नई दिल्ली | भारतीय सर्राफा बाजार में आज सोने और चांदी की कीमतों में जबरदस्त गिरावट दर्ज की गई है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार, चांदी की कीमतों में ₹3,761 की बड़ी कटौती हुई है।
अब एक किलो चांदी का भाव ₹2.65 लाख पर आ गया है। वहीं, 24 कैरेट सोने की बात करें तो इसके दाम में ₹1,116 की कमी आई है। अब 10 ग्राम सोना ₹1.58 लाख में मिल रहा है।
ऑलटाइम हाई से ₹1.21 लाख नीचे आई चांदी
इस साल जनवरी के महीने में सोने और चांदी ने अपने ऐतिहासिक रिकॉर्ड तोड़ दिए थे। 29 जनवरी को चांदी ₹3.86 लाख के ऑलटाइम हाई पर पहुंच गई थी। तब से अब तक इसमें भारी गिरावट आई है।
पिछले 49 दिनों के भीतर चांदी करीब ₹1.21 लाख सस्ती हो चुकी है। यह उन लोगों के लिए बड़ी राहत है जो शादी-ब्याह के सीजन के लिए खरीदारी करने की योजना बना रहे थे।
सोने की कीमतों में भी इसी तरह का ट्रेंड देखा जा रहा है। जनवरी में सोना ₹1.76 लाख के उच्चतम स्तर पर था। अब यह अपने पीक से करीब ₹18 हजार नीचे कारोबार कर रहा है।
बाजार में गिरावट की मुख्य वजह क्या है?
आमतौर पर दुनिया में जब भी युद्ध जैसे हालात बनते हैं, तो सोने और चांदी के दाम बढ़ते हैं। लेकिन इस बार मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बावजूद कीमतें गिर रही हैं।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि निवेशक अब मेटल की जगह 'कैश' पर ज्यादा भरोसा कर रहे हैं। अनिश्चितता के दौर में लोग अपने पास लिक्विड मनी रखना चाहते हैं ताकि जरूरत पड़ने पर काम आए।
"बाजार में आई इस गिरावट का एक बड़ा कारण प्रॉफिट बुकिंग भी है। जनवरी में कीमतें बहुत ऊपर चली गई थीं, जिससे बड़े निवेशकों ने मुनाफा कमाना शुरू कर दिया।"
निवेशकों और खरीदारों के लिए जरूरी सलाह
अगर आप इस गिरावट का फायदा उठाकर सोना खरीदना चाहते हैं, तो कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है। हमेशा ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड (BIS) का हॉलमार्क लगा हुआ सोना ही खरीदें।
हॉलमार्किंग से सोने की शुद्धता की गारंटी मिलती है। यह नंबर अल्फान्यूमेरिक होता है। इसके अलावा, खरीदारी करने से पहले विभिन्न विश्वसनीय वेबसाइटों पर उस दिन के ताजा भाव की जांच जरूर कर लें।
सोने की शुद्धता पहचानने के लिए हॉलमार्क के साथ-साथ ज्वेलर से पक्का बिल मांगना न भूलें। पक्के बिल में सोने की शुद्धता, वजन और मेकिंग चार्ज का स्पष्ट विवरण होता है जो भविष्य में काम आता है।
सोने और चांदी की कीमतों में आ रहा यह उतार-चढ़ाव वैश्विक अर्थव्यवस्था और भू-राजनीतिक स्थितियों पर निर्भर करता है। आने वाले दिनों में बाजार की चाल निवेशकों के रुख और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों से तय होगी।
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