जालोर। राजनीति में सत्ता परिवर्तन के कई रंग देखने को मिलते हैं। कहीं चुनावी जीत के बाद प्रतिद्वंद्वी से कुर्सी मिलती है तो कहीं लंबे समय से पद पर रहे जनप्रतिनिधि को नए निर्वाचित प्रतिनिधि के लिए जिम्मेदारी छोड़नी पड़ती है। जालोर जिले की बादनवाड़ी ग्राम पंचायत में गुरुवार को सत्ता हस्तांतरण की एक अनूठी तस्वीर सामने आई। यहां पिछले 5 वर्षों तक पंचायत की बागडोर संभालने वाली गुड़िया कंवर ने सरपंच की कुर्सी किसी राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी को नहीं, बल्कि अपने पति एवं नवनिर्वाचित सरपंच गजेंद्रसिंह बालावत को सौंपी।
कैप्टन किशोर सिंह बादनवाड़ी के पोते हैं सरपंच गजेन्द्रसिंह
भारतीय सेना में द्वितीय विश्व युद्ध समेत कई लड़ाइयां लड़ने वाले कैप्टन किशोर सिंह बादनवाड़ी के पोते हैं सरपंच गजेन्द्रसिंह। इस नाते आसपास के इलाके में इस परिवार का नाम खासा सम्मान का प्रतीक है।
बादनवाड़ी ग्राम पंचायत में पिछले कार्यकाल के दौरान गुड़िया कंवर निर्वाचित सरपंच रहीं। निर्वाचित कार्यकाल पूरा होने के बाद उन्होंने प्रशासक के रूप में भी पंचायत की जिम्मेदारी संभाली। इस बार सरपंच का पद सामान्य श्रेणी का होने पर उनके पति गजेंद्रसिंह बालावत चुनाव मैदान में उतरे और जीत हासिल कर पंचायत के नए सरपंच बने।
पत्नी ने पति को सौंपी पंचायत की जिम्मेदारी
ग्राम पंचायत कार्यालय में आयोजित पदभार ग्रहण कार्यक्रम में निवर्तमान प्रशासक गुड़िया कंवर ने नवनिर्वाचित सरपंच गजेंद्रसिंह बालावत को औपचारिक रूप से पंचायत की जिम्मेदारी सौंपी। इस दौरान आवश्यक प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी करने के बाद नए सरपंच ने अपना पदभार ग्रहण किया।
इसके साथ ही बादनवाड़ी ग्राम पंचायत का नेतृत्व एक ही परिवार के भीतर पत्नी से पति के हाथों में पहुंच गया। जहां पिछले 5 वर्षों के दौरान गुड़िया कंवर ने पंचायत का नेतृत्व किया, वहीं अब निर्वाचित सरपंच के रूप में गजेंद्रसिंह बालावत गांव के विकास कार्यों और प्रशासनिक निर्णयों की जिम्मेदारी संभालेंगे।
सीट सामान्य हुई तो चुनाव मैदान में उतरे गजेंद्रसिंह
पिछले पंचायत चुनाव में सीट की आरक्षण व्यवस्था के तहत गुड़िया कंवर चुनाव जीतकर सरपंच बनी थीं। इस बार सीट सामान्य श्रेणी की होने पर गजेंद्रसिंह बालावत ने चुनाव लड़ा। ग्रामीण मतदाताओं का समर्थन मिलने के बाद उन्होंने जीत हासिल की और सरपंच निर्वाचित हुए।
इस प्रकार पंचायत में नेतृत्व का चेहरा तो बदल गया, लेकिन जिम्मेदारी उसी परिवार के दूसरे सदस्य के पास पहुंची है। यह घटनाक्रम स्थानीय ग्रामीण राजनीति में चर्चा का विषय बना हुआ है।
अब विकास के मोर्चे पर होगी परीक्षा
बादनवाड़ी ग्राम पंचायत में हुआ यह सत्ता हस्तांतरण केवल सरपंच की कुर्सी पर चेहरे का बदलाव नहीं, बल्कि पंचायत के नेतृत्व में नए अध्याय की शुरुआत भी है। पिछले कार्यकाल में गुड़िया कंवर के नेतृत्व में पंचायत का संचालन हुआ, जबकि अब गजेंद्रसिंह बालावत निर्वाचित जनप्रतिनिधि के रूप में फैसलों और विकास कार्यों की जिम्मेदारी संभालेंगे।
नए सरपंच के सामने पंचायत की बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने, ग्रामीण समस्याओं का समाधान करने और अधूरी विकास योजनाओं को आगे बढ़ाने की चुनौती रहेगी। ग्रामीणों को भी नए नेतृत्व से सड़क, नाली, पेयजल, स्वच्छता, शिक्षा और अन्य आधारभूत सुविधाओं से जुड़े कार्यों को गति मिलने की अपेक्षा है।
इसके साथ ही पिछले कार्यकाल में शुरू की गई योजनाओं की निरंतरता बनाए रखना और नई आवश्यकताओं के अनुसार विकास की प्राथमिकताएं तय करना भी नए सरपंच की जिम्मेदारी होगी।
समारोह में जनप्रतिनिधि और ग्रामीण रहे मौजूद
पदभार ग्रहण कार्यक्रम में ग्राम विकास अधिकारी सौरभ दवे सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि और ग्रामीण मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान गजेंद्रसिंह बालावत ने विधिवत सरपंच का पदभार ग्रहण किया। उपस्थित लोगों ने उन्हें नई जिम्मेदारी मिलने पर शुभकामनाएं दीं।
बादनवाड़ी में इस सत्ता हस्तांतरण ने ग्रामीण राजनीति की एक दिलचस्प तस्वीर पेश की है। 5 साल तक पत्नी के हाथों में रही पंचायत की कमान अब चुनाव जीतकर सरपंच बने पति के पास पहुंच गई है। नेतृत्व का चेहरा बदलने के बाद अब असली कसौटी गांव का विकास और ग्रामीणों की अपेक्षाओं पर खरा उतरना होगी।