांत का अनुसरण बताया। उन्होंने सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग और मनमाने परिसीमन की भी कड़ी आलोचना की।</p>
<p>उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के रोड शो और भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) की निगरानी के बावजूद 64% वोट भाजपा के खिलाफ पड़े हैं। इसके बावजूद प्रधानमंत्री का बधाई देना दुर्भाग्यपूर्ण है।</p>
<h3>दिग्गजों के गढ़ में भाजपा की स्थिति</h3>
<p>गहलोत ने चुनाव आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि भाजपा कई वरिष्ठ नेताओं के गृह क्षेत्रों में बहुमत हासिल करने में विफल रही है। इनमें निम्नलिखित क्षेत्र शामिल हैं:</p>
<ul>
<li>मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का भरतपुर</li>
<li>केंद्रीय मंत्री भागीरथ चौधरी का अजमेर</li>
<li>केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव का अलवर</li>
<li>केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत का जोधपुर</li>
<li>प्रदेश भाजपा अध्यक्ष मदन राठौड़ का पाली</li>
<li>पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे का झालावाड़</li>
</ul>
<h2>वोटों का गणित और परिसीमन का खेल</h2>
<p>गहलोत ने बताया कि राजस्थान भर में भाजपा और कांग्रेस के बीच कुल वोट शेयर का अंतर केवल 0.94% था। भाजपा को 35.19% और कांग्रेस को 34.25% वोट मिले।</p>
<p>हालांकि, सीटों का अंतर 5.5% तक बढ़ गया। उन्होंने जोधपुर नगर निगम का उदाहरण दिया, जहां कांग्रेस को भाजपा से 14,282 अधिक वोट मिले, फिर भी दोनों दलों ने 44-44 सीटें जीतीं।</p>
<p>उन्होंने आरोप लगाया कि जोधपुर के वार्ड नंबर 99 में कांग्रेस समर्थित चार वार्डों को एक में मिला दिया गया। वहीं, भाजपा समर्थित क्षेत्रों को दो या तीन वार्डों में विभाजित कर दिया गया।</p>
<h3>चुनाव परिणामों का विश्लेषण</h3>
<p>गहलोत ने परिणामों का विश्लेषण पेश करते हुए कहा कि राज्य के कुल 10,244 वार्डों में से भाजपा 6,065 वार्डों (59%) में चुनाव हार गई है।</p>
<p>राज्य के 309 नगरीय निकायों में से भाजपा 223 (72%) में स्पष्ट बहुमत हासिल करने में विफल रही। 10 नगर निगमों में से भाजपा केवल 4 में बहुमत पा सकी:</p>
<ul>
<li>भीलवाड़ा</li>
<li>जयपुर</li>
<li>कोटा</li>
<li>उदयपुर</li>
</ul>
<h2>डराने-धमकाने और पुलिस दबाव की साजिश</h2>
<p>अशोक गहलोत ने कहा कि चुनावी हार स्वीकार करने के बजाय मुख्यमंत्री कार्यालय का एक आईएएस अधिकारी सीधे कलेक्टरों और एसडीएम पर दबाव बना रहा है।</p>
<p>उन्होंने झुंझुनू (मंडावा), नीमराना, टोंक, जोधपुर, कोटपुतली-बहरोड़, सीकर, धौलपुर, जालौर, अजमेर और बूंदी जैसे क्षेत्रों से डराने-धमकाने की घटनाओं की रिपोर्ट होने का दावा किया।</p>
<p>गहलोत ने खैरथल के पार्षद विक्रम चौधरी का उदाहरण दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें पाला बदलने के लिए राजी किया गया और दिल्ली में केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव द्वारा भाजपा में शामिल कराया गया।</p>
<p>उन्होंने अंत में कहा कि 2 करोड़ रुपये का ऑफर देकर भाजपा भ्रष्टाचार का नया रिकॉर्ड बना रही है। करोड़ों खर्च कर अध्यक्ष या मेयर बनने वाले लोग सेवा के बजाय पैसा वसूलने पर ध्यान देंगे।</p>
<p style="display: flex; align-items: center; gap: 4px; font-style: italic; font-size: 0.65em; color: #94a3b8; font-weight: normal; margin-top: 20px;">*Edit with Google AI Studio</p>]]></content:encoded>
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  </item>
  <item>
    <title>जयपुर में अवैध शराब के खिलाफ रेड, लग्जरी कारों से बोतलें जब्त</title>
    <link>https://thinq360.com/jaipur-illegal-liquor-raid-malviya-nagar-arrests</link>
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    <pubDate>Fri, 18 Sep 2026 11:06:07 +0530</pubDate>
    <dc:creator>जोगेन्द्र सिंह शेखावत</dc:creator>
    <category>राजस्थान</category>
    <description><![CDATA[जयपुर में अवैध शराब के खिलाफ विशेष अभियान के तहत मालवीय नगर और रामनगर में छापेमारी की गई। पुलिस ने कारों और रिहायशी मकानों से दर्जनों बोतलें जब्त कर 4 लोगों को गिरफ्तार किया है।]]></description>
    <content:encoded><![CDATA[<p><strong>जयपुर | </strong> राजधानी जयपुर में अवैध शराब के कारोबार के खिलाफ पुलिस और आबकारी विभाग ने एक बड़ा अभियान चलाया है। इस विशेष कार्रवाई के तहत शहर के कई पॉश इलाकों में ताबड़तोड़ छापेमारी की गई।</p>
<h2>पॉश इलाकों में पुलिस की बड़ी कार्रवाई</h2>
<p>जयपुर के मालवीय नगर और रामनगर मेट्रो स्टेशन जैसे प्रमुख क्षेत्रों में पुलिस ने मल्टीपल रेड डाली। इस दौरान रिहायशी मकानों और लग्जरी कारों का उपयोग शराब सप्लाई के लिए किया जा रहा था।</p>
<p>प्रवर्तन टीम ने कार्रवाई करते हुए विभिन्न ब्रांड्स की दर्जनों अवैध शराब की बोतलें बरामद की हैं। इस पूरे मामले में अब तक 4 लोगों को रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया है।</p>
<h3>रामनगर मेट्रो स्टेशन के पास कार से बरामदगी</h3>
<p>पहली बड़ी सफलता रामनगर मेट्रो स्टेशन के पास मिली। यहाँ एक संदिग्ध कार की तलाशी लेने पर उसके भीतर से नामी ब्रांड्स की 36 बोतल अवैध शराब मिली।</p>
<p>पुलिस ने मौके से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। ये आरोपी कार के जरिए शहर के अलग-अलग हिस्सों में शराब की डिलीवरी देने की योजना बना रहे थे।</p>
<h3>मालवीय नगर में रिहायशी मकान बना गोदाम</h3>
<p>मालवीय नगर के प्रधान मार्ग पर भी एक कार को इंटरसेप्ट किया गया। जाँच के दौरान कार से भारी मात्रा में अवैध शराब बरामद हुई और एक आरोपी को हिरासत में लिया गया।</p>
<p>सबसे चौंकाने वाला मामला मदर टेरेसा नगर में सामने आया। यहाँ एक रिहायशी मकान के अंदर अवैध शराब का गोदाम बनाया गया था, जहाँ से 44 बोतलें जब्त की गईं।</p>
<h2>प्रशासनिक अधिकारियों के निर्देशन में एक्शन</h2>
<p>यह पूरी कार्रवाई आयुक्त नमित मेहता और जिला अधिकारी घनश्याम शर्मा के कड़े निर्देशों पर की गई। उपायुक्त ज्ञान प्रकाश मीणा ने भी इस अभियान की निगरानी की।</p>
<p>लखन मीणा के सुपरविजन और पीओ नरेंद्र सिंह सांजू के नेतृत्व में टीम ने इस ऑपरेशन को अंजाम दिया। गिरफ्तार आरोपियों से अब गहन पूछताछ की जा रही है।</p>
<h3>टीम का विशेष योगदान</h3>
<p>इस छापेमारी को सफल बनाने में जमादार धीरज सिंह और सिपाही हर्ष वशिष्ठ की अहम भूमिका रही। साथ ही रामेश्वर लाल, राम और रिंकू चौधरी ने भी सहयोग किया।</p>
<p>पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि यह अवैध शराब कहाँ से लाई जा रही थी। इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश भी तेज कर दी गई है।</p>
<p style="display: flex; align-items: center; gap: 4px; font-style: italic; font-size: 0.65em; color: #94a3b8; font-weight: normal; margin-top: 20px;">*Edit with Google AI Studio</p>]]></content:encoded>
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  </item>
  <item>
    <title>श्रीगंगानगर: चोरी करते रंगे हाथों पकड़ा गया सिपाही निलंबित</title>
    <link>https://thinq360.com/sri-ganganagar-constable-caught-stealing-suspended-dismissal</link>
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    <pubDate>Fri, 18 Sep 2026 10:54:33 +0530</pubDate>
    <dc:creator>जोगेन्द्र सिंह शेखावत</dc:creator>
    <category>राजस्थान</category>
    <description><![CDATA[श्रीगंगानगर की भगत सिंह कॉलोनी में चोरी करते रंगे हाथों पकड़े गए पुलिस सिपाही हरिकिशन को एसपी ने सस्पेंड कर दिया है। आरोपी के खिलाफ अब बर्खास्तगी की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।]]></description>
    <content:encoded><![CDATA[<p><strong>श्रीगंगानगर | </strong> श्रीगंगानगर की भगत सिंह कॉलोनी में चोरी की वारदात को अंजाम देते हुए पुलिस लाइन का एक सिपाही रंगे हाथों पकड़ा गया है। आरोपी सिपाही की पहचान हरिकिशन के रूप में हुई है।</p>
<h2>पुलिस अधीक्षक ने की बड़ी कार्रवाई</h2>
<p>घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक हरीशंकर ने आरोपी सिपाही को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। विभाग ने आरोपी के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है।</p>
<h3>सेवा समाप्ति की प्रक्रिया शुरू</h3>
<p>एसपी ने बताया कि सिपाही की पुलिस सेवा समाप्त करने के लिए बर्खास्तगी की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। विभाग में ऐसे कृत्यों के लिए कोई जगह नहीं है।</p>
<h2>चोरी की वारदात का पूरा घटनाक्रम</h2>
<p>कोतवाली में दर्ज रिपोर्ट के अनुसार, 15 सितंबर की रात करीब 11:30 बजे आरोपी हरिकिशन भगत सिंह कॉलोनी निवासी राजन सिंह के घर में घुस गया।</p>
<h3>नकद और सामान की चोरी</h3>
<p>आरोपी ने घर में रखे 15 हजार रुपए नकद चुरा लिए। इसके बाद वह घर से गैस सिलेंडर भी लेकर भागने की कोशिश करने लगा।</p>
<h3>हथियार दिखाकर भागने का प्रयास</h3>
<p>जब घर के मालिक को पता चला तो उसने पीछा किया। आरोपी ने बचने के लिए कथित रूप से कापा लहराया और सिलेंडर रास्ते में छोड़कर भागने लगा।</p>
<h2>आम जनता ने आरोपी को दबोचा</h2>
<p>शोर सुनकर आसपास के लोग और राहगीर भी आरोपी के पीछे दौड़ पड़े। लोगों ने रेलवे स्टेशन के सामने पुलिस कंट्रोल रूम के पास उसे पकड़ लिया।</p>
<h3>पुलिस के हवाले किया आरोपी</h3>
<p>उसी समय गश्त कर रही पुलिस टीम मौके पर पहुंच गई। लोगों ने आरोपी को पुलिस के सुपुर्द कर दिया, जिसके बाद उसकी पहचान सिपाही के रूप में हुई।</p>
<h2>नशे की लत और अनुकंपा नियुक्ति</h2>
<p>प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि सिपाही हरिकिशन नशे का आदी हो चुका है। वह अनुकंपा नियुक्ति के तहत पुलिस विभाग में भर्ती हुआ था।</p>
<h3>अनुशासनहीनता का पुराना रिकॉर्ड</h3>
<p>एसपी के अनुसार, हरिकिशन के खिलाफ पहले भी अनुशासनहीनता की शिकायतें आती रही हैं। नशे के कारण वह लगातार गलत गतिविधियों में शामिल था।</p>
<h2>कानूनी कार्रवाई और गिरफ्तारी</h2>
<p>कोतवाली सीआई तेजवंत सिंह ने बताया कि आरोपी के खिलाफ घर में घुसकर चोरी करने का मामला दर्ज किया गया है। फिलहाल उसे शांतिभंग में गिरफ्तार किया गया है।</p>
<h3>आगे की जांच जारी</h3>
<p>पुलिस चोरी के मामले में जांच पूरी होने के बाद उसे विधिवत गिरफ्तार करेगी। विभागीय जांच की प्रक्रिया को भी तेज कर दिया गया है।</p>
<p style="display: flex; align-items: center; gap: 4px; font-style: italic; font-size: 0.65em; color: #94a3b8; font-weight: normal; margin-top: 20px;">*Edit with Google AI Studio</p>]]></content:encoded>
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  </item>
  <item>
    <title>नगर निगम री-पोलिंग में कांग्रेस का क्लीन स्वीप, भाजपा की बढ़ी टेंशन</title>
    <link>https://thinq360.com/jaipur-nagar-nigam-election-congress-clean-sweep-mayor-race</link>
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    <pubDate>Fri, 18 Sep 2026 10:47:30 +0530</pubDate>
    <dc:creator>जोगेन्द्र सिंह शेखावत</dc:creator>
    <category>राजनीति</category>
    <description><![CDATA[जयपुर नगर निगम की 4 सीटों पर हुए पुनर्मतदान में कांग्रेस ने क्लीन स्वीप किया है। इस जीत से भाजपा का गणित गड़बड़ा गया है और मेयर पद के लिए लॉबिंग तेज हो गई है।]]></description>
    <content:encoded><![CDATA[<p><strong>जयपुर | </strong> जयपुर नगर निगम 2026 के लंबित चल रहे चार वार्डों के पुनर्मतदान के नतीजे घोषित होते ही गुलाबी नगरी की राजनीति में अचानक बड़ा मोड़ आ गया है। री-पोलिंग के बाद गुरुवार को आए नतीजों में चारों की चारों सीटें कांग्रेस के खाते में चली गईं।</p>
<h2>पुनर्मतदान के नतीजे: कांग्रेस का क्लीन स्वीप</h2>
<p>ईवीएम में आई तकनीकी खराबी के बाद वार्ड 9, 18, 25 और 34 के पांच बूथों पर दोबारा मतदान कराया गया था। गुरुवार को श्री भवानी निकेतन में हुई मतगणना में कांग्रेस ने चारों सीटों पर जीत हासिल की।</p>
<h3>वार्डवार चुनावी परिणाम</h3>
<p>वार्ड 9 में कांग्रेस की कैलाश देवी ने 4,610 वोट हासिल किए। उन्होंने भाजपा की मंजू अग्रवाल को 764 वोटों के बड़े अंतर से हराया।</p>
<p>वार्ड 18 में कांग्रेस की वंदिता शर्मा को 4,962 वोट मिले। उन्होंने भाजपा के नीरज कुमावत को 181 वोटों से मात दी।</p>
<p>वार्ड 25 में कांग्रेस की रेखा देवी सैनी 5,533 वोट पाकर विजयी रहीं। उन्होंने भाजपा समर्थित चंचल कंवर को 397 वोटों से पीछे छोड़ा।</p>
<p>वार्ड 34 में कांग्रेस के सुरेश यादव को 4,405 वोट मिले। उन्होंने भाजपा के पीयूष किराड़ को 149 वोटों से हराया।</p>
<h2>नगर निगम का नया संख्या बल और बहुमत का गणित</h2>
<p>इस क्लीन स्वीप के साथ ही कांग्रेस का आंकड़ा 53 से बढ़कर 57 हो गया है। भाजपा वर्तमान में 78 सीटों पर टिकी हुई है और 15 निर्दलीय जीतकर आए हैं।</p>
<p>150 सदस्यों वाले बोर्ड में भाजपा बहुमत के 76 के आंकड़े से महज 2 सीट आगे है। कांग्रेस और निर्दलीयों का संयुक्त संख्या बल 72 पहुंच गया है।</p>
<h2>मेयर पद के लिए भाजपा में मची रार</h2>
<p>78 सीटों के साथ बहुमत में होने के बावजूद भाजपा के भीतर मेयर प्रत्याशी के चयन को लेकर भारी असमंजस है। सुनील कोठारी और पुनीत कर्णावट के नाम पहले से चर्चा में थे।</p>
<p>अब अनुराधा माहेश्वरी और विजय अग्रवाल के नाम भी तेजी से आगे आए हैं। शैलेंद्र भार्गव, सुभाष सिंघी, विमल अग्रवाल और भवानी सिंह राजावत भी रेस में हैं।</p>
<h3>संघ और केंद्रीय नेतृत्व की एंट्री</h3>
<p>मेयर पद के दावेदारों को लेकर भाजपा में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पदाधिकारियों की सीधी एंट्री हो चुकी है। राजस्थान के एक केंद्रीय मंत्री सहित दो बड़े केंद्रीय नेता सक्रिय हैं।</p>
<p>सूत्रों के अनुसार, एक नए और निष्पक्ष चेहरे को आगे बढ़ाने के लिए लॉबિંગ तेज हो गई है। एक प्रसिद्ध धार्मिक स्थल से जुड़े गैर-पार्षद व्यक्ति का नाम भी चर्चा में है।</p>
<h2>जातीय समीकरण और सामाजिक लॉबिंग</h2>
