लोकसभा चुनाव-2024: अमेठी से गाँधी परिवार का रिश्ता टुटा ,रायबरेली से राहुल गाँधी ने दाखिल किया नामांकन

अमेठी से गाँधी परिवार का रिश्ता टुटा ,रायबरेली से राहुल गाँधी ने दाखिल किया नामांकन
,रायबरेली से राहुल गाँधी ने दाखिल किया नामांकन
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अमेठी से इस बार गांधी परिवार के चुनाव नहीं लड़ने से इस सीट से परिवार का 47 साल पुराना रिश्ता टूटता दिख रहा है।

दोनों सीटों ने देश को दो प्रधानमंत्री, इंदिरा गांधी (रायबरेली) और राजीव गांधी(अमेठी) दिए हैं

उत्तरप्रदेश | पांचवे चरण के नामांकन के आखिरी दिन राहुल गांधी ने उत्तर प्रदेश के रायबरेली से अपना नामांकन पत्र दाखिल किया जबकि कांग्रेस के गढ़ अमेठी से गांधी परिवार नहीं बल्कि किशोरी लाल शर्मा चुनाव लड़ेंगे।

देश और दुनिया में रायबरेली और अमेठी शहरों की पहचान गांधी-नेहरू परिवार के कारण है। इन दोनों सीटों ने देश को दो प्रधानमंत्री, इंदिरा गांधी (रायबरेली) और राजीव गांधी(अमेठी) दिए हैं। देश की फर्स्ट पॉलिटिकल फैमिली मानी जाने वाली गांधी-नेहरू फैमिली में राहुल गांधी छठे शख्स हैं जो रायबरेली से कांग्रेस के टिकट पर चुनावी मैदान में उतरे हैं।

अमेठी से गाँधी परिवार का रिश्ता 

कांग्रेस के गढ़ माने जाने वाले इस क्षेत्र में उपचुनावों सहित 20 में से 15 चुनावों में गांधी-नेहरू परिवार ने यहां का प्रतिनिधित्व किया है. दूसरी ओर अमेठी से इस बार गांधी परिवार के चुनाव नहीं लड़ने से इस सीट से परिवार का 47 साल पुराना रिश्ता टूटता दिख रहा है। पहले और दूसरे आम चुनाव में राहुल गांधी के दादा फिरोज गांधी ने यहां से चुनाव जीता था. उनके बाद इंदिरा गांधी इस सीट से तीन बार जीत कर देश की प्रधानमंत्री रही.

राहुल गांधी की मां सोनिया गांधी ने इस सीट पर एक उपचुनाव सहित पांच चुनावों में जीत दर्ज की। उनके अलावा फर्स्ट फैमिली से जुड़ीं शीला कौल और अरुण नेहरू भी यहां से सांसद रहे.

कांग्रेस ने राहुल गांधी (rahul gandhi) को इस बार रायबरेली सीट से उतारा है. राहुल गांधी के अमेठी से चुनाव नहीं लड़ने पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की उम्मीदवार स्मृति ईरानी (smriti irani) ने गांधी परिवार पर हमला बोला है. स्मृति ने कहा कि अमेठी (amethi) से गांधी परिवार का न लड़ना संकेत है कि चुनाव से पहले बिना वोट पड़े ही कांग्रेस ने अपनी हार मान ली है. यहां जीत की कोई भी गुंजाइश होती तो वह (राहुल गांधी) अपने प्रॉक्सी को नहीं लड़ाते.

केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने भी तंज करते हुए कहा कि कुछ समय पहले राहुल गांधी कहते थे 'डरो मत, डरो मत'. अब अमेठी से वायनाड और वायनाड से लेकर रायबरेली तक, हार के प्रति उनका डर उन्हें हर जगह ले जा रहा है. राहुल की रायबरेली से उम्मीदवारी को बीजेपी अमेठी में हार मानने की तरह बता रही है तो वहीं कांग्रेस के नेता इसे पार्टी की रणनीति चर्चा का हॉट टॉपिक. ये है कि राहुल ने अपनी सीट अमेठी छोड़कर रायबरेली से क्यों उतरे?


अमेठी से गाँधी परिवार का 47 साल पुराने रिश्ते में टूट कैसे पड़ी

अमेठी से गांधी - नेहरू परिवार के 47 साल पुराने रिश्ते पर एक बार फिर से ब्रेक (STOP) लग गया है। पार्टी ने यहां से राजीव गांधी, सोनिया गांधी और राहुल गांधी (RAHUL GANDHI)  के साथ काम कर चुके किशोरी लाल शर्मा को अपना उम्मीदवार बनाया है. किशोरी लाल शर्मा (KISHORI LAL SHARMA) ने इससे पहले कोई भी चुनाव नहीं लड़ा है. दरअसल 1977 में संजय गांधी के यहां से चुनाव लड़ने के बाद यह गांधी-नेहरू परिवार के राजनैतिक वारिसों के पॉलिटिकल डेब्यू की सीट बन गई. देश-दुनिया में अमेठी की पहचान गांधी-नेहरू परिवार के गढ़ के रूप में होने लगी. संजय गांधी 1977 में पहला चुनाव हार गए थे लेकिन उसके बाद संजय गांधी, राजीव गांधी, सोनिया गांधी और राहुल गांधी यहां से जीतकर लोकसभा पहुंचते रहे.

1980 से 1991 तक संजय गांधी और राजीव गांधी यहां से जीते। राजीव की मौत के आठ साल बाद सोनिया यहां से 1999 में पहली बार लड़ीं और जीतीं। 2004 से राहुल गांधी इस सीट से जीत रहे थे जिनको 2019 में भाजपा की स्मृति ईरानी ने हरा दिया। केएल शर्मा लंबे समय से अमेठी-रायबरेली में नेहरू-गांधी परिवार की आंख और कान बनकर काम करते रहे हैं। अमेठी और रायबरेली इलाके की जनता के लिए गांधी परिवार का दरवाजा केएल शर्मा ही रहे हैं। इस लिहाज से उनकी जमीनी पकड़ मजबूत है। कांग्रेस ने यही सब जोड़कर इस बार केएल शर्मा को लड़ाया है।

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