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डीजल, ATF पर विंडफॉल टैक्स बढ़ा, पेट्रोल-डीजल के रेट जानें

जोगेन्द्र सिंह शेखावत · 16 जुलाई 2026, 11:17 दोपहर
केंद्र सरकार ने डीजल और ATF के निर्यात पर विंडफॉल टैक्स बढ़ा दिया है, जबकि पेट्रोल पर इसे घटाया है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच जानें इसका आम आदमी पर क्या असर होगा।

डीजल और ATF पर बढ़ा विंडफॉल टैक्स

केंद्र सरकार ने डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (एटीएफ) के निर्यात पर लगने वाले विंडफॉल टैक्स में बढ़ोतरी की है।

इसके विपरीत, पेट्रोल के निर्यात पर लगने वाले टैक्स को घटाया गया है। यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तेजी देखी जा रही है।

टैक्स की नई दरें क्या हैं?

सरकार द्वारा 16 जुलाई से लागू किए गए नए आदेश के अनुसार, पेट्रोल के निर्यात पर विंडफॉल टैक्स 4 रुपये प्रति लीटर से घटाकर 2.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है।

वहीं, डीजल के निर्यात पर यह टैक्स 8.5 रुपये से बढ़ाकर 15.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है।

एविएशन टर्बाइन फ्यूल (एटीएफ) पर भी टैक्स 7.5 रुपये से बढ़ाकर 14.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है।

कच्चे तेल की कीमतों में उछाल

यह फैसला तब आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लगातार चौथे दिन बढ़ी हैं।

गुरुवार को ब्रेंट क्रूड 33 सेंट यानी 0.4% बढ़कर 85.28 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।

वहीं, अमेरिकी डब्ल्यूटीआई क्रूड 42 सेंट यानी 0.5% चढ़कर 80.02 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था।

पिछले तीन कारोबारी सत्रों में ब्रेंट क्रूड में लगभग 12% की बढ़ोतरी हो चुकी है, जिससे वैश्विक तेल बाजार में सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ गई है।

आम आदमी पर क्या होगा असर?

विंडफॉल टैक्स में इस बदलाव का आम ग्राहकों पर तत्काल कोई सीधा असर नहीं पड़ता है।

यह टैक्स सरकार तब लगाती है जब तेल कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊंची कीमतों के कारण निर्यात पर असाधारण मुनाफा होता है।

इसका उद्देश्य मुनाफे का एक हिस्सा सरकारी खजाने में लाना और घरेलू बाजार में ईंधन की उपलब्धता सुनिश्चित करना है।

देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतें स्थिर

विंडफॉल टैक्स में बढ़ोतरी के बावजूद, देश में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। ये कीमतें 25 मई से स्थिर बनी हुई हैं।

प्रमुख शहरों में 16 जुलाई को पेट्रोल-डीजल के दाम:

विशेषज्ञों की राय

चॉइस ब्रोकिंग के कमोडिटी और करेंसी एक्सपर्ट आमिर मकदा का मानना है कि अगर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और बढ़ता है, तो कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल को पार कर सकती है।

उनके अनुसार, होर्मुज से तेल आपूर्ति बाधित होने का खतरा बाजार में चिंता पैदा कर रहा है, जिससे निवेशक खरीदारी बढ़ा सकते हैं।

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