<p>मेयर पद के लिए जातीय समीकरण पूरी तरह हावी हो चुके हैं। वैश्य समाज के दावे के बाद अब ब्राह्मण समाज ने भी अपनी मांग रखी है।</p>
<p>अखिल भारतवर्षीय ब्राह्मण महासभा और विप्र फाउंडेशन ने मुख्यमंत्री से मुलाकात की है। उन्होंने ब्राह्मण चेहरे को मेयर बनाने की मांग की है।</p>
<p>श्री अग्रवाल समाज समिति और राजपूत सभा जयपुर के प्रतिनिधियों ने भी अपने-अपने बिरादरी के प्रत्याशी के लिए ज्ञापन सौंपे हैं।</p>
<h2>2019 का 'विष्णु लाटा कांड' और क्रॉस वोटिंग का डर</h2>
<p>भाजपा नेतृत्व को 2019 का वह उपचुनाव याद आ रहा है जब बहुमत के बावजूद पार्टी हार गई थी। तब बागी नेता विष्णु लाटा ने कांग्रेस और निर्दलीयों के दम पर जीत दर्ज की थी।</p>
<p>नगर निगम में दलबदल कानून लागू नहीं होने के कारण इस बार भी क्रॉस वोटिंग का खतरा बना हुआ है। भाजपा अपनी सरकार सुरक्षित करने के लिए निर्दलीयों को साध रही है।</p>
<p>वार्ड 80 की निर्दलीय पार्षद रेणु चौधरी ने भाजपा की सदस्यता ले ली है। भाजपा का दावा है कि 50% से अधिक निर्दलीय उनके संपर्क में हैं।</p>
<p style="display: flex; align-items: center; gap: 4px; font-style: italic; font-size: 0.65em; color: #94a3b8; font-weight: normal; margin-top: 20px;">*Edit with Google AI Studio</p>]]></content:encoded>
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  </item>
  <item>
    <title>भाजपा की हार के बाद संगठन में घमासान, वार्ड 4 के प्रत्याशी ने प्रभारी-संयोजक पर लगाए गंभीर आरोप</title>
    <link>https://thinq360.com/sirohi-bjp-defeat-ward-4-sanjay-verma-allegations-chhaganlal-ghanchi</link>
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    <pubDate>Thu, 17 Sep 2026 19:34:10 +0530</pubDate>
    <dc:creator>गणपत सिंह मांडोली</dc:creator>
    <category>राजस्थान</category>
    <description><![CDATA[सिरोही नगर परिषद के वार्ड संख्या 4 से भाजपा प्रत्याशी रहे संजय वर्मा ने सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से पार्टी के वार्ड प्रभारी और संयोजक की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि संगठन ने अपेक्षित सहयोग नहीं किया और कुछ लोगों ने भाजपा के बजाय निर्दलीय प्रत्याशी के पक्ष में काम किया।]]></description>
    <content:encoded><![CDATA[<p><strong>सिरोही |</strong> नगर परिषद चुनाव में भाजपा के निराशाजनक प्रदर्शन के बाद अब पार्टी के भीतर ही आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। वार्ड संख्या 4 से भाजपा के अधिकृत प्रत्याशी रहे संजय वर्मा ने सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से पार्टी के स्थानीय पदाधिकारियों, वार्ड प्रभारी और संयोजक की चुनावी भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए हैं।</p>
<p><strong>महत्वपूर्ण:</strong> समाचार में वर्णित आरोप संजय वर्मा की सोशल मीडिया पोस्ट और उस पर आई प्रतिक्रियाओं पर आधारित हैं। इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। जिन पदाधिकारियों पर आरोप लगाए गए हैं, उनका विस्तृत पक्ष सामने आना बाकी है।</p>
<h2>प्रभारी और संयोजक ने अपेक्षित काम नहीं किया&mdash;वर्मा</h2>
<p>संजय वर्मा ने अपनी पोस्ट में लिखा कि भाजपा ने नगर परिषद चुनाव के दौरान विभिन्न वार्डों में प्रभारी और संयोजक नियुक्त किए थे, लेकिन कई लोगों ने पार्टी प्रत्याशियों के पक्ष में अपेक्षित रूप से काम नहीं किया।</p>
<p>उन्होंने विशेष रूप से वार्ड संख्या 4 का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि वार्ड प्रभारी और संयोजक ने अपने समाज के मतदाताओं से उनके पक्ष में संपर्क तक नहीं किया। वर्मा का दावा है कि संगठनात्मक सहयोग के अभाव का असर उनके चुनाव परिणाम पर पड़ा।</p>
<h2>बार-बार आग्रह के बाद भी नहीं हुई समाज की बैठक</h2>
<p>संजय वर्मा के अनुसार उन्होंने वार्ड प्रभारी और संयोजक से कई बार आग्रह किया था कि भाजपा प्रत्याशी के समर्थन में समाज की बैठक आयोजित करवाई जाए, लेकिन उनके आग्रह के बावजूद बैठक नहीं हुई।</p>
<p>उन्होंने दावा किया कि भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ के सिरोही प्रवास के दौरान भी उन्होंने घांची समाज के कुछ प्रमुख लोगों के साथ बैठक करवाने का आग्रह किया था, लेकिन यह बैठक आयोजित नहीं हो सकी।</p>
<p>वर्मा का कहना है कि मदन राठौड़ जिस होटल में ठहरे थे, वहां होटल संचालक के माध्यम से भी समाज के लोगों से संपर्क करवाया जाता तो चुनाव परिणाम भाजपा के पक्ष में हो सकता था। हालांकि यह संजय वर्मा का व्यक्तिगत आकलन है, जिसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।</p>
<p><img src="https://d2uvd0bcf4ztg.cloudfront.net/uploads/images/WhatsApp_Image_2026-09-17_at_19_26_41.webp" alt="" width="514" height="1279"></p>
<p><img src="https://d2uvd0bcf4ztg.cloudfront.net/uploads/images/WhatsApp_Image_2026-09-17_at_19_26_39.webp" alt="" width="717" height="1600"></p>
<p><img src="https://d2uvd0bcf4ztg.cloudfront.net/uploads/images/WhatsApp_Image_2026-09-17_at_19_26_38.webp" alt="" width="717" height="1600"></p>
<p><img src="https://d2uvd0bcf4ztg.cloudfront.net/uploads/images/WhatsApp_Image_2026-09-17_at_19_26_37.webp" alt="" width="717" height="1600"></p>
<h2>दो अन्य प्रत्याशियों से भी संपर्क करवाने का दावा</h2>
<p>संजय वर्मा ने अपनी पोस्ट में दावा किया कि भाजपा ने घांची समाज के दो अन्य व्यक्तियों को भी चुनाव में टिकट दिया था। उन्होंने उन प्रत्याशियों से वार्ड संख्या 4 में आकर अपने समाज के लोगों से भाजपा के पक्ष में संपर्क करने का आग्रह किया, लेकिन वे प्रचार के लिए नहीं आए।</p>
<p>वर्मा के अनुसार संबंधित प्रत्याशियों की ओर से कथित रूप से यह कहा गया कि यदि वे उनके वार्ड में प्रचार करने आए तो निर्दलीय प्रत्याशी दलपत पटेल नाराज हो सकते हैं और इसका प्रभाव उनके अपने चुनाव पर भी पड़ सकता है। इस दावे पर संबंधित प्रत्याशियों का पक्ष सामने नहीं आया है।</p>
<h2>निर्दलीय प्रत्याशी के पक्ष में काम करने का आरोप</h2>
<p>संजय वर्मा ने आरोप लगाया कि घांची समाज लंबे समय से भाजपा का समर्थक रहा है, लेकिन वार्ड संख्या 4 में समाज से आने वाले निर्दलीय प्रत्याशी को जिताने के लिए पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी के खिलाफ काम किया गया।</p>
<p>उन्होंने वार्ड प्रभारी और संयोजक पर आरोप लगाया कि उन्होंने अपने समाज के मतदाताओं को भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में लाने के लिए कोई प्रभावी प्रयास नहीं किया। वर्मा ने यह भी दावा किया कि भाजपा संगठन की ओर से एक कार्यकर्ता तक उनके वार्ड में प्रचार के लिए नहीं भेजा गया।</p>
<p>उनका कहना है कि नगर परिषद चुनाव में उनके जैसे कई अन्य भाजपा प्रत्याशियों को भी संगठनात्मक सहयोग की कमी का सामना करना पड़ा।</p>
<h2>महिपाल सिंह चारण की टिप्पणी से बढ़ी चर्चा</h2>
<p>संजय वर्मा की सोशल मीडिया पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा नेता महिपाल सिंह चारण ने भी टिप्पणी की। उन्होंने लिखा कि इस विषय में उन्होंने स्वयं वार्ड प्रभारी से बातचीत की थी।</p>
<p>चारण के मुताबिक प्रभारी ने कथित रूप से जवाब दिया था कि &lsquo;सांवला जी के समाज ने सौगंध डाली है, कैसे काम करें।&rsquo; इस टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया पर मामला और अधिक चर्चा में आ गया।</p>
<p>हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि यह कथित बातचीत किन परिस्थितियों में हुई और &lsquo;सौगंध&rsquo; से किस सामाजिक अथवा चुनावी संदर्भ की ओर संकेत किया गया था। संबंधित पक्ष का स्पष्टीकरण आने के बाद ही इसकी वास्तविकता स्पष्ट हो सकेगी।</p>
<h2>वार्ड प्रभारी थे जिला उपाध्यक्ष छगनलाल घांची</h2>
<p>नगर परिषद चुनाव के दौरान भाजपा संगठन ने वार्ड संख्या 4 में जिला उपाध्यक्ष छगनलाल घांची को वार्ड प्रभारी की जिम्मेदारी सौंपी थी। ऐसे में संजय वर्मा की ओर से लगाए गए आरोपों के केंद्र में उनकी चुनावी भूमिका है।</p>
<p>वर्मा ने दावा किया है कि वार्ड प्रभारी रहते हुए छगनलाल घांची ने भाजपा प्रत्याशी के समर्थन में अपने समाज के लोगों से अपेक्षित संपर्क नहीं किया और समाज की बैठक करवाने के आग्रह पर भी पहल नहीं की।</p>
<p>उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि वार्ड में भाजपा के अधिकृत प्रत्याशी के बजाय निर्दलीय प्रत्याशी के पक्ष में माहौल बनाने का प्रयास किया गया। इन आरोपों पर छगनलाल घांची की प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है।</p>
<h2>भाजपा की चुनावी रणनीति पर उठे सवाल</h2>
<p>नगर परिषद चुनाव में भाजपा की हार के बाद सामने आए इन आरोपों ने पार्टी की वार्ड स्तरीय रणनीति, प्रभारियों की जवाबदेही और प्रत्याशियों के साथ संगठन के समन्वय पर सवाल खड़े कर दिए हैं।</p>
<p>सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी के पक्ष में संगठनात्मक स्तर पर अपेक्षित प्रचार और सामाजिक संपर्क नहीं हुआ तो इसकी जिम्मेदारी किसकी तय की जाएगी। क्या भाजपा संगठन हार के कारणों की वार्डवार समीक्षा करेगा और प्रत्याशियों की शिकायतों पर संबंधित पदाधिकारियों से जवाब मांगा जाएगा?</p>
<h2>जातीय निष्ठा बनाम पार्टी अनुशासन की बहस</h2>
<p>संजय वर्मा ने अपनी पोस्ट के अंत में पार्टी की मौजूदा स्थिति के लिए ऐसे लोगों को जिम्मेदार बताया, जो उनके अनुसार पार्टी का पद और टिकट मिलने के बावजूद अधिकृत प्रत्याशी के स्थान पर अपनी जाति के व्यक्ति को जिताने का प्रयास करते हैं।</p>
<p>उनके आरोपों ने भाजपा के भीतर पार्टी अनुशासन और जातीय निष्ठा को लेकर भी बहस छेड़ दी है। वर्मा ने दावा किया कि उन्होंने चुनाव के दौरान ही इस संबंध में पार्टी के कई लोगों को जानकारी दी थी और महिपाल सिंह चारण को भी पूरे मामले से अवगत कराया था।</p>
<h2>दूसरे पक्ष के जवाब का इंतजार</h2>
<p>संजय वर्मा के आरोपों पर वार्ड प्रभारी छगनलाल घांची, संबंधित संयोजक और निर्दलीय प्रत्याशी दलपत पटेल का विस्तृत पक्ष सामने नहीं आया है। निष्पक्ष तस्वीर के लिए आरोपों से जुड़े सभी पक्षों का जवाब आवश्यक है।</p>
<p>अब निगाहें भाजपा संगठन पर टिकी हैं कि वह इन आरोपों को प्रत्याशी की व्यक्तिगत नाराजगी मानकर छोड़ देता है या चुनावी हार की समीक्षा करते हुए वार्ड स्तर पर जिम्मेदारी तय करता है।</p>]]></content:encoded>
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  </item>
  <item>
    <title>मंत्री के घर के सामने चल रहा था कथित अवैध जनता पाइल्स क्लीनिक, स्वास्थ्य विभाग ने किया सीज</title>
    <link>https://thinq360.com/bikaner-janta-piles-clinic-sealed-sadulganj-licence-investigation</link>
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    <pubDate>Thu, 17 Sep 2026 18:57:15 +0530</pubDate>
    <dc:creator>महेन्द्रसिंह शेखावत</dc:creator>
    <category>लाइफ स्टाइल</category>
    <description><![CDATA[बीकानेर के सादुलगंज में मंत्री के आवास के सामने संचालित जनता पाइल्स क्लीनिक को मरीजों के परिजनों की शिकायत के बाद सीज कर दिया गया। अधिकारियों के अनुसार संचालक चिकित्सा गतिविधियों से संबंधित वैध लाइसेंस प्रस्तुत नहीं कर सके। गलत उपचार और एलोपैथी दवाएं लिखने के आरोपों की जांच की जा रही है।]]></description>
    <content:encoded><![CDATA[<p><strong>बीकानेर |</strong> सादुलगंज जैसे पॉश इलाके में मंत्री के आवास के सामने संचालित जनता पाइल्स क्लीनिक पर गुरुवार को चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने कार्रवाई करते हुए क्लीनिक को सीज कर दिया। मरीज के परिजनों की शिकायत के बाद पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीम मौके पर पहुंची थी। अधिकारियों के अनुसार जांच के दौरान क्लीनिक संचालक चिकित्सा गतिविधियों के वैध संचालन से संबंधित कोई आवश्यक लाइसेंस अथवा पंजीयन प्रस्तुत नहीं कर सके।</p>
<p><strong>महत्वपूर्ण:</strong> गलत उपचार, नियमों के विरुद्ध दवाएं लिखने और मरीजों की तबीयत बिगड़ने से संबंधित आरोप फिलहाल जांच के दायरे में हैं। इन आरोपों की अंतिम पुष्टि विभागीय जांच पूरी होने के बाद ही होगी।</p>
<h2>मरीज के परिजनों की शिकायत पर पहुंची टीम</h2>
<p>जनता पाइल्स क्लीनिक में उपचार कराने वाले मरीज के परिजनों ने कथित रूप से गलत इलाज और तबीयत बिगड़ने की शिकायत की थी। शिकायत मिलने के बाद पुलिस तथा चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की टीम सादुलगंज स्थित क्लीनिक पहुंची।</p>
<p>टीम ने क्लीनिक में संचालित चिकित्सा गतिविधियों, उपलब्ध दवाओं, चिकित्सकों की योग्यता और संचालन से संबंधित दस्तावेजों की जांच की। प्रारंभिक जांच के बाद क्लीनिक को सीज कर दिया गया।</p>
<h2>वैध लाइसेंस प्रस्तुत नहीं करने की बात आई सामने</h2>
<p>कार्रवाई के दौरान चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त निदेशक डॉ. देवेंद्र चौधरी, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. पुखराज साध सहित विभागीय अधिकारी मौजूद रहे।</p>
<p>डॉ. देवेंद्र चौधरी के अनुसार क्लीनिक संचालकों की ओर से ऐसा कोई लाइसेंस अथवा वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किया गया, जिससे वहां चिकित्सा गतिविधियों के नियमानुसार संचालन की पुष्टि हो सके। इसके बाद विभाग ने क्लीनिक को सीज करने की कार्रवाई की।</p>
<h2>चिकित्सकों के जवाब संतोषजनक नहीं</h2>
<p>जांच टीम ने क्लीनिक में कार्यरत चिकित्सकों और अन्य कर्मचारियों से भी पूछताछ की। अधिकारियों के अनुसार चिकित्सा पद्धति, दवाओं और क्लीनिक के वैधानिक संचालन से जुड़े प्रश्नों पर दिए गए जवाब संतोषजनक नहीं पाए गए।</p>
<p>डॉ. चौधरी ने मामले में गंभीर गड़बड़ी की आशंका जताते हुए कहा कि क्लीनिक से संबंधित सभी दस्तावेज प्राप्त करने के बाद पूरे मामले की गहराई से जांच की जाएगी। आगे की विभागीय जांच सीएमएचओ डॉ. पुखराज साध के नेतृत्व में की जाएगी।</p>
<h2>आयुर्वेद की आड़ में एलोपैथी दवाएं देने का आरोप</h2>
<p>प्रारंभिक जांच में यह बात भी सामने आई कि क्लीनिक में आयुर्वेद पद्धति से उपचार करने का दावा किया जा रहा था, जबकि मरीजों को कथित रूप से एलोपैथी की दवाएं लिखी जा रही थीं।</p>
