जयपुर | राजस्थान में खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने के लिए राज्य सरकार बड़े स्तर पर ‘खेलो राजस्थान’ का आयोजन करने जा रही है। सरकार का मुख्य नारा ‘हर गांव, हर खेल, हर खिलाड़ी’ रखा गया है।
लेकिन इस बड़े आयोजन की खेल सूची से एक महत्वपूर्ण खेल गायब है। भारत को ओलंपिक में कई स्वर्ण पदक दिलाने वाला हॉकी खेल इस आयोजन का हिस्सा नहीं है।
सरकार ने प्रतियोगिता के लिए कुल 12 खेलों का चयन किया है। इन 12 खेलों की सूची में हॉकी को जगह नहीं मिल पाई है।
अब इस फैसले पर हॉकी राजस्थान ने कड़ी आपत्ति जताई है। हॉकी राजस्थान ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से इस मामले में हस्तक्षेप की मांग की है।
तीन चरणों में 12 खेलों का आयोजन
राजस्थान सरकार के आधिकारिक ‘खेलो राजस्थान’ पोर्टल पर कार्यक्रम की विस्तृत जानकारी दी गई है। ब्रोशर के अनुसार, ये प्रतियोगिताएं कुल तीन चरणों में आयोजित की जाएंगी।
हैरानी की बात यह है कि किसी भी चरण में हॉकी को शामिल नहीं किया गया है। आयोजन का ढांचा इस प्रकार तैयार किया गया है कि इसमें 12 खेलों को प्राथमिकता दी गई है।
पहले चरण के खेल और कार्यक्रम
प्रतियोगिता के पहले चरण के लिए चार खेलों का चयन किया गया है। इसमें वॉलीबॉल, एथलेटिक्स, रस्साकशी और तीरंदाजी शामिल हैं।
पहले चरण की प्रतियोगिताएं 1 दिसंबर 2026 से 15 जनवरी 2027 तक प्रस्तावित हैं। इन खेलों के लिए खिलाड़ियों के पंजीकरण की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।
दूसरे और तीसरे चरण की खेल सूची
दूसरे चरण में भी चार प्रमुख खेलों को स्थान दिया गया है। इसमें कबड्डी, फुटबॉल, जूडो और निशानेबाजी की प्रतियोगिताएं होंगी।
तीसरे चरण के लिए खो-खो, कुश्ती, बास्केटबॉल और सतोलिया को चुना गया है। इस प्रकार कुल 12 खेलों का ढांचा तैयार किया गया है।
मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर जताई आपत्ति
हॉकी राजस्थान के अध्यक्ष महिपाल सिंह निंबाड़ा ने इस स्थिति पर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने 9 अक्टूबर को मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को एक औपचारिक पत्र लिखा है।
पत्र में उन्होंने हॉकी को आयोजन से बाहर रखने के फैसले पर सवाल उठाए हैं। निंबाड़ा ने कहा कि खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने का सरकार का प्रयास सराहनीय है।
लेकिन हॉकी जैसे गौरवशाली खेल को नजरअंदाज करना चिंताजनक विषय है। उन्होंने मुख्यमंत्री से इस मामले में तुरंत संज्ञान लेने का आग्रह किया है।
हॉकी राजस्थान की प्रमुख मांगें
हॉकी राजस्थान की ओर से एक प्रेस नोट भी जारी किया गया है। इसमें बताया गया कि मुख्यमंत्री के साथ खेल मंत्री को भी ई-मेल भेजा गया है।
संबंधित खेल अधिकारियों को भी इस विसंगति से अवगत कराया गया है। संस्था ने मांग की है कि हॉकी को तुरंत इस प्रतियोगिता में शामिल किया जाए।
निंबाड़ा का मानना है कि हॉकी भारत की खेल विरासत का अभिन्न हिस्सा है। इसे किसी भी बड़े खेल आयोजन से बाहर रखना खिलाड़ियों के साथ अन्याय है।
