नई दिल्ली | भीषण गर्मी और लू का कहर पूरे देश में जारी है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसका असर महिलाओं पर पुरुषों से अलग होता है? हालिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, महिलाओं को हीट वेव का अधिक खतरा रहता है।
महिलाओं पर लू का खतरा और बचाव: Heat Wave: महिलाओं पर क्यों ज्यादा असर करती है लू? जानें लक्षण।
फिजिशियन डॉ. बाबूलाल वर्मा से जानें महिलाओं में लू के लक्षण और बचाव के जरूरी उपाय।
HIGHLIGHTS
- महिलाओं में हार्मोनल बदलाव के कारण लू लगने का खतरा बढ़ जाता है।
- रसोई की गर्मी और कम पानी पीना डिहाइड्रेशन का मुख्य कारण बनता है।
- गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों को हीट वेव से अधिक सावधानी बरतनी चाहिए।
- चक्कर आना, कमजोरी और चिड़चिड़ापन लू के शुरुआती लक्षण हो सकते हैं।
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महिलाओं पर लू का असर अलग क्यों?
फिजिशियन डॉ. बाबूलाल वर्मा के अनुसार, महिलाओं का शरीर गर्मी को पुरुषों की तुलना में अलग तरीके से झेलता है। इसके पीछे कई शारीरिक और सामाजिक कारण जिम्मेदार होते हैं।
महिलाओं के शरीर में हार्मोनल बदलाव लगातार होते रहते हैं। पीरियड्स, प्रेग्नेंसी या मेनोपॉज के दौरान शरीर का तापमान नियंत्रित करना मुश्किल हो जाता है। ऐसे समय में गर्मी का असर जल्दी होता है।
इसके अलावा, घरेलू जिम्मेदारियां भी एक बड़ा कारण हैं। कई महिलाएं लंबे समय तक गर्म रसोई में खाना बनाती हैं। इससे उनके शरीर का तापमान सामान्य से अधिक बढ़ जाता है।
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पानी की कमी और पहनावा
अक्सर देखा गया है कि बाहर काम करने वाली महिलाएं टॉयलेट की सुविधा न होने के कारण कम पानी पीती हैं। यह आदत शरीर में पानी की गंभीर कमी यानी डिहाइड्रेशन पैदा करती है।
कुछ क्षेत्रों में महिलाएं शरीर को पूरी तरह ढककर रखती हैं। हालांकि यह धूप से बचाता है, लेकिन पसीना सूख न पाने के कारण शरीर की गर्मी बाहर नहीं निकल पाती। इससे बेचैनी बढ़ जाती है।
लू लगने के प्रमुख लक्षण
महिलाओं में लू लगने पर कई तरह के लक्षण दिखाई दे सकते हैं। इनमें पीरियड्स के दौरान अत्यधिक थकान, पेट में भारीपन या अचानक कमजोरी महसूस होना शामिल है।
डॉक्टर बताते हैं कि दिल की धड़कन का तेज होना और अत्यधिक चिड़चिड़ापन भी लू के संकेत हैं। अगर आपको बार-बार चक्कर आ रहे हैं, तो इसे नजरअंदाज बिल्कुल न करें।
गंभीर लक्षणों में मांसपेशियों में ऐंठन, जी मिचलाना और सिर में भारीपन महसूस होना शामिल है। कई बार बहुत ज्यादा पसीना आने के बाद अचानक पसीना आना बंद हो जाता है, जो खतरे की घंटी है।
किन महिलाओं को है ज्यादा खतरा?
गर्भवती महिलाओं को हीट वेव से सबसे ज्यादा सावधान रहने की जरूरत है। उनके शरीर को अतिरिक्त ऊर्जा और ठंडक की आवश्यकता होती है। बुजुर्ग महिलाओं की सहनशक्ति भी कम होती है।
हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज से पीड़ित महिलाओं को भी विशेष ध्यान देना चाहिए। बाहर धूप में काम करने वाली महिलाओं के लिए भी लू का खतरा दोगुना हो जाता है।
"महिलाओं को अपनी सेहत के प्रति जागरूक रहना चाहिए। गर्मी के दिनों में शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बनाए रखना बहुत जरूरी है ताकि गंभीर बीमारियों से बचा जा सके।"
बचाव के आसान और प्रभावी उपाय
गर्मी से बचने के लिए सबसे जरूरी है कि आप खूब पानी पिएं। नींबू पानी, ओआरएस या नारियल पानी का सेवन शरीर को हाइड्रेटेड रखने में मदद करता है।
दोपहर 12 बजे से 4 बजे के बीच घर से बाहर निकलने से बचें। अगर बाहर जाना जरूरी हो, तो सूती और हल्के रंग के कपड़े ही पहनें।
रसोई में काम करते समय वेंटिलेशन का ध्यान रखें। छोटे-छोटे अंतराल पर पानी पीते रहें और पौष्टिक आहार लें। यदि लक्षण गंभीर लगें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
निष्कर्ष के तौर पर, सावधानी ही लू से बचने का सबसे बड़ा हथियार है। महिलाओं को अपनी शारीरिक स्थिति को समझते हुए गर्मी के मौसम में विशेष एहतियात बरतनी चाहिए ताकि वे स्वस्थ रह सकें।
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