<p>स्वास्थ्य विभाग अब इस बात की जांच करेगा कि क्लीनिक में कार्यरत चिकित्सकों की वास्तविक योग्यता क्या है और उन्हें किस चिकित्सा पद्धति के तहत उपचार एवं दवाएं लिखने की अनुमति प्राप्त है।</p>
<p>डॉ. चौधरी ने बताया कि इस संबंध में आयुर्वेद विभाग से भी विशेषज्ञ राय ली जाएगी। यदि जांच में नियमों के विपरीत उपचार करने अथवा दवाएं लिखने की पुष्टि होती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।</p>
<h2>मरीजों की तबीयत बिगड़ने की शिकायत</h2>
<p>क्लीनिक में उपचार कराने वाले कुछ मरीजों की कथित रूप से गलत इलाज के कारण तबीयत बिगड़ने की शिकायत सामने आई है। बताया जा रहा है कि मरीजों के परिजनों की शिकायत के बाद ही यह मामला स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों तक पहुंचा।</p>
<p>हालांकि मरीजों की तबीयत बिगड़ने और उसे क्लीनिक में दिए गए उपचार से जोड़ने वाले आरोपों की चिकित्सा एवं प्रशासनिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। विभाग मरीजों के उपचार से संबंधित रिकॉर्ड और दवाओं की जांच करने के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचेगा।</p>
<h2>क्लीनिक से मिले दस्तावेजों और दवाओं की होगी जांच</h2>
<p>स्वास्थ्य विभाग क्लीनिक से प्राप्त दस्तावेजों, मरीजों के पर्चों, लिखी गई दवाओं और उपचार से संबंधित रिकॉर्ड का परीक्षण करेगा। जांच के दौरान यह भी देखा जाएगा कि क्लीनिक कब से संचालित हो रहा था और यहां प्रतिदिन कितने मरीजों का उपचार किया जाता था।</p>
<p>इसके अतिरिक्त क्लीनिक के पंजीयन, चिकित्सकों की शैक्षणिक योग्यता, चिकित्सा अभ्यास की अनुमति और दवाओं के भंडारण तथा वितरण से संबंधित दस्तावेजों की भी जांच की जाएगी।</p>
<h2>सोशल मीडिया पर प्रचार, फिर विभाग को जानकारी क्यों नहीं?</h2>
<p>कार्रवाई के बाद स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं। बताया जा रहा है कि जनता पाइल्स क्लीनिक का सोशल मीडिया के माध्यम से लगातार प्रचार-प्रसार किया जा रहा था। इसके बावजूद विभाग को कथित अनियमितताओं की जानकारी मरीजों की शिकायत के बाद ही मिली।</p>
<p>यदि क्लीनिक आवश्यक लाइसेंस और पंजीयन के बिना संचालित हो रहा था तो सवाल यह है कि स्वास्थ्य विभाग की नियमित निगरानी और निरीक्षण व्यवस्था की नजर उस पर पहले क्यों नहीं पड़ी। पॉश इलाके में सार्वजनिक रूप से संचालित और सोशल मीडिया पर प्रचारित हो रहे क्लीनिक के दस्तावेजों की पहले जांच क्यों नहीं की गई?</p>
<h2>जांच के बाद तय होगी आगे की कार्रवाई</h2>
<p>स्वास्थ्य विभाग ने फिलहाल क्लीनिक को सीज कर दिया है। अब सीएमएचओ के नेतृत्व में जांच पूरी होने के बाद आगे की कानूनी और विभागीय कार्रवाई तय की जाएगी। जांच में लाइसेंस, पंजीयन, चिकित्सकीय योग्यता और उपचार पद्धति से संबंधित नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है।</p>
<p>मामले में क्लीनिक संचालकों और संबंधित चिकित्सकों का विस्तृत पक्ष अभी सामने नहीं आया है। उनका पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी समाचार में शामिल किया जाना आवश्यक होगा।</p>]]></content:encoded>
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  </item>
  <item>
    <title>‘जन्माद्यस्य यतः’ से खुला सृष्टि के रहस्य का द्वार, शंकराचार्य ने समझाया परम सत्य का स्वरूप</title>
    <link>https://thinq360.com/nandgaon-bhagwat-katha-shankaracharya-janmadyasya-yatah-param-satya</link>
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    <pubDate>Thu, 17 Sep 2026 18:52:08 +0530</pubDate>
    <dc:creator>गणपत सिंह मांडोली</dc:creator>
    <category>राजस्थान</category>
    <description><![CDATA[श्री गोधाम महातीर्थ पथमेड़ा की ओर से नंदगांव में आयोजित श्री सुरभि हरिहर चातुर्मास आराधना महोत्सव की भागवत कथा में जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी सदानन्द सरस्वती महाराज ने प्रथम स्कन्ध के माध्यम से सृष्टि, जीव, परमात्मा और परम सत्य के संबंध को सरल भाषा में समझाया।]]></description>
    <content:encoded><![CDATA[<p><strong>रेवदर |</strong> अर्बुदारण्य की पावन धरा पर स्थित श्री गोधाम महातीर्थ पथमेड़ा की ओर से नंदगांव में आयोजित &lsquo;श्री सुरभि हरिहर चातुर्मास आराधना महोत्सव&rsquo; के तहत श्रीमद्भागवत कथा श्रद्धा और भक्ति के वातावरण में चल रही है। गो ऋषि दत्त शरणानंद जी महाराज के सानिध्य में आयोजित कथा में जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी सदानन्द सरस्वती जी महाराज ने प्रथम स्कन्ध के माध्यम से सृष्टि के मूल और परम सत्य का सरल एवं शास्त्रसम्मत विवेचन किया।</p>
<h2>&lsquo;जन्माद्यस्य यतः&rsquo; में समाया सृष्टि का रहस्य</h2>
<p>शंकराचार्य स्वामी सदानन्द सरस्वती जी महाराज ने &lsquo;जन्माद्यस्य यतः&rsquo; का अर्थ समझाते हुए कहा कि जिस परम सत्य से इस संसार की उत्पत्ति होती है, जिससे इसका पालन और स्थिति बनी रहती है तथा अंत में जिसमें समस्त सृष्टि का विलय हो जाता है, वही परम तत्त्व है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि संसार केवल दिखाई देने वाले पदार्थों का समूह नहीं है। इसके पीछे एक चेतन, सर्वज्ञ और सर्वशक्तिमान आधार विद्यमान है। उसी परम चेतना से सृष्टि का विस्तार होता है और अंततः सम्पूर्ण सृष्टि उसी में समाहित हो जाती है।</p>
<h2>सृष्टि के मूल कारण की खोज कराता है भागवत</h2>
<p>महाराज श्री ने समझाया कि श्रीमद्भागवत का आरंभ ही मनुष्य को सृष्टि के मूल कारण की खोज की ओर ले जाता है। मनुष्य सामान्यतः संसार के दिखाई देने वाले स्वरूप को ही अंतिम सत्य मान लेता है, जबकि भागवत उसे दृश्य के पीछे विद्यमान अदृश्य चेतना को समझने की प्रेरणा देती है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि सृष्टि की उत्पत्ति, पालन और विलय की प्रक्रिया को समझने के लिए उस परम तत्त्व का ज्ञान आवश्यक है, जो इन सभी अवस्थाओं में अपरिवर्तित रहता है।</p>
<h2>&lsquo;सत्यं परं धीमहि&rsquo; का बताया आध्यात्मिक अर्थ</h2>
<p>शंकराचार्य जी महाराज ने &lsquo;सत्यं परं धीमहि&rsquo; का अर्थ बताते हुए कहा कि हम उस परम सत्य का ध्यान करते हैं, जो सम्पूर्ण सृष्टि का आधार है। यह परम सत्य किसी एक स्थान, वस्तु अथवा कालखंड तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रत्येक जीव और सम्पूर्ण ब्रह्मांड में चेतना के रूप में विद्यमान है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि भागवत का उद्देश्य केवल कथा सुनना नहीं है। इसका वास्तविक उद्देश्य उस परम सत्य को समझना, उसका चिंतन करना और उसे अपने जीवन में अनुभव करना है।</p>
<h2>आत्मप्रश्न से प्रारंभ होती है आध्यात्मिक यात्रा</h2>
<p>महाराज श्री ने कहा कि मनुष्य जब संसार की छोटी-बड़ी इच्छाओं और क्षणभंगुर विषयों से ऊपर उठकर अपने अस्तित्व के मूल प्रश्नों पर विचार करता है, तभी उसकी वास्तविक आध्यात्मिक यात्रा प्रारंभ होती है।</p>
<p>&lsquo;मैं कौन हूं?&rsquo;, &lsquo;यह संसार किससे उत्पन्न हुआ?&rsquo;, &lsquo;जीवन का वास्तविक उद्देश्य क्या है?&rsquo; और &lsquo;परम सत्य का स्वरूप क्या है?&rsquo; जैसे प्रश्न मनुष्य को बाहरी संसार से आत्मचिंतन की ओर ले जाते हैं। इन प्रश्नों के उत्तर खोजने की प्रक्रिया ही मनुष्य को आत्मज्ञान और परमात्मा की अनुभूति के निकट पहुंचाती है।</p>
<p><img src="https://d2uvd0bcf4ztg.cloudfront.net/uploads/images/WhatsApp_Image_2026-09-17_at_18_05_50.webp" alt="" width="700" height="465"></p>
<h2>जीव और परमात्मा का संबंध समझाया</h2>
<p>कथा के दौरान शंकराचार्य जी महाराज ने सृष्टि और सृष्टिकर्ता, जीव और परमात्मा तथा दिखाई देने वाले संसार और अदृश्य चेतन तत्त्व के संबंध को सरल उदाहरणों के माध्यम से समझाया।</p>
<p>उन्होंने बताया कि जीव स्वयं को शरीर और सांसारिक पहचान तक सीमित मानता है, लेकिन उसका वास्तविक स्वरूप चेतन है। जब मनुष्य इस चेतना के मूल को समझने का प्रयास करता है, तब उसे जीव और परमात्मा के संबंध का बोध होने लगता है।</p>
<h2>क्षणभंगुर संसार से ऊपर उठने का संदेश</h2>
<p>शंकराचार्य जी महाराज ने कहा कि संसार के विषय और इच्छाएं स्थायी नहीं हैं। मनुष्य अपना अधिकांश जीवन उन्हीं क्षणभंगुर उपलब्धियों को प्राप्त करने में लगा देता है, जो समय के साथ समाप्त हो जाती हैं।</p>
<p>श्रीमद्भागवत मनुष्य को इन अस्थायी विषयों से ऊपर उठकर उस सत्य की खोज करने का संदेश देती है, जो सदैव विद्यमान रहता है। परम सत्य का चिंतन मनुष्य को जीवन की वास्तविकता समझने और अपने कर्मों को धर्म के मार्ग पर ले जाने की प्रेरणा देता है।</p>
<h2>श्रद्धालु जुड़े गहन आध्यात्मिक चिंतन से</h2>
<p>शंकराचार्य जी महाराज की सहज, सरल और शास्त्रसम्मत व्याख्या से कथा में उपस्थित श्रद्धालु गहन आध्यात्मिक चिंतन से जुड़े। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण करते हुए धर्म, अध्यात्म और आत्मचिंतन का संदेश ग्रहण किया।</p>
<p>कथा स्थल पर भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण वातावरण बना रहा। श्रद्धालुओं ने परम सत्य, सृष्टि के मूल और जीवन के वास्तविक उद्देश्य से संबंधित विचारों को ध्यानपूर्वक सुना।</p>
<h2>पदाधिकारी एवं गणमान्यजन रहे उपस्थित</h2>
<p>इस अवसर पर श्री गोधाम महातीर्थ पथमेड़ा के कार्यकारी अध्यक्ष रघुनाथसिंह राजपुरोहित, मुख्य कार्यकारी अधिकारी आलोक सिंहल, वरिष्ठ ट्रस्टी देवाराम जागरवाल, भरतसिंह बसंत, ब्रह्मदत्त राजपुरोहित और रामचन्द्र नेहरा सहित महोत्सव से जुड़े पदाधिकारी एवं गणमान्यजन उपस्थित रहे।</p>
<p>श्री सुरभि हरिहर चातुर्मास आराधना महोत्सव में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होकर श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण कर रहे हैं। आयोजन के माध्यम से गोसेवा, धर्म, अध्यात्म और आत्मचिंतन का संदेश जन-जन तक पहुंचाया जा रहा है।</p>]]></content:encoded>
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  </item>
  <item>
    <title>सिरोही सभापति चुनाव: आपत्तियों के बाद भी रितु जैन का नामांकन कायम</title>
    <link>https://thinq360.com/sirohi-chairperson-election-ritu-jain-nomination-valid-after-objections</link>
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    <pubDate>Thu, 17 Sep 2026 13:22:22 +0530</pubDate>
    <dc:creator>गणपत सिंह मांडोली</dc:creator>
    <category>राजनीति</category>
    <description><![CDATA[सिरोही नगर परिषद सभापति पद की कांग्रेस प्रत्याशी रितु जैन के नामांकन पर भाजपा की ओर से दर्ज आपत्तियों का कांग्रेस की कानूनी टीम ने जवाब दिया। दोनों पक्षों को सुनने के बाद नामांकन कायम रहा, जिससे कांग्रेस खेमे में उत्साह नजर आया।]]></description>
    <content:encoded><![CDATA[<p><strong>सिरोही |</strong> नगर परिषद सभापति पद के चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी रितु जैन के नामांकन को लेकर कई घंटों तक चला राजनीतिक और कानूनी घटनाक्रम समाप्त हो गया है। भाजपा की ओर से दर्ज कराई गई आपत्तियों और कांग्रेस की कानूनी टीम द्वारा प्रस्तुत जवाब पर विचार करने के बाद रितु जैन का नामांकन कायम रहा। इसके साथ ही उनकी उम्मीदवारी को लेकर चल रही अटकलों पर विराम लग गया है।</p>
<p>नामांकन सही पाए जाने की जानकारी सामने आते ही कांग्रेस कार्यकर्ताओं में उत्साह की लहर दिखाई दी। कलेक्ट्रेट परिसर के बाहर मौजूद कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी करते हुए इसे पार्टी की जीत बताया। पूर्व विधायक संयम लोढ़ा ने भी कांग्रेस प्रत्याशी के चुनाव मैदान में बने रहने पर संतोष जताया।</p>
<h2>भाजपा ने नामांकन पर दर्ज कराई थीं आपत्तियां</h2>
<p>मामले की शुरुआत उस समय हुई, जब भाजपा की ओर से जोधपुर हाईकोर्ट के दो अधिवक्ताओं ने रिटर्निंग अधिकारी के समक्ष कांग्रेस प्रत्याशी रितु जैन के नामांकन को लेकर आपत्तियां प्रस्तुत कीं।</p>
<p>आपत्तियां दर्ज होने के बाद सिरोही की राजनीति में हलचल तेज हो गई। भाजपा और कांग्रेस दोनों दलों की कानूनी एवं राजनीतिक टीमें सक्रिय हो गईं। हालांकि भाजपा की ओर से प्रस्तुत आपत्तियों के विस्तृत कानूनी आधार की पूरी जानकारी सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आई है।</p>
<p>आपत्तियों के कारण रितु जैन की उम्मीदवारी को लेकर अटकलें शुरू हो गईं। राजनीतिक हलकों में यह चर्चा तेज थी कि उनका नामांकन कायम रहेगा या निर्वाचन अधिकारी की ओर से कोई प्रतिकूल निर्णय आएगा।</p>
<h2>कांग्रेस को मिला जवाब देने का समय</h2>
<p>रिटर्निंग अधिकारी ने रितु जैन के पक्ष को आपत्तियों का जवाब प्रस्तुत करने के लिए दोपहर 12:30 बजे तक का समय दिया। इसके बाद कांग्रेस की कानूनी टीम ने दस्तावेजों और कानूनी तर्कों के साथ रिटर्निंग अधिकारी के समक्ष अपना पक्ष रखा।</p>
<p>कांग्रेस की ओर से दावा किया गया कि रितु जैन का नामांकन नियमानुसार दाखिल किया गया है और उस पर लगाई गई आपत्तियों में ऐसा कोई आधार नहीं है, जिससे उनकी उम्मीदवारी प्रभावित हो।</p>
<p>इस दौरान दोनों दलों के नेताओं और कार्यकर्ताओं की नजरें रिटर्निंग अधिकारी के निर्णय पर टिकी रहीं। कलेक्ट्रेट परिसर में पूरे समय राजनीतिक सरगर्मी बनी रही।</p>
<h2>कलेक्ट्रेट पहुंचे संयम लोढ़ा</h2>
<p>नामांकन की जांच और आपत्तियों पर सुनवाई के बीच पूर्व विधायक एवं कांग्रेस नेता संयम लोढ़ा भी कलेक्ट्रेट पहुंचे। उनके पहुंचने के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं की सक्रियता और बढ़ गई। बाहर मौजूद कार्यकर्ताओं ने पार्टी और रितु जैन के समर्थन में नारेबाजी की।</p>
<p>कांग्रेस नेताओं ने पूरे घटनाक्रम को भाजपा की राजनीतिक रणनीति से जोड़ते हुए निष्पक्ष निर्वाचन प्रक्रिया की मांग की। दूसरी ओर भाजपा की ओर से नामांकन की वैधता को लेकर कानूनी आपत्तियां प्रस्तुत करने की बात कही गई।</p>
<h2>रिटर्निंग अधिकारी के निर्णय से साफ हुई तस्वीर</h2>
<p>दोनों पक्षों के तर्क और उपलब्ध दस्तावेजों पर विचार करने के बाद रितु जैन का नामांकन कायम रहा। इस निर्णय के बाद सभापति चुनाव में उनकी उम्मीदवारी को लेकर बनी अनिश्चितता समाप्त हो गई।</p>
