प्राया | अटलांटिक महासागर की लहरों के बीच एक लग्जरी क्रूज शिप पर मौत का साया मंडरा रहा है। एमवी होंडियस नामक इस जहाज पर हंतावायरस संक्रमण का संदिग्ध मामला सामने आया है।
क्रूज पर हंतावायरस का कहर: समुद्र में मौत का तांडव: क्रूज पर हंतावायरस से 3 की मौत
अटलांटिक में क्रूज शिप पर हंतावायरस का संदिग्ध हमला, 3 की मौत और कई यात्री बीमार पड़े।
HIGHLIGHTS
- अटलांटिक महासागर में एमवी होंडियस क्रूज शिप पर हंतावायरस फैलने से तीन यात्रियों की मौत हो गई है।
- जहाज को वर्तमान में अफ्रीकी देश केप वर्डे की राजधानी प्राया में क्वारंटीन किया गया है।
- हंतावायरस मुख्य रूप से चूहों और गिलहरियों के मल-मूत्र या लार के संपर्क में आने से फैलता है।
- इस वायरस की मृत्यु दर 38% से 54% तक हो सकती है, जो इसे कोरोना से भी अधिक खतरनाक बनाती है।
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इस खतरनाक संक्रमण की वजह से अब तक तीन यात्रियों की जान जा चुकी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन और दक्षिण अफ्रीका स्वास्थ्य विभाग ने इस गंभीर स्थिति की पुष्टि की है।
जहाज पर फिलहाल हड़कंप मचा हुआ है क्योंकि कम से कम तीन अन्य यात्री भी गंभीर रूप से बीमार हैं। संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए कड़े कदम उठाए जा रहे हैं।
अफ्रीकी तट पर रोका गया मौत का जहाज
एमवी होंडियस को फिलहाल अफ्रीकी देश केप वर्डे की राजधानी प्राया के बंदरगाह पर रोक दिया गया है। अधिकारियों ने किसी भी यात्री को नीचे उतरने की अनुमति नहीं दी है।
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यह फैसला इसलिए लिया गया है ताकि जहाज पर मौजूद संभावित वायरस तट पर न फैल सके। विशेषज्ञों की एक टीम जहाज पर मौजूद यात्रियों की स्वास्थ्य जांच कर रही है।
डब्ल्यूएचओ के अनुसार, जहाज पर कुल छह लोगों में संक्रमण के स्पष्ट लक्षण पाए गए हैं। इनमें से एक मामले की पुष्टि प्रयोगशाला परीक्षणों के माध्यम से हो चुकी है।
अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ रहे यात्री
संक्रमित मरीजों में से एक की हालत बेहद नाजुक बनी हुई है। उसे दक्षिण अफ्रीका के एक अस्पताल के आईसीयू में भर्ती कराया गया है, जहां वह वेंटिलेटर पर है।
दो अन्य बीमार यात्रियों को भी जहाज से सुरक्षित बाहर निकालने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। उन्हें विशेष एम्बुलेंस के जरिए अस्पताल पहुंचाया जाएगा।
हालांकि, अभी यह पूरी तरह स्पष्ट नहीं है कि सभी बीमार लोग हंतावायरस से ही ग्रसित हैं। स्वास्थ्य अधिकारी इस बात की विस्तृत जांच कर रहे हैं कि यह बीमारी कहां से आई।
7 हफ्तों का सफर और तबाही की शुरुआत
नीदरलैंड के झंडे वाला यह क्रूज शिप 20 मार्च को अर्जेंटीना के उशुआइया से अपनी यात्रा पर रवाना हुआ था। इस यात्रा का उद्देश्य अंटार्कटिका और अटलांटिक के द्वीपों की सैर करना था।
अपनी यात्रा के दौरान यह जहाज दक्षिणी ध्रुव के बर्फीले इलाकों से गुजरा। इसके बाद इसने अटलांटिक महासागर को पार करते हुए यूरोप की ओर बढ़ना शुरू किया था।
जहाज की अंतिम मंजिल स्पेन का प्रसिद्ध कैनरी द्वीप था। लेकिन बीच रास्ते में ही इस रहस्यमयी बीमारी ने यात्रियों को अपनी चपेट में लेना शुरू कर दिया।
जहाज पर सवार थे 241 लोग
इस क्रूज शिप पर कुल 170 यात्री और 71 क्रू सदस्य सवार हैं। यात्रियों की देखभाल के लिए जहाज पर एक डॉक्टर और चिकित्सा सुविधा भी उपलब्ध थी।
पहली मौत जहाज पर ही हुई थी, जब एक 70 वर्षीय बुजुर्ग की तबीयत अचानक बिगड़ गई। वह अपनी पत्नी के साथ इस लंबी समुद्री यात्रा का आनंद ले रहे थे।
