पुर | क्षेत्र के गुरु जंभेश्वर भगवान मंदिर परिसर में आयोजित सात दिवसीय जाम्भाणी कथा के चौथे दिन श्रद्धालुओं को गुरु जंभेश्वर की दिव्य बाल लीलाओं का भावपूर्ण वर्णन सुनने को मिला।
गुरु जंभेश्वर की बाल लीलाओं का दिव्य संदेश
आचार्य रामाचार्य महाराज ने गुरु जंभेश्वर के बाल्यकाल को ज्ञान, भक्ति, सत्य और जीव दया का अद्भुत संगम बताया। उनकी लीलाएं समाज को धर्म और लोककल्याण का मार्ग दिखाने वाली प्रेरणादायक घटनाएं थीं। वे बचपन से ही सामान्य बालकों से अलग थे और सांसारिक खेल-कूद से दूर रहकर मौन, ध्यान और आध्यात्मिक चिंतन में लीन रहते थे। उनकी लीलाओं में सांसारिक मोह-माया का खंडन स्पष्ट था। जब माता हंसादेवी उन्हें सांसारिक कार्यों में लगाना चाहतीं, तब भी वे अपने दिव्य स्वरूप से संदेश देते थे कि उनका जीवन मानव कल्याण और धर्म स्थापना के लिए पूर्णतः समर्पित है।
पर्यावरण और जीव रक्षा का मूल मंत्र
आचार्य ने कहा कि जाम्भोजी ने बाल्यकाल से ही जीवों के प्रति दया और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। यही संदेश आगे चलकर बिश्नोई पंथ के 29 नियमों का मुख्य आधार बना।
"गुरु जंभेश्वर भगवान की बाल लीलाएं केवल चमत्कार नहीं थीं, बल्कि समाज को सत्य, करुणा, संयम और ईश्वर भक्ति की शिक्षा देने वाली एक महान पाठशाला थीं।"
स्वामी श्यामदास महाराज ने कहा कि गुरु के बिना सच्ची भक्ति और ईश्वर की प्राप्ति कठिन है। कथा के दौरान मंदिर परिसर पूरी तरह भक्तिमय वातावरण और जयकारों से सराबोर नजर आया। इस अवसर पर संत सुरजनदास महाराज, संत भगवान प्रकाश महाराज और महादेवाचार्य सहित बड़ी संख्या में बिश्नोई समाज के श्रद्धालु मौजूद रहे। सभी ने गुरु के चरणों में अपनी आस्था प्रकट की। यह कथा समाज को पाखंड और आडंबर से दूर रहकर सरल जीवन जीने की प्रेरणा दे रही है। जाम्भोजी के विचार आज के समय में प्रकृति संरक्षण के लिए सबसे बड़े मार्गदर्शक हैं।
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