<p>नामांकन कायम रहने के बाद रितु जैन कांग्रेस की अधिकृत प्रत्याशी के रूप में सभापति पद का चुनाव लड़ सकेंगी। भाजपा की ओर से दर्ज आपत्तियों के कारण उनकी उम्मीदवारी पर बना संशय भी दूर हो गया है।</p>
<p>हालांकि निर्वाचन अधिकारी के विस्तृत आदेश और आपत्तियों पर दिए गए कानूनी निष्कर्षों की पूरी जानकारी सामने आने के बाद ही मामले के तकनीकी पहलुओं की विस्तृत तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।</p>
<h2>कांग्रेस कार्यकर्ताओं में दिखा उत्साह</h2>
<p>रितु जैन का नामांकन कायम रहने की खबर मिलते ही कांग्रेस कार्यकर्ताओं में उत्साह नजर आया। कार्यकर्ताओं ने इसे सच्चाई और कानूनी पक्ष की जीत बताते हुए रितु जैन तथा संयम लोढ़ा के समर्थन में नारे लगाए।</p>
<p>नामांकन की जांच के दौरान कांग्रेस खेमे में चिंता का माहौल था, लेकिन निर्णय सामने आने के बाद कार्यकर्ताओं और नेताओं ने राहत की सांस ली। पार्टी नेताओं ने अब पूरा ध्यान सभापति पद के चुनाव और पार्षदों को एकजुट रखने पर केंद्रित करने की बात कही।</p>
<h2>संयम लोढ़ा ने भाजपा पर साधा निशाना</h2>
<p>रितु जैन का नामांकन कायम रहने के बाद पूर्व विधायक संयम लोढ़ा ने भाजपा पर राजनीतिक दबाव बनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस लोकतांत्रिक और कानूनी तरीके से चुनाव लड़ रही है और सभापति पद का मुकाबला पूरी मजबूती के साथ लड़ा जाएगा।</p>
<p>लोढ़ा ने कार्यकर्ताओं से एकजुट रहने और किसी भी राजनीतिक दबाव से प्रभावित नहीं होने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि नामांकन को लेकर पैदा की गई अनिश्चितता समाप्त हो चुकी है और अब कांग्रेस का पूरा ध्यान चुनावी मुकाबले पर है।</p>
<h2>अब पार्षदों के समर्थन पर टिकी नजरें</h2>
<p>रितु जैन का नामांकन कायम रहने के बाद सिरोही नगर परिषद सभापति चुनाव की तस्वीर काफी हद तक स्पष्ट हो गई है। अब चुनाव का परिणाम पार्षदों के संख्या बल, उनकी एकजुटता और संभावित क्रॉस वोटिंग पर निर्भर करेगा।</p>
<p>दोनों प्रमुख दल अपने-अपने पार्षदों को साथ रखने और आवश्यक समर्थन जुटाने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। ऐसे में मतदान तक बैठकों, राजनीतिक रणनीति और पार्षदों की बाड़ेबंदी का दौर जारी रह सकता है।</p>
<p>नामांकन पर आपत्तियों का अध्याय समाप्त होने के बाद अब असली मुकाबला सभापति की कुर्सी के लिए होगा। कांग्रेस रितु जैन के साथ चुनाव मैदान में है, जबकि भाजपा भी अपना बोर्ड बनाने के लिए पूरी ताकत लगा रही है।</p>
<p>फिलहाल रितु जैन का नामांकन कायम रहना कांग्रेस के लिए बड़ी राहत है। अब सिरोही की राजनीति में सबसे बड़ा सवाल यही है कि नगर परिषद सभापति की कुर्सी पर किसका कब्जा होगा और मतदान के दिन पार्षदों का वास्तविक रुख क्या रहेगा।</p>]]></content:encoded>
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  </item>
  <item>
    <title>सिरोही सभापति चुनाव: रितु जैन के नामांकन पर आपत्ति, भाजपा-कांग्रेस में सियासी घमासान</title>
    <link>https://thinq360.com/sirohi-sabhapati-election-ritu-jain-nomination-objections</link>
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    <pubDate>Thu, 17 Sep 2026 12:28:04 +0530</pubDate>
    <dc:creator>Pradeep Beedawat</dc:creator>
    <category>राजनीति</category>
    <description><![CDATA[सिरोही नगर परिषद सभापति पद की कांग्रेस प्रत्याशी रितु जैन के नामांकन पर भाजपा की ओर से दो अधिवक्ताओं ने आपत्तियां दर्ज कराईं। कांग्रेस की कानूनी टीम ने रिटर्निंग अधिकारी के समक्ष जवाब पेश किया। इसी दौरान कांग्रेस नेता संयम लोढ़ा कलेक्टर से मिलने पहुंचे।]]></description>
    <content:encoded><![CDATA[<p><strong>सिरोही |</strong> नगर परिषद सभापति पद के चुनाव को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच सियासी घमासान तेज हो गया है। कांग्रेस की अधिकृत प्रत्याशी रितु जैन के नामांकन पर भाजपा की ओर से आपत्तियां दर्ज कराए जाने के बाद कलेक्ट्रेट परिसर में राजनीतिक और कानूनी गतिविधियां बढ़ गईं। कांग्रेस की कानूनी टीम ने भी रिटर्निंग अधिकारी के समक्ष जवाब पेश करते हुए प्रत्याशी का पक्ष रखा।</p>
<h2>दो अधिवक्ताओं ने दर्ज कराईं आपत्तियां</h2>
<p>भाजपा की ओर से जोधपुर हाईकोर्ट के दो अधिवक्ताओं ने रिटर्निंग अधिकारी के समक्ष रितु जैन के नामांकन को लेकर आपत्तियां प्रस्तुत कीं। इसके बाद नामांकन की जांच और आपत्तियों पर जवाब देने की प्रक्रिया को लेकर दोनों राजनीतिक दलों की सक्रियता बढ़ गई।</p>
<p>उपलब्ध जानकारी में भाजपा की ओर से लगाई गई आपत्तियों के विस्तृत कानूनी आधार का खुलासा नहीं किया गया है। ऐसे में आपत्तियों के वास्तविक आधार और उन पर निर्वाचन अधिकारी के निष्कर्ष को लेकर आधिकारिक निर्णय का इंतजार है।</p>
<h2>दोपहर 12:30 बजे तक जवाब का समय</h2>
<p>रिटर्निंग अधिकारी ने रितु जैन के पक्ष को आपत्तियों का जवाब प्रस्तुत करने के लिए दोपहर 12:30 बजे तक का समय दिया। कांग्रेस की कानूनी टीम ने निर्धारित समय के भीतर जवाब पेश करते हुए नामांकन के समर्थन में अपना पक्ष रखा।</p>
<p>नामांकन पत्र पर उठे सवालों और कांग्रेस की ओर से दिए गए जवाब के बाद भाजपा और कांग्रेस दोनों की नजरें रिटर्निंग अधिकारी के निर्णय पर टिक गईं।</p>
<h2>कलेक्टर से मिलने पहुंचे संयम लोढ़ा</h2>
<p>नामांकन पर आपत्तियों से जुड़े घटनाक्रम के दौरान कांग्रेस नेता एवं पूर्व विधायक संयम लोढ़ा कलेक्टर से मिलने पहुंचे। इस दौरान कलेक्ट्रेट के बाहर मौजूद कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी की।</p>
<p>संयम लोढ़ा के कलेक्टर से मिलने पहुंचने के बाद मामला और अधिक राजनीतिक हो गया। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने रितु जैन के समर्थन में एकजुटता दिखाते हुए भाजपा पर चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने का आरोप लगाया। हालांकि इन राजनीतिक आरोपों पर भाजपा की विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।</p>
<h2>रिटर्निंग अधिकारी के निर्णय पर टिकी नजरें</h2>
<p>सभापति पद के चुनाव में नामांकन की वैधता को लेकर अंतिम निर्णय रिटर्निंग अधिकारी को करना है। भाजपा की आपत्तियों और कांग्रेस के जवाब पर विचार करने के बाद ही स्पष्ट होगा कि रितु जैन का नामांकन स्वीकार किया जाता है या उस पर कोई अन्य निर्णय लिया जाता है।</p>
<p>इस रिपोर्ट के लिए उपलब्ध जानकारी में रितु जैन का नामांकन स्वीकार अथवा खारिज किए जाने का अंतिम निर्णय शामिल नहीं है। फिलहाल घटनाक्रम भाजपा की आपत्तियों, कांग्रेस के जवाब और प्रशासनिक स्तर पर जारी जांच प्रक्रिया से संबंधित है।</p>
<h2>सभापति चुनाव से पहले बढ़ी राजनीतिक सरगर्मी</h2>
<p>रितु जैन के नामांकन पर आपत्तियों ने सिरोही नगर परिषद सभापति चुनाव को राजनीतिक और कानूनी संघर्ष में बदल दिया है। दोनों दलों की सक्रियता और कलेक्ट्रेट परिसर में कार्यकर्ताओं की मौजूदगी से चुनावी माहौल गरमा गया है।</p>
<p>अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि रिटर्निंग अधिकारी आपत्तियों और कांग्रेस के जवाब पर क्या निर्णय देते हैं। इसी निर्णय से सिरोही सभापति चुनाव के आगामी राजनीतिक समीकरण तय होंगे।</p>]]></content:encoded>
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  </item>
  <item>
    <title>80s फोटो ट्रेंड बना ठगी का हथियार, पुलिस ने चेताया</title>
    <link>https://thinq360.com/80s-retro-photo-trend-nostalgia-scam-police-warning</link>
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    <pubDate>Thu, 17 Sep 2026 12:15:03 +0530</pubDate>
    <dc:creator>जोगेन्द्र सिंह शेखावत</dc:creator>
    <category>भारत</category>
    <description><![CDATA[सोशल मीडिया पर वायरल 80s रेट्रो फोटो ट्रेंड अब 'नॉस्टेल्जिया स्कैम' बन गया है। साइबर ठग फर्जी लिंक भेजकर फोन हैक कर रहे हैं और कई राज्यों की पुलिस ने चेतावनी जारी की है।]]></description>
    <content:encoded><![CDATA[<h2>80s रेट्रो फोटो ट्रेंड बना ठगी का नया हथियार</h2>
<p>आजकल सोशल मीडिया पर हर तरफ 80 के दशक की रेट्रो-स्टाइल तस्वीरें छाई हुई हैं। लोग आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से अपनी और परिवार की तस्वीरों को पुराने जमाने का लुक देकर शेयर कर रहे हैं।</p>
<p>लेकिन इस ट्रेंड के पीछे एक बड़ा खतरा छिपा है, जिसे 'नॉस्टेल्जिया स्कैम' कहा जा रहा है। राजस्थान सहित देशभर में करोड़ों लोग अनजाने में इस स्कैम का शिकार हो सकते हैं।</p>
<h2>क्या है 'नॉस्टेल्जिया स्कैम'?</h2>
<p>नॉस्टेल्जिया स्कैम साइबर ठगी का एक नया तरीका है, जिसमें ठग लोगों की पुरानी यादों (Nostalgia) के प्रति लगाव का फायदा उठाते हैं।</p>
<p>वे 80 के दशक के रेट्रो ट्रेंड की आड़ में लोगों को अपना निशाना बना रहे हैं। यह पुरानी यादों के नाम पर किया जाने वाला एक खतरनाक साइबर फ्रॉड है।</p>
<h3>कैसे काम करता है यह स्कैम?</h3>
<p>साइबर अपराधी इस ट्रेंड का फायदा उठाकर लोगों को फंसा रहे हैं। इसके काम करने का तरीका बहुत सरल लेकिन प्रभावी है।</p>
<ul>
<li><strong>फर्जी लिंक और मैसेज:</strong> ठग सोशल मीडिया और व्हाट्सएप पर "अपनी फोटो को 80s का लुक दें" या "फ्री में रेट्रो पोर्ट्रेट बनाएं" जैसे आकर्षक मैसेज के साथ एक लिंक भेजते हैं।</li>
<li><strong>मैलिशियस APK फाइल:</strong> लिंक पर क्लिक करते ही यूजर को एक फर्जी ऐप (APK फाइल) डाउनलोड करने के लिए कहा जाता है, जो प्ले स्टोर पर उपलब्ध नहीं होती।</li>
<li><strong>डेटा की चोरी:</strong> ऐप इंस्टॉल होते ही यह फोन की गैलरी, कैमरा, कॉन्टैक्ट्स और मैसेज जैसी जरूरी अनुमतियां मांग लेता है। अनुमति मिलते ही ठग OTP, बैंकिंग डिटेल्स और अन्य निजी जानकारी चुरा लेते हैं।</li>
<li><strong>बैंक खाता खाली:</strong> चुराई गई जानकारी का उपयोग करके अपराधी बैंक खाते से पैसे निकाल लेते हैं या पहचान की चोरी (Identity Theft) जैसी घटनाओं को अंजाम देते हैं।</li>
</ul>
<h2>कई राज्यों की पुलिस ने जारी की चेतावनी</h2>
<p>इस बढ़ते खतरे को देखते हुए झारखंड, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, तेलंगाना और कर्नाटक समेत कई राज्यों की पुलिस ने आधिकारिक चेतावनी और एडवाइजरी जारी की है।</p>
<h3>झारखंड: बोकारो साइबर पुलिस की सलाह</h3>
<p>बोकारो साइबर थाना प्रभारी पवन कुमार ने लोगों को AI ट्रेंड्स के प्रति सतर्क रहने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि किसी भी अनजान ऐप पर फोटो अपलोड करने से पहले उसकी प्राइवेसी पॉलिसी की जांच अवश्य करें।</p>
<h3>हिमाचल प्रदेश: CID साइबर क्राइम ब्यूरो का अलर्ट</h3>
<p>हिमाचल पुलिस महानिदेशक अशोक तिवारी के नेतृत्व में स्टेट CID साइबर क्राइम ब्यूरो ने चेतावनी दी है। उन्होंने कहा, "सोचें, समझें, फिर अपलोड करें।" अनजान AI ऐप पर तस्वीरें अपलोड करने से डीपफेक वीडियो, फर्जी प्रोफाइल और ब्लैकमेलिंग का खतरा बढ़ सकता है।</p>
<h3>उत्तर प्रदेश: मुरादाबाद पुलिस की चेतावनी</h3>
<p>मुरादाबाद में एसपी सिटी कुमार रण विजय सिंह और साइबर एक्सपर्ट्स ने बताया कि ठग APK फाइल भेजकर फोन हैक कर रहे हैं। साइबर थाने के प्रशांत सिंह ने आगाह किया कि अनजान ऐप्स को परमिशन देने से निजी डेटा चोरी हो सकता है।</p>
<h2>सबसे बड़ा खतरा: बायोमेट्रिक डेटा लीक</h2>
<p>जब लोग अपनी हाई-क्वालिटी तस्वीरें ChatGPT या अन्य AI टूल्स पर अपलोड करते हैं, तो वे अनजाने में अपना सबसे कीमती डेटा, यानी चेहरे का बायोमेट्रिक डेटा, लीक कर देते हैं।</p>
<p>इस डेटा का इस्तेमाल पहचान चुराने, फर्जी KYC करवाने या आधार से जुड़े स्कैम करने के लिए किया जा सकता है। इससे डीपफेक वीडियो बनाकर किसी को बदनाम भी किया जा सकता है।</p>
<h2>धोखाधड़ी होने पर क्या करें?</h2>
<p>साइबर ठगी का शिकार होने पर घबराएं नहीं। तत्काल राष्ट्रीय साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें।</p>
<p>आप अपनी शिकायत ऑनलाइन माध्यम से <strong>cybercrime.gov.in</strong> पर भी दर्ज करा सकते हैं। याद रखें, आपकी पुरानी यादें कीमती हैं, लेकिन आपकी डिजिटल सुरक्षा उससे भी ज्यादा महत्वपूर्ण है। सतर्क रहें, सुरक्षित रहें।</p>]]></content:encoded>
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  </item>
  <item>
    <title>बड़ी चौपड़ में भीषण आग, 20 से ज्यादा दुकानें चपेट में</title>
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    <pubDate>Thu, 17 Sep 2026 12:05:35 +0530</pubDate>
    <dc:creator>जोगेन्द्र सिंह शेखावत</dc:creator>
    <category>राजस्थान</category>
    <description><![CDATA[जयपुर के व्यस्त त्रिपोलिया बाजार में गुरुवार सुबह भीषण आग लग गई। आग पुरोहित जी का कटला की दूसरी मंजिल पर लगी और 20 से अधिक दुकानों और गोदामों में फैल गई।]]></description>
    <content:encoded><![CDATA[<p><strong>जयपुर | </strong> जयपुर के त्रिपोलिया बाजार स्थित सेठी कॉम्प्लेक्स मणिहारी कटला (पुरोहित जी का कटला) में गुरुवार सुबह करीब 7 बजे भीषण आग लग गई। आग ने देखते ही देखते विकराल रूप धारण कर लिया और आसपास की दुकानों को अपनी चपेट में ले लिया।</p>
<p>यह आग दूसरी मंजिल पर कपड़ों की दुकान के बाहर कार्टन में रखे सामान से शुरू हुई थी। जल्द ही यह आसपास की दुकानों और गोदामों तक फैल गई, जिससे पूरे बाजार में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।</p>
<h2>आग की लपटों से मचा हड़कंप</h2>
<p>आग की लपटें और धुएं का गुबार इतना भयानक था कि यह सुभाष चौक से लेकर चांदपोल तक दिखाई दे रहा था। आग की चपेट में दूसरी मंजिल की 20 से ज्यादा दुकानें आ गईं।</p>
<p>इन दुकानों में कपड़ों के गोदाम, प्लास्टिक का सामान और चूड़ी-बैंगल्स की दुकानें शामिल थीं, जिनमें ज्वलनशील सामान भरा हुआ था।</p>
<h3>दमकल की गाड़ियां मौके पर</h3>
<p>आग लगने की जगह से कुछ ही दूरी पर माणक चौक थाना स्थित है। धुआं उठता देखकर पुलिसकर्मी तुरंत मौके पर पहुंचे और स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया।</p>
<p>पुलिस ने तुरंत दमकल विभाग को सूचना दी। करीब 8 बजे दमकल की पांच गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और आग बुझाने का काम शुरू किया। बाद में आधा दर्जन और दमकल वाहन, पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी भी राहत एवं बचाव कार्य में जुट गए।</p>
