हरिद्वार | उत्तराखंड में आज गंगा दशहरा का पर्व बेहद हर्षोल्लास और श्रद्धा के साथ मनाया जा रहा है। आस्था की नगरी हरिद्वार में श्रद्धालुओं का भारी हुजूम उमड़ पड़ा है।
हरिद्वार में आस्था का महासंगम
हरिद्वार की विश्व प्रसिद्ध हरकी पैड़ी पर सुबह से ही भक्तों की लंबी कतारें लगी हुई हैं। प्रशासन के अनुसार अब तक 5 लाख से ज्यादा लोग स्नान कर चुके हैं।
ब्रह्मकुंड पर सुबह 5 बजे से ही तिल रखने की जगह नहीं बची थी। श्रद्धालु कड़ाके की ठंड के बावजूद मां गंगा की गोद में डुबकी लगा रहे हैं।
सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए पूरे मेला क्षेत्र को विभिन्न जोनों में बांटा गया है। पुलिस बल चप्पे-चप्पे पर तैनात है ताकि श्रद्धालुओं को कोई असुविधा न हो।
गंगोत्री धाम में उमड़े श्रद्धालु
उत्तरकाशी स्थित गंगोत्री धाम में भी आज ऐतिहासिक भीड़ देखने को मिल रही है। यहां 1 लाख से अधिक भक्त मां गंगा के दर्शन के लिए पहुंचे हैं।
10 मई को कपाट खुलने के बाद से यहां रोजाना 5 हजार लोग आ रहे थे। लेकिन गंगा दशहरा पर यह संख्या रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है।
शाम को होने वाली भव्य गंगा आरती के लिए लोग घंटों से इंतजार कर रहे हैं। धाम में चारों तरफ केवल भक्तों का सैलाब ही नजर आ रहा है।
गंगा अवतरण की पौराणिक कथा
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार आज ही के दिन मां गंगा का स्वर्ग से पृथ्वी पर अवतरण हुआ था। राजा भागीरथ ने अपने पूर्वजों के उद्धार के लिए तपस्या की थी।
ब्रह्मा जी के आदेश पर जब गंगा पृथ्वी की ओर चलीं, तो उनका वेग प्रचंड था। पृथ्वी को बचाने के लिए भगवान शिव ने उन्हें अपनी जटाओं में धारण किया।
शिव की जटाओं से निकलने के बाद गंगा शांत धारा के रूप में प्रवाहित हुईं। भागीरथ के पीछे चलते हुए गंगा ने सगर के 60 हजार पुत्रों को मोक्ष प्रदान किया।
10 पापों से मुक्ति का मार्ग
धार्मिक ग्रंथों में उल्लेख है कि गंगा दशहरा पर स्नान करने से 10 पाप मिटते हैं। इनमें तीन कायिक, चार वाचिक और तीन मानसिक पाप शामिल होते हैं।
कायिक पापों में हिंसा और चोरी जैसे शारीरिक कृत्य आते हैं। वाचिक पापों में झूठ बोलना और कठोर वचन कहना शामिल है, जिनका शमन आज संभव है।
मानसिक पापों में दूसरों का बुरा सोचना या द्वेष रखना शामिल होता है। गंगा की पवित्र धारा में डुबकी लगाने से मन और आत्मा शुद्ध हो जाती है।
हरिद्वार के ज्योतिषाचार्य पंडित मनोज त्रिपाठी ने बताया, "आज के दिन मौन रहकर स्नान करना सर्वोत्तम है। इससे वाणी के दोषों का नाश होता है और अक्षय पुण्य मिलता है।"
कुमाऊं की 'द्वार पत्र' परंपरा
कुमाऊं मंडल में गंगा दशहरा को एक विशिष्ट लोक परंपरा के रूप में मनाया जाता है। यहां लोग अपने घरों के मुख्य द्वार पर 'द्वार पत्र' लगाते हैं।
इसे 'दसौर पत्र' भी कहा जाता है, जिसमें धार्मिक मंत्र और चित्र अंकित होते हैं। माना जाता है कि यह पत्र घर को नकारात्मक ऊर्जा से बचाता है।
यह परंपरा सदियों से चली आ रही है और नई पीढ़ी भी इसे उत्साह से निभाती है। ग्रामीण इलाकों में इस दिन विशेष पकवान भी बनाए जाते हैं।
दान और पुण्य का महत्व
गंगा दशहरा पर स्नान के साथ-साथ दान का भी विशेष विधान बताया गया है। भीषण गर्मी के कारण जल, छाता और पंखा दान करना शुभ माना जाता है।
श्रद्धालु सामर्थ्य अनुसार अन्न, वस्त्र और मौसमी फलों का भी दान कर रहे हैं। हरिद्वार में दान करने से मिलने वाला फल कई गुना बढ़ जाता है।
हरिद्वार ही वह स्थान है जहां गंगा पहाड़ों को छोड़कर पहली बार मैदान में आती हैं। इसीलिए ब्रह्मकुंड में स्नान का महत्व सबसे अधिक माना गया है।
समापन और प्रभाव
गंगा दशहरा का यह पर्व न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह हमारी संस्कृति को भी जोड़ता है। लाखों लोगों की उपस्थिति भारत की अटूट श्रद्धा को दर्शाती है।
आज की भीड़ और उत्साह ने पिछले कई वर्षों के रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। यह उत्सव उत्तराखंड के पर्यटन और अर्थव्यवस्था के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण साबित हो रहा है।
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