Rajasthan Vidhansabha election 2023: पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की विधानसभा सीट झालरापाटन का इतिहास, कब किसकी ताजपोशी हुई, किस पार्टी ने किया लगातार राज

पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की विधानसभा सीट झालरापाटन का इतिहास, कब किसकी ताजपोशी हुई, किस पार्टी ने किया लगातार राज
History of jhalrapatan Assembly Seat Former CM Vasundhara Raje's Reign
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Highlights

साल 1985 से पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे (Former Chief Minister Vasundhara Raje) लगातार राजस्थान विधानसभा की सदस्य और झालरापाटन से विधायक रही हैं।

1989 से 2004 तक )- लगातार  9वी-10वी-11वीं-12वीं-13वीं लोकसभा की सदस्य 

साल 1985 से पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे (Former Chief Minister Vasundhara Raje) लगातार राजस्थान विधानसभा की सदस्य और झालरापाटन से विधायक रही हैं। आइए जानते हैं इस सीट पर कब-कब किस पार्टी से विधायक रहे हैं। झालरापाटन सीट पर और किस पार्टी का वर्चस्व रहा - 

पहली विधानसभा, झालरापाटन सीट  Rajasthan Constituency (jhalrapatan assembly seat)

झालरापाटन विधानसभा सीट (jhalrapatan assembly seats) से पहली राजस्थान विधानसभा सदस्य 1952 से 1957 माधोलाल खानपुरिया।

1962 से 1967 तीसरी विधानसभा के सदस्य रहे । 9 अप्रैल 1964 से 6 मई 1965 तक विशेषाधिकार समिति के सदस्य, राजस्थान विधानसभा।

अन्य जानकारी- हरीजनों का दो ग्राम नया आबाद करके अशोकपुरा व माधोपुरा बनाया।

पहले सदन में झालरापाटन विधानसभा संख्या 88 से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा, प्रतिद्वंदी थे नर्मित दास, जीत का अंतर 3921 वोट। कुल वोट पड़े 6821, नर्मित दास को 2900 वोट मिले। 

तीसरी विधानसभा में कांग्रेस के टिकट पर कोटा के अटरू से चुनाव लड़ा विधानसभा संख्या 99। प्रतिद्वंदी थे मूलचंद। कुल वोट पड़े 20420, जीत का अंतर 17383, इस चुनाव में मूलचंद को 3037 वोट मिले।

भगवान सिंह तरंगी पहली राजस्थान विधानसभा के सदस्य 1952 से 1957 तक। 23 फरवरी 1953 से 12 मार्च 1954 तक विशेषाधिकार समिति के सदस्य भी रहे।

कांग्रेस के टिकट पर झालावाड़ के झालरापाटन से चुनाव लड़ा। इस चुनाव में गोविंद सिंह इनके प्रतिद्वंदी थे जिन्हें 7050 वोट मिले। भगवान सिंह तरंगी ने ये चुनाव 1361 वोटों से जीता। इस चुनाव में कुल 8411 वोट पड़े यह स्वतंत्र भारत का पहला चुनाव था।

दूसरी विधानसभा (Rajasthan Constituency)

जयेन्द्र सिंह (पहली राजस्थान विधानसभा सदस्य) 1952 से 1952

दो पार्टियों से चुनाव लड़ा पहली विधानसभा में कांग्रेस पार्टी की ओर से और दूसरी विधानसभा में राम राज्य परिषद की ओर से। 1949 से 1951 ग्राम पंचायत सारथल के सरपंच भी रहे।

दूसरी विधानसभा के आम चुनावों में झालरापाटन से कन्हैयालाल मित्तल के सामने कांग्रेस के टिकट पर लड़े और जीते।

इस दौरान कुल 17226 वोट पड़े जिनमें से कन्हैया लाल मित्तल को मात्र 2588 वोट मिले जीत का अंतर 14638 वोटों से था

