राजनीति

हनुमान बेनीवाल का पीएम मोदी को पत्र: राजस्थान की स्वास्थ्य सेवाओं पर हनुमान बेनीवाल का बड़ा हमला, पीएम मोदी से की स्वास्थ्य मंत्री की शिकायत

मानवेन्द्र जैतावत · 10 अप्रैल 2026, 10:24 दोपहर
आरएलपी सांसद हनुमान बेनीवाल ने राजस्थान की बदहाल चिकित्सा व्यवस्था को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को पत्र लिखा है। उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर पर भ्रष्टाचार और लापरवाही के गंभीर आरोप लगाते हुए उनके इस्तीफे की मांग की है।

जयपुर | राजस्थान की राजनीति में एक बार फिर उबाल आ गया है। राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के सुप्रीमो और सांसद हनुमान बेनीवाल ने प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर मोर्चा खोल दिया है।

सांसद बेनीवाल ने सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को पत्र लिखकर स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने मंत्री को 'नाकारा' करार देते हुए उनके इस्तीफे की मांग की है।

'वेंटिलेटर' पर राजस्थान का स्वास्थ्य ढांचा

हनुमान बेनीवाल ने सोशल मीडिया के माध्यम से प्रधानमंत्री मोदी का ध्यान राजस्थान की बदहाल चिकित्सा व्यवस्था की ओर खींचा है। उनका कहना है कि राज्य की स्वास्थ्य सेवाएं वर्तमान में 'वेंटिलेटर' पर हैं।

अस्पतालों में बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। चिकित्सकों की भारी कमी, खराब पड़ी मशीनें और कुप्रबंधन ने आम जनता के जीवन को संकट में डाल दिया है। सरकारी अस्पतालों की स्थिति दिन-ब-दिन खराब होती जा रही है।

निजी लैब और फर्जी रिपोर्ट का बड़ा खेल

बेनीवाल का सबसे बड़ा हमला सरकारी अस्पतालों की लैब जांच एक निजी कंपनी को सौंपने के फैसले पर है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह कंपनी बिना सैंपल लिए ही फर्जी रिपोर्ट जारी कर रही है।

चौंकाने वाली बात यह है कि कई स्वस्थ व्यक्तियों को थायराइड और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों से ग्रसित बता दिया गया है। बेनीवाल ने इसे जनता के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ और एक बड़ा भ्रष्टाचार बताया है।

स्वास्थ्य मंत्री पर भ्रष्टाचार के आरोप

सांसद ने दावा किया कि जिस निजी कंपनी को यह ठेका दिया गया है, वह स्वास्थ्य मंत्री के किसी करीबी से जुड़ी हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि मंत्री अपने विभाग की सुध लेने के बजाय निजी हितों को साधने में लगे हैं।

उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि स्वास्थ्य मंत्री के अपने गृह जिले नागौर में भी स्वास्थ्य सेवाएं दयनीय स्थिति में हैं। जब मंत्री अपने जिले का ध्यान नहीं रख पा रहे, तो पूरे प्रदेश का क्या होगा?

संविदा कर्मियों की आजीविका पर संकट

निजी कंपनी को लैब जांच का काम सौंपने से सरकारी अस्पतालों में वर्षों से कार्यरत संविदा और प्लेसमेंट कार्मिकों की नौकरी पर खतरा मंडरा रहा है। बेनीवाल ने इसे एक 'आपराधिक कृत्य' करार दिया है।

उन्होंने कहा कि अल्प वेतन पर काम करने वाले इन कर्मियों को हटाकर निजी कंपनी को फायदा पहुँचाना सरासर गलत है। इससे न केवल भ्रष्टाचार बढ़ रहा है, बल्कि हजारों परिवारों के सामने रोजी-रोटी का संकट आ गया है।

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से तीखे सवाल

बेनीवाल ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से पूछा है कि इस निजी लैब को इतनी लापरवाही के बावजूद संरक्षण क्यों दिया जा रहा है? उन्होंने मुख्यमंत्री से पिछले 10 दिनों के कामकाज की उच्च स्तरीय समीक्षा करने की मांग की है।

सांसद ने पीएम मोदी से आग्रह किया है कि वे इस मामले में हस्तक्षेप करें। उन्होंने मांग की है कि लापरवाह और गैर-जिम्मेदार मंत्रियों को कड़ा संदेश दिया जाए ताकि जनता को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें।

राजस्थान में इस राजनीतिक घटनाक्रम ने सरकार की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। अब देखना यह है कि मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री कार्यालय इस गंभीर शिकायत पर क्या कदम उठाते हैं।

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