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सिरोही भाजपा में बड़ा धमाका: गिरीश जोशी ने खोली सिरोही भाजपा की पोल, लगाए गंभीर आरोप

विशाल खण्डेलवाल · 23 अप्रैल 2026, 01:47 दोपहर
संघ के पुराने नेता गिरीश जोशी ने बाहरी नेताओं और भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज बुलंद की है।

सिरोही |  राजस्थान की राजनीति में इन दिनों एक बड़ा भूचाल आया हुआ है, जिसने भारतीय जनता पार्टी के भीतर की अंदरूनी कलह को सरेआम कर दिया है। 'thinQ360' यूट्यूब चैनल पर वरिष्ठ पत्रकार विशाल के साथ बातचीत में भाजपा के पुराने दिग्गज गिरीश जोशी ने पार्टी की कार्यप्रणाली पर जो सवाल उठाए हैं, उसने राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है।

संघ से नाता और वर्तमान भाजपा से मोहभंग

गिरीश जोशी कोई साधारण नाम नहीं हैं, वे संघ के पुराने और समर्पित कार्यकर्ता रहे हैं। उन्होंने सिरोही भारतीय जनता युवा मोर्चा के पहले जिला महामंत्री के रूप में पार्टी की जड़ें मजबूत की थीं। जोशी जी ने बताया कि उन्होंने संघ से राष्ट्रनीति और सच बोलना सीखा है। राम जन्मभूमि आंदोलन के दौरान उन्होंने पुलिस की लाठियां खाईं और कई मुकदमों का सामना किया।

उनका कहना है कि आज की भाजपा वह नहीं रही जिसके लिए उन्होंने अपना पूरा जीवन और करियर दांव पर लगा दिया था। जोशी जी का दर्द इस बात को लेकर है कि पार्टी अब उन्हीं बुराइयों का शिकार हो गई है, जिनका विरोध करते हुए संघ ने इसे खड़ा किया था। वैचारिक पतन की यह कहानी भाजपा के समर्पित कार्यकर्ताओं को भीतर से झकझोर रही है।

उनका मानना है कि जब तक पार्टी अपने मूल सिद्धांतों पर वापस नहीं लौटती, तब तक कार्यकर्ताओं का सम्मान बहाल नहीं हो सकता। जोशी जी ने स्पष्ट किया कि उनकी नाराजगी किसी पद के लिए नहीं, बल्कि पार्टी के गिरते स्तर और विचारधारा से हुए समझौतों को लेकर है। यह साक्षात्कार उन सभी पुराने कार्यकर्ताओं की आवाज बनकर उभरा है जो खुद को आज उपेक्षित महसूस कर रहे हैं।

सिरोही का 'श्राप' और बाहरी नेताओं का वर्चस्व

साक्षात्कार के दौरान गिरीश जोशी ने सिरोही जिले की राजनीति को एक विशेष 'श्राप' से जोड़कर देखा। उनके अनुसार, सिरोही को हमेशा से बाहरी नेताओं की राजनीतिक प्रयोगशाला बनाया गया है। चाहे वह कांग्रेस के दिग्गज नेता बूटा सिंह रहे हों या भाजपा के कैलाश मेघवाल और बंगारू लक्ष्मण की पत्नी, स्थानीय जनता ने हमेशा बाहरी लोगों को सिर-आंखों पर बिठाया।

जोशी जी कहते हैं कि स्थानीय जनता भावुक होकर इन बाहरी चेहरों को चुनकर दिल्ली और जयपुर तो भेज देती है, लेकिन जीतने के बाद ये नेता कभी मुड़कर सिरोही की सुध नहीं लेते। उन्होंने इसे स्थानीय प्रतिभाओं का अपमान बताया। उनका तर्क है कि क्या सिरोही की धरती पर कोई ऐसा योग्य व्यक्ति नहीं है जो यहां का नेतृत्व कर सके? बाहरी नेताओं के थोपे जाने से स्थानीय नेतृत्व पूरी तरह खत्म हो चुका है।

यह स्थिति न केवल भाजपा बल्कि कांग्रेस में भी देखी गई है। जोशी जी का आरोप है कि ये बाहरी नेता केवल चुनाव जीतने तक ही सीमित रहते हैं और स्थानीय समस्याओं से उनका कोई सरोकार नहीं होता। इसी कारण आज सिरोही विकास की दौड़ में पिछड़ा हुआ है और यहां के संसाधन बाहरी लोगों की भेंट चढ़ रहे हैं।