<h2>आग बुझाने में चुनौतियां</h2>
<p>दुकानों के अंदर कपड़े, प्लास्टिक और अन्य ज्वलनशील सामान होने के कारण आग बुझाने में दमकलकर्मियों को काफी मशक्कत करनी पड़ रही है।</p>
<p>बाजार की दुकानें आपस में जुड़ी होने और शटर बंद होने के कारण अंदर धुआं भर गया था। इसके अलावा, संकरी गलियों के कारण दमकल वाहनों को भी मौके तक पहुंचने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।</p>
<h2>व्यापारियों ने लगाए गंभीर आरोप</h2>
<p>स्थानीय व्यापारियों के अनुसार, जिस मंजिल पर आग लगी है, उसके ऊपर एक रेस्टोरेंट भी संचालित किया जा रहा है। व्यापारियों ने आरोप लगाया कि यह रेस्टोरेंट अवैध रूप से चल रहा है।</p>
<p>उन्होंने यह भी बताया कि मकर संक्रांति के दौरान भी इसी रेस्टोरेंट से जुड़ी जगह पर छत पर आग लगने की घटना हुई थी, जिसकी शिकायत माणक चौक थाने में की गई थी।</p>
<h2>फायर सेफ्टी और अतिक्रमण पर उठे सवाल</h2>
<p>पुरोहित जी का कटला महिलाओं के कपड़ों, साड़ियों, ब्राइडल लहंगों और शादी के सामान का एक प्रमुख थोक बाजार है। यहां 535 से ज्यादा दुकानें हैं और रोजाना बड़ी संख्या में लोग खरीदारी करने आते हैं।</p>
<h3>बाजार में सुरक्षा के इंतजाम नाकाफी</h3>
<p>व्यापारियों ने बाजार में सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनके अनुसार, बाजार में कई सुरक्षा खामियां हैं, जो इस तरह की घटनाओं को न्योता देती हैं।</p>
<ul>
<li>बाजार में लगाए गए कई फायर हाइड्रेंट खराब हैं या उनके वाल्व और कपलिंग गायब हैं।</li>
<li>दुकानों के आसपास खुले बिजली के स्विच और लटकते तार भी एक बड़ा खतरा बने हुए हैं।</li>
<li>अतिक्रमण के कारण बाजार की करीब 5 फीट चौड़ी सड़क कई जगहों पर घटकर 2 फीट तक रह गई है।</li>
<li>दुकानों के अंदर से ज्यादा सामान बाहर रखा रहता है, जिससे आपात स्थिति में राहत कार्य प्रभावित होता है।</li>
</ul>
<p style="display: flex; align-items: center; gap: 4px; font-style: italic; font-size: 0.65em; color: #94a3b8; font-weight: normal; margin-top: 20px;">*Edit with Google AI Studio</p>]]></content:encoded>
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  </item>
  <item>
    <title>US फेड ने बढ़ाई ब्याज दर, सोना-चांदी धड़ाम, देखें नए रेट</title>
    <link>https://thinq360.com/gold-silver-price-today-us-fed-rate-hike-impact</link>
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    <pubDate>Thu, 17 Sep 2026 11:49:07 +0530</pubDate>
    <dc:creator>जोगेन्द्र सिंह शेखावत</dc:creator>
    <category>भारत</category>
    <description><![CDATA[अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व के ब्याज दर बढ़ाने के फैसले से सोने और चांदी की कीमतों पर भारी दबाव देखने को मिला है। घरेलू और वैश्विक दोनों बाजारों में कीमती धातुओं में गिरावट आई है।]]></description>
    <content:encoded><![CDATA[<p>अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व (US Fed) ने बुधवार रात तीन साल से अधिक समय के बाद प्रमुख ब्याज दरों में इजाफा करने का ऐलान किया है। इस फैसले का सीधा असर सोने और चांदी की कीमतों पर देखने को मिला है।</p>
<p>यूएस फेड द्वारा दरें बढ़ाने के बाद कॉमेक्स पर सोने-चांदी की कीमतों में 1 फीसदी से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। इसका असर घरेलू वायदा बाजार पर भी पड़ा, जहां गुरुवार सुबह सोना लाल निशान पर कारोबार करता दिखा।</p>
<h2>वायदा बाजार में सोने का भाव</h2>
<p>एमसीएक्स (MCX) एक्सचेंज पर गुरुवार सुबह 9 बजकर 31 मिनट पर 5 अक्टूबर की डिलीवरी वाले सोने का वायदा भाव 0.78 फीसदी यानी 1200 रुपये की बड़ी गिरावट के साथ 1,51,277 रुपये प्रति 10 ग्राम पर ट्रेड कर रहा था।</p>
<h3>चांदी की कीमतों में भी गिरावट</h3>
<p>सोने के साथ-साथ चांदी की घरेलू वायदा कीमतों में भी गुरुवार को भारी गिरावट देखने को मिली। एमसीएक्स पर सुबह 9 बजकर 34 मिनट पर 4 दिसंबर की डिलीवरी वाली चांदी का रेट 0.86 फीसदी यानी 2025 रुपये की गिरावट के साथ 2,32,761 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गया।</p>
<h2>वैश्विक बाजार का हाल</h2>
<p>वैश्विक स्तर पर भी सोने-चांदी की कीमतों में गिरावट का रुख रहा। कॉमेक्स पर सोने का वैश्विक भाव 1.21 फीसदी या 52.90 डॉलर की गिरावट के साथ 4,334.60 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया।</p>
<p>इसी तरह, कॉमेक्स पर चांदी का वैश्विक भाव 1.15 फीसदी या 0.75 डॉलर की गिरावट के साथ 64.17 डॉलर प्रति औंस पर ट्रेड कर रहा था।</p>
<h2>क्यों आई कीमतों में गिरावट?</h2>
<p>सोने की कीमतों में गिरावट की मुख्य वजह यूएस फेड द्वारा ब्याज दरों में इजाफा करना है। फेडरल रिजर्व ने 3 साल से अधिक समय बाद ब्याज दरों में 0.25 फीसदी की बढ़ोतरी को मंजूरी दी है।</p>
<p>इस बढ़ोतरी के बाद फेड रेट 3.75 से 4 फीसदी की रेंज में आ गई है। फेड ने यह भी संकेत दिया है कि बढ़ती महंगाई पर लगाम लगाने के लिए साल के अंत तक एक और बढ़ोतरी की जा सकती है।</p>
<h3>निवेशकों ने बदला रुख</h3>
<p>फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दर बढ़ाने से निवेशक अब बिना ब्याज वाले एसेट यानी सोने को छोड़कर ट्रेजरी बॉन्ड जैसे ब्याज देने वाले एसेट्स की ओर रुख कर सकते हैं। इसी कारण से सोने की कीमतों में गिरावट देखने को मिली है।</p>
<h2>घरेलू हाजिर बाजार में सोने के दाम</h2>
<p>घरेलू हाजिर बाजार में भी गुरुवार को सोने की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। गुड रिटर्न्स के अनुसार, सुबह 9 बजकर 50 मिनट पर दिल्ली में 24 कैरेट सोने का रेट 600 रुपये की गिरावट के साथ 1,52,990 रुपये प्रति 10 ग्राम पर था।</p>
<ul>
<li><strong>22 कैरेट सोना:</strong> 550 रुपये की गिरावट के साथ 1,40,250 रुपये प्रति 10 ग्राम।</li>
<li><strong>18 कैरेट सोना:</strong> 400 रुपये गिरकर 1,14,830 रुपये प्रति 10 ग्राम।</li>
<li><strong>चांदी का हाजिर भाव:</strong> 2,45,000 रुपये प्रति किलोग्राम।</li>
</ul>
<h3>प्रमुख शहरों में सोने का भाव</h3>
<p><strong>दिल्ली:</strong> 24 कैरेट सोना ₹1,52,990, 22 कैरेट सोना ₹1,40,250।</p>
<p><strong>मुंबई:</strong> 24 कैरेट सोना ₹1,52,840, 22 कैरेट सोना ₹1,40,100।</p>
<p><strong>चेन्नई:</strong> 24 कैरेट सोना ₹1,52,840, 22 कैरेट सोना ₹1,40,100।</p>
<p><strong>कोलकाता:</strong> 24 कैरेट सोना ₹1,52,840, 22 कैरेट सोना ₹1,40,100।</p>
<p style="display: flex; align-items: center; gap: 4px; font-style: italic; font-size: 0.65em; color: #94a3b8; font-weight: normal; margin-top: 20px;">*Edit with Google AI Studio</p>]]></content:encoded>
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  </item>
  <item>
    <title>हजारों करोड़ खर्च, फिर भी BHIM ऐप 1% हिस्सेदारी को तरसा</title>
    <link>https://thinq360.com/bhim-app-fails-against-phonepe-google-pay-upi-market</link>
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    <pubDate>Thu, 17 Sep 2026 11:41:31 +0530</pubDate>
    <dc:creator>जोगेन्द्र सिंह शेखावत</dc:creator>
    <category>भारत</category>
    <description><![CDATA[सरकारी प्रयासों और भारी निवेश के बावजूद, भारत का अपना भीम ऐप UPI बाजार में फोनपे और गूगलपे जैसे विदेशी दिग्गजों से बहुत पीछे है, जिसकी हिस्सेदारी 1% से भी कम है।]]></description>
    <content:encoded><![CDATA[<h2>विदेशी ऐप्स का दबदबा, देसी BHIM ऐप क्यों पिछड़ा?</h2>
<p>यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (UPI) के जरिए पैसों का लेन-देन अब आम हो गया है। लेकिन इस विशाल बाजार में देसी ऐप्स की मौजूदगी न के बराबर है, खासकर सरकारी ऐप की।</p>
<p>यह एक बड़ा सवाल है कि सरकार के भारी प्रयासों के बावजूद, भीम (BHIM) ऐप के बाद आए विदेशी ऐप्स ने कैसे तीन-चौथाई बाजार पर कब्जा कर लिया?</p>
<h3>बाजार पर किसका कितना कब्जा?</h3>
<p>एनसीपीआई (NCPI) के आंकड़ों के अनुसार, अगस्त 2026 में यूपीआई के जरिए हुए कुल लेन-देन में से लगभग 80% हिस्सेदारी सिर्फ दो विदेशी ऐप्स - फोनपे और गूगलपे की थी।</p>
<p>फोनपे (वालमार्ट) और गूगलपे (अल्फाबेट) ने भारतीय डिजिटल भुगतान बाजार में अपनी मजबूत पकड़ बना ली है।</p>
<ul>
<li><strong>फोनपे (PhonePe):</strong> वॉल्यूम में 45.68% और वैल्यू में 48.61% हिस्सेदारी।</li>
<li><strong>गूगल पे (Google Pay):</strong> वॉल्यूम में 33.31% और वैल्यू में 33.77% हिस्सेदारी।</li>
<li><strong>पेटीएम (Paytm):</strong> वॉल्यूम में 7.65% और वैल्यू में 6.42% हिस्सेदारी।</li>
<li><strong>भीम (BHIM):</strong> वॉल्यूम में 0.79% और वैल्यू में 0.78% हिस्सेदारी।</li>
</ul>
<p>ये आंकड़े दिखाते हैं कि पेटीएम जैसे निजी देसी ऐप भी सरकारी भीम ऐप से कहीं आगे हैं।</p>
<h2>हजारों करोड़ की सरकारी मदद भी बेअसर</h2>
<p>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 30 दिसंबर, 2016 को भारत इंटरफेस फॉर मनी (BHIM) ऐप लॉन्च किया था। इसका उद्देश्य डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देना था।</p>
<p>लेकिन दस साल बाद भी यह ऐप संख्या और रकम दोनों के मामले में एक फीसदी हिस्सेदारी भी हासिल नहीं कर पाया है।</p>
<h3>सरकारी प्रोत्साहन योजनाएं</h3>
<p>मोदी सरकार ने भीम-यूपीआई को मजबूत करने के लिए लगातार इंसेंटिव स्कीमें चलाई हैं। वित्त वर्ष 2024-25 में इसके लिए 1500 करोड़ रुपये की योजना शुरू की गई।</p>
<p>इससे पहले के तीन वर्षों में सरकार करीब 7230 करोड़ रुपये का इंसेंटिव दे चुकी थी। इसके बावजूद, भीम ऐप बाजार में अपनी जगह बनाने में असफल रहा है।</p>
<p>यह स्थिति सर्विस सेक्टर में सरकारी कंपनियों की विफलता पर फिर से सवाल खड़े करती है, जैसे कि बीएसएनएल-एमटीएनएल का निजी कंपनी जियो के सामने पिछड़ जाना।</p>
<h2>UPI ट्रांजैक्शन पर फिर से चार्ज</h2>
<p>यूपीआई से भुगतान पर चार्ज को लेकर भी बहस छिड़ी हुई है। 15 अक्टूबर, 2026 से 2000 रुपये से ज्यादा के मर्चेंट भुगतान पर 0.4% का चार्ज लगाया जाएगा।</p>
<p>यह चार्ज ग्राहक से नहीं, बल्कि मर्चेंट से वसूला जाएगा। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने इसे 'यूपीआई टैक्स' कहकर इसका विरोध किया है।</p>
<h3>चार्ज क्यों जरूरी है?</h3>
<p>चार्ज लगाने के पक्षधरों का कहना है कि डिजिटल पेमेंट के बढ़ते इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए निवेश जरूरी है। इस चार्ज से मिलने वाली रकम से इस जरूरत को पूरा करने में मदद मिलेगी।</p>
<p>अनुमान है कि इससे करीब 160-170 अरब रुपये की वसूली होगी, जिसका 60% बैंकों को, 25% ऐप्स को और 15% एग्रीगेटर्स को मिलेगा।</p>
<p>यह पहली बार नहीं है जब यूपीआई पर चार्ज लगा है। 2016 में 0.3% चार्ज था, जिसे बाद में हटा दिया गया था। क्रेडिट और डेबिट कार्ड पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) पहले से ही लागू है।</p>]]></content:encoded>
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  </item>
  <item>
    <title>भागवत कथा साक्षात श्रीकृष्ण का स्वरूप: शंकराचार्य</title>
    <link>https://thinq360.com/shankaracharya-sadanand-saraswati-bhagwat-katha-nandgaon-revdar</link>
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    <pubDate>Wed, 16 Sep 2026 22:14:17 +0530</pubDate>
    <dc:creator>गणपत सिंह मांडोली</dc:creator>
    <category>लाइफ स्टाइल</category>
    <description><![CDATA[रेवदर के नंदगांव में शंकराचार्य सदानन्द सरस्वती ने भागवत कथा के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि यह ग्रंथ साक्षात श्रीकृष्ण का स्वरूप है और इसका श्रवण जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाता है।]]></description>
    <content:encoded><![CDATA[<p><strong>रेवदर | </strong> श्रीगोधाम महातीर्थ नंदगांव में इन दिनों आध्यात्मिक रस की धारा बह रही है। गोऋषि दत्त शरणानंद महाराज के सान्निध्य में चल रहे सुरभि हरिहर चातुर्मास के तहत श्रीमद्भागवत ज्ञान यज्ञ का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें श्रद्धालुओं का भारी जनसैलाब उमड़ रहा है।</p>
<p>इस भव्य आयोजन में पूज्य द्वारकाशारदापीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी श्री सदानन्द सरस्वती जी महाराज अपने श्रीमुख से कथा का वाचन कर रहे हैं। श्रद्धालु भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं और आध्यात्मिक ज्ञान का रसपान कर रहे हैं।</p>
<h2>श्रीमद्भागवत का आध्यात्मिक महत्व</h2>
<p>कथा के दौरान जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी सदानन्द सरस्वती ने श्रीमद्भागवत महापुराण के आध्यात्मिक और व्यावहारिक महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने समय के अनुसार कथा श्रवण के लाभों पर जोर दिया।</p>
<h3>प्रातःकालीन कथा श्रवण के लाभ</h3>
<p>व्यासपीठ से प्रवचन करते हुए शंकराचार्य ने बताया कि सूर्योदय और प्रातःकाल का समय सत्त्वगुण प्रधान होता है। इस पवित्र समय में श्रीमद्भागवत का श्रवण करने से विशेष लाभ मिलते हैं।</p>
<ul>
<li>बुद्धि और विवेक निर्मल होते हैं।</li>
<li>अज्ञानता का अंधकार मिटता है।</li>
<li>मन में सात्विक संस्कारों का बीजारोपण होता है।</li>
<li>दिनभर के सांसारिक दायित्वों को धर्म और ईमानदारी से निभाने की सकारात्मक ऊर्जा मिलती है।</li>
</ul>
<h3>संध्याकालीन कथा का महत्व</h3>
<p>इसी प्रकार, शंकराचार्य ने संध्याकालीन कथा के महत्व को भी समझाया। उन्होंने कहा कि दिनभर की भागदौड़, चिंता और तनाव के बाद भगवान की कथा का श्रवण मन को अद्भुत शांति प्रदान करता है।</p>
<p>उन्होंने बताया कि संध्या में कथा सुनने से चित्त की चंचलता कम होती है और मन भगवान श्रीकृष्ण के चरणों में सहजता से एकाग्र हो जाता है।</p>
<h2>"भागवत श्रीकृष्ण का वांग्मय स्वरूप है"</h2>
<p>जगद्गुरु ने श्रद्धालुओं को सचेत करते हुए कहा कि श्रीमद्भागवत को केवल एक सामान्य पौराणिक ग्रंथ समझने की भूल नहीं करनी चाहिए।</p>
