राजस्थान

एसपी डॉ. अजेय सिंह राठौड़ का सम्मान: दहेज विरोधी संघ के आंध्र प्रदेश अध्यक्ष गणपत सिंह वाड़का के नेतृत्व में एसपी डॉ. अजेय सिंह राठौड़ का सम्मान

गणपत सिंह मांडोली · 16 अक्टूबर 2026, 08:41 रात
दहेज विरोधी क्षत्रिय संघ भारत के आंध्र प्रदेश अध्यक्ष गणपत सिंह देवड़ा वाड़का के नेतृत्व में सिरोही एसपी डॉ. अजेय सिंह राठौड़ का सम्मान किया गया। मूल रूप से वाड़का निवासी गणपत सिंह पिछले 40 वर्षों से दहेज विरोधी विचारधारा और सामाजिक सुधार के क्षेत्र में काम कर रहे हैं।

सिरोही। दहेज विरोधी क्षत्रिय संघ भारत के आंध्र प्रदेश अध्यक्ष गणपत सिंह देवड़ा वाड़का के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने सिरोही जिला पुलिस अधीक्षक डॉ. अजेय सिंह राठौड़ का सम्मान किया। इस दौरान संगठन से जुड़े पदाधिकारियों और सदस्यों ने एसपी से मुलाकात की।

गणपत सिंह देवड़ा मूल रूप से सिरोही जिले के वाड़का गांव के निवासी हैं और वर्तमान में आंध्र प्रदेश में रह रहे हैं। वह लंबे समय से दहेज प्रथा के खिलाफ जागरूकता और सामाजिक सुधार से जुड़ी गतिविधियों में सक्रिय हैं।

40 वर्षों से दहेज विरोधी अभियान से जुड़े

संगठन के संस्थापक महेन्द्र सिंह जाखली ने बताया कि गणपत सिंह पिछले 40 वर्षों से राजपूत समाज में दहेज विरोधी विचारधारा को बढ़ावा देने और सामाजिक सुधार के लिए कार्य कर रहे हैं। उनका प्रयास समाज के लोगों को दहेज रहित विवाह के लिए प्रेरित करना और इस सामाजिक कुरीति के खिलाफ जागरूकता बढ़ाना रहा है।

जाखली के अनुसार, गणपत सिंह ने स्वयं बिना दहेज विवाह किया था। इसके बाद उन्होंने अपने सभी बच्चों के विवाह भी दहेज रहित तरीके से संपन्न करवाकर समाज के सामने उदाहरण प्रस्तुत किया।

आंध्र प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी

गणपत सिंह की सामाजिक सेवाओं को देखते हुए उन्हें दहेज विरोधी क्षत्रिय संघ भारत का आंध्र प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। इसके साथ ही उन्हें राजपूत सर्वोत्तम सहयोग संस्थान भारत में कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी सौंपी गई है।

संगठन ने उनसे आंध्र प्रदेश में रहने वाले प्रवासी राजस्थानियों सहित राजपूत समाज के लोगों को इस अभियान से जोड़ने की अपेक्षा जताई है। इसके माध्यम से दहेज मुक्त समाज के निर्माण, सामाजिक जागरूकता और आपसी एकता को मजबूत करने की दिशा में काम किया जाएगा।

दहेज मुक्त विवाह के लिए जागरूकता पर जोर

संगठन के पदाधिकारियों ने कहा कि दहेज प्रथा को समाप्त करने के लिए केवल कानूनी प्रावधान पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि समाज के स्तर पर जागरूकता और व्यक्तिगत संकल्प भी आवश्यक है। युवाओं और परिवारों को दहेज रहित विवाह के लिए प्रेरित करके इस सामाजिक कुरीति को समाप्त करने की दिशा में प्रभावी पहल की जा सकती है।

दहेज विरोधी क्षत्रिय संघ भारत की ओर से विभिन्न राज्यों में सामाजिक जागरूकता बढ़ाने और दहेज मुक्त विवाह की विचारधारा को आगे ले जाने के लिए समाज के लोगों को संगठन से जोड़ने का अभियान चलाया जा रहा है।

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