नव-सामंतवाद और परिवारवाद का बढ़ता जाल

भाजपा में बढ़ते परिवारवाद पर प्रहार करते हुए गिरीश जोशी ने 'नव-सामंतवाद' शब्द का प्रयोग किया। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे एक बाहरी विधायक के बेटे को बिना किसी खेल पृष्ठभूमि के सिरोही जिला क्रिकेट बोर्ड का अध्यक्ष बना दिया गया। यह सीधे तौर पर योग्यता की अनदेखी और सत्ता के दुरुपयोग का मामला है।

जोशी जी ने बताया कि सिरोही की क्रिकेट एकेडमी में आज ताले लगे हुए हैं। स्थानीय खिलाड़ियों को आगे बढ़ने का मौका नहीं मिल रहा है क्योंकि पदों पर नेताओं के बच्चे काबिज हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या भाजपा अब केवल नेताओं के बच्चों को सैटल करने का माध्यम बन गई है? यह नव-सामंतवाद पार्टी के उस दावे को खोखला साबित करता है जिसमें वह खुद को 'पार्टी विद ए डिफरेंस' कहती है।

उनका मानना है कि जब तक योग्य और जमीनी कार्यकर्ताओं को दरकिनार कर केवल 'पुत्र मोह' में फैसले लिए जाएंगे, तब तक संगठन का भला नहीं हो सकता। क्रिकेट बोर्ड का यह विवाद तो केवल एक बानगी है, सिरोही के कई अन्य संस्थानों में भी इसी तरह का कब्जा देखा जा रहा है। इससे युवाओं में भारी असंतोष और निराशा व्याप्त है।

भ्रष्टाचार और भू-माफियाओं का बोलबाला

साक्षात्कार में सबसे विस्फोटक खुलासे भ्रष्टाचार और भू-माफियाओं को लेकर हुए। जोशी जी ने आरोप लगाया कि प्रशासन और नेताओं की मिलीभगत से सिरोही की कीमती जमीनों को लूटा जा रहा है। सनवाड़ा गांव का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि वहां स्कूल विस्तार के लिए 20 करोड़ रुपये स्वीकृत हुए थे, लेकिन एक रसूखदार कार्यकर्ता के अवैध कब्जे को बचाने के लिए काम रुकवा दिया गया।

उन्होंने गोचर भूमि (गायों के चरने की जमीन) पर हो रहे अतिक्रमण पर भी गहरी चिंता जताई। रोहिड़ा गांव की 5000 बीघा गोचर जमीन पर बाहरी लोगों और भू-माफियाओं का कब्जा हो चुका है। जोशी जी ने भावुक होते हुए कहा कि जिस पार्टी में गाय और मंदिर के नाम पर राजनीति होती है, उसी के राज में गोचर भूमि सुरक्षित नहीं है।

मंदिरों की जमीनों को लेकर भी उन्होंने गंभीर आरोप लगाए। उनके अनुसार, जन-नेताओं से जुड़े लोग मंदिरों की जमीन पर टैक्स वसूली कर रहे हैं और वहां व्यावसायिक निर्माण कर रहे हैं। यह सब प्रशासन की नाक के नीचे हो रहा है, लेकिन कोई बोलने वाला नहीं है। सत्ता के संरक्षण में फल-फूल रहा यह भू-माफिया तंत्र सिरोही की अस्मिता को निगल रहा है।

सिलिकोसिस और जल संकट: विकास के दावों की हकीकत

सिरोही के विकास के दावों की पोल खोलते हुए जोशी जी ने सिलिकोसिस बीमारी और जल संकट का मुद्दा उठाया। उन्होंने बताया कि अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए सिरोही का बेशकीमती पत्थर गया है, जो गर्व की बात है। लेकिन उन खदानों में काम करने वाले स्थानीय मजदूरों की सुध लेने वाला कोई नहीं है।

सैकड़ों मजदूर 'सिलिकोसिस' जैसी जानलेवा बीमारी से तड़प-तड़प कर मर रहे हैं, लेकिन उनके इलाज और मुआवजे के लिए कोई ठोस नीति नहीं है। इसके साथ ही, जिले में पानी की भारी लूट मची हुई है। वासा डैम और 24 भाखर डैम का पानी जो किसानों की सिंचाई के लिए होना चाहिए था, वह पाइपलाइनों के जरिए निजी फैक्ट्रियों को बेचा जा रहा है।

प्रशासन इस लूट पर खामोश बैठा है क्योंकि इसमें बड़े सफेदपोश नेताओं के हित जुड़े हुए हैं। जोशी जी ने कहा कि एक तरफ किसान प्यासा मर रहा है और दूसरी तरफ फैक्ट्रियां फल-फूल रही हैं। यह विकास नहीं बल्कि विनाश है। सिरोही की जनता को बुनियादी सुविधाओं से वंचित रखकर कुछ खास लोगों की जेबें भरी जा रही हैं।

