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घोड़े वाले हनुमान मंदिर में रामायण पाठ: बूंदी के श्री घोड़े वाले हनुमान मंदिर में 9 दिवसीय अखंड रामायण पाठ की भव्य पूर्णाहुति, उमड़ा जनसैलाब

thinQ360 · 29 मार्च 2026, 08:00 रात
बूंदी के अहिंसा सर्किल स्थित श्री घोड़े वाले हनुमान मंदिर में नौ दिवसीय अखंड रामायण पाठ का भव्य समापन हुआ। श्रद्धालुओं ने सुंदरकांड और भजनों का आनंद लिया और पतल पर बैठकर प्रसाद ग्रहण किया।

बूंदी | राजस्थान के बूंदी शहर में स्थित प्रसिद्ध श्री घोड़े वाले हनुमान मंदिर में भक्ति की बयार बह रही है। यहाँ पिछले नौ दिनों से चल रहे अखंड रामायण पाठ की आज हर्षोल्लास के साथ पूर्णाहुति हुई।

श्रद्धालुओं की अटूट आस्था

अहिंसा सर्किल के समीप स्थित इस प्राचीन मंदिर में श्रद्धालुओं का भारी तांता लगा रहा। नौ दिनों तक चले इस धार्मिक अनुष्ठान में बड़ी संख्या में भक्तों ने हिस्सा लेकर पुण्य लाभ कमाया। देर रात तक मंदिर परिसर में सुंदरकांड, हनुमान चालीसा और राम रक्षा स्त्रोत के पाठ निरंतर चलते रहे। वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया और भक्तों ने श्रद्धा के साथ हनुमान जी के चरणों में शीश नवाया।

भव्य श्रृंगार और सेवा

विकास समिति के अध्यक्ष पुरुषोत्तम पारीक ने बताया कि पुजारी पंडित शुभेंदु मेहता पूरी निष्ठा से सेवा कर रहे हैं। हनुमान जी का चोला श्रृंगार इतना आकर्षक होता है कि हर कोई देखता रह जाता है। मंदिर में आने वाले भक्तों की संख्या और उनकी आस्था लगातार बढ़ रही है। पुजारी की लगन और मंदिर की व्यवस्थाओं की स्थानीय लोगों और दर्शनार्थियों द्वारा काफी प्रशंसा की जा रही है।

सामूहिक भोज और भजन संध्या

पूर्णाहुति के पश्चात शाम को विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। यहाँ श्रद्धालुओं ने पतल पर बैठकर सादगी के साथ प्रसाद ग्रहण किया, जो एक बहुत ही सुंदर और पारंपरिक दृश्य था। विभिन्न वाद्य यंत्रों की मधुर थाप पर कलाकारों ने देवी-देवताओं के मधुर भजन प्रस्तुत किए। भजनों की इन प्रस्तुतियों ने वहां मौजूद सभी श्रोताओं को पूरी तरह से मंत्रमुग्ध कर दिया।

प्रमुख जनों की उपस्थिति

विजयदशमी के पावन अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में कई गणमान्य नागरिक मौजूद रहे। समाजसेवी संदीप सोमानी, शिव शर्मा और राम प्रजापत ने व्यवस्थाओं में विशेष सहयोग दिया। पशुपालन विभाग के उपनिदेशक डॉ. रामलाल मीणा भी प्रतिदिन सेवा कार्यों में सक्रिय रहे। तेजस्वी मेहता सहित अन्य स्वयंसेवकों ने भी कार्यक्रम को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह आयोजन न केवल धार्मिक दृष्टि से बल्कि सामाजिक एकता की दृष्टि से भी बहुत महत्वपूर्ण रहा। भक्तों ने मंदिर में माथा टेककर क्षेत्र की खुशहाली और सुख-समृद्धि की कामना की।

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