भारत

गंगा दशहरा: हरिद्वार में उमड़ा जनसैलाब: गंगा दशहरा 2024: हरिद्वार में आस्था का सैलाब, 10 पापों से मुक्ति

जोगेन्द्र सिंह शेखावत · 25 मई 2026, 10:13 दोपहर
गंगा दशहरा पर हरिद्वार के हरकी पैड़ी में उमड़ा श्रद्धालुओं का जनसैलाब, जानें महत्व और पौराणिक कथा।

हरिद्वार | आज गंगा दशहरा के पावन पर्व पर धर्मनगरी हरिद्वार में आस्था का अद्भुत सैलाब उमड़ पड़ा है। सुबह तीन बजे से ही हरकी पैड़ी और अन्य घाटों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखी जा रही है। श्रद्धालुओं का विश्वास देखते ही बनता है।

हरकी पैड़ी पर सुबह पांच बजे से आठ बजे तक स्थिति ऐसी थी कि वहां पैर रखने की भी जगह नहीं बची। श्रद्धालु मां गंगा के जयकारे लगाते हुए पवित्र जल में डुबकी लगा रहे हैं। हर तरफ भक्ति का माहौल है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गंगा दशहरा के दिन गंगा में स्नान करने का विशेष फल मिलता है। कहा जाता है कि इस दिन डुबकी लगाने से व्यक्ति के दस प्रकार के पाप पूरी तरह नष्ट हो जाते हैं।

गंगा दशहरा पर हरिद्वार में उमड़ा आस्था का महासंगम

हरिद्वार के ज्योतिषाचार्य पंडित मनोज त्रिपाठी ने बताया कि आज के दिन का आध्यात्मिक महत्व बहुत अधिक है। उन्होंने श्रद्धालुओं को एक विशेष सलाह भी दी है जो स्नान के फल को बढ़ाती है।

पंडित मनोज त्रिपाठी के अनुसार, पौराणिक मान्यताओं के आधार पर आज के दिन गंगा स्नान हमेशा मौन रहकर करना चाहिए। इससे स्नान का फल कई गुना बढ़ जाता है और मानसिक शांति की प्राप्ति होती है।

"मौन रहकर गंगा स्नान करने से शारीरिक, मानसिक और वाणी से जुड़े सभी दोषों का शमन होता है। यह मनुष्य को अंतर्मन से शुद्ध करने की एक प्राचीन और प्रभावी आध्यात्मिक प्रक्रिया है।"

इस पावन अवसर पर हरिद्वार के सभी प्रमुख घाटों पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। प्रशासन लगातार भीड़ को नियंत्रित करने और श्रद्धालुओं की सुविधा का ध्यान रखने में पूरी तरह जुटा हुआ है।

10 प्रकार के पापों से मुक्ति का पावन मार्ग

शास्त्रों में विस्तार से बताया गया है कि गंगा दशहरा पर स्नान करने से कौन से पाप मिटते हैं। इसमें शरीर द्वारा किए गए चार प्रकार के कायिक पाप शामिल हैं जो अनजाने में होते हैं।

इसके अतिरिक्त, वाणी द्वारा किए गए चार वाचिक पाप और मन में उत्पन्न होने वाले तीन मानसिक पाप भी धुल जाते हैं। यही कारण है कि आज करोड़ों लोग गंगा तट पर आस्था की डुबकी लगाते हैं।

मां गंगा के पृथ्वी पर अवतरण की अद्भुत पौराणिक कथा

पौराणिक कथाओं के अनुसार, आज ही के दिन मां गंगा का स्वर्ग से पृथ्वी पर आगमन हुआ था। यह दिन ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि के रूप में पूरे देश में मनाया जाता है।

राजा सगर के साठ हजार पुत्रों के उद्धार के लिए उनके वंशज राजा भागीरथ ने हजारों वर्षों तक कठिन तप किया। उनकी अटूट भक्ति से प्रसन्न होकर ब्रह्मा जी ने गंगा को पृथ्वी पर भेजा।

जब गंगा स्वर्ग से पृथ्वी की ओर चलीं, तो उनका वेग इतना प्रचंड था कि पृथ्वी उसे संभाल नहीं पाती। ऐसे में पूरी सृष्टि के विनाश का गहरा खतरा उत्पन्न हो गया था।

भगवान शिव की जटाओं में समाहित हुई गंगा की धारा

पृथ्वी को विनाश से बचाने के लिए भगवान शिव ने गंगा के अहंकार को शांत करने का निर्णय लिया। उन्होंने अपनी जटाएं खोल दीं और गंगा की तीव्र धारा को उनमें समाहित कर लिया।

कई दिनों तक शिव की जटाओं में भ्रमण करने के बाद गंगा का वेग पूरी तरह शांत हुआ। इसके बाद शिव जी ने एक जटा खोली और गंगा शांत धारा के रूप में पृथ्वी पर प्रवाहित हुईं।

गंगा के पवित्र जल ने जैसे ही राजा सगर के पुत्रों की राख का स्पर्श किया, उन्हें तत्काल मोक्ष प्राप्त हुआ। वे सभी पूर्वज स्वर्ग सिधार गए, जिससे भागीरथ का संकल्प सिद्ध हुआ।

हरिद्वार: पहाड़ों से मैदानों तक का पावन सफर

हरिद्वार को गंगा दशहरा का मुख्य केंद्र इसलिए माना जाता है क्योंकि यहीं गंगा पहली बार मैदानी क्षेत्र में आती हैं। ब्रह्मकुंड वह स्थान है जहां गंगा ने पहाड़ों की गोद छोड़ी थी।

पहाड़ों की गोद छोड़कर गंगा का स्वरूप जन-जन के जीवन से यहीं जुड़ता है। इसलिए हरिद्वार में स्नान करने का महत्व देश के अन्य किसी भी घाट से कहीं अधिक और श्रेष्ठ माना जाता है।

आज के दिन देश के कोने-कोने से लोग अपने पूर्वजों की शांति के लिए अस्थि विसर्जन करने आते हैं। माना जाता है कि आज अस्थि विसर्जन करने से पितरों को सीधा वैकुंठ धाम मिलता है।

दान और पुण्य की प्राचीन और फलदायी परंपरा

गंगा दशहरा पर केवल स्नान ही नहीं, बल्कि दान का भी विशेष महत्व बताया गया है। भीषण गर्मी के मौसम को देखते हुए इस दिन शीतल वस्तुओं का दान करना अत्यंत शुभ होता है।

श्रद्धालु आज के दिन जल, छाता, पंखा, फल, अन्न और वस्त्रों का दान कर रहे हैं। मान्यता है कि इस दिन किया गया दान अक्षय पुण्य प्रदान करता है और जीवन में सुख-समृद्धि लाता है।

भीषण गर्मी के बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह कम नहीं हो रहा है। हरकी पैड़ी पर सूर्य को अर्घ्य देते श्रद्धालुओं की तस्वीरें श्रद्धा और विश्वास की एक अनुपम और भव्य झलक पेश कर रही हैं।

गंगा दशहरा का यह पर्व हमें प्रकृति और पवित्र नदियों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का संदेश देता है। मां गंगा की अविरल धारा करोड़ों लोगों की आस्था और जीवन का मुख्य आधार बनी हुई है।

*Edit with Google AI Studio

← पूरा आर्टिकल पढ़ें (Full Version)