मेजर ध्यानचंद की विरासत का हवाला
मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में महान खिलाड़ी मेजर ध्यानचंद का विशेष उल्लेख है। निंबाड़ा ने याद दिलाया कि ध्यानचंद की जयंती पर ही राष्ट्रीय खेल दिवस मनाया जाता है।
हॉकी ने भारत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक विशिष्ट पहचान दिलाई है। ओलंपिक खेलों में भारत की शुरुआती सफलताएं हॉकी के कारण ही संभव हुईं।
ऐसे में नई पीढ़ी को इस खेल से दूर रखना उचित नहीं है। हॉकी राजस्थान ने इस ऐतिहासिक संदर्भ को मुख्यमंत्री के सामने रखा है।
ग्रामीण प्रतिभाओं के लिए अवसर
हॉकी राजस्थान का कहना है कि इस आयोजन से खिलाड़ियों का मनोबल बढ़ेगा। विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में हॉकी खेलने वाले युवाओं को मंच मिलेगा।
ग्रामीण क्षेत्रों में कई ऐसी प्रतिभाएं हैं जिनके पास सीमित साधन हैं। खेलो राजस्थान जैसा मंच उनके लिए अपनी क्षमता दिखाने का बड़ा अवसर हो सकता है।
हॉकी को शामिल करने से प्रदेश में खेल संस्कृति और अधिक मजबूत होगी। इससे नए खिलाड़ियों को आगे आने की प्रेरणा मिलेगी।
आखिर हॉकी को बाहर रखने का आधार क्या है?
इस पूरे विवाद में सबसे बड़ा सवाल खेलों के चयन की प्रक्रिया पर है। सरकार ने कबड्डी, फुटबॉल और कुश्ती जैसे खेलों को प्राथमिकता दी है।
यहां तक कि पारंपरिक खेल सतोलिया और रस्साकशी को भी शामिल किया गया है। लेकिन हॉकी को बाहर रखने का कोई स्पष्ट कारण नहीं बताया गया है।
संसाधनों और बजट पर सवाल
क्या खेलों का चयन उपलब्ध मैदानों के आधार पर किया गया है? क्या तकनीकी व्यवस्थाओं या बजट की कमी के कारण हॉकी को हटाया गया?
आधिकारिक दस्तावेजों में इन सवालों का कोई ठोस जवाब नहीं मिलता है। जब तक सरकार स्पष्ट नहीं करती, तब तक यह एक प्रशासनिक पहेली बनी हुई है।
खेल मंत्री और खेल विभाग के सामने चुनौतियां
राजस्थान में खेलों के विकास की जिम्मेदारी खेल विभाग और क्रीड़ा परिषद की है। वर्तमान खेल मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ स्वयं एक ओलंपिक पदक विजेता हैं।
ऐसे में खेल जगत को उनसे काफी उम्मीदें हैं। हॉकी राजस्थान की आपत्ति के बाद विभाग पर दबाव बढ़ गया है।
विभाग को अब खेलों के चयन का तार्किक आधार स्पष्ट करना होगा। खिलाड़ियों के हितों की रक्षा करना विभाग की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
अब मुख्यमंत्री के फैसले पर टिकी नजरें
हॉकी राजस्थान ने मुख्यमंत्री से खिलाड़ियों के हित में निर्णय लेने का आग्रह किया है। उन्होंने मेजर ध्यानचंद की विरासत को सम्मान देने की बात कही है।
फिलहाल आधिकारिक सूची में हॉकी का नाम शामिल नहीं है। हालांकि, सरकार के पास नियमों में संशोधन करने का अधिकार सुरक्षित है।
अब देखना होगा कि क्या सरकार इस मांग को स्वीकार करती है। क्या हॉकी के खिलाड़ियों को इस महाकुंभ में अपनी जगह मिल पाएगी?
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