पहली बार राम राज्य परिषद से झालावाड़ की मनोहर थाना सीट से चुनाव लड़ा इस दौरान कुल 8761 वोट पड़े।

जयेन्द्र सिंह के सामने प्रत्याशी थे दुलीचन्द त्रिवेदी। दुलीचंद त्रिवेदी को कुल 2369 वोट ही मिले जीत का अंतर 6392 वोटों से था। 

तीसरी राजस्थान विधानसभा (Rajasthan Constituency)

  1. हरिशचंद महाराजा- 1957 से 1962 दूसरी विधानसभा के सदस्य
  2. 1962 से 1967 तक तीसरी राजस्थान विधानसभा के सदस्य 
  3. 1967 से 1972 चौथी विधानसभा के सदस्य 
  4. 10 फरवरी 1960 से 12 मार्च 1962 तक राजस्थान सरकार में ऊर्जा विभाग में मंत्री रहे। इसी दौरान राजस्थान सरकार में भवन एवं सड़क विभाग में मंत्री रहे।
  5. 12 मार्च 1962 से 2 जून 1965 तक राजस्थान सरकार में मुद्रण विभाग के मंत्री 
  6. 12 मार्च 1962 से 19 नवंबर 1963 तक राजस्थान सरकार में यातायात विभाग के मंत्री
  7. 12 मार्च 1962 से 27 दिसंबर 1966 तक राजस्थान सरकार में कार्यकाल, मंत्री
  8. 12 मार्च 1962 से 30 अप्रैल 1966 तक ऊर्जा विभाग के मंत्री  इसी दौरान राजस्थान सरकार में सार्वजनिक निर्माण विभाग के मंत्री रहे।
  9. 19 नवंबर 1963 से 27 दिसंबर 1966 तक राजस्थान सरकार के उद्योग विभाग के मंत्री रहे इसी दौरान नागरिक आपूर्ति विभाग के मंत्री भी रहे। 

दूसरी विधानसभा में झालावाड़ की डग विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा कुल वोट पड़े 24664, निकटतम प्रतिद्वंदी थे चैनसिंह। चैनसिंह को 4256 वोट मिले, इस चुनाव में हरिशचंद 20408 वोटों से जीते। 

तीसरी विधानसभा में झालावाड़ की झालरापाटन सीट से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा, निकटतम प्रतिद्वंदी थे सूरजमल। सूरजमल को 4382 वोट मिले, महाराज हरिशचंद ने इस चुनाव में 22713 वोटों से जीत दर्ज की।

चौथी विधानसभा में जनसंघ के टिकट पर झालावाड़ के खानपुर से चुनाव लड़ा। इस चुनाव में प्रतिद्वंदी थे पी.एल.सेन्टर, जिन्हें 8061 वोट मिलें। इस चुनाव में महाराजा हरिशचंद ने 14313 वोटों से जीत दर्ज की।

चौथी विधानसभा 

रामप्रसाद बोहरा, राजस्थान विधानसभा के 4 और 5  दोनों सदनों के सदस्य रहे। 1967 से 1972 (4वीं) 1972 से 1977 5वें सदन के सदस्य रहे।

10 अप्रैल 1970 में राजस्थान विधानसभा की प्राक्कलन समिति के सदस्य चुनें गए। और 29 मार्च 1975 तक इस समिति के सदस्य रहे। 27 मई 1972 से 11 अप्रैल 1974 तक राजस्थान विधानसभा की याचिका समिति के सदस्य रहे।

4 चौथी विधानसभा के आम चुनावों में झालावाड़ की झालरापाटन सीट से निर्दलीय चुनाव लड़ा। सामने प्रत्याशी थे चॉद मल, जिन्हें 7171 वोट मिले।

राम प्रसाद बोहरा ने इस चुनाव में 10079 वोटों से जीत दर्ज की। इसके बाद पांचवी विधानसभा में इसी सीट पर कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा।

