भारत

गुजरात: स्वच्छता में तकनीक और सम्मान: स्वच्छ भारत मिशन 2.0: गुजरात ने पेश किया स्वच्छता और सम्मान का मॉडल, रोबोटिक तकनीक से बदली सफाईकर्मियों की जिंदगी

मानवेन्द्र जैतावत · 09 अप्रैल 2026, 12:05 दोपहर
स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0 के तहत गुजरात ने नवाचार और सामाजिक कल्याण का अनूठा उदाहरण पेश किया है। राजकोट में रोबोटिक सीवर सफाई और भरूच में महिला स्वास्थ्य शिविरों के माध्यम से स्वच्छता कर्मियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आया है।

राजकोट | स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0 के अंतर्गत भारत के विभिन्न राज्यों में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और सैनिटेशन इन्फ्रास्ट्रक्चर में व्यापक सुधार देखे जा रहे हैं। इसी कड़ी में गुजरात ने तकनीकी नवाचार और सामाजिक कल्याण को जोड़कर एक प्रेरक मॉडल प्रस्तुत किया है।

रोबोटिक तकनीक से सुरक्षा

राजकोट ने सीवर सफाई की पारंपरिक और खतरनाक पद्धति को बदलकर रोबोटिक तकनीक को अपनाया है। 2.29 करोड़ रुपये की इस महत्वपूर्ण परियोजना ने सफाई मित्रों के जीवन से जोखिम को कम कर दिया है। यह पहल "जीरो-ह्यूमन-एंट्री" के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है। अब सफाईकर्मी सीवर के जहरीले वातावरण में प्रवेश करने के बजाय मशीन ऑपरेटर के रूप में काम कर रहे हैं, जिससे उनकी कार्य दक्षता बढ़ी है। इस तकनीक के उपयोग से न केवल सफाई की गुणवत्ता में सुधार हुआ है, बल्कि सफाईकर्मियों को समाज में एक नई पहचान और सम्मान मिला है। यह उनके पेशेवर जीवन में एक बड़ा सकारात्मक बदलाव है।

सामुदायिक भवन और गरिमा

सफाई कर्मियों के जीवन स्तर को ऊंचा उठाने के लिए राजकोट नगर निगम ने एक आधुनिक सामुदायिक भवन का निर्माण किया है। यह भवन सफाई कर्मियों के परिवारों के लिए एक समर्पित सामाजिक और सांस्कृतिक केंद्र के रूप में कार्य करेगा। इस भवन में 5000 से अधिक परिवारों के लिए विवाह एवं कार्यक्रम हॉल, आधुनिक रसोई, और विशाल भोजन कक्ष जैसी सुविधाएं दी गई हैं। यह संरचना सफाई कर्मियों को गरिमा के साथ जीवन जीने का अवसर प्रदान करती है।

भरूच में महिला सफाईमित्रों की देखभाल

भरूच नगर पालिका ने महिला सफाईमित्रों के स्वास्थ्य और पोषण पर विशेष ध्यान केंद्रित किया है। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर आयोजित स्वास्थ्य शिविरों के माध्यम से महिलाओं को जागरूक किया गया। शिविर में 108 महिला कर्मियों की विस्तृत स्वास्थ्य जांच की गई। उन्हें निशुल्क दवाइयां और पोषण संबंधी किट भी प्रदान की गई। यह पहल दर्शाती है कि स्वच्छता अभियान में महिलाओं की भूमिका और स्वास्थ्य सर्वोपरि है।

नवाचार और समावेशी विकास

गुजरात के ये प्रयास स्पष्ट करते हैं कि एसबीएम-यू 2.0 केवल कूड़ा प्रबंधन तक सीमित नहीं है। यह मिशन अब तकनीकी प्रगति, बुनियादी ढांचे के विकास और सामाजिक न्याय का एक संगम बन चुका है। राज्य ने यह साबित किया है कि अगर सही दृष्टिकोण अपनाया जाए, तो स्वच्छता और सम्मान एक साथ चल सकते हैं। यह मॉडल अन्य राज्यों के लिए भी एक मार्गदर्शक की भूमिका निभा सकता है। अंततः, ये नवाचार एक ऐसे भारत की नींव रख रहे हैं जहां हर नागरिक, विशेषकर हमारे स्वच्छता योद्धा, सुरक्षित और सम्मानित महसूस करें। समावेशी विकास ही "स्वच्छ भारत" के सपने को पूर्णता प्रदान करेगा।

← पूरा आर्टिकल पढ़ें (Full Version)