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धनतेरस पर सोना-चांदी के भाव: धनतेरस से पहले चांदी में भारी गिरावट, सोना भी हुआ सस्ता

बलजीत सिंह शेखावत · 28 अक्टूबर 2026, 12:29 दोपहर
धनतेरस से पहले सोने और चांदी के खरीदारों के लिए राहत भरी खबर है। अंतरराष्ट्रीय और घरेलू बाजार में दोनों धातुओं की कीमतें घटी हैं, जिसमें सोने की तुलना में चांदी में करीब तीन गुना ज्यादा गिरावट आई है।

धनतेरस से पहले धातुओं के भाव में गिरावट

धनतेरस पर सोना और चांदी खरीदने की तैयारी कर रहे लोगों के लिए दोनों धातुओं की कीमतों में गिरावट अच्छी खबर लेकर आई है।

हालांकि दोनों धातुओं के भाव एक जैसी रफ्तार से नहीं गिरे हैं। चांदी की कीमत में सोने के मुकाबले कहीं ज्यादा कमी देखी गई है।

जनवरी में रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी अपने उच्च स्तर से करीब 56% नीचे आ चुकी है।

भारत में भी इसका भाव 2 लाख रुपये प्रति किलो से नीचे चला गया है। सोने की कीमत में भी गिरावट आई है, लेकिन यह चांदी के मुकाबले कम है।

अक्टूबर में चांदी और सोने के दाम

इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के मुताबिक, 26 अक्टूबर को चांदी 999 का भाव 1,94,479 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुआ।

इससे पहले 30 सितंबर को इसका भाव 2,20,435 रुपये प्रति किलोग्राम पर था। इस तरह अक्टूबर के शुरुआती 26 दिनों में चांदी की कीमत 11.8% गिर गई।

इसी अवधि में 24 कैरेट सोने का भाव 1,47,888 रुपये प्रति 10 ग्राम से घटकर 1,41,710 रुपये पर आ गया। यानी सोने की कीमत में 4.2% की गिरावट आई।

इस हिसाब से अक्टूबर में चांदी को सोने के मुकाबले करीब तीन गुना ज्यादा नुकसान उठाना पड़ा है।

बाजार में मुनाफावसूली का असर

चांदी में गिरावट सबसे ज्यादा उन दिनों दिखी, जब बाजार में बिकवाली तेज हुई।

22 अक्टूबर को चांदी करीब 3.4% टूट गई, जबकि सोने में लगभग 1% की कमी आई। इसी दिन चांदी का भाव इस साल पहली बार 2 लाख रुपये प्रति किलो के नीचे बंद हुआ।

अगले दिन भी चांदी 2.7% गिर गई, जबकि सोने में करीब 0.75% की गिरावट दर्ज की गई।

सोने के मुकाबले चांदी के ज्यादा टूटने की वजहें

दोनों धातुओं पर ब्याज दरों और डॉलर का असर पड़ता है, लेकिन चांदी की कीमत में गिरावट ज्यादा होने के पीछे तीन प्रमुख वजहें हैं:

चांदी की इंडस्ट्रीयल डिमांड कमजोर पड़ी

चांदी का इस्तेमाल गहने और सिक्के बनाने के साथ कई उद्योगों में भी होता है। इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर पैनल और दूसरे उपकरणों में इसकी जरूरत पड़ती है।

सिल्वर इंस्टीट्यूट की वर्ल्ड सिल्वर सर्वे 2026 रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में उद्योगों ने करीब 65.74 करोड़ औंस चांदी का इस्तेमाल किया। वहीं, कुल वैश्विक मांग 113 करोड़ औंस थी।

जब महंगी ब्याज दरों और आर्थिक अनिश्चितता के कारण उद्योगों की मांग घटने का डर बढ़ता है, तो चांदी पर दोहरा दबाव आता है।

इसकी कीमत पर निवेशकों की खरीदारी में कमी का असर भी पड़ता है और औद्योगिक मांग कमजोर होने की आशंका का भी प्रभाव दिखता है।

सोलर पैनल कंपनियां घटा रहीं इस्तेमाल

चांदी की मांग पर सोलर पैनल इंडस्ट्री में हो रहे बदलावों का भी असर पड़ रहा है। लागत कम करने के लिए सोलर पैनल बनाने वाली कंपनियां हर पैनल में पहले के मुकाबले कम चांदी इस्तेमाल कर रही हैं।

इंडस्ट्री में इसे 'थ्रिफ्टिंग' कहा जाता है। सिल्वर इंस्टीट्यूट का अनुमान है कि इस साल औद्योगिक क्षेत्र से चांदी की मांग में 3% की गिरावट आ सकती है।

इसकी प्रमुख वजह सोलर सेक्टर से मांग की रफ्तार धीमी होना है। प्रति पैनल कम चांदी इस्तेमाल होने से कुल मांग की बढ़ोतरी प्रभावित हो सकती है।

तेजी ज्यादा थी, इसलिए गिरावट भी तेज

चांदी का बाजार सोने के मुकाबले छोटा है, इसलिए इसमें कीमतें तेजी से ऊपर-नीचे होती हैं।

जनवरी में चांदी का अंतरराष्ट्रीय भाव 121 डॉलर प्रति औंस से ऊपर पहुंच गया था, जो अब घटकर करीब 54 डॉलर प्रति औंस के आसपास आ गया है।

यानी रिकॉर्ड स्तर से इसमें लगभग 56% की गिरावट आ चुकी है। वहीं अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना करीब 4,025 डॉलर प्रति औंस पर है, जो अपने 5,608 डॉलर के रिकॉर्ड स्तर से लगभग 28% नीचे है।

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