<p>उन्होंने जोर देकर कहा, "यह साक्षात भगवान श्रीकृष्ण का वांग्मय स्वरूप है।" शंकराचार्य ने समझाया कि भागवत का श्रवण और चिंतन जीव के आध्यात्मिक कल्याण का मार्ग प्रशस्त करता है और उसे मोक्ष की ओर ले जाता है।</p>
<p>कथा के समापन पर एक भव्य महाआरती का आयोजन किया गया। इस अवसर पर नंदगांव (केसुआ) सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में यजमान और श्रद्धालु उपस्थित हुए और महाआरती में भाग लेकर भगवान का आशीर्वाद प्राप्त किया।</p>]]></content:encoded>
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  </item>
  <item>
    <title>पाली महापौर चुनाव: कांग्रेस से सुमित्रा, भाजपा से नमिता; निर्दलीयों ने बढ़ाया मुकाबला</title>
    <link>https://thinq360.com/pali-mayor-election-sumitra-jain-namita-bubkiya-independent-candidates</link>
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    <pubDate>Wed, 16 Sep 2026 18:17:53 +0530</pubDate>
    <dc:creator>Pradeep Beedawat</dc:creator>
    <category>राजस्थान</category>
    <description><![CDATA[पाली नगर निगम महापौर चुनाव में कांग्रेस की सुमित्रा जैन और भाजपा की नमिता बुबकिया अधिकृत प्रत्याशी हैं। राजबाला हिंगड़, पुष्पा सोमनानी, कुसुम सोनी और राशिदा मोहसिन खत्री ने भी नामांकन दाखिल किया है। कांग्रेस के पास 29, भाजपा के पास 21 और निर्दलीयों के पास 15 सीटें हैं।]]></description>
    <content:encoded><![CDATA[<p><strong>पाली |</strong> नगर निगम महापौर चुनाव में नामांकन के साथ ही राजनीतिक समीकरण रोचक हो गए हैं। कांग्रेस ने सुमित्रा जैन को अधिकृत प्रत्याशी बनाते हुए उनका पार्टी सिंबल जमा करवा दिया है, जबकि भाजपा ने नमिता बुबकिया को मैदान में उतारा है। कांग्रेस की राजबाला हिंगड़ सहित निर्दलीय पुष्पा सोमनानी, भाजपा की बागी कुसुम सोनी और राशिदा मोहसिन खत्री ने भी दावेदारी पेश की है।</p>
<p>महापौर पद के लिए कुल 10 नामांकन पत्र जमा हुए हैं। कांग्रेस और भाजपा में किसी के पास अपने दम पर बहुमत नहीं होने के कारण 15 निर्दलीय पार्षद बोर्ड गठन में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।</p>
<h2>सिंबल जमा करवाकर लौट रहे विधायक के भाई से मारपीट</h2>
<p>कांग्रेस प्रत्याशी सुमित्रा जैन का सिंबल जमा करवाकर लौट रहे विधायक भीमराज भाटी के छोटे भाई लक्ष्मी नारायण भाटी के साथ कथित मारपीट का मामला भी सामने आया है।</p>
<p>बताया गया है कि लक्ष्मी नारायण भाटी की स्कूटी को एक वाहन से टक्कर मारकर गिराया गया और इसके बाद उनके साथ लात-घूंसों से मारपीट की गई। घटना के बाद वे शिकायत देने कोतवाली थाने पहुंचे। घटना की परिस्थितियों और हमलावरों के संबंध में पुलिस की जांच तथा आधिकारिक पुष्टि सामने आना बाकी है।</p>
<h2>कांग्रेस ने सुमित्रा जैन को दिया सिंबल</h2>
<p>कांग्रेस की ओर से शुरुआत में सुमित्रा जैन और राजबाला हिंगड़ ने दावेदारी पेश की थी। सुमित्रा जैन ने नामांकन के समय कहा था कि पार्टी जिसे सिंबल देगी, वे उसके साथ रहेंगी। बाद में कांग्रेस ने उनके नाम को अंतिम रूप देते हुए पार्टी का सिंबल जमा करवा दिया।</p>
<p>सुमित्रा जैन के प्रस्तावक के रूप में पार्षद भंवर राव और नजमा शेख उनके साथ रहे। राजबाला हिंगड़ ने कांग्रेस और निर्दलीय श्रेणी से नामांकन दाखिल किया था। नामांकन के दौरान राजबाला हिंगड़ और सुमित्रा जैन एक-दूसरे से गले मिलीं और पार्टी में एकजुटता का संदेश देने का प्रयास किया।</p>
<h2>भाजपा ने नमिता बुबकिया को बनाया प्रत्याशी</h2>
<p>भाजपा ने वार्ड संख्या 33 से पहली बार पार्षद बनीं नमिता बुबकिया को महापौर प्रत्याशी बनाया है। नामांकन के दौरान पूर्व सांसद पुष्प जैन, पूर्व विधायक ज्ञानचंद पारख और भाजपा जिलाध्यक्ष सुनील भंडारी मौजूद रहे।</p>
<p>नमिता बुबकिया ने कहा कि भाजपा मजबूत है और उच्च नेतृत्व ने आवश्यक राजनीतिक व्यवस्था कर ली है। पाली भाजपा चुनाव प्रभारी ओमप्रकाश भड़ाना ने दावा किया कि पार्टी के 21 पार्षद दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ रहे हैं और 21 सितंबर को कमल खिलेगा।</p>
<h2>निर्दलीय पुष्पा सोमनानी का बड़ा दावा</h2>
<p>निर्दलीय पुष्पा सोमनानी ने दो नामांकन पत्र दाखिल किए। उन्होंने दावा किया कि निर्दलीय पार्षदों के साथ कांग्रेस और भाजपा के कुछ पार्षद भी उनके संपर्क में हैं। उनके अनुसार, पर्याप्त समर्थन की उम्मीद के कारण ही उन्होंने महापौर पद के लिए दावेदारी की है।</p>
<p>पुष्पा सोमनानी के दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। राजनीतिक तस्वीर मतदान के समय पार्षदों के वास्तविक रुख के बाद ही स्पष्ट होगी।</p>
<h2>भाजपा की बागी कुसुम सोनी भी मैदान में</h2>
<p>भाजपा से बगावत कर निर्दलीय चुनाव जीतने वाली कुसुम सोनी ने भी महापौर पद के लिए नामांकन दाखिल किया। उन्होंने दावा किया कि चार निर्दलीय पार्षद साथ हैं और राजनीतिक पत्ते बाद में खोले जाएंगे।</p>
<p>कुसुम सोनी ने कहा कि उनके साथ कई पार्षद हैं और तुरुप का पत्ता कहां जाकर बैठता है, यह आगे स्पष्ट होगा। उनकी दावेदारी से भाजपा के लिए अपने खेमे और बागी पार्षदों को साधने की चुनौती बढ़ गई है।</p>
<h2>राशिदा मोहसिन खत्री ने भी भरा पर्चा</h2>
<p>वार्ड संख्या 30 से दूसरी बार निर्दलीय पार्षद निर्वाचित हुईं राशिदा मोहसिन खत्री ने भी महापौर पद के लिए नामांकन दाखिल किया है। मुस्लिम समाज के निर्वाचित पार्षदों के बीच महापौर पद पर प्रतिनिधित्व की मांग को उनकी दावेदारी से जोड़कर देखा जा रहा है।</p>
<h2>महापौर पद के लिए 10 नामांकन</h2>
<p>भाजपा प्रत्याशी नमिता बुबकिया की ओर से दो नामांकन पत्र दाखिल किए गए। कांग्रेस खेमे से राजबाला हिंगड़ और सुमित्रा जैन ने कुल चार नामांकन जमा किए। निर्दलीय श्रेणी में पुष्पा सोमनानी ने दो, कुसुम सोनी ने एक और राशिदा मोहसिन खत्री ने एक नामांकन पत्र दाखिल किया। इस प्रकार कुल 10 नामांकन पत्र जमा हुए हैं।</p>
<h2>कांग्रेस को चार और भाजपा को 12 मतों की जरूरत</h2>
<p>पाली नगर निगम में कुल 65 पार्षद हैं और बोर्ड बनाने के लिए 33 मतों की आवश्यकता है। कांग्रेस के 29 पार्षद निर्वाचित हुए हैं, इसलिए उसे बहुमत के लिए चार अतिरिक्त मत चाहिए।</p>
<p>भाजपा के पास 21 पार्षद हैं और उसे बहुमत के लिए 12 अतिरिक्त मतों की आवश्यकता है। भाजपा से बगावत कर चुनाव जीते पांच निर्दलीय भी यदि पार्टी के साथ आते हैं, तो उसका आंकड़ा 26 तक पहुंचेगा और फिर भी उसे सात अन्य पार्षदों का समर्थन जुटाना होगा।</p>
<p>नगर निगम में कुल 15 निर्दलीय पार्षद निर्वाचित हुए हैं। इनमें से 10 को कांग्रेस समर्थित और पांच को भाजपा के बागी खेमे से जुड़ा बताया जा रहा है। हालांकि मतदान के समय उनका वास्तविक रुख ही बोर्ड की तस्वीर तय करेगा।</p>
<h2>कौन हैं नमिता बुबकिया?</h2>
<p>नमिता बुबकिया पूर्व पार्षद विकास बुबकिया की पत्नी हैं। उन्होंने वार्ड संख्या 33 से कांग्रेस प्रत्याशी सोहनलाल को 90 मतों से हराया था। 47 वर्षीय नमिता बीकॉम तक शिक्षित हैं और केमिकल व्यवसाय से जुड़ी हुई हैं। यह उनका पहला चुनाव है।</p>
<h2>निर्दलीय और क्रॉस वोटिंग तय करेंगे बोर्ड</h2>
<p>नाम वापसी के बाद ही स्पष्ट होगा कि महापौर पद के चुनाव में कितने प्रत्याशी मैदान में रहते हैं। फिलहाल कांग्रेस संख्या बल के आधार पर बोर्ड बनाने के सबसे नजदीक है, लेकिन निर्दलीय प्रत्याशियों के दावे और संभावित क्रॉस वोटिंग ने मुकाबले को खुला बना दिया है।</p>
<p>अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या कांग्रेस चार अतिरिक्त पार्षदों का समर्थन जुटा पाएगी या भाजपा अपने 21 पार्षदों के साथ निर्दलीयों और दूसरे खेमे में सेंध लगाकर राजनीतिक उलटफेर करेगी।</p>]]></content:encoded>
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  </item>
  <item>
    <title>आबूरोड अध्यक्ष चुनाव: भाजपा से भावना अग्रवाल, कांग्रेस से शोभा जोशी अधिकृत प्रत्याशी</title>
    <link>https://thinq360.com/abu-road-chairperson-election-bhavna-agarwal-shobha-joshi-nomination</link>
    <guid isPermaLink="true">https://thinq360.com/abu-road-chairperson-election-bhavna-agarwal-shobha-joshi-nomination</guid>
    <pubDate>Wed, 16 Sep 2026 18:10:43 +0530</pubDate>
    <dc:creator>गणपत सिंह मांडोली</dc:creator>
    <category>राजस्थान</category>
    <description><![CDATA[आबूरोड नगरपालिका अध्यक्ष पद के लिए भाजपा की भावना अग्रवाल और कांग्रेस की शोभा जोशी ने नामांकन दाखिल किया है। कांग्रेस की उषा कंवर ने भी पर्चा भरा है, लेकिन पार्टी का चुनाव चिह्न शोभा जोशी को दिया गया है। भाजपा के पास 20, कांग्रेस के पास 16 और निर्दलीय चार पार्षद हैं।]]></description>
    <content:encoded><![CDATA[<p><strong>आबूरोड, सिरोही |</strong> नगरपालिका अध्यक्ष पद को लेकर आबूरोड में सियासी मुकाबले की तस्वीर सामने आने लगी है। भाजपा की ओर से भावना अग्रवाल और कांग्रेस की ओर से शोभा जोशी ने अध्यक्ष पद के लिए नामांकन दाखिल किया है। दोनों को उनकी पार्टियों ने अधिकृत प्रत्याशी बनाया है। हालांकि कांग्रेस की उषा कंवर ने भी नामांकन दाखिल कर पार्टी के भीतर दावेदारी का एक अलग समीकरण खड़ा कर दिया है।</p>
<h2>भाजपा से भावना अग्रवाल ने भरा नामांकन</h2>
<p>भाजपा की ओर से भावना अग्रवाल ने नगरपालिका अध्यक्ष पद के लिए अपना नामांकन पत्र दाखिल किया। पार्टी ने उन्हें अपना अधिकृत प्रत्याशी घोषित करते हुए अध्यक्ष पद की चुनावी कमान सौंपी है।</p>
<p>40 सदस्यीय आबूरोड नगरपालिका में भाजपा के पास 20 निर्वाचित पार्षद हैं। बहुमत के लिए 21 मतों की आवश्यकता है। इस लिहाज से भाजपा अपने दम पर बहुमत से केवल एक मत दूर है।</p>
<h2>निर्दलीयों के समर्थन का भाजपा ने किया दावा</h2>
<p>नगरपालिका में चार निर्दलीय पार्षद निर्वाचित हुए हैं। भाजपा ने दावा किया है कि निर्दलीय पार्षद उसके समर्थन में हैं। यदि पार्टी को चारों निर्दलीयों का समर्थन मिलता है तो भाजपा का आंकड़ा 24 तक पहुंच सकता है। ऐसी स्थिति में भावना अग्रवाल का अध्यक्ष बनना और भाजपा का बोर्ड गठित होना लगभग तय माना जाएगा।</p>
<p>हालांकि निर्दलीय पार्षद मतदान में किस प्रत्याशी का समर्थन करेंगे, इसकी आधिकारिक और अंतिम तस्वीर अभी सामने आना बाकी है। अध्यक्ष पद के चुनाव में उनका वास्तविक रुख ही भाजपा के दावे की पुष्टि करेगा।</p>
<h2>कांग्रेस से शोभा जोशी अधिकृत प्रत्याशी</h2>
<p>कांग्रेस की ओर से शोभा जोशी ने अध्यक्ष पद के लिए नामांकन दाखिल किया है। कांग्रेस पर्यवेक्षक ने पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी के रूप में शोभा जोशी के नाम का चुनाव चिह्न संबंधी प्रपत्र जमा करवाया। इससे स्पष्ट हो गया है कि पार्टी का अधिकृत समर्थन शोभा जोशी के साथ है।</p>
<p>नगरपालिका में कांग्रेस के पास 16 निर्वाचित पार्षद हैं। अपने दम पर अध्यक्ष बनाने के लिए पार्टी के पास पर्याप्त संख्या बल नहीं है। कांग्रेस को जीत के लिए अपने सभी पार्षदों को एकजुट रखने के साथ निर्दलीयों और दूसरे खेमे से अतिरिक्त समर्थन जुटाना होगा।</p>
<h2>उषा कंवर ने भी दाखिल किया नामांकन</h2>
<p>कांग्रेस खेमे से उषा कंवर ने भी नगरपालिका अध्यक्ष पद के लिए नामांकन पत्र दाखिल किया है। हालांकि पार्टी ने उन्हें चुनाव चिह्न नहीं दिया है और शोभा जोशी को ही अधिकृत प्रत्याशी बनाया गया है।</p>
<p>अब निगाहें इस बात पर हैं कि उषा कंवर नाम वापसी की निर्धारित अवधि तक अपना नामांकन वापस लेती हैं या चुनाव मैदान में बनी रहती हैं। यदि वे मैदान में रहती हैं तो कांग्रेस पार्षदों के मतों में विभाजन अथवा क्रॉस वोटिंग की आशंका बढ़ सकती है।</p>
<h2>कांग्रेस के सामने एकजुटता की चुनौती</h2>
<p>कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने सभी 16 पार्षदों को अधिकृत प्रत्याशी शोभा जोशी के पक्ष में एकजुट रखने की है। उषा कंवर की अलग दावेदारी के कारण पार्टी के भीतर गुटबाजी और संभावित असंतोष की चर्चाएं तेज हो गई हैं।</p>
<p>यदि कांग्रेस के मतों में विभाजन होता है तो संख्या बल में पहले से मजबूत भाजपा की राह और आसान हो सकती है। दूसरी ओर, कांग्रेस को मुकाबले में बने रहने के लिए चारों निर्दलीय पार्षदों का समर्थन हासिल करने के बाद भी कम से कम एक अतिरिक्त मत की आवश्यकता होगी।</p>
<h2>अध्यक्ष चुनाव का पूरा गणित</h2>
<p>आबूरोड नगरपालिका के कुल 40 वार्डों में भाजपा के 20, कांग्रेस के 16 और निर्दलीय चार पार्षद हैं। बहुमत का आंकड़ा 21 है। भाजपा को अध्यक्ष बनाने के लिए केवल एक अतिरिक्त मत चाहिए, जबकि कांग्रेस को अपने सभी 16 पार्षदों के साथ पांच अतिरिक्त मतों की जरूरत होगी।</p>
<p>यदि सभी चार निर्दलीय कांग्रेस के साथ आते हैं तो भी उसका आंकड़ा 20 तक ही पहुंचेगा। ऐसी स्थिति में कांग्रेस को भाजपा खेमे से कम से कम एक क्रॉस वोट की आवश्यकता होगी। इसके विपरीत भाजपा को किसी एक निर्दलीय का समर्थन मिलने पर बहुमत हासिल हो सकता है।</p>
<h2>भावना अग्रवाल की स्थिति मजबूत</h2>
<p>मौजूदा संख्या बल और निर्दलीय पार्षदों के समर्थन के भाजपा के दावे को देखते हुए भावना अग्रवाल अध्यक्ष पद की दौड़ में मजबूत स्थिति में दिखाई दे रही हैं। हालांकि पार्टी का बोर्ड बनने की औपचारिक पुष्टि मतदान और परिणाम घोषित होने के बाद ही होगी।</p>
<p>दूसरी ओर कांग्रेस की चुनावी संभावनाएं उसके 16 पार्षदों की एकजुटता, उषा कंवर के अंतिम रुख और निर्दलीय पार्षदों के समर्थन पर निर्भर करेंगी। इस कारण नाम वापसी तक कांग्रेस की आंतरिक राजनीति पर विशेष नजर रहेगी।</p>
<h2>निर्दलीय और क्रॉस वोटिंग तय करेंगे परिणाम</h2>
<p>आबूरोड नगरपालिका अध्यक्ष चुनाव में संख्या बल भाजपा के पक्ष में दिखाई दे रहा है, लेकिन अंतिम परिणाम चार निर्दलीय पार्षदों के फैसले और संभावित क्रॉस वोटिंग से तय होगा। भाजपा जहां भावना अग्रवाल के नेतृत्व में बोर्ड बनाने का दावा कर रही है, वहीं कांग्रेस शोभा जोशी के पक्ष में अपने पार्षदों को एकजुट करने की कोशिश में जुटी है।</p>
<p>नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा कि मुकाबला भावना अग्रवाल और शोभा जोशी के बीच सीधा रहता है या उषा कंवर की दावेदारी इसे त्रिकोणीय रूप देती है।</p>]]></content:encoded>
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  </item>
  <item>
