जयपुर | राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने बाबा साहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर की 135वीं जयंती पर आयोजित विशेष समारोह में उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि बाबा साहेब केवल एक व्यक्ति नहीं थे, बल्कि वह अपने आप में एक संपूर्ण संस्था थे।
राज्यपाल ने जोर देकर कहा कि अम्बेडकर ने देश को न केवल सामाजिक समरसता का मंत्र दिया, बल्कि 'राष्ट्र सर्वोपरि' की दृष्टि भी प्रदान की। वह भारतीय संविधान और संस्कृति के मूल्यों में गहराई से रचे-बसे एक महान व्यक्तित्व थे।
राष्ट्रवाद और भारतीयता का संदेश
राज्यपाल बागडे ने बाबा साहेब के 1938 के उस ऐतिहासिक भाषण को याद किया, जो उन्होंने बॉम्बे विधानसभा में दिया था। तब बाबा साहेब ने स्पष्ट कहा था कि मैं चाहता हूं कि समस्त लोग पहले भारतीय हों और अंततः भी भारतीय ही रहें।
उनका राष्ट्रवाद जातियों, वर्णों और धर्मों के भेदभाव से पूरी तरह मुक्त था। राज्यपाल ने कहा कि डॉ. अम्बेडकर के विचार वास्तविक राष्ट्रवाद से जुड़े हैं, जहां हर नागरिक समान है और राष्ट्र का हित ही सबसे ऊपर रहता है।
'शिक्षित बनो, संगठित रहो' का नारा
समारोह को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि डॉ. अम्बेडकर ने अपना अधिकांश समय दुनिया भर के कानूनों को समझने में बिताया। इसी कड़ी मेहनत से उन्होंने भारत को विश्व का सबसे बड़ा और महान संविधान उपहार में दिया।
उन्होंने बाबा साहेब के प्रसिद्ध नारे 'शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो' का उल्लेख करते हुए युवाओं से इसे अपनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि शिक्षा और जागरूकता ही समाज में बदलाव का सबसे सशक्त माध्यम है।
विकास परियोजनाओं में अहम भूमिका
राज्यपाल ने बाबा साहेब की दूरदृष्टि की सराहना करते हुए बताया कि उन्होंने देश में रोजगार केंद्रों की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उनके प्रयासों से ही दामोदर घाटी, हीराकुंड और सोन जैसी बड़ी परियोजनाएं धरातल पर उतर सकीं।
अंत में राज्यपाल ने कहा कि बाबा साहेब एक युगपुरुष थे। उनके जीवन और विचारों से सीख लेकर ही हम एक समृद्ध और समरस भारत का निर्माण कर सकते हैं। हमें उनके बताए मार्ग पर चलकर देश को सशक्त बनाना होगा।