बुजुर्ग के शव को दक्षिण अटलांटिक के सेंट हेलेना द्वीप पर उतारा गया। इसके बाद उनकी पत्नी दक्षिण अफ्रीका पहुंचीं, जहां से उन्हें अपने देश नीदरलैंड वापस लौटना था।
एयरपोर्ट पर पत्नी की अचानक मौत
दुखद बात यह रही कि बुजुर्ग की पत्नी भी इस संक्रमण से नहीं बच सकीं। जैसे ही वह दक्षिण अफ्रीका के एयरपोर्ट पहुंचीं, वह अचानक बेहोश होकर गिर पड़ीं।
अस्पताल ले जाते समय उनकी भी मौत हो गई। क्रूज कंपनी ओशनवाइड एक्सपेडिशंस ने पुष्टि की है कि तीसरे मृतक का शव अभी भी केप वर्डे में जहाज पर ही है।
हंतावायरस: चूहों से फैलने वाला अदृश्य दुश्मन
सेंटर फॉर डिसीज कंट्रोल (CDC) के अनुसार, हंतावायरस एक ऐसी बीमारी है जो मुख्य रूप से चूहों और गिलहरियों के माध्यम से इंसानों में फैलती है।
हैरानी की बात यह है कि इस वायरस से चूहों को कोई नुकसान नहीं होता। लेकिन जैसे ही यह वायरस इंसानों के शरीर में प्रवेश करता है, यह जानलेवा साबित होता है।
यह वायरस पहली बार 1993 में अमेरिका में पहचाना गया था। तब एक युवा जोड़े की अचानक मौत ने पूरी दुनिया के वैज्ञानिकों को हैरान कर दिया था।
कैसे होता है संक्रमण?
हंतावायरस फैलने के मुख्य रूप से तीन तरीके होते हैं। पहला तरीका संक्रमित चूहे का काटना है, हालांकि इसके मामले बहुत ही कम देखे जाते हैं।
दूसरा और सबसे सामान्य तरीका चूहों के मल, मूत्र या लार के संपर्क में आना है। यदि कोई इंसान ऐसी दूषित सतह को छूकर अपने चेहरे को छूता है, तो वह संक्रमित हो जाता है।
तीसरा तरीका दूषित भोजन का सेवन करना है। अगर किसी खाने की चीज पर चूहों की लार या मल मौजूद हो, तो उसे खाने से वायरस शरीर में पहुंच जाता है।
कोरोना से भी अधिक घातक है मृत्यु दर
वैज्ञानिकों का कहना है कि हंतावायरस हवा के जरिए नहीं फैलता, लेकिन यह कोरोना वायरस से कहीं अधिक खतरनाक है। इसकी मृत्यु दर डराने वाली है।
हंतावायरस के संक्रमण में लगभग 38% मरीजों की मौत हो जाती है। यदि संक्रमण का स्ट्रेन 'अराराक्वॉरा' है, तो मृत्यु दर बढ़कर 54% तक पहुंच सकती है।
"हंतावायरस के मामले में समय पर पहचान ही बचाव का एकमात्र रास्ता है, क्योंकि इसकी कोई स्वीकृत वैक्सीन अभी तक मौजूद नहीं है।"
इस बीमारी का कोई विशिष्ट इलाज नहीं है। डॉक्टर केवल लक्षणों के आधार पर मरीज का उपचार करते हैं। गंभीर स्थिति में मरीज को ऑक्सीजन और वेंटिलेटर की जरूरत पड़ती है।
इतिहास और अमेरिकी अभिनेता का कनेक्शन
हंतावायरस पिछले साल तब चर्चा में आया था जब हॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता जीन हैकमैन की पत्नी बेट्सी अराकावा की इससे मौत हुई थी।
वे अपने घर में मृत पाई गई थीं और उनके घर के पास चूहों के निशान मिले थे। अराकावा अपनी मौत से पहले इंटरनेट पर फ्लू जैसे लक्षणों के बारे में सर्च कर रही थीं।
अमेरिका में 1993 से 2023 के बीच इस वायरस के केवल 890 मामले ही दर्ज किए गए हैं। लेकिन सीमित मामलों के बावजूद इसकी गंभीरता वैज्ञानिकों को हमेशा सतर्क रखती है।
निष्कर्ष: क्या जहाज के अंदर ही था खतरा?
विशेषज्ञ इस बात की जांच कर रहे हैं कि संक्रमण जहाज पर कैसे आया। अर्जेंटीना के उस इलाके में हंतावायरस का कोई पिछला रिकॉर्ड नहीं है जहां से जहाज चला था।
माना जा रहा है कि संक्रमण जहाज के भीतर ही कहीं से फैला होगा। फिलहाल यात्रियों की सुरक्षा और वायरस की रोकथाम ही स्वास्थ्य अधिकारियों की सर्वोच्च प्राथमिकता बनी हुई है।
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