इस समय सुजान सिंह प्रतिद्वंदी से । सुजान सिंह को इस चुनाव में 8978 वोट मिले। राम प्रसाद बोहरा ने 8177 वोटों से जीत दर्ज की।

सदन-6-  निर्मल कुमार सकलेचा

1977 से 1980 तक छठी विधानसभा के सदस्य रहे। 29 अक्टूबर 1977 से 17 फरवरी 1980 तक छठी विधानसभा की सामान्य प्रयोजनो संबंधी समिति के सदस्य रहे।

इन्हें 18 माह तक आन्‍तरिक सुरक्षा कानून के अन्‍तर्गत गिरफ्तार व जेल। छठी विधानसभा में झालावाड़ की झालरापाटन सीट से जनता पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ा।

निकटतम प्रतिद्वंदी थे जुझार सिंह, जिन्हें 8597 वोट मिले। और इस चुनाव में निर्मल कुमार सकलेचा ने 21595 वोटों से जीत दर्ज की। 

7. अनंग कुमार जैन 7/9/10 सदन के सदस्य रहे। 

1980 से 1985 तक  सातवीं राजस्थान विधान सभा के सदस्य रहे। फिर  1990 से 1992 तक नौवीं राजस्थान विधान सभा के सदस्य रहे। और  1993 से 1998 तक दसवीं राजस्थान विधान सभा के सदस्य रहे। 

इसके अलावा 2 मार्च 1982 से  09 मार्च 1985 राजस्थान विधान सभा की संसदीय परामर्शदात्री समिति के सदस्य रहे। इसके बाद  19 फरवरी 1991 को फिर  राजस्थान विधान सभा संसदीय परामर्शदात्री समिति के  सदस्य बनाए गए।  1983 से 1984 तक  राजस्थान विधान सभा के अधीनस्थ विधान सम्बन्धी समिति के सदस्य रहे

1990 से 1992  राजस्थान विधान सभा के सभापति और  विशेषाधिकार समिति के सदस्य भी रहे। 20 मार्च 1982 से 24 मार्च 1983 तक  राजस्थान विधान सभा में  प्राक्कलन समिति (ख) के सदस्य रहे। 

27 मार्च  1990 से 25 मार्च 1991 तक  राजस्थान विधान सभा की जन लेखा समिति के सदस्य रहे।  29 अगस्त 1980 को  राजस्थान विधान सभा की सामान्य प्रयोजनो सम्बन्धी समिति के सदस्य बनाए गए।

11 दिसंबर 1993 से 30 नवंबर 1998 तक राजस्थान सरकार में स्वतंत्र प्रभार मामलों के राज्य मंत्री रहे। 13 दिसंबर 1993 से 22 अप्रैल 1994 तक करारोपण विभाग (texation department)के राज्यमंत्री बने।

13 दिसंबर 1993 से 30 नवंबर 1998 तक राजस्थान सरकार में विशिष्ठ योजना एवं एकी.ग्रामीण विभाग में स्वतंत्र प्रभार राज्यमंत्री रहे। इस दौरान राजस्थान सरकार में आबकारी और वित्त विभाग के राज्य मंत्री रहे। 

22 अप्रैल 1994 से 30 नवंबर 1998 तक राजस्थान सरकार में करारोपण विभाग में स्वतंत्र प्रभार राज्य मंत्री रहे। 

7- सातवीं विधानसभा में भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर झालावाड़ के झालरापाटन से चुनाव लड़ा इनके निकटतम प्रतिद्वंदी थे कृपाराम।

कृपाराम को 17125 वोट मिले। इस चुनाव में  अनंग कुमार जैन ने 2711 के अंतर से जीत दर्ज की।

वहीं 9वीं विधानसभा में भी इसी जगह से चुनाव लड़ा, अब इनके प्रतिद्वंदी थे ज्वाला प्रसाद। ज्वाला प्रसाद को 13386 वोट मिले। इस चुनाव में  अनंग कुमार जैन ने 31160 वोटों से जीत दर्ज की। 