ओटाराम देवासी और 'पाखंड' पर सीधा हमला

सिरोही के वर्तमान विधायक ओटाराम देवासी पर प्रहार करते हुए गिरीश जोशी ने किसी भी तरह की नरमी नहीं दिखाई। उन्होंने देवासी को 'भोपा' (तंत्र-मंत्र करने वाला) कहकर संबोधित किया और उन पर पाखंड को बढ़ावा देने का आरोप लगाया। जोशी जी ने तंज कसते हुए कहा कि अगर सरकार भोपों को ही नेतृत्व सौंपना चाहती है, तो उन्हें अस्पतालों और थानों में भी लगा देना चाहिए।

\"अगर भोपा ही सब कुछ ठीक कर सकते हैं, तो मेडिकल कॉलेजों की क्या जरूरत है? उन्हें ही इलाज और चोरियां पकड़ने का जिम्मा दे देना चाहिए।\"

उनका मानना है कि ऐसे नेतृत्व से सिरोही के युवाओं का भविष्य अंधकारमय है। शिक्षा और रोजगार के बजाय पाखंड को प्राथमिकता दी जा रही है। जोशी जी ने कहा कि ओटाराम जी का भविष्य तो सुरक्षित हो सकता है, लेकिन सिरोही के विकास का पहिया पूरी तरह थम गया है। यह राजनीति का वह रूप है जो समाज को पीछे ले जाने का काम कर रहा है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि वे किसी व्यक्ति के विरोधी नहीं हैं, बल्कि उस विचारधारा के खिलाफ हैं जो जनता को गुमराह कर सत्ता हासिल करती है। सिरोही को आज एक विजनरी नेतृत्व की जरूरत है, न कि ऐसे लोगों की जो केवल अपनी कुर्सी बचाने में मशगूल हों।

राष्ट्रीय नेतृत्व और वैचारिक पतन पर सवाल

जोशी जी ने केवल स्थानीय ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी पार्टी की कार्यशैली पर सवाल उठाए। उन्होंने 'राष्ट्रपति' और 'राष्ट्रपिता' जैसे शब्दों के इस्तेमाल पर अपनी आपत्ति दर्ज कराई। संघ की पुरानी विचारधारा का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि राष्ट्र का केवल एक ही अध्यक्ष होता है, जिसे 'राष्ट्र-अध्यक्ष' कहना चाहिए।

उन्होंने वर्तमान राष्ट्रपति की नियुक्ति के पीछे भी राजनीतिक षड्यंत्र और एक अंतरराष्ट्रीय संस्था (ब्रह्माकुमारी) के दबाव की बात कही। उनका मानना है कि पार्टी अब अपने वैचारिक स्टैंड से भटक गई है। हर फैसले के पीछे केवल राजनीतिक लाभ देखा जा रहा है, जिससे संघ के समर्पित कार्यकर्ताओं में गहरा असंतोष है।

जोशी जी के अनुसार, जब तक पार्टी में आंतरिक लोकतंत्र बहाल नहीं होता और कार्यकर्ताओं की बात नहीं सुनी जाती, तब तक सुधार संभव नहीं है। यह वैचारिक पतन पार्टी की जड़ों को खोखला कर रहा है। उन्होंने शीर्ष नेतृत्व को चेतावनी दी कि अगर समय रहते सुधार नहीं किया गया, तो परिणाम गंभीर हो सकते हैं।

बदलाव की हुंकार और भविष्य की राह

साक्षात्कार के अंत में गिरीश जोशी ने स्वामी विवेकानंद के विचारों को उद्धृत करते हुए बदलाव का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि यदि उन्हें सिरोही जिले में 100 सच्चे और समर्पित लोग मिल जाएं, तो वे गांव-गांव जाकर इन भ्रष्ट नेताओं की पोल खोलेंगे। उनका मकसद चुनाव लड़ना या कोई पद पाना नहीं है।

वे केवल अपनी मातृभूमि सिरोही को इन राजनीतिक ठेकेदारों से बचाना चाहते हैं। उन्होंने जनता से अपील की कि वे जागें और अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाएं। जोशी जी का यह साक्षात्कार केवल एक बातचीत नहीं, बल्कि सिरोही की राजनीति में व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ एक जंग का ऐलान है।

कुल मिलाकर, 'thinQ360' पर गिरीश जोशी का यह प्रखर साक्षात्कार सत्ता के केंद्रीकरण और योग्यता की अनदेखी का एक जीवंत दस्तावेज़ है। यह संवाद इस बात का प्रमाण है कि जमीन से जुड़े पुराने कार्यकर्ता अब चुप नहीं बैठने वाले हैं। आने वाले समय में इसका असर राजस्थान और विशेषकर सिरोही की राजनीति पर गहरा पड़ने वाला है।

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