    <title>बीकानेर महापौर चुनाव: कांग्रेस के 42 पार्षद, फिर भी बगावत से त्रिकोणीय हुआ मुकाबला</title>
    <link>https://thinq360.com/bikaner-mayor-election-anil-kalla-navratan-daga-surendra-singh-shekhawat</link>
    <guid isPermaLink="true">https://thinq360.com/bikaner-mayor-election-anil-kalla-navratan-daga-surendra-singh-shekhawat</guid>
    <pubDate>Wed, 16 Sep 2026 17:51:17 +0530</pubDate>
    <dc:creator>महेन्द्रसिंह शेखावत</dc:creator>
    <category>राजस्थान</category>
    <description><![CDATA[बीकानेर नगर निगम में 42 पार्षदों के साथ स्पष्ट बहुमत रखने वाली कांग्रेस के सामने अंदरूनी चुनौती खड़ी हो गई है। अधिकृत प्रत्याशी अनिल कल्ला के अलावा कांग्रेस पार्षद नवरतन डागा ने भी नामांकन दाखिल किया है, जबकि भाजपा ने डॉ. सुरेंद्र सिंह शेखावत को प्रत्याशी बनाया है।]]></description>
    <content:encoded><![CDATA[<p><strong>बीकानेर |</strong> नगर निगम महापौर चुनाव में कांग्रेस के स्पष्ट बहुमत के बावजूद मुकाबला रोचक हो गया है। कांग्रेस के अधिकृत प्रत्याशी अनिल कल्ला के सामने पार्टी के ही नवनिर्वाचित पार्षद नवरतन डागा ने नामांकन दाखिल कर दिया है। वहीं भाजपा ने डॉ. सुरेंद्र सिंह शेखावत को अपना प्रत्याशी बनाया है। ऐसे में फिलहाल महापौर पद के लिए मुकाबला त्रिकोणीय नजर आ रहा है।</p>
<h2>कांग्रेस के पास स्पष्ट बहुमत</h2>
<p>बीकानेर नगर निगम में कुल 80 पार्षद हैं। इनमें कांग्रेस के 42, भाजपा के 27, निर्दलीय 10 और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी का एक पार्षद है। बहुमत के लिए 41 पार्षदों का समर्थन आवश्यक है। इस लिहाज से कांग्रेस के पास अपने दम पर महापौर बनाने के लिए पर्याप्त संख्या बल मौजूद है।</p>
<p>हालांकि नवरतन डागा के नामांकन ने कांग्रेस नेतृत्व के सामने अपने सभी 42 पार्षदों को एकजुट रखने की चुनौती खड़ी कर दी है। यदि कांग्रेस के मतों में विभाजन होता है तो स्पष्ट बहुमत के बावजूद महापौर चुनाव का गणित बदल सकता है।</p>
<h2>अनिल कल्ला कांग्रेस के अधिकृत प्रत्याशी</h2>
<p>वार्ड संख्या 73 से निर्वाचित अनिल कल्ला को कांग्रेस ने महापौर पद के लिए अपना अधिकृत प्रत्याशी बनाया है। अनिल कल्ला पूर्व मंत्री डॉ. बीडी कल्ला के भतीजे हैं। पार्टी के पास स्पष्ट बहुमत होने के कारण सामान्य परिस्थितियों में उनकी दावेदारी मजबूत मानी जा रही है।</p>
<p>कांग्रेस नेतृत्व की कोशिश अपने सभी पार्षदों को अधिकृत प्रत्याशी के पक्ष में एकजुट रखने की होगी। पार्टी के भीतर मतों का बिखराव रोकना अब उसकी सबसे बड़ी राजनीतिक और संगठनात्मक चुनौती बन गया है।</p>
<h2>नवरतन डागा ने बढ़ाई कांग्रेस की चिंता</h2>
<p>वार्ड संख्या 50 से निर्वाचित कांग्रेस पार्षद नवरतन डागा ने भी महापौर पद के लिए नामांकन दाखिल किया है। उनके नामांकन को कांग्रेस के भीतर असंतोष और महापौर पद की अलग दावेदारी से जोड़कर देखा जा रहा है।</p>
<p>हालांकि डागा चुनाव मैदान में बने रहेंगे या नाम वापसी से पहले पार्टी स्तर पर कोई समझौता होगा, इस पर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है। उन्हें कांग्रेस अथवा अन्य खेमों के कितने पार्षदों का समर्थन प्राप्त है, इसकी भी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।</p>
<h2>भाजपा ने डॉ. सुरेंद्र सिंह शेखावत को उतारा</h2>
<p>भाजपा ने महापौर पद के लिए डॉ. सुरेंद्र सिंह शेखावत को प्रत्याशी बनाया है। नगर निगम में भाजपा के पास 27 पार्षद हैं। संख्या बल के अनुसार भाजपा कांग्रेस से काफी पीछे है, लेकिन कांग्रेस के भीतर संभावित मत विभाजन ने उसके लिए राजनीतिक संभावनाओं का एक रास्ता खोल दिया है।</p>
<p>भाजपा के सामने अपने 27 पार्षदों को एकजुट रखने के साथ कांग्रेस के असंतुष्ट पार्षदों, 10 निर्दलीयों और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के एक पार्षद के समर्थन का समीकरण बनाने की चुनौती है। इन पार्षदों का वास्तविक रुख मतदान के समय ही स्पष्ट होगा।</p>
<h2>निर्दलीयों की भूमिका भी महत्वपूर्ण</h2>
<p>नगर निगम में निर्वाचित 10 निर्दलीय पार्षद महापौर चुनाव के राजनीतिक समीकरणों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। कांग्रेस के पास बहुमत होने के कारण उसे सामान्य स्थिति में निर्दलीयों के समर्थन की आवश्यकता नहीं है, लेकिन पार्टी के मतों में विभाजन होने पर निर्दलीय पार्षद निर्णायक भूमिका में आ सकते हैं।</p>
<p>राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के एकमात्र पार्षद का मत भी करीबी मुकाबले की स्थिति में महत्वपूर्ण हो सकता है। फिलहाल निर्दलीय और अन्य पार्षद किस प्रत्याशी का समर्थन करेंगे, इसे लेकर कोई स्पष्ट तस्वीर सामने नहीं आई है।</p>
<h2>कांग्रेस में सेंध लगी तो बदल सकता है गणित</h2>
<p>कांग्रेस के पास भाजपा से 15 पार्षद अधिक हैं। इसके बावजूद पार्टी के दो प्रत्याशियों के मैदान में आने से क्रॉस वोटिंग और आंतरिक विभाजन की चर्चा शुरू हो गई है। यदि नवरतन डागा नाम वापस नहीं लेते और कांग्रेस के कुछ पार्षद उनके साथ जाते हैं, तो मुकाबला अधिक पेचीदा हो सकता है।</p>
<p>हालांकि केवल नामांकन के आधार पर कांग्रेस में बड़े विभाजन अथवा किसी प्रत्याशी की जीत का निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। अंतिम समीकरण नाम वापसी, प्रत्याशियों के समर्थन और मतदान के दौरान पार्षदों के वास्तविक रुख के बाद ही सामने आएगा।</p>
<h2>21 सितंबर को होगा मतदान</h2>
<p>महापौर चुनाव के कार्यक्रम के अनुसार 17 सितंबर को नामांकन पत्रों की जांच की जाएगी। उम्मीदवार 18 सितंबर तक अपना नामांकन वापस ले सकेंगे, जबकि 21 सितंबर को मतदान होगा।</p>
<p>नाम वापसी की समय सीमा पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा कि महापौर पद का मुकाबला वास्तव में त्रिकोणीय रहता है या कांग्रेस के भीतर किसी समझौते के बाद चुनाव की तस्वीर बदल जाती है।</p>
<h2>सबसे बड़ा सवाल&mdash;क्या एकजुट रहेंगे 42 पार्षद?</h2>
<p>फिलहाल बीकानेर महापौर चुनाव का सबसे बड़ा सवाल कांग्रेस के 42 पार्षदों की एकजुटता को लेकर है। यदि सभी कांग्रेस पार्षद पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी अनिल कल्ला के साथ रहते हैं, तो कांग्रेस की जीत का रास्ता आसान दिखाई देता है। लेकिन पार्टी के मतों में सेंध लगने पर भाजपा और दूसरे प्रत्याशी के लिए संभावनाएं बन सकती हैं।</p>
<p>अब सभी की निगाहें नामांकन पत्रों की जांच, नाम वापसी और निर्दलीय पार्षदों के रुख पर टिकी हैं। इन्हीं घटनाक्रमों से तय होगा कि बीकानेर की महापौर की कुर्सी पर बहुमत का अंकगणित भारी पड़ता है या अंदरूनी राजनीति कोई अप्रत्याशित परिणाम देती है।</p>]]></content:encoded>
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  </item>
  <item>
    <title>बहुमत के बावजूद कांग्रेस में बगावत, त्रिकोणीय मुकाबला</title>
    <link>https://thinq360.com/bikaner-mayor-election-congress-rebel-triangular-contest</link>
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    <pubDate>Wed, 16 Sep 2026 17:43:49 +0530</pubDate>
    <dc:creator>महेन्द्रसिंह शेखावत</dc:creator>
    <category>राजनीति</category>
    <description><![CDATA[बीकानेर नगर निगम में कांग्रेस के 42 पार्षद होने के बावजूद मेयर चुनाव रोचक हो गया है। पार्टी के ही पार्षद नवरतन डागा ने अधिकृत प्रत्याशी अनिल कल्ला के खिलाफ नामांकन भर दिया है, जिससे मुकाबला त्रिकोणीय बन गया है।]]></description>
    <content:encoded><![CDATA[<p><strong>बीकानेर | </strong> नगर निगम महापौर चुनाव में कांग्रेस के स्पष्ट बहुमत के बावजूद मुकाबला बेहद रोचक और त्रिकोणीय हो गया है। कांग्रेस के अधिकृत प्रत्याशी के सामने पार्टी के ही एक अन्य पार्षद ने नामांकन दाखिल कर दिया है, जिससे पार्टी के भीतर सेंधमारी की चुनौती खड़ी हो गई है।</p>
<p>इस स्थिति ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के लिए भी अवसर के द्वार खोल दिए हैं, जो अब कांग्रेस के आंतरिक मतभेद का फायदा उठाने की कोशिश कर सकती है।</p>
<h2>कांग्रेस में सेंधमारी की चुनौती</h2>
<p>80 सदस्यीय बीकानेर नगर निगम में कांग्रेस के पास 42 पार्षदों के साथ स्पष्ट बहुमत है। पार्टी ने वार्ड 73 से निर्वाचित अनिल कल्ला को अपना अधिकृत महापौर प्रत्याशी बनाया है। अनिल कल्ला पूर्व मंत्री डॉ. बीडी कल्ला के भतीजे हैं।</p>
<p>लेकिन कांग्रेस की एकजुटता पर तब सवाल खड़े हो गए जब वार्ड 50 से जीते नवरतन डागा ने भी निर्दलीय के तौर पर अपना नामांकन दाखिल कर दिया। इस कदम को पार्टी के भीतर असंतोष और महापौर पद की दावेदारी से जोड़कर देखा जा रहा है।</p>
<h3>क्या है पूरा चुनावी समीकरण?</h3>
<p>निगम में कांग्रेस के 42, भाजपा के 27, निर्दलीय 10 और आरएलपी का एक पार्षद है। संख्या बल के हिसाब से कांग्रेस की जीत तय मानी जा रही थी, लेकिन अब समीकरण बदल गए हैं।</p>
<p>भाजपा ने डॉ. सुरेंद्र सिंह शेखावत को अपना प्रत्याशी बनाया है। अब भाजपा की रणनीति कांग्रेस के वोटों में विभाजन कराने और निर्दलीय व अन्य पार्षदों को अपने पक्ष में करने पर टिकी है। यदि कांग्रेस के वोटों में बिखराव होता है, तो चुनाव का परिणाम कुछ भी हो सकता है।</p>
<h2>नाम वापसी पर टिकी निगाहें</h2>
<p>चुनाव प्रक्रिया के अनुसार, 17 सितंबर को नामांकन पत्रों की जांच होगी और 18 सितंबर नाम वापसी की अंतिम तारीख है। मतदान 21 सितंबर को होगा।</p>
<p>अब सभी की निगाहें 18 सितंबर पर टिकी हैं, जब यह स्पष्ट होगा कि नवरतन डागा अपना नामांकन वापस लेते हैं या नहीं। अगर वह मैदान में बने रहते हैं, तो मुकाबला त्रिकोणीय बना रहेगा और कांग्रेस के लिए अपने पार्षदों को एकजुट रखना सबसे बड़ी चुनौती होगी।</p>]]></content:encoded>
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  </item>
  <item>
    <title>चेयरमैन पद पर बगावत, दिनेश बिंदल के तेवर तल्ख</title>
    <link>https://thinq360.com/shivganj-bjp-revolt-chairman-post-dinesh-bindal-upset</link>
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    <pubDate>Wed, 16 Sep 2026 17:41:06 +0530</pubDate>
    <dc:creator>गणपत सिंह मांडोली</dc:creator>
    <category>राजनीति</category>
    <description><![CDATA[शिवगंज में भाजपा चेयरमैन पद के दावेदार दिनेश बिंदल ने कुंदनमल अग्रवाल के नामांकन के बाद बगावती तेवर दिखाए हैं। उन्होंने पार्टी पर धोखे का आरोप लगाया है।]]></description>
    <content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिवगंज | </strong>&nbsp;नगर पालिका अध्यक्ष पद को लेकर शिवगंज भाजपा के भीतर सियासी घमासान तेज हो गया है। चेयरमैन पद के एक प्रमुख दावेदार माने जा रहे दिनेश बिंदल ने पार्टी के फैसले पर अपनी गहरी नाराजगी व्यक्त की है।<img src="https://d2uvd0bcf4ztg.cloudfront.net/uploads/images/Screenshot_646.webp" alt="" width="846" height="468"></p>
<p>यह पूरा विवाद कुंदनमल अग्रवाल को चेयरमैन पद के लिए नामांकित किए जाने के बाद शुरू हुआ। इस फैसले से बिंदल और उनके समर्थक खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।<img src="https://d2uvd0bcf4ztg.cloudfront.net/uploads/images/Screenshot_647.webp" alt="" width="851" height="479"></p>
<h2>पार्टी के फैसले से नाराज बिंदल</h2>
<p>दिनेश बिंदल ने पार्टी के निर्णय के बाद बगावती तेवर अपना लिए हैं। उन्होंने दावा किया कि शिवगंज में बोर्ड तो भाजपा का ही बनेगा, लेकिन इसके तुरंत बाद वे पार्टी द्वारा आयोजित कैंप में शामिल नहीं हुए।</p>
<p>कैंप में जाने के बजाय, बिंदल सीधे अपने घर चले गए। उन्होंने पार्टी पर सीधे तौर पर धोखे का आरोप लगाया है, जिससे पार्टी की आंतरिक कलह सतह पर आ गई है।</p>
<h3>मनाने की कोशिशें हुईं नाकाम</h3>
<p>मामले की गंभीरता को देखते हुए पार्टी के कुछ पदाधिकारी दिनेश बिंदल को मनाने के लिए उनके आवास पर पहुंचे। हालांकि, बिंदल ने उनसे मिलने से इनकार कर दिया और उन्हें वापस लौटा दिया।</p>
<h2>सुरक्षा की मांग और समर्थकों में आक्रोश</h2>
<p>इस राजनीतिक घटनाक्रम के बीच, दिनेश बिंदल ने एक और अप्रत्याशित कदम उठाया।</p>
<ul>
<li>वह स्थानीय पुलिस थाने पहुंचे।</li>
<li>वहां उन्होंने अपनी सुरक्षा को लेकर एक रिपोर्ट दर्ज कराई।</li>
</ul>
<p>थाने से लौटने के बाद, उन्होंने अपने वार्ड के निवासियों और समर्थकों से मुलाकात की। इस दौरान उनके समर्थकों में पार्टी के इस निर्णय के खिलाफ जबरदस्त आक्रोश देखा गया। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पार्टी इस आंतरिक संकट को कैसे संभालती है।</p>
<p style="display: flex; align-items: center; gap: 4px; font-style: italic; font-size: 0.65em; color: #94a3b8; font-weight: normal; margin-top: 20px;">*Edit with Google AI Studio</p>]]></content:encoded>
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  </item>
  <item>
    <title>माउंट आबू अध्यक्ष पद: BJP-कांग्रेस में सीधी टक्कर</title>
    <link>https://thinq360.com/mount-abu-municipal-chairman-election-bjp-congress-nomination</link>
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    <pubDate>Wed, 16 Sep 2026 17:37:54 +0530</pubDate>
    <dc:creator>गणपत सिंह मांडोली</dc:creator>
    <category>राजनीति</category>
    <description><![CDATA[माउंट आबू नगर पालिका अध्यक्ष पद के लिए भाजपा से सुनील आचार्य और कांग्रेस से यश शर्मा ने दावेदारी पेश की है। भाजपा के पास बहुमत होने से आचार्य की जीत लगभग तय मानी जा रही है।]]></description>
    <content:encoded><![CDATA[<p><strong>माउंट आबू | </strong>&nbsp;माउंट आबू नगर पालिका अध्यक्ष पद के लिए चुनावी सरगर्मी तेज हो गई है। बुधवार को अध्यक्ष पद के लिए दो प्रमुख दलों ने अपने-अपने उम्मीदवारों के नामांकन पत्र दाखिल किए। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला देखने को मिल रहा है।</p>
<h2>किसने पेश की दावेदारी?</h2>
<p>भाजपा की ओर से सुनील आचार्य ने अध्यक्ष पद के लिए अपनी दावेदारी पेश की। वह अपने दो प्रस्तावकों के साथ रिटर्निंग अधिकारी के समक्ष उपस्थित हुए और अपना नामांकन पत्र सौंपा।</p>