फिर 10 वीं विधानसभा में भी इसी सीट से भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ा। इस चुनाव में इनके प्रतिद्वंदी थे सुजान सिंह। सुजान सिंह को 33916 वोट मिले। जीत का अंतर था 3197 वोट।

8वीं विधानसभा

8वीं विधानसभा में अनंग कुमार जैन के प्रतिद्वंदी ज्वाला प्रसाद शर्मा ने अनंग कुमार जैन के प्रतिद्वंदी के रूप में चुनाव लड़ा और 4772 वोटों से जीत दर्ज की।

इस चुनाव में अनंग कुमार जैन बीजेपी प्रत्याशी को 22003 वोट मिले। ज्वाला प्रसाद शर्मा ने कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा।

ज्वाला प्रसाद शर्मा 8 वीं विधानसभा के 1985 से 1990 तक सदस्य रहे। 1 अप्रैल 1987 से 1 अप्रैल 1988 तक राजस्थान विधानसभा की राजकीय उपक्रम समिति के सदस्य रहे। इसके अलावा 1985 से 1986 और 1986 से 1987 राजस्थान विधानसभा में गृह समिति के सदस्य रहे

11वीं विधानसभा- मोहनलाल राठौड़

मोहनलाल राठौड़ कांग्रेस के टिकट पर झालावाड़ के झालरापाटन सीट से चुनाव लड़े, इनके निकटतम प्रतिद्वंदी थे अनंगर कुमार जैन जो 7वी,9वीं और 10 वीं विधानसभा के सदस्य रहे। यह सीट आठवीं विधानसभा में कांग्रेस के पास गई इससे पहले 7,9और 10वीं विधानसभा में तीनों बार यहां भाजपा की सरकार थी। इस चुनाव में मोहनलाल राठौड़ ने बीजेपी के अनंगकुमार को 3314 वोटों से हराया था। 

वसुंधरा राजे- (Former Chief Minister Vasundhara Raje)

12 से लेकर लगातार 15वीं विधानसभा में वसुंधरा राजे सदस्य रही हैं। 

(1985-1990) वसुंधरा राजे 8वीं विधानसभा में भाजपा के टिकट पर धौलपुर से प्रत्याशी रही और इस चुनाव में राजे ने अपने प्रतिद्वंदी बनवारी लाल को 22680 वोटों से हराया। कुल वोट पड़े थे 49174

12वीं विधानसभा में झालावाड़ के झालरापाटन से बीजेपी (BJP) के टिकट पर चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की इस चुनाव में राजे ने सचिन पायलट की मां रमा पायलट  (Rama Pilot) को 27375 वोटों से हराया था। इस चुनाव में कुल वोट 72760 पड़ें जिसमें 45385 रमा पायलट को मिले थे। 

इसके बाद 13वीं विधानसभा में इसी सीट से अपने प्रतिद्वंदी मोहनलाल को 32581 वोटों के अंतर से हराया। इस चुनाव में कुल प्राप्त मत थे 81593।

14वीं विधानसभा में राजे ने झालरापाटन से उनकी निकटतम प्रतिद्वंदी मिनाक्षी चन्द्रावत को 60896 वोटों से भारी शिकस्त देकर अपनी विधानसभा सीट पक्की की।

15वीं विधानसभा में वसुंधरा राजे (Former Chief Minister Vasundhara Raje) ने इसी सीट से कांग्रेस के मानवेन्द्र सिंह को 34980 वोटों से हराया। इस चुनाव में कुल मत मिले 116484।

इसके अलावा मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे लगातार 5 बार से लोकसभा की सदस्य भी रही हैं। 9 से लेकर 13वीं लोकसभा की वो सदस्य रही हैं। 

1989 से 2004 तक )- लगातार  9वी-10वी-11वीं-12वीं-13वीं लोकसभा की सदस्य 

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