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Barmer: गिरल लिग्नाइट माइंस आंदोलन प्रशासन और भाटी की वार्ता विफल

बलजीत सिंह शेखावत · 20 मई 2026, 12:58 दोपहर
बाड़मेर में गिरल माइंस आंदोलन पर प्रशासन के साथ वार्ता बेनतीजा रही, रविंद्र सिंह भाटी लिखित मांग पर अड़े।

बाड़मेर | गिरल लिग्नाइट माइंस आंदोलन को लेकर मंगलवार देर रात जिला कलेक्ट्रेट में हुई वार्ता बेनतीजा रही। विधायक रविंद्र सिंह भाटी के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल और प्रशासन के बीच करीब चार घंटे तक लंबी चर्चा चली।

प्रशासन और आंदोलनकारियों के बीच हुई इस मैराथन बैठक में फिलहाल कोई ठोस निर्णय नहीं हो सका है। वार्ता के बावजूद आंदोलन समाप्त करने को लेकर सहमति नहीं बन सकी है।

अब बुधवार को एक बार फिर प्रशासन और प्रतिनिधिमंडल के बीच दूसरे दौर की बातचीत प्रस्तावित है। प्रशासन ने फिलहाल नरम रुख अपनाते हुए आंदोलनकारियों से धरना समाप्त करने की अपील की है।

प्रशासन ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया है कि उनकी सभी जायज मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, विधायक रविंद्र सिंह भाटी लिखित आश्वासन की मांग पर पूरी तरह अड़े रहे।

लिखित आश्वासन की मांग और ठेकेदार का रुख

वार्ता के दौरान विधायक भाटी ने स्पष्ट रूप से कहा कि संबंधित ठेकेदार मजदूरों और ग्रामीणों की बात सुनने को तैयार नहीं है। उन्होंने प्रशासन से ठेकेदार को सीधे वार्ता टेबल पर बुलाने की मांग की।

भाटी ने कहा कि जब तक मांगों पर लिखित सहमति नहीं दी जाती, तब तक आंदोलन खत्म नहीं होगा। इससे पहले उपखंड अधिकारी और आरएसएमएमएल अधिकारियों के साथ भी बातचीत का दौर चला था।

आंदोलनकारियों का कहना है कि पिछले कई दिनों से ग्रामीण और मजदूर धरने पर बैठे हैं। इसके बावजूद उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुनने के लिए कोई भी जिम्मेदार अधिकारी आगे नहीं आया।

संबंधित ठेकेदार मजदूरों और ग्रामीणों की बात सुनने को तैयार नहीं है। प्रशासन पहले ठेकेदार को वार्ता टेबल पर बुलाए और मांगों पर लिखित सहमति दे।

श्रमिकों की प्रमुख मांगें और संघर्ष

आंदोलनकारियों की सबसे बड़ी मांग कंपनी द्वारा निकाले गए 100 से अधिक ड्राइवरों और श्रमिकों की पुनर्बहाली है। वे सभी कार्मिकों के लिए 8 घंटे की ड्यूटी व्यवस्था लागू करने की मांग कर रहे हैं।

इसके अलावा स्थानीय युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता देना और श्रमिकों को नियमानुसार वेतन व बोनस उपलब्ध कराना भी प्रमुख है। सुरक्षा मानकों और श्रम कानूनों का पालन सुनिश्चित करने की मांग भी उठाई गई।

जिला कलेक्टर ने प्रतिनिधिमंडल को भरोसा दिलाया कि मांगों पर उचित सुनवाई होगी। उन्होंने सकारात्मक समाधान का प्रयास करने का वादा किया, लेकिन प्रतिनिधिमंडल इस मौखिक आश्वासन से संतुष्ट नहीं हुआ।

शहर की सड़कों पर लगा घंटों लंबा जाम

गिरल से जिला मुख्यालय तक पहुंचे रविंद्र सिंह भाटी के काफिले के कारण शहर की यातायात व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई। जैसलमेर रोड से लेकर कलेक्ट्रेट तक वाहनों की लंबी कतारे लग गईं।

सुरक्षा कारणों से पुलिस ने कई मुख्य मार्गों पर बैरिकेडिंग कर दी थी। इस वजह से आमजन और मरीजों को ले जा रहे वाहनों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।

कई लोग घंटों तक जाम में फंसे रहे और रास्ता खुलने का इंतजार करते दिखे। ट्रैफिक व्यवस्था को सुचारू करने में पुलिस बल को काफी मशक्कत करनी पड़ी और स्थिति तनावपूर्ण बनी रही।

वार्ता में विधायक भाटी के साथ वीरसिंह थूंबली, गिरधरसिंह, नरपतसिंह गेहूं और ईश्वरसिंह बलाई सहित अन्य लोग मौजूद रहे। सभी ने एक सुर में मजदूरों के हक की लड़ाई जारी रखने का संकल्प लिया।

इस आंदोलन का भविष्य अब बुधवार को होने वाली अगली वार्ता पर टिका है। यदि प्रशासन और ठेकेदार लिखित सहमति नहीं देते हैं, तो आंदोलन और उग्र रूप ले सकता है, जिससे प्रशासन की चिंता बढ़ गई है।

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