<p><img src="https://d2uvd0bcf4ztg.cloudfront.net/uploads/images/WhatsApp_Image_2026-09-16_at_3_57_25_PM.webp" alt="" width="576" height="800"></p>
<p>इसके लगभग एक घंटे बाद, कांग्रेस पार्टी की तरफ से यश शर्मा ने भी अध्यक्ष पद के लिए अपना पर्चा भरा। वह भी अपने दो प्रस्तावकों के साथ पहुंचे और अपनी दावेदारी प्रस्तुत की।</p>
<p><img src="https://d2uvd0bcf4ztg.cloudfront.net/uploads/images/WhatsApp_Image_2026-09-16_at_3_58_21_PM.webp" alt="" width="295" height="443"></p>
<h3>चुनावी समीकरण किसके पक्ष में?</h3>
<p>हाल ही में संपन्न हुए नगर निकाय चुनावों के नतीजों पर नजर डालें तो भाजपा का पलड़ा भारी नजर आ रहा है। पार्टी ने पहले ही बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया है।</p>
<p>भाजपा के पास कुल 15 विजयी प्रत्याशी हैं, जबकि कांग्रेस को केवल 7 सीटों पर ही संतोष करना पड़ा। इसके अलावा, कई निर्दलीय पार्षदों का झुकाव भी भाजपा की ओर बताया जा रहा है।</p>
<h2>सुनील आचार्य का रास्ता साफ</h2>
<p>इन चुनावी समीकरणों को देखते हुए भाजपा के सुनील आचार्य के अध्यक्ष बनने का रास्ता लगभग साफ माना जा रहा है।</p>
<p>हालांकि, उन्हें अपने 15 प्रत्याशियों के अलावा और कितने निर्दलीय पार्षदों का समर्थन मिलता है, इसकी अंतिम और स्पष्ट तस्वीर 21 सितंबर को ही सामने आएगी।</p>]]></content:encoded>
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  </item>
  <item>
    <title>पार्षद चुनाव हारने के बाद राजेश सोनी ने अध्यक्ष पद के लिए भरा नामांकन, कांग्रेस पार्षद बने प्रस्तावक</title>
    <link>https://thinq360.com/shivganj-municipal-chairperson-election-rajesh-soni-nomination-cross-voting</link>
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    <pubDate>Wed, 16 Sep 2026 17:34:33 +0530</pubDate>
    <dc:creator>गणपत सिंह मांडोली</dc:creator>
    <category>राजनीति</category>
    <description><![CDATA[शिवगंज नगरपालिका अध्यक्ष चुनाव में राजेश सोनी के नामांकन ने मुकाबले को रोचक बना दिया है। कांग्रेस पार्षद दलपत परमार उनके प्रस्तावक बने हैं। भाजपा के पास 18 पार्षदों का बहुमत है, लेकिन तीन पार्षदों के बाड़ेबंदी से बाहर आने के बाद संभावित क्रॉस वोटिंग और संयम लोढ़ा की रणनीति को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं।]]></description>
    <content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिवगंज, सिरोही |</strong> नगरपालिका अध्यक्ष पद के चुनाव को लेकर शिवगंज की राजनीति में नया और अप्रत्याशित मोड़ आ गया है। पार्षद का चुनाव हारने के बावजूद राजेश सोनी ने नगरपालिका अध्यक्ष पद के लिए नामांकन दाखिल कर दिया है। उनके नामांकन की सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि कांग्रेस पार्षद दलपत परमार उनके प्रस्तावक बने।</p>
<p>इस नामांकन के बाद शिवगंज नगरपालिका अध्यक्ष पद का चुनाव महज संख्या बल का मुकाबला नहीं रह गया है। अब संभावित क्रॉस वोटिंग, पार्षदों की बाड़ेबंदी और आखिरी समय में बनने वाले राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।</p>
<h2>कांग्रेस पार्षद बने राजेश सोनी के प्रस्तावक</h2>
<p>राजेश सोनी के नामांकन के दौरान कांग्रेस पार्षद दलपत परमार प्रस्तावक के रूप में उनके साथ उपस्थित रहे। इस घटनाक्रम ने स्थानीय राजनीतिक हलकों में कई तरह की अटकलों को जन्म दे दिया है।</p>
<p>कांग्रेस नेता एवं पूर्व विधायक संयम लोढ़ा की रणनीति को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं। राजनीतिक हलकों में इसे अध्यक्ष पद के चुनाव से पहले किसी बड़े सियासी दांव के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि कांग्रेस अथवा संयम लोढ़ा की ओर से रणनीति को लेकर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।</p>
<h2>भाजपा के पास 18 पार्षदों का बहुमत</h2>
<p>नगरपालिका में संख्या बल के लिहाज से भाजपा मजबूत स्थिति में है। भाजपा के पास कुल 18 पार्षद हैं, जबकि कांग्रेस के 14 पार्षद निर्वाचित हुए हैं।</p>
<p>यदि कांग्रेस को दो निर्दलीय पार्षदों का समर्थन मिल जाता है, तो कांग्रेस समर्थित खेमे का आंकड़ा 16 तक पहुंच सकता है। इसके बावजूद सामान्य परिस्थितियों में भाजपा संख्या बल के आधार पर आगे दिखाई देती है।</p>
<h2>भाजपा के तीन पार्षद बाड़ेबंदी से बाहर</h2>
<p>अध्यक्ष पद के चुनाव से पहले भाजपा की चिंता उस समय बढ़ गई, जब उसके 18 पार्षदों में से तीन पार्षद कथित रूप से बाड़ेबंदी से बाहर आ गए। इस घटनाक्रम के बाद अध्यक्ष चुनाव में क्रॉस वोटिंग की संभावना को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।</p>
<p>यदि भाजपा के तीन पार्षद पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी के खिलाफ मतदान करते हैं और उनका मत कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार के पक्ष में जाता है, तो चुनावी गणित पूरी तरह बदल सकता है। ऐसी स्थिति में कांग्रेस समर्थित खेमे का आंकड़ा 16 से बढ़कर 19 तक पहुंच सकता है, जबकि भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में प्रभावी संख्या घटकर 15 रह सकती है। हालांकि यह गणना संभावित क्रॉस वोटिंग की अटकलों पर आधारित है। वास्तविक स्थिति मतदान के बाद ही स्पष्ट होगी।</p>
<h2>संयम लोढ़ा के &lsquo;बड़े खेल&rsquo; की चर्चा</h2>
<p>कांग्रेस पार्षद का राजेश सोनी के प्रस्तावक के रूप में सामने आना और भाजपा के तीन पार्षदों का बाड़ेबंदी से बाहर होना&mdash;इन दोनों घटनाक्रमों को जोड़कर स्थानीय राजनीति में संयम लोढ़ा की रणनीति की चर्चा की जा रही है।</p>
<p>राजनीतिक जानकारों के अनुसार, यदि कांग्रेस अपने 14 पार्षदों के साथ दोनों निर्दलीयों का समर्थन हासिल कर लेती है और भाजपा खेमे में सेंध लगाने में सफल रहती है, तो बहुमत के बावजूद भाजपा के सामने अपना बोर्ड बनाने की चुनौती खड़ी हो सकती है।</p>
<h2>भाजपा के सामने पार्षदों को एकजुट रखने की चुनौती</h2>
<p>भाजपा के पास स्पष्ट संख्या बल होने के बावजूद अब सबसे बड़ी चुनौती अपने सभी पार्षदों को एकजुट रखने की है। अध्यक्ष पद के मतदान तक यदि भाजपा के सभी 18 पार्षद पार्टी प्रत्याशी के पक्ष में बने रहते हैं तो उसकी स्थिति मजबूत रहेगी। लेकिन क्रॉस वोटिंग होने की स्थिति में चुनाव का परिणाम अप्रत्याशित हो सकता है।</p>
<p>नगरपालिका अध्यक्ष का चुनाव अब केवल भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला नहीं दिखाई दे रहा। राजेश सोनी के नामांकन, निर्दलीय पार्षदों की भूमिका और भाजपा खेमे की संभावित नाराजगी ने इसे रणनीति एवं राजनीतिक प्रबंधन की लड़ाई में बदल दिया है।</p>
<h2>अब सबसे बड़ा सवाल&mdash;किसका बनेगा बोर्ड?</h2>
<p>शिवगंज की राजनीति में अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि बहुमत होने के बावजूद क्या भाजपा अपना बोर्ड बनाने में सफल हो पाएगी या नामांकन से शुरू हुआ यह सियासी घटनाक्रम कांग्रेस समर्थित खेमे के पक्ष में नया समीकरण तैयार कर देगा?</p>
<p>अध्यक्ष पद के चुनाव की अंतिम तस्वीर मतदान, पार्षदों के वास्तविक रुख और संभावित क्रॉस वोटिंग के बाद ही साफ होगी। फिलहाल शिवगंज नगरपालिका में संख्या बल से अधिक चर्चा राजनीतिक रणनीति और आखिरी समय में बदलने वाले समीकरणों की है।</p>]]></content:encoded>
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  </item>
  <item>
    <title>सिरोही सभापति पद: संयम लोढ़ा ने रितु जैन को प्रत्याशी बनाया</title>
    <link>https://thinq360.com/sirohi-municipal-council-chairman-election-ritu-jain-sanyam-lodha</link>
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    <pubDate>Wed, 16 Sep 2026 13:43:52 +0530</pubDate>
    <dc:creator>गणपत सिंह मांडोली</dc:creator>
    <category>राजनीति</category>
    <description><![CDATA[सिरोही नगर परिषद सभापति चुनाव में पूर्व विधायक संयम लोढ़ा ने रितु जैन के नाम का ऐलान कर दिया है। कांग्रेस नगर अध्यक्ष की पत्नी रितु की दावेदारी से मुकाबला रोचक हो गया है।]]></description>
    <content:encoded><![CDATA[<p><strong>सिरोही | </strong> सिरोही नगर परिषद के सभापति पद को लेकर चल रही राजनीतिक चर्चाओं के बीच एक बड़ा अपडेट सामने आया है। पूर्व विधायक संयम लोढ़ा ने रितु जैन को सभापति पद के लिए प्रत्याशी घोषित कर दिया है, जिससे चुनावी सरगर्मियां तेज हो गई हैं।</p>
<h2>संयम लोढ़ा का ऐलान, रितु जैन मैदान में</h2>
<p>पूर्व विधायक संयम लोढ़ा ने आधिकारिक तौर पर रितु जैन के नाम का ऐलान किया है। इस घोषणा के साथ ही सभापति पद के लिए कांग्रेस की ओर से एक प्रमुख दावेदार का नाम स्पष्ट हो गया है।</p>
<p>अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि रितु जैन के पक्ष में कितने पार्षद समर्थन करते हैं और विपक्ष की क्या रणनीति रहती है।</p>
<h3>कौन हैं रितु जैन?</h3>
<p>रितु जैन सिरोही में एक जाना-पहचाना नाम हैं। वह कांग्रेस नगर अध्यक्ष पुनीत जैन की पत्नी हैं।</p>
<p>उन्होंने वार्ड संख्या 25 से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीतकर पार्षद के रूप में अपनी जगह बनाई है।</p>
<h2>क्या है नगर परिषद का समीकरण?</h2>
<p>सिरोही नगर परिषद में कुल 35 वार्ड हैं, और सभापति पद पर काबिज होने के लिए बहुमत का आंकड़ा 18 है।</p>
<p>हाल के चुनावों में कांग्रेस ने शानदार प्रदर्शन करते हुए बहुमत हासिल किया था।</p>
<ul>
<li><strong>कांग्रेस:</strong> 23 पार्षद</li>
<li><strong>भाजपा:</strong> 10 पार्षद</li>
<li><strong>निर्दलीय:</strong> 2 पार्षद</li>
</ul>
<p>इन आंकड़ों के साथ कांग्रेस के पास स्पष्ट बहुमत है, जिससे उनका सभापति बनना लगभग तय माना जा रहा है।</p>
<h2>शहर के विकास का सवाल</h2>
<p>शहर के निवासियों को नए सभापति से काफी उम्मीदें हैं। सफाई, पेयजल, सड़क, नालियों जैसी बुनियादी सुविधाओं के साथ-साथ लंबित विकास कार्यों को गति देना नए नेतृत्व के लिए एक बड़ी प्राथमिकता होगी। रितु जैन की ओर से इन मुद्दों पर एक विस्तृत कार्ययोजना प्रस्तुत किए जाने की उम्मीद है।</p>]]></content:encoded>
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  </item>
  <item>
    <title>10 बूथों पर दोबारा वोटिंग, कल आएगा फैसला</title>
    <link>https://thinq360.com/rajasthan-civic-polls-repolling-10-booths-evm-glitch-jaipur-jodhpur-kota</link>
    <guid isPermaLink="true">https://thinq360.com/rajasthan-civic-polls-repolling-10-booths-evm-glitch-jaipur-jodhpur-kota</guid>
    <pubDate>Wed, 16 Sep 2026 11:39:21 +0530</pubDate>
    <dc:creator>बलजीत सिंह शेखावत</dc:creator>
    <category>राजस्थान</category>
    <description><![CDATA[EVM में गंभीर तकनीकी खराबी के बाद राज्य निर्वाचन आयोग ने जयपुर, जोधपुर और कोटा के 10 मतदान केंद्रों पर पुनर्मतदान का आदेश दिया है। वोटिंग आज शाम 6 बजे तक चलेगी और नतीजे कल घोषित होंगे।]]></description>
    <content:encoded><![CDATA[<p><strong>जयपुर | </strong> राजस्थान नगरीय निकाय चुनाव 2026 के तहत प्रदेश के कई प्रमुख शहरों में आज पुनर्मतदान की प्रक्रिया शांतिपूर्ण ढंग से चल रही है। जयपुर, जोधपुर, कोटा और सुकेत (कोटा जिला) के कुल 10 मतदान केंद्रों पर सुबह 7 बजे से मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग कर रहे हैं।</p>
<p>यह निर्णय राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा तब लिया गया जब मतगणना के दौरान इन बूथों की इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (EVM) में गंभीर तकनीकी खराबी सामने आई।</p>
<h2>क्यों पड़ी पुनर्मतदान की जरूरत?</h2>
<p>राज्य निर्वाचन आयोग ने यह बड़ा फैसला लोकतंत्र में पारदर्शिता और जनमत के सम्मान को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए लिया। आयोग यह सुनिश्चित करना चाहता था कि चुनाव परिणाम पूरी तरह से निष्पक्ष और सटीक हों।</p>
<h3>EVM में गंभीर तकनीकी खराबी</h3>
<p>हाल ही में संपन्न हुए निकाय चुनावों की मतगणना के दौरान, संबंधित रिटर्निंग अधिकारियों ने जब कुछ EVM से परिणाम निकालने का प्रयास किया, तो मशीनों की स्क्रीन पर मतों का प्रदर्शन नहीं हो सका। यह एक गंभीर तकनीकी समस्या थी जिसने मतगणना प्रक्रिया को बाधित कर दिया।</p>
<h3>जीत-हार के अंतर से ज्यादा थे अप्रदर्शित वोट</h3>
<p>जिला निर्वाचन अधिकारियों द्वारा भेजी गई रिपोर्ट की समीक्षा करने पर यह पाया गया कि इन मशीनों में जो वोट अप्रदर्शित रह गए थे, उनकी संख्या संबंधित वार्डों में जीत-हार के निकटतम अंतर से कहीं ज्यादा थी। ऐसी स्थिति में, सही विजेता का निर्धारण करना असंभव था। इसी के चलते आयोग ने मूल मतदान को रद्द कर दिया।</p>
<h2>किन-किन बूथों पर हो रही है दोबारा वोटिंग?</h2>
<p>पुनर्मतदान की यह प्रक्रिया जयपुर, जोधपुर और कोटा नगर निगम के अलावा सुकेत नगरपालिका क्षेत्र के कुल 10 बूथों पर संचालित हो रही है। इन क्षेत्रों के मतदाता आज शाम 6 बजे तक वोट डाल सकेंगे।</p>
<h3>विस्तृत सूची:</h3>
<ul>
<li><strong>नगर निगम जयपुर:</strong> वार्ड संख्या 09 का बूथ संख्या 111, वार्ड संख्या 18 का बूथ संख्या 235, वार्ड संख्या 25 का बूथ संख्या 343, और वार्ड संख्या 34 के बूथ संख्या 477 व 484।</li>
<li><strong>नगर निगम जोधपुर:</strong> वार्ड संख्या 50 का बूथ संख्या 338।</li>
<li><strong>नगर निगम कोटा:</strong> वार्ड संख्या 87 का बूथ संख्या 99, वार्ड संख्या 44 का बूथ संख्या 448, और वार्ड संख्या 11 का बूथ संख्या 576।</li>
</ul>
<h2>कब आएंगे नतीजे?</h2>
<p>आज शाम 6 बजे मतदान समाप्त होने के बाद, सभी EVM को सुरक्षित स्ट्रांग रूम में सील कर दिया जाएगा। इन 10 बूथों के भाग्य का फैसला और सभी अटके हुए नतीजों का ऐलान कल, यानी 17 सितंबर 2026 को किया जाएगा।</p>
<p>मतगणना की प्रक्रिया सुबह 8 बजे से शुरू होगी, जिसके बाद यह स्पष्ट हो जाएगा कि इन वार्डों में किस प्रत्याशी को जनता का समर्थन मिला है।</p>
<p style="display: flex; align-items: center; gap: 4px; font-style: italic; font-size: 0.65em; color: #94a3b8; font-weight: normal; margin-top: 20px;">*Edit with Google AI Studio</p>